भास्कर एक्सप्लेनर:2 हफ्ते से जेल में बंद आर्यन की जमानत पर फैसला कल, जानें केस से जुड़े 6 किरदारों के बारे में सब कुछ

एक महीने पहले

शाहरुख खान के बेटे आर्यन की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। आर्यन क्रूज रेव पार्टी ड्रग्स मामले में जेल में हैं। आर्यन की जमानत पर सुनवाई कर रही स्पेशल NDPS कोर्ट ने पिछली सुनावाई में जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आर्यन पिछले करीब दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले से जुड़े 6 बड़े पहलू और किरदार हैं। आइये इन सभी किरदारों और उनके पक्ष-विपक्ष के तर्कों के बारे में बता रहे हैं भास्कर एक्सपर्ट विराग गुप्ता, जो सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं...

1. अभियुक्त आर्यन खान और अन्य लोग

मामले की शुरुआत 2 अक्टूबर को क्रूज पार्टी में छापे से होती है। इसमें सैकड़ों लोग शामिल थे, लेकिन सिर्फ 8 लोगों को ही हिरासत लिया गया। पहले दिन सिर्फ 3 लोगों की रिमांड के लिए अदालत में पेशी हुई और अन्य 5 को बाद में पेश किया गया।

अधूरी जांच पर विवाद बढ़ने पर जहाज की दोबारा जांच हुई और फिर आयोजकों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में पिछले 2 हफ्ते में डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

क्या सभी लोग एक ही रैकेट का हिस्सा हैं, या सभी लोग ड्रग्स से जुड़े अलग-अलग अपराध के हिस्सेदार हैं? यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा। नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS) में ड्रग्स का सेवन करने वाले, छोटे डीलर, फंडिंग करने वाले, पेशेवर अपराधी और बड़े माफिया के लिए अलग-अलग तरह के कानून और सजा का प्रावधान है। आर्यन मामले में कुछ लोग पहली बार गिरफ्तार हुए हैं, तो कुछ पेशवर अपराधी। सभी का कनेक्शन और रोल फिक्स करने में खासा समय लग सकता है। सवाल ये है कि तो क्या सभी गिरफ्तार लोगों की जमानत में सामूहिक तौर पर ही फैसला होने तक आर्यन को जेल में ही रहना पड़ेगा? इसका जवाब देश के कानून से समझने की कोशिश करते हैं।

2. देश का कानून (NDPS एक्ट और जमानत)

दरअसल, ड्रग्स को मानवता के खिलाफ अपराध माना जाता है। इसलिए भारत समेत अधिकांश देशों में ड्रग्स से जुड़े मामलों के खिलाफ कठोर कानून बने हैं। भारत में इसके लिए 1985 में NDPS एक्ट बना। इस कानून से जुड़े कुछ मामलों में गिरफ्तारी के बाद जमानत भी मिल सकती है, लेकिन अधिकांश अपराध गैर जमानती हैं।

सामान्य अपराधों में यदि चार्जशीट फाइल नहीं हो तो सीआरपीसी कानून की धारा 167 के तहत 60 दिन या अधिकतम 90 दिन के बाद आरोपी को डिफॉल्ट बेल यानी जमानत मिल जाती है। लेकिन एनडीपीएस की धारा 36A (4) के तहत 180 दिन और अदालत के आदेश से 1 साल तक चार्जशीट फाइल किए बगैर आरोपी को जेल में रखा जा सकता है।

आर्यन की गिरफ्तारी की शाम अदालत में सहायक अभियोजन के बयान से ऐसा लगा था कि आर्यन को 2 दिन बाद जमानत मिल जाएगी, लेकिन उसके बाद एएसजीASG ने केन्द्रीय एजेंसी की तरफ से पैरवी शुरू की और यह मामला जटिल होता गया।

अब व्हाट्सऐप चैट के आधार पर यह कहा जा रहा है कि आर्यन का संबंध अंतरराष्ट्रीय रैकेट से है। अगर इन आरोपों को सही साबित करने के लिए NCB पर्याप्त सबूत कोर्ट के के सामने पेश कर देती है तो फिर आर्यन को जमानत मिलने में मुश्किल होगी। साथ ही ट्रायल के बाद उन्हें कड़ी सजा भी हो सकती है।

आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद ऐसा लगा था कि आर्यन को 2 दिन बाद जमानत मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद ऐसा लगा था कि आर्यन को 2 दिन बाद जमानत मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

3. अभियोजन पक्ष यानी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)

क्रूज पार्टी में छापे के बाद 3 अक्टूबर को आर्यन को गिरफ्तार करके ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किया गया था। पहले सुनवाई के दौरान 2 दिन की रिमांड मांगी गई। इसके बाद 7 अक्टूबर को आर्यन और 7 अन्य लोगों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

पंचनामे में सामूहिक तौर पर छिटपुट तौर पर ड्रग्स बरामदगी का जिक्र है, लेकिन आर्यन के पास से किसी ड्रग्स की बरामदगी नहीं हुई है। ऐसी कोई टेस्ट रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है, जिससे क्रूज पार्टी वाले दिन आर्यन के ड्रग्स के लेने की पुष्टि होती हो।

व्हाट्सऐप की बातचीत और कोड शब्दों के मनमाफिक रूपांतरण को सबूत मानते हुए फिलहाल आर्यन के खिलाफ मामला बनता दिख रहा है। वैसे भी बॉलीवुड और अपराध का पुराना नाता रहा है। इसलिए आर्यन के अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट के सम्बन्ध के NCB के दावों को खारिज नहीं किया जा सकता।

NCB के मुताबिक आर्यन पिछले कई सालों से ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। आर्यन अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट का हिस्सा हैं और उन्हें हिरासत में रखकर पूछताछ जरूरी है। दूसरी ओर बचाव पक्ष के मुताबिक आर्यन के पास ड्रग्स खरीदने के लिए नगद पैसे भी नहीं थे।

जमानत का विरोध इस आधार पर भी किया जा रहा है कि अभियुक्त और उसका परिवार प्रभावशाली होने की वजह से सबूतों से छेड़खानी कर सकते हैं। अगर यह दावा सही है तो फिर व्हाट्सऐप चैट और अपराध की स्वीकारोक्ति के बयानों के अलावा NCB अन्य सबूत जुटाने के लिए पहल क्यों नहीं कर रही है? सवाल यह है कि आर्यन से जुड़े बैंक खातों को सील करने के साथ घर में छापे मारकर जरूरी दस्तावेज बरामद क्यों नहीं किए जाते?

