शराब पीने पर विमान से उतारे जा सकते हैं पैसेंजर:एयरलाइंस किन नियमों के बेस पर ऐसा करती है, 6 सवालों में जानें पूरी गाइडलाइन

9 दिन पहलेलेखक: नीरज सिंह

क्या शराब के नशे में होने में पर ही कोई एयरलाइंस किसी पैसेंजर्स को विमान से उतार सकती हैं? या पैसेंजर्स के हुड़दंग मचाने पर। पैसेंजर्स केबिन क्रू से खराब व्यवहार किया तो क्या होगा?

भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे कि विमान में शराब पीने पर क्या एयरलाइंस पैसेंजर को यात्रा करने से रोक सकती हैं, हवाई सफर में पैसेंजर्स के व्यवहार को लेकर क्या नियम हैं...

सवाल-1 : शराब पीने और खराब व्यवहार को लेकर क्या हैं नियम?

जवाब : डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA सरकार की एक रेगुलेटरी बॉडी है, जो सिविल एविएशन को रेगुलेट करता है। यह मुख्य रूप से विमान हादसों और बाकी घटनाओं की जांच करता है।

DGCA इंडियन एयरक्राफ्ट रूल्स 1937 के प्रोविजन 22, 23 और 29 के तहत विमान में हुड़दंग करने, ज्यादा शराब पीने या गाली गलौज करने पर यात्रियों को यात्रा करने से रोक सकता है और उन्हें विमान से उतार सकता है।

प्रोविजन 22 कहता है कि किसी क्रू मेंबर पर हमला करना या धमकी देना, चाहे वह शारीरिक रूप से हो या मौखिक रूप से, यह उस क्रू मेंबर की ड्यूटी में हस्तक्षेप माना जाएगा। ऐसा करने पर पैसेंजर को विमान में बैठने से रोका जा सकता है। विमान में सुरक्षा उपायों को मानने से इनकार करना भी इस कैटेगरी में आता है।

प्रोविजन 23 कहता है कि शराब या ड्रग्स के नशे में यात्री अगर प्लेन या किसी शख्स की सुरक्षा को खतरे में डालता है, तो उसे विमान से उतारा जा सकता है।

सवाल-2 : क्या ये नियम विदेशों में भी लागू होंगे?

जवाब : ये नियम भारत आने वाली सभी इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर लागू होंगे। यदि घटना विदेश में हुई हो और एयरलाइंस भी विदेशी हो, तो यह नियम लागू नहीं होंगे।

सवाल-3 : विमान में शराब पीकर हुड़दंग करने के मामलों में कार्रवाई कौन करता है?

जवाब : सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विराग गुप्ता कहते हैं कि ऐसे मामलों में कार्रवाई जगह के हिसाब से तय होती है। जैसे...

  • एयरपोर्ट की घटना पर संबंधित पुलिस थाना या जिम्मेदार सुरक्षा एजेंसी।
  • एयरपोर्ट पर खड़े विमान पर DGCA
  • किसी देश के एयरस्पेस के भीतर संबंधित देश के कानून के आधार पर

12 नॉटिकल मील से दूर इंटरनेशनल स्पेस में यदि विमान है, तो फिर कई देशों के कानून लागू हो सकते हैं।

  • जहां पर विमान का रजिस्ट्रेशन हुआ है
  • विमान जहां पर जा रहा है
  • पीड़ित व्यक्ति जिस देश का हो
  • आरोपी व्यक्ति जिस देश का हो
  • क्रू और स्टाफ जिस देश के हों

सवाल-4 :क्या कोई इंटरनेशनल रूल्स भी हैं?

जवाब : इंटरनेशनल मामलों में विभिन्न देशों के बीच समन्वय और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए इंटरनेशनल सिविल एविएशन आर्गेनाइजेशन यानी ICAO का गठन हुआ है। इसके तहत कई इंटरनेशनल ट्रीटी हुई हैं...

  • 1944 शिकागो ट्रीटी
  • 1963 टोक्यो ट्रीटी
  • 1958 जेनेवा ट्रीटी- इसके अनुसार इंटरनेशनल बॉर्डर का निर्धारण होता है।
  • 1971 मॉन्ट्रियल ट्रीटी
  • 1979 न्यूयॉर्क ट्रीटी

कुछ उदाहरण से भी इसे समझ सकते हैं। जैसे- 2013 में पाकिस्तान एयरलाइंस के पायलट ने ज्यादा शराब पी थी और उसके खिलाफ ब्रिटेन के कानून के अनुसार कार्रवाई हुई थी। हाईजैक के मामलों में आरोपी, पीड़ित, जहाज और स्टाफ के अनुसार सभी देश अपने कानून के अनुसार कार्रवाई करने की कोशिश करते हैं और विवाद होने पर इसका फैसला इंटरनेशनल कोर्ट यानी ICJ में होता है।

भारत में 2017 में नो फ्लाई लिस्ट के तहत कार्रवाई की शुरुआत हुई, इसके लिए DGCA को रेगुलेटर बनाया गया है।

सवाल-5: क्या सरकार ऐसे पैसेंजर को हवाई यात्रा से रोक सकती है?

