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भास्कर एक्सप्लेनर:वैक्सीन प्रोडक्शन और उपलब्धता पर हो रहे दावों पर केंद्र सरकार ने जारी किया स्पष्टीकरण; जानिए सब कुछ

4 महीने पहले

देश में 18+ के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है। अभी तक 20 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है, लेकिन वैक्सीन और वैक्सीनेशन प्रोग्राम को लेकर लोगों में अलग-अलग तरह के सवाल या भ्रांतियां भी हैं। अलग-अलग लोगों की अलग-अलग बातों ने आम लोगों में भ्रम पैदा कर दिया है। इस बीच सरकार ने वैक्सीन प्रोडक्शन और उसकी उपलब्धता को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है।

नीति आयोग की ओर से जारी इस स्पष्टीकरण में 7 अलग-अलग मुद्दों पर सफाई दी गई है। आइए जानते हैं वैक्सीन की उपलब्धता, बच्चों की वैक्सीन, राज्यों को दिए जाने वाले डोज और वैक्सीन एक्सपोर्ट की कोशिशों पर उठते सवालों को लेकर सरकार का क्या कहना है...

क्या केंद्र विदेश से वैक्सीन खरीदने के लिए जरूरी कोशिशें नहीं कर रहा?

सरकार का कहना है कि 2020 के मध्य से ही वह मुख्य वैक्सीन निर्माताओं के साथ बातचीत कर रही है। फाइजर, मॉडर्ना जैसी लीडिंग वैक्सीन निर्माता कंपनियों के साथ कई बार बातचीत कर वैक्सीन को भारत में ही बनाने या एक्सपोर्ट पर बात की जा चुकी है। डोज की सप्लाई लिमिटेड है और वैक्सीन देने को लेकर भी कंपनियों की अपनी प्रायोरिटी है। जो कंपनी जिस देश की है, वो पहले वहां डोज दे रही है। फाइजर ने जैसे ही वैक्सीन एक्सपोर्ट करने की इच्छा जताई है, उसी के बाद से भारत सरकार और फाइजर के बीच लगातार बातचीत जारी है। सरकार ने रूस की वैक्सीन स्पूतनिक को भी फास्ट ट्रैक अप्रूवल दिया, इससे न सिर्फ भारत को स्पूतनिक वैक्सीन की सप्लाई शुरू हुई बल्कि जल्द ही भारत में भी इसका प्रोडक्शन शुरू हो सकेगा।

सरकार ने दूसरे देशों की उपलब्ध वैक्सीन को अप्रूवल नहीं दिया?

सरकार ने इस पर अपनी सफाई में कहा है कि अमेरिका, यूके, जापान के साथ-साथ WHO ने जिन वैक्सीन को अप्रूव किया था, भारत सरकार ने भी उन्हें अप्रैल में ही अप्रूवल दे दिया था। ये सभी वैक्सीन बिना किसी ब्रिजिंग ट्रायल के भारत में इस्तेमाल की जा सकेगी। हाल ही में दूसरे देशों के भी विश्वसनीय वैक्सीन निर्माताओं को ट्रायल से छूट दी गई है। भारतीय ड्रग कंट्रोलर के पास वैक्सीन अप्रूवल के लिए फिलहाल कोई भी आवेदन पेंडिंग नहीं है।

देश में ही बन रही वैक्सीन की रफ्तार बढ़ाने के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया?

सरकार का कहना है कि 2020 की शुरुआत से ही वह वैक्सीन निर्माताओं को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की कोशिश कर रही है। फिलहाल केवल भारत बायोटेक के पास ही वैक्सीन उत्पादन के लिए इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट है। सरकार भारत बायोटेक की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कोशिश कर रही है कि जल्द से जल्द 3 और वैक्सीन कंपनियां देश में ही प्रोडक्शन शुरू कर सकें। सरकार का दावा है कि अक्टूबर तक भारत बायोटेक हर महीने 10 करोड़ वैक्सीन प्रोड्यूस कर सकेगी। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के 3 उपक्रमों के साथ मिलकर दिसंबर तक 4 करोड़ डोज प्रोड्यूस करने की तैयारी है।

वैक्सीन प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कंपलसरी लाइसेंसिंग लागू करना चाहिए?

सरकार का कहना है कि उसने कंपलसरी लाइसेंसिंग से आगे बढ़ते हुए वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने के लिए वैक्सीन निर्माताओं और दूसरी कंपनियों के बीच पार्टनरशिप बढ़ाने पर भी जोर दिया है। वैक्सीन कंपनियों के लिए जरूरी संसाधन जैसे रॉ मटेरियल, लैब्स, ट्रेंड लैब वर्कर्स की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जरूरी कदम उठाए हैं। सरकार की कोशिश है कि वैक्सीन का फॉर्मूला शेयर करने पर भी बात आगे बढ़े, लेकिन ये वैक्सीन निर्माताओं के ऊपर निर्भर करता है।

केंद्र सरकार ने सारी जिम्मेदारी राज्यों को देकर खुद की जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया?

इस आरोप पर केंद्र सरकार का कहना है कि केंद्र वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों में लगातार लगा हुआ है। चुनिंदा राज्यों को ही वैक्सीन के ग्लोबल टेंडर की अनुमति दी गई है वो भी राज्यों की मांग पर। केंद्र जो भी वैक्सीन खरीदेगा, उसको अंतत: राज्यों को ही सप्लाई किया जाएगा। जनवरी से अप्रैल के बीच फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स के लिए जो वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाया गया था, उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार की ही थी और वो बेहतर तरीके से मैनेज किया गया था।

लेकिन जिन राज्यों ने 3 महीने में फ्रंटलाइन वर्कर्स को ही टीका नहीं लगवाया, वे भी सभी के लिए वैक्सीन की मांग करने लगे। जिन राज्यों ने वैक्सीन के ग्लोबल टेंडर निकाले थे, उन्हें भी कोई खास सफलता नहीं मिली है। ये दर्शाता है कि फिलहाल सभी जगह ही वैक्सीन की कमी है।

केंद्र राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन नहीं दे रहा?

अपनी तरह के बेहद गंभीर आरोप के जवाब में केंद्र की ओर से नीति आयोग ने कहा है कि सरकार पूरे पारदर्शी तरीके से राज्यों को वैक्सीन सप्लाई कर रहा है। वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में राज्यों को पहले से जानकारी दी जाती है। जैसे-जैसे वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा, वैसे-वैसे राज्यों को दी जा रही वैक्सीन डोज की संख्या भी बढ़ेगी।

फिलहाल सरकारी चैनल से दी जा रही कुल वैक्सीन सप्लाई का 25% राज्यों और 25% प्राइवेट हॉस्पिटल को दिया जा रहा है। वैक्सीन सप्लाई के बारे में सब कुछ जानते हुए भी कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं का रवैया जनता में वैक्सीन को लेकर भय का माहौल पैदा कर रहा है।

बच्चों के वैक्सीनेशन को लेकर सरकार की कोई तैयारी नहीं है?

इस पर सरकार ने कहा है कि फिलहाल, दुनिया के किसी भी देश में बच्चों को कोरोना वैक्सीन नहीं दी जा रही है। WHO ने भी बच्चों में वैक्सीनेशन को लेकर कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं। हालांकि कुछ स्टडी में बच्चों में वैक्सीन के सकारात्मक नतीजे देखने को मिले हैं।

भारत में बच्चों की वैक्सीन पर जल्द ही ट्रायल शुरू किया जाएगा। ट्रायल के नतीजे आने के बाद ही बच्चों की वैक्सीन पर फैसला लिया जाएगा।

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