भास्कर एक्सप्लेनर:CDS के हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स बरामद; क्या ये बताएगा हादसे की वजह? कैसे होगी पूरी जांच?

एक वर्ष पहलेलेखक: आबिद खान

देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत का तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलिकॉप्टर क्रैश में बुधवार को निधन हो गया। इस हादसे में जनरल रावत की पत्नी मधुलिका रावत समेत कुल 13 लोगों की मौत हो गई। जबकि ग्रुप कैप्टन वरुण की हालत गंभीर है।

वैसे तो हादसे की वजह खराब मौसम और लो विजिबिलिटी को माना जा रहा है, लेकिन असल वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगी। सरकार ने मामले की ट्राई सर्विस इन्क्वायरी करवाने का फैसला लिया है, जिसकी अगुवाई एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह करेंगे।

समझते हैं, ट्राई सर्विस इन्क्वायरी क्या होती है? एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को ही क्यों दी गई है जांच की जिम्मेदारी? विमान क्रैश की जांच किस तरह होती है? हेलिकॉप्टर के किन-किन उपकरणों की मदद से जांच की जाती है? और ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर क्या होता है?...

कौन करेगा क्रैश की जांच?
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि हादसे की ट्राई सर्विस इन्क्वायरी एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह की अगुआई में की जाएगी। सिंह इंडियन एयर फोर्स की ट्रेनिंग कमांड के कमांडर हैं और वे खुद भी हेलिकॉप्टर पायलट हैं। इस जांच दल में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही टेक्निकल टीम भी शामिल होंगी।

हादसे के बाद हेलिकॉप्टर में आग लग गई।
हादसे के बाद हेलिकॉप्टर में आग लग गई।

ट्राई सर्विस इन्क्वायरी क्या होती है?

ट्राई सर्विस इन्क्वायरी यानी सेना की तीनों सेवाएं (थल, जल और वायु) मिलकर हादसे की जांच करेगी।

मानवेंद्र सिंह को क्यों दी गई जांच की जिम्मेदारी?

एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को इतने बड़े हादसे की जांच का जिम्मा सौंपे जाने की वजह है कि वे खुद हेलीकॉप्टर पायलट हैं और उनके पास 6 हजार से भी ज्यादा घंटे का उड़ान अनुभव है। इस दौरान सियाचिन, उत्तर-पूर्व भारत, उत्तराखंड और पश्चिमी मरुस्थल से लेकर कांगो तक के चुनौतीपूर्ण इलाकों में सफलतापूर्वक उड़ान भरी है। उनका इस्पेक्शन और सेफ्टी से जुड़े विषय में भी खासा अनुभव रहा है। इसी वजह से उन्हें जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह इंडियन एयर फोर्स की फ्लाइंग ब्रांच में 29 दिसंबर, 1982 को हेलिकॉप्टर पायलट के तौर पर शामिल हुए थे।
एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह इंडियन एयर फोर्स की फ्लाइंग ब्रांच में 29 दिसंबर, 1982 को हेलिकॉप्टर पायलट के तौर पर शामिल हुए थे।

कैसे की जाएगी जांच?

  • जांच दल का गठन होने के बाद पहला काम क्रैश साइट के इन्वेस्टिगेशन का होगा। जांच दल हादसे की जगह पर जाएगा और जहां हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ उस इलाके की बारीकी से जांच करेगा। आसपास की जगहों से विमान का छोटे से छोटा मलबा कलेक्ट किया जाएगा। इससे ये पता लगेगा कि विमान हवा में था उसी दौरान कुछ हुआ या टकराकर गिरा। मान लिया जाए कि हादसे की जगह से 500 मीटर दूर हेलिकॉप्टर को कोई हिस्सा पड़ा है इसका मतलब हुआ कि विमान में 500 मीटर दूर ही गड़बड़ आ गई थी, उसके बाद क्रैश हुआ। अगर हादसे की जगह के अलावा ज्यादा दूर तक कोई मलबा नहीं मिला इसका मतलब हुआ कि विमान सीधा जा टकराया।
  • हेलिकॉप्टर के मलबे को इकट्ठा कर उसके एक-एक टुकड़े की जांच होगी। इससे भी हादसे की वजह जानने में मदद मिलती है। जैसे हेलिकॉप्टर की मेन बॉडी का कोई हिस्सा बाहर की तरफ खुला है तो इससे ये अंदाजा लगाया जा सकेगा कि हेलिकॉप्टर के अंदर ही विस्फोट हुआ था। इसी तरह अगर कोई हिस्सा चपटा हो गया है तो इससे ये अंदाजा लगाया जा सकेगा कि बाहरी टक्कर की वजह से ऐसा हुआ है।
  • इसके साथ ही पूरे सीन का रीकंस्ट्रक्शन, फोटो और वीडियो की जांच, चश्मदीद गवाहों और जिंदा बचे लोगों के बयान भी लिए जाते हैं। जांच के लिए हेलिकॉप्टर से जुड़ी सभी जानकारी, क्रू और पायलट की जानकारी और हेलिकॉप्टर की पिछली कुछ उड़ानों का डेटा, मेंटेनेंस का डेटा, सेफ्टी इक्विपमेंट, मौसम की जानकारी भी निकाली जाती है।

ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर सबसे अहम

किसी भी विमान हादसे की जांच में सबसे अहम भूमिका ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की होती है। इन दोनों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि खतरनाक क्रैश होने के बावजूद भी इन्हें नुकसान न हो और ये सुरक्षित रहें।

ब्लैक बॉक्स क्या होता है?

  • यह मजबूत स्टील या टाइटेनियम से बना इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग डिवाइस होता है, जो विमान के क्रैश होने पर जांचकर्ताओं को उसकी वजह जानने में मदद करता है। ब्लैक बॉक्स को फ्लाइट रिकॉर्डर भी कहते हैं। यह दो तरह के होते हैं।
  • ब्लैक बॉक्स हवा की स्पीड, ऊंचाई, हेलिकॉप्टर की स्पीड और फ्यूल फ्लो जैसी करीब 80 टेक्निकल डिटेल को हर सेकेंड रिकॉर्ड करता है। ये एक दिन तक की डिटेल को स्टोर कर सकता है।
  • ब्लैक बॉक्स का रंग ब्लैक नहीं, बल्कि ऑरेंज होता है, ताकि हादसे के बाद ये आसानी से नजर आ सके। ये अल्ट्रासोनिक पल्स भी भेजता है, ताकि इसे आसानी से डिटेक्ट किया जा सके। गहरे पानी के भीतर से भी ये लगातार 30 दिन तक हर सेकेंड पल्स भेज सकता है।
ऑरेंज कलर का होता है विमान का ब्लैक बॉक्स
ऑरेंज कलर का होता है विमान का ब्लैक बॉक्स

कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर क्या होता है?

ये विमान के भीतर की हर आवाज को रिकॉर्ड करता है। इसमें पायलट और क्रू के बीच की बातचीत, पैसेंजर की बीच की बातचीत और पायलट की एयर ट्रैफिक कंट्रोल से होने वाली बातचीत रिकॉर्ड होती है। आमतौर पर कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर को विमान के सबसे पिछले हिस्से में फिट किया जाता है, क्योंकि माना जाता है कि ये हिस्सा सबसे आखिर में हादसे का शिकार होता है।