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भास्कर एक्सप्लेनर:वोट के बदले कोरोना वैक्सीनः ताे क्या बिहार के अलावा बाकी राज्यों में वैक्सीन के पैसे लगेंगे?

एक महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
  • भाजपा ने बिहार चुनावों के घोषणापत्र में फ्री वैक्सीन का वादा किया है
  • पहली बार किसी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में वैक्सीन को जगह मिली है
  • विपक्ष का दावा- वैक्सीन तो लोगों का अधिकार है, इस पर राजनीति क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली से एक दिन पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने बिहार में भाजपा का चुनावी घोषणापत्र जारी किया। वादा किया कि जीतकर आए तो बिहार की जनता को कोविड-19 वैक्सीन फ्री में लगाया जाएगा। देश में पहली बार किसी चुनावी घोषणापत्र में वैक्सीन की इंट्री हुई है। लिहाजा, राजनीति भी शुरू हो गई है। आइए जानते हैं कि कोरोना वैक्सीन को लेकर अब तक केंद्र और राज्यों ने क्या तय किया है और इस चुनावी वादे ने किस तरह समीकरण बदल दिए हैं...

सबसे पहले, यह चुनावी वादा है क्या?

  • वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने घोषणापत्र जारी कर कहा कि भाजपा चुनाव जीतकर आई तो सरकार बिहार में लोगों को फ्री में वैक्सीन उपलब्ध कराएगी। वहीं, स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि हर राज्य को फ्री कोविड-19 वैक्सीन मिलेगा। बिहार में घोषणा होते ही तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी फ्री में वैक्सीन उपलब्ध कराने की घोषणा कर दी।
  • भाजपा की चुनावी घोषणा के बाद पार्टी के आईटी सेल के अमित मालवीय ने ट्वीट किया- सभी प्रोग्राम्स की तरह केंद्र सरकार रियायती दरों पर वैक्सीन राज्यों को उपलब्ध कराएगी। यह राज्यों को तय करना है कि वैक्सीन फ्री दिया जाए या इसका पैसा वसूला जाए। हेल्थ राज्यों का विषय है, ऐसे में बिहार भाजपा ने वैक्सीन फ्री में देने का फैसला किया है। इसमें क्या गलत है?

फिलहाल वैक्सीन को लेकर क्या स्थिति है?

  • स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन कह चुके हैं कि जुलाई 2021 तक 400-500 मिलियन डोज उपलब्ध होंगे और तब तक 20-25 करोड़ लोगों को वैक्सीन लग चुका होगा। एक्सपर्ट वैक्सीन ग्रुप ने राज्यों से प्रायरिटी लिस्ट बनाने को कहा है ताकि यह तय हो सके कि पहले चरण में कितने लोगों को वैक्सीन की जरूरत होगी।
  • एक्सपर्ट ग्रुप फिलहाल वैक्सीन खरीदने के रास्तों पर ही विचार कर रही है। पहले ही, अमेरिकी और यूरोपीय देशों ने वैक्सीन के लिए एडवांस मार्केट कमिटमेंट्स कर रखे हैं। ऐसे में सरकार में यह स्पष्ट मत है कि जब तक वैक्सीन रेगुलेटर से अप्रूवल नहीं पाते, तब तक कीमतों पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा था कि वैक्सीन सिंगल डोज होगा या डबल डोज, यह तो उसकी सेफ्टी और इफेक्टिवनेस पर निर्भर करेगा। रेगुलेटर्स से अप्रूवल के बाद जब वैक्सीन मार्केट में उपलब्ध होंगे तब उनकी वास्तविक कीमत तय हो सकेगी। ज्यादा वैक्सीन होंगे तो कीमत भी कम होगी। फिलहाल नहीं कह सकते कि कितना खर्च होगा।
  • इस समय केंद्र के कोविड टास्क फोर्स से जुड़े वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ने पहली ही बैठक में साफ कर दिया था कि राज्यों को अलग से वैक्सीन खरीदने की जरूरत नहीं है। बिहार में किए वादे से साफ है कि अब कई राज्यों को लग रहा है कि केंद्र वैक्सीन रेट्स तय करेगी और खरीदेगी। फिर राज्यों को अपना स्टॉक खरीदने को कहा जाएगा।

विपक्ष का आरोप क्या है और उनके राज्यों में क्या तैयारी है?