4. जमानत पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले

जमानत के बारे में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला है कि बेल नियम है और जेल अपवाद, लेकिन ड्रग्स से जुड़े मामले संगीन अपराध माने जाते हैं। इन मामलों में आरोपी का बयान भी सजा के लिए काफी है। इसलिए ड्रग्स से जुड़े मामलों में जांच एजेंसी के विरोध के बाद आरोपी को जमानत मिलना मुश्किल होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अन्य फैसले में कहा है कि जमानत के समय मुख्य मामले की मेरिट पर बहस नहीं होनी चाहिए। देश के लाखों आम मुकदमों में आर्यन जैसी लम्बी चौड़ी बहस के बगैर ही अभियुक्त की हिरासत की अवधि रूटीन तौर पर बढ़ती जाती है, लेकिन आर्यन जैसे VIP लोगों के मामलों में हर छोटे-बड़े बिंदु पर लंबी कानूनी बहस होने के साथ हर फैसले के खिलाफ अपील भी होती है।

जांच एजेंसी द्वारा मीडिया से जांच की जानकारी शेयर करना सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार वर्जित है। इससे मामले की जांच प्रभावित होने के साथ अभियुक्त की निजता और सम्मान का अधिकार भी प्रभावित होता है। इसके बाद भी आर्यन मामले की जांच के सभी पहलुओं को मीडिया में नियमित तौर पर उजागर करना, कानूनी कैसे माना जा सकता है?

5. शिवसेना, कांग्रेस और NCP की गठबंधन सरकार और राजनीति

देश में करोड़ों लोग नशे का शिकार हैं। पिछले 1 साल से मुंबई में ड्रग्स के खिलाफ 300 से ज्यादा छापे पड़े हैं। ड्रग्स के सेवन और कारोबार की बॉलीवुड बड़ी मंडी है, इसमें कोई विवाद नहीं है। ड्रग्स से जुड़े कारोबारी मनोरंजन जगत और बॉलीवुड को फाइनेंस करते हैं, यह भी एक कड़वा सच है।

आर्यन मामले पर राज्य और केंद्र सरकार के बीच तलवारें तनने से संघीय व्यवस्था के साथ कानून के शासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इसे महाराष्ट्र और बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश मानते हैं। दूसरी तरफ NCP नेता नवाब मलिक, जिनका दामाद ड्रग्स कारोबार का आरोपी है, जांच एजेंसी NCB की मंशा पर ही शक कर रहे हैं।

मंत्री का दर्जा वाले शिवसेना नेता किशोर तिवारी ने तो एनसीबी एजेंसी उसके अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। गवाहों की साख पर सवाल उठाते हुए उनकी भाजपा के साथ संलिप्तता बताई जा रही है।

दूसरी ओर NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेडे ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनका पीछा किया जा रहा है और उनकी जासूसी हो रही है। सवाल यह है कि ड्रग्स से जुड़े अपराधी समाज और देश के अपराधी हैं तो फिर उन्हें दलीय राजनीति का मोहरा क्यों बनाया जा रहा है? राजनीति से परे जाकर ड्रग्स के बड़े कारोबारियों के खिलाफ ठोस कारवाई हो तभी समाज और देश को ड्रग्स के खतरनाक चंगुल से मुक्ति मिलेगी।

6. समाज और देश

ड्रग्स से युवा पीढ़ी तबाह हो रही है। ड्रग्स के कारोबार के काले धन से आतंकवाद और देश विरोधी कामों को मदद मिलती है। अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद भारत में ड्रग्स और आतंकवाद दोनों तरह के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। इसलिए राज्य और केंद्र सरकार सभी को मिलकर ड्रग्स के कारोबार के खिलाफ कारगर चोट करने के लिए क़ानून को कठोरता से सभी के खिलाफ लागू करना चाहिए।

दलीय सियासत के नाम पर ड्रग्स के कारोबारियों का बचाव, या बड़े मगरमच्छों को छोड़कर छोटी मछलियों को टारगेट करना, दोनों ही बातें देश के लिहाज से ठीक नहीं हैं। ड्रग्स तो संगीन अपराध है। छुटपुट मामलों से जुड़े लोगों की जमानत में महीनों सुनवाई नहीं होती। कई साल बाद अभियुक्त छूट भी जाए तो भी लम्बी हिरासत में जेल में रहने पर अभियुक्त और उसके परिवार का बेड़ागर्क हो जाता है।

जांच एजेंसियों की लापरवाही और अदालतों की सुस्ती पर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय विधिक प्राधिकरण ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। कानून के सामने सभी बराबर हैं। आर्यन की जमानत पर बुधवार को फैसला होगा, जिसके बाद यह मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी जा सकता है। आर्यन जैसे लाखों लोग जमानत और सुनवाई का इंतज़ार कर रहे हैं, इसलिए क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के व्यापक रिफॉर्म पर बहस और कारवाई हो तो पूरे समाज को राहत मिलेगी।

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