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भास्कर एक्सप्लेनर:ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए सरकार ने दी पेट के बल लेटने की सलाह; जानिए क्या है प्रोनिंग और कोरोना में कितनी फायदेमंद

6 महीने पहलेलेखक: आबिद खान

भोपाल, शहडोल, इंदौर और नासिक के बाद अब विरार में भी ऑक्सीजन की कमी से लोगों की मौतों की घटनाएं सामने आई हैं। मेडिकल ऑक्सीजन की कमी हर राज्य और जिले में दिख रही है। ऐसे में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस के मरीजों को शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए पेट के बल लेटने (प्रोनिंग) की सलाह दी है। यह खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिनके इन्फेक्शन की वजह से फेफड़े खराब हो चुके हैं और सांस लेने में दिक्कत हो रही है।

आइए जानते हैं कि केंद्र सरकार ने क्या सलाह दी है और यह किस तरह मरीजों के लिए लाभदायक है?

प्रोनिंग क्या होती है?

सरल भाषा में पेट के बल लेटना ही प्रोनिंग है। ऐसा करने से फेफड़ों पर पॉजिटिव प्रेशर बनता है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी दूर होती है। ये चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित तरीका है। पिछले कुछ समय से कई डॉक्टरों ने वॉट्सऐप पर वीडियो जारी कर इसे अपनाने की सलाह दी थी। अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस तरीके को अपनाने की एडवाइजरी जारी की है।

प्रोनिंग क्यों जरूरी है?

आपके लेटने के तरीके से फेफड़ों पर पड़ने वाला दबाव भी प्रभावित होता है। इससे तय होता है कि आपके फेफड़े में कितनी हवा जा रही है। अस्पतालों में अक्सर मरीज को पीठ के बल लिटाया जाता है और ऐसा करने से फेफड़ों पर गुरुत्वाकर्षण और अन्य अंगों का दबाव पड़ता है। इससे फेफड़े दब जाते हैं और सही तरीके से ऑक्सीजन उन तक नहीं पहुंच पाती। इससे ऑक्सीजन की कमी महसूस होती है।

प्रोनिंग को लेकर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

महामारी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रकांत लहारिया का कहना है कि ये काफी पुराना और वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित तरीका है। कई देशों में इस विधि को सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर आजमाया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।