  • कांग्रेस ने चुनावी वादे पर आपत्ति जताई और कहा कि कोरोना के वैक्सीन पर सबका अधिकार होना चाहिए, सशर्त राजनीतिक विशेषाधिकार नहीं। आम आदमी पार्टी ने पूछा- गैर-भाजपा शासित राज्यों का क्या होगा? जिन भारतीयों ने भाजपा को वोट नहीं दिया क्या वहां फ्री वैक्सीन नहीं मिलेगा?
  • नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने कहा- क्या भाजपा अपनी पार्टी फंड से कोविड-19 वैक्सीन खरीद रही है? यदि इसका पैसा सरकारी खजाने से खर्च हो रहा है तो बिहार में फ्री वैक्सीन क्यों मिलेगा और बाकी देश को पेमेंट क्यों करना होगा?
  • कांग्रेस की छत्तीसगढ़ सरकार में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने कहा- हमें तो भारत सरकार ने बताया ही नहीं कि वैक्सीन खरीदना होगा। यदि हमें पेमेंट करना होगा, तो हम करेंगे। लेकिन वैक्सीन आबादी के अनुपात में उपलब्ध होना चाहिए। वैक्सीन पहले किसे मिलेगा, यह वादा किसी राज्य से नहीं किया जा सकता। चुनाव आयोग को इस घोषणा पर नोटिस लेना चाहिए।

तो क्या वैक्सीन को चुनावी घोषणापत्र में शामिल करना गैरकानूनी है?

  • नहीं। दरअसल, यह पहला मामला है जब किसी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में वैक्सीन को मुद्दा बनाया है। इससे पहले ऐसा कभी हुआ ही नहीं तो इसे राजनीतिक भ्रष्टाचार की श्रेेणी में नहीं रखा जा सकता। चुनाव आयोग के पूर्व लीगल एडवाइजर एसके मेंदिरत्ता ने कहा कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट के सेक्शन 123 के तहत चुनावी घोषणापत्र में किया गया वादा भ्रष्ट प्रक्रिया नहीं है। और इसमें चुनाव आयोग कुछ नहीं कर सकता।

कोरोना वैक्सीन को केंद्र की ओर से मुहैया कराने में क्या पेंच है?

  • यह पॉलिसी से जुड़ा फैसला है। केंद्र इस समय 9 बीमारियों के लिए मुफ्त टीके उपलब्ध कराता है। यह नेशनल हेल्थ मिशन के तहत यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) यानी राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान का हिस्सा है। UIP पूरी तरह से केंद्र की स्कीम है। इसके तहत इस समय सालाना 2.67 करोड़ बच्चों और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया जा रहा है।
  • UIP में इस समय डिप्थीरिया, परटुसिस, टीटेनस, पोलियो, मीजल्स, रूबेला, बचपन में होने वाली गंभीर टीबी, हेपेटाइटिस बी और मेनिंजाइटिस और निमोनिया के टीके दिए जाते हैं। कुछ चुनिंदा महामारी वाले जिलों में तीन वैक्सीन फ्री लगाए जाते हैं- रोटावायरस डायरिया, नियमोकोक्कल निमोनिया और जापानी एनसेफैलिटिस।
  • यदि कोरोना का वैक्सीन केंद्र सरकार को मुफ्त में देना है तो UIP में वयस्कों को इस लिस्ट में लाना होगा। क्योंकि उसके बिना वयस्कों को वैक्सीन नहीं दिया जा सकेगा। यदि पॉलिसी में बदलाव होता है तो इसके लिए केंद्र को राज्यों से प्राइजिंग को लेकर फार्मूला तय करना होगा।

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