जवाब: सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने 2017 में नई गाइडलाइंस जारी करते हुए बार-बार दुर्व्यवहार करने वाले पैसेंजर को नो-फ्लाई लिस्ट में डालने की बात कही थी। दुनिया के कई देशों में यह सिस्टम है। इसमें बदसलूकी या हिंसा करने वाले एयर पैसेंजर्स को नो फ्लाई लिस्ट में डाल दिया जाता है।

इस लिस्ट में आने का मतलब है वो शख्स दोबारा उस एयरलाइन से ट्रैवल नहीं कर सकता है। यह बैन हमेशा के लिए या कुछ साल या महीनों के लिए हो सकता है।

भारत की सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने बुरे बर्ताव को 3 कैटेगरी में बांटा है। इसके तहत बैन की सीमा 3 महीने से लेकर 2 साल या अनिश्चित समय के लिए भी हो सकती है।

1. गलत तरीके से इशारा करना, गाली-गलौच और शराब पीना। ऐसा करने वाले पैसेंजर पर तीन माह का बैन लगाया जा सकता है।

2. शारीरिक रूप से अपमानजनक व्यवहार जैसे धक्का देना, लात मारना, गलत ढंग से छूना। ऐसा करने वाले यात्रियों पर 6 महीने का बैन लगाया जा सकता है।

3. प्लेन को नुकसान पहुंचाना, किसी को जान से मारने की धमकी देना और मारपीट करने जैसे अपराध शामिल हैं। ऐसा करने वाले यात्रियों पर कम से कम 2 साल या अनिश्चित समय तक के लिए बैन लगाया जा सकता है।

इसके लिए पायलट-इन-कमांड को एयरलाइन अधिकारियों से इसके बारे में शिकायत करनी होगी। फिर एक आंतरिक समिति 10 दिनों में इसकी जांच करती है। उसके बाद यात्री के व्यवहार की गंभीरता तय होती है।

जांच जारी रहने के दौरान ऐसे लोगों पर 10 दिनों के लिए बैन लगाया जा सकता है। जांच के नतीजे आने पर एयरलाइन नो-फ्लाई लिस्ट में उस शख्स को डाल सकती है।

23 मार्च 2017 को उस समय के शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ पर एअर इंडिया के स्टाफर को 25 बार सैंडल से मारने का आरोप है। यही एपिसोड इन नियमों को लागू करने के पीछे बड़ी वजह बना था।
23 मार्च 2017 को उस समय के शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ पर एअर इंडिया के स्टाफर को 25 बार सैंडल से मारने का आरोप है। यही एपिसोड इन नियमों को लागू करने के पीछे बड़ी वजह बना था।

सवाल-6 : क्या विदेश में हुई किसी घटना की जांच सिविल एविएशन मिनिस्ट्री कर सकती है?

जवाब : नहीं। क्योंकि न तो ये घटना भारत में हुई है और न ही ये विमान भारत का था। ऐसे में इस मामले की जांच भारत की एविएशन मिनिस्ट्री नहीं कर सकती है। यदि विमान भारत का है या वो भारत आ रहा है तो इसकी जांच सिविल एविएशन मिनिस्ट्री कर सकती है।

भास्कर एक्सप्लेनर के कुछ और ऐसे ही रोचक आर्टिकल हम नीचे पेश कर रहे हैं...

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के लीक MMS का क्या होगा:क्या सभी सोशल मीडिया से वीडियो डिलीट हो सकता है, दोषियों को कितनी सजा होगी?

गेंद स्पाइडर कैमरे से टकराए या स्टेडियम पार जाए:क्रिकेट के 10 रोचक पर कन्फ्यूज करने वाले नियम; धोनी-कोहली को भी भुगतनी पड़ी कीमत

सोनिया के राज में पहली बार होगा CWC चुनाव:1992 में नरसिम्हा राव ने कराया था इलेक्शन, शरद पवार जीते तो सारे सदस्यों को हटा दिया

खबरें और भी हैं...