श्रीलंका से भारत की टोह लेगा चीनी शिप:750 किमी दूर की बातचीत सुन सकता है वांग-5, इसरो और नौसेना बेस तक की जासूसी का खतरा

14 दिन पहलेलेखक: नीरज सिंह

चीन का जासूसी शिप युआन वांग-5, 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भारत की टोह लेने के लिए श्रीलंका की ओर बढ़ रहा है। इसके 11 अगस्त को हंबनटोटा पहुंचने की संभावना है। भारत ने इस स्पाई शिप को लेकर श्रीलंका के सामने विरोध दर्ज कराया है। इसके बावजूद श्रीलंका ने इसे हंबनटोटा पोर्ट पर आने की अनुमति दे दी है। भारत इसको लेकर अलर्ट पर है। शिप के मूवमेंट पर इंडियन नेवी की कड़ी नजर है।

ऐसे में आज हम एक्सप्लेनर में बताएंगे कि कितना खतरनाक है चीन का जासूसी शिप? भारत ने क्यों चिंता जताई है?

इन सवालों के जवाब जानने से पहले इस पोल पर हम आपकी राय जानना चाहते हैं...

बीजिंग के लैंड बेस्ड ट्रैकिंग स्टेशनों को जानकारी भेजता है युआन वांग-5

चीनी जासूसी शिप युआन वांग-5, 13 जुलाई को जियानगिन पोर्ट से रवाना हुआ था और 11 अगस्त को श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचेगा। हंबनटोटा में यह एक हफ्ते यानी 17 अगस्त तक रहेगा। इस पोर्ट को चीन ने श्रीलंका से 99 साल की लीज पर लिया है।

इस शिप को स्पेस और सैटेलाइट ट्रैकिंग में महारत हासिल है। चीन युआन वांग क्लास शिप के जरिए सैटेलाइट, रॉकेट और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM की लॉन्चिंग को ट्रैक करता है। चीन के पास इस तरह के 7 शिप हैं, जो पूरे प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर में काम करने में सक्षम हैं। ये शिप जासूसी कर बीजिंग के लैंड बेस्ड ट्रैकिंग स्टेशनों को पूरी जानकारी भेजते हैं।

अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिप को PLA की स्ट्रैटजिक सपोर्ट फोर्स यानी SSF ऑपरेट करती है। SSF थिएटर कमांड लेवल का आर्गेनाइजेशन है। यह PLA को स्पेस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक, इंफॉर्मेशन, कम्युनिकेशन और साइकोलॉजिकल वारफेयर मिशन में मदद करती है।

इससे पहले चीन ने 2022 में जब लॉन्ग मार्च 5B रॉकेट लॉन्च किया था, तब यह शिप निगरानी मिशन पर निकला था। हाल ही में यह चीन के तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन के पहले लैब मॉड्यूल की लॉन्चिंग की समुद्री निगरानी में भी शामिल था।

श्रीलंका से भारत की टोह लेना आसान होगा

श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय ने पहले चीनी शिप के हंबनटोटा आने की खबरों को खारिज कर दिया था। बाद में श्रीलंका ने इस मसले पर सफाई देते हुए इसे नियमित गतिविधि बताया और कहा कि उसने पहले भी कई देशों को ऐसी इजाजत दी है। अब तक श्रीलंका कहता आया है कि वो हंबनटोटा पोर्ट का इस्तेमाल मिलिट्री एक्टिविटी के लिए नहीं होने देगा।

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव श्रीलंका, यानी BRISL ने बताया कि युआन वांग-5, 11 अगस्त को हंबनटोटा पहुंचने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र के नॉर्थ-वेस्टर्न हिस्से में अगस्त से सितंबर तक चीन के सैटेलाइटों को ट्रैक कर रिसर्च करेगा।

BRISL ने अपने बयान में कहा है कि युआन वांग-5 की हंबनटोटा पोर्ट की यात्रा श्रीलंका और विकासशील देशों के अपने स्पेस प्रोग्राम्स को सीखने और डेवलप करने का मौका देता है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि ये जहाज 11 से 17 अगस्त तक हंबनटोटा में रहेगा। इतने दिनों में तो बहुत सारी जानकारियां जुटाई जा सकती हैं। इसलिए श्रीलंका का इसे सामान्य कदम बताना एकदम गलत है।

