भास्कर एक्सप्लेनर:बिग बी ने जिस सरोगेट ऐडवर्टाइजिंग का हवाला देकर पान मसाले का ऐड छोड़ा, जानिए वो क्या होती है? इसको लेकर देश में क्या कानून है?

5 दिन पहले

बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने पान मसाला ब्रांड से कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया है। अमिताभ के ऑफिस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, एक्टर जब इस ब्रांड से एसोसिएट हुए तब उन्हें यह पता नहीं था कि यह सरोगेट ऐडवरटाइजिंग है। अमिताभ ने अपनी प्रमोशन फीस भी ब्रांड को वापस लौटा दी है।

अमिताभ इस ऐड को लेकर विवादों से घिर गए थे। अपने पसंदीदा एक्टर को पान मसाले का प्रमोशन करते देख फैन्स भड़के हुए थे। इस मामले में नेशनल एंटी- टोबैको ऑर्गेनाइजेशन (NGO) ने भी हस्तक्षेप किया। NGO ने बिग बी को ऑफिशियल लेटर भेजा, जिसमें उनसे जल्द से जल्द इस ऐड कैंपेन को छोड़ने की मांग की गई थी।

समझते हैं, सरोगेट ऐड क्या होते हैं? इस तरह की ऐडवर्टाइजमेंट क्यों की जाती है? भारत में इसको लेकर क्या कानून है? और इससे पहले कब-कब सरोगेट ऐड्स को लेकर विवाद हुए है...

सरोगेट ऐडवर्टाइजमेंट क्या होता है?

आपने अक्सर टीवी पर किसी शराब, तंबाकू या ऐसे ही किसी प्रोडक्ट का ऐड देखा होगा, जिसमें प्रोडक्ट के बारे में सीधे न बताते हुए उसे किसी दूसरे ऐसे ही प्रोडक्ट या पूरी तरह अलग प्रोडक्ट के तौर पर दिखाया जाता है। जैसे शराब को अक्सर म्यूजिक CD या सोडे के तौर पर दिखाया जाता है।

यानी ऐसा ऐड जिसमें दिखाया कोई और प्रोडक्ट जाता है, लेकिन असल प्रोडक्ट दूसरा होता है, जो सीधा-सीधा ब्रांड से जुड़ा होता है।

सरोगेट ऐडवर्टाइजिंग क्यों की जाती है?

दरअसल, कई ऐसे प्रोडक्ट होते हैं, जिनकी डायरेक्ट ऐडवर्टाइजमेंट पर बैन लगा है। आमतौर पर इनमें शराब, सिगरेट और पान मसाला जैसे प्रोडक्ट हैं। ऐसे में इन प्रोडक्ट की ऐडवर्टाइजिंग के लिए सरोगेट ऐड्स का सहारा लिया जाता है।

भारत में इसको लेकर क्या कानून है?

भारत सरकार ने भी एक कानून के जरिए सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट की डायरेक्ट ऐडवर्टाइजिंग को बैन कर रखा है। इसके लिए 2003 में सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोडक्ट एक्ट पास किया गया था। इसे COTPA भी कहते हैं। इस कानून के मुताबिक तंबाकू और सिगरेट प्रोडक्ट की डायरेक्ट ऐडवर्टाइजिंग पर बैन लगा है। साथ ही इस कानून में बिक्री प्रोडक्शन और इस्तेमाल से जुड़े भी कई प्रावधान हैं।

तंबाकू और सिगरेट से जुड़े डायरेक्ट ऐडवर्टाइजमेंट करने वाले पर 2 से लेकर 5 साल तक की सजा और 1 हजार से लेकर 5 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान है।

इसी के साथ केबल टेलीविजन नेटवर्क एक्ट 1994 के जरिए भी सिगरेट, तंबाकू उत्पाद, शराब या किसी और नशीले पदार्थ के डायरेक्ट और इनडायरेक्ट प्रमोशन और ऐडवर्टाइजमेंट पर रोक लगाई गई है। हालांकि, इसमें कई शर्तों के साथ प्रोडक्ट्स को छूट भी दी गई है।

  • ऐडवर्टाइजमेंट के विजुअल्स में केवल सरोगेट प्रोडक्ट को ही दिखाया जा सकता है, बैन किए गए प्रोडक्ट को किसी भी तरीके से दिखाने पर बैन है।
  • डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से बैन प्रोडक्ट को कई रेफरेंस नहीं होना चाहिए।
  • बैन प्रोडक्ट से जुड़ा कोई खास कलर, स्टाइल, लेआउट और टैगलाइन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

अमिताभ बच्चन को लेकर क्या विवाद चल रहा था?

हाल ही में अमिताभ बच्चन एक पान मसाला के एड को लेकर लोगों के निशाने पर रहे हैं। इंटरनेट पर यूजर्स उन्हें पैसे के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ करने तक के भी आरोप लगाते रहे हैं। ट्विटर और फेसबुक पर यूजर्स उन्हें निशाना बना रहे थे, इसके बाद अमिताभ बच्चन ने ये फैसला लिया है।

NGO ने बिग बी से ऐड कैंपेन को छोड़ने की मांग की थी
इस मामले पर नेशनल एंटी- टोबैको ऑर्गेनाइजेशन (NGO) ने अमिताभ बच्चन को एक ऑफिशियल लेटर लिखा था। इस लेटर में उन्होंने कहा था कि मेडिकल रिसर्च से पता चला है कि तंबाकू और पान मसाला जैसे पदार्थ व्यक्ति, खासकर युवाओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अमिताभ बच्चन पोलियो कैंपेन के सरकारी ब्रांड एम्बेसडर हैं। ऐसे में उन्हें पान मसाला के विज्ञापन से जल्द से जल्द हट जाना चाहिए।

इससे पहले कब-कब सरोगेट ऐड्स को लेकर विवाद हुए हैं?

2016 में एक पान मसाला ब्रांड के एक ऐड को लेकर खासा विवाद हुआ था। इसमें जेम्स बॉन्ड का किरदार निभा चुके फेमस एक्टर पियर्स ब्रोसनन पान मसाला का प्रचार करते हुए नजर आए थे। विवाद होने पर एक्टर को नोटिस भी भेजा गया था, जिसका जवाब देते हुए एक्टर ने कहा था कि कंपनी ने उन्हें धोखे में रखा था। उन्हें बताया गया कि ये एक माउथ फ्रेशनर है और इसके हानिकारक पहलू को छिपाया गया।

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