भारत के नौसेना बेस चीन के रडार में आ जाएंगे

युआन वांग-5 मिलिट्री नहीं बल्कि पावरफुल ट्रैकिंग शिप है। ये शिप अपनी आवाजाही तब शुरू करते हैं, जब चीन या कोई अन्य देश मिसाइल टेस्ट कर रहा होता है। यह शिप लगभग 750 किलोमीटर दूर तक आसानी से निगरानी कर सकता है। 400 क्रू वाला यह शिप पैराबोलिक ट्रैकिंग एंटीना और कई सेंसर्स से लैस है।

हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचने के बाद इस शिप की पहुंच दक्षिण भारत के प्रमुख सैन्य और परमाणु ठिकाने जैसे कलपक्कम, कुडनकुलम तक होगी। साथ ही केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई पोर्ट यानी बंदरगाह चीन के रडार पर होंगे। कुछ एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि चीन भारत के मुख्य नौसैना बेस और परमाणु संयंत्रों की जासूसी के लिए इस जहाज को श्रीलंका भेज रहा है।

शिप में हाई-टेक ईव्सड्रॉपिंग इक्विपमेंट (छिपकर सुनने वाले उपकरण) लगे हैं। यानी श्रीलंका के पोर्ट पर खड़े होकर यह भारत के अंदरूनी हिस्सों तक की जानकारी जुटा सकता है। साथ ही पूर्वी तट पर स्थित भारतीय नौसैनिक अड्डे इस शिप की जासूसी के रेंज में होंगे। कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि चांदीपुर में इसरो का लॉन्चिंग केंद्र की भी इससे जासूसी हो सकती है। इतना ही नहीं देश की अग्नि जैसी मिसाइलों की सारी सूचना जैसे कि परफॉर्मेंस और रेंज के बारे में जानकारी चुरा सकता है।

31 जुलाई को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि हमें अगस्त में इस शिप के हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचने की खबर मिली है। भारत सरकार देश की सिक्योरिटी और इकोनॉमिक इंटरेस्ट को देखते हुए हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और उनकी रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।।

वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने इसके जवाब में कहा कि चीन को उम्मीद है कि संबंधित पक्ष चीन की मरीन साइंटिफिक रिसर्च एक्टिविटी को सही नजर से देखेंगे। साथ ही इसमें दखल देने से परहेज करेंगे।

श्रीलंका ने हंबनटोटा पोर्ट को 99 साल की लीज पर चीन को सौंपा है

श्रीलंका ने कर्ज न चुका पाने के बाद साल 2017 में साउथ में स्थित हंबनटोटा पोर्ट को 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया था। ये पोर्ट एशिया से यूरोप के बीच मुख्य समुद्री व्यापार मार्ग के पास स्थित है। जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

भारत और अमेरिका ने हमेशा ये चिंता जाहिर की है कि 1.5 अरब डॉलर की लागत से तैयार हुआ ये बंदरगाह चीन का नौसेना बेस बन सकता है। भारत के सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने कई बार इसकी आर्थिक व्यवहार्यता (इकोनॉमिक फीजिबिलिटी) पर सवाल उठाया है। साथ ही कहा है कि यह चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स स्ट्रैटजी में सही बैठता है। इसके तहत चीन जमीन के साथ ही समुद्र से भी हिंद महासागर के जरिए भारत को घेर सकता है।

हंबनटोटा पोर्ट का निर्माण 2008 में शुरू हुआ था, जिसके लिए चीन ने श्रीलंका को 1.5 अरब डॉलर का कर्ज दिया था। इसको बनाने में चीन हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी और चीन हाइड्रो कॉर्पोरेशन नाम की सरकारी कंपनियों ने एक साथ मिलकर काम किया था।
हंबनटोटा पोर्ट का निर्माण 2008 में शुरू हुआ था, जिसके लिए चीन ने श्रीलंका को 1.5 अरब डॉलर का कर्ज दिया था। इसको बनाने में चीन हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी और चीन हाइड्रो कॉर्पोरेशन नाम की सरकारी कंपनियों ने एक साथ मिलकर काम किया था।
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