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भास्कर एक्सप्लेनर:अब अमेरिका के निशाने पर चीन की कोरोना लैब, बाइडेन ने 90 दिन में सबूत जुटाने के दिए आदेश

2 महीने पहलेलेखक: जयदेव सिंह

कोरोना कब आया, कहां से आया और कैसे आया, इन सवालों के जवाब वैज्ञानिक फिर से तलाश रहे हैं। अब तक दो तरह की थ्योरी पर सबसे ज्यादा बात होती रही है। पहला ये कि वायरस किसी जानवर से इंसानों तक पहुंचा और दूसरा ये कि वायरस चीन के वुहान की लैब से निकला। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक रिपोर्ट के बाद अपनी एजेंसियों को 90 दिन में इस सवालों का जवाब तलाशने को कहा है।

वहीं, पिछले हफ्ते आई वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2019 में वुहान लैब के तीन वैज्ञानिक कोरोना के लक्षण जैसी बीमारी से जूझ रहे थे। जबकि इस वक्त तक चीन ने दुनिया को कोरोना महामारी के बारे में नहीं बताया था।

कोरोना की उत्पत्ति को लेकर अब तक क्या-क्या कहा गया है? चीन के वुहान की लैब को लेकर क्यों विवाद होता रहा है? लैब के वैज्ञानिकों को लेकर किए गए दावे का आधार क्या है? इस पर चीन की ओर से क्या कहा गया है? और जानवर से कोरोना इंसानों में आने वाली बात का क्या हुआ? आइए जानते हैं...

चीन के वुहान की लैब क्यों चर्चा में है?

चीन के वुहान शहर की वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एक हाई सिक्योरिटी रिसर्च लैब है। यहां प्रकृति में पाए जाने वाले उन रोग जनकों (ऐसे बैक्टीरिया या वायरस जो इंसानों में रोग फैला सकते हैं) की स्टडी की जाती है जो इंसानों को घातक और नई बीमारियों से संक्रमित कर सकते हैं। 2002 में चीन में मिले SARS-CoV-1 वायरस ने दुनियाभर में 774 लोगों की जान ली थी। उसके बाद से इस लैब में चमगादड़ से इंसानों में फैलने वाले वायरस को लेकर कई स्टडी हुई हैं। इसी लैब में हुई स्टडी में दक्षिण-पश्चिम चीन स्थित चमगादड़ की गुफाओं में SARS जैसे वायरस मिले थे।

इस इंस्टीट्यूट में एक्सपेरिमेंट के लिए भी जंगली जानवरों से जेनेटिक मटेरियल इकट्ठा किए जाते हैं। यहां काम करने वाले इंसानों पर वायरस के असर का पता लगाने के लिए जानवरों में लाइव वायरस के साथ प्रयोग भी करते हैं। यहां काम करने वाले वैज्ञानिकों को कठोर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को फॉलो करना होता है जिससे गलती से भी वायरस के कारण कोई अनहोनी न हो। हालांकि, इसके बाद भी इसके खतरों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।

तो क्या किसी लैब एक्सीडेंट की वजह से भी कोरोना फैलने की आशंका है?
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि लैब के किसी कर्मचारी की लापरवाही की वजह से घातक रोग जनक वायरस लैब से बाहर निकला और यही इस महामारी की वजह बना। वुहान की ये लैब हुनान सीफूड मार्केट से भी ज्यादा दूर नहीं है जहां सबसे पहले कोरोना का कहर देखा गया।

अब तक किसी जंगली जानवर में इस संक्रमण का नहीं मिलना और चीन सरकार द्वारा लैब से वायरस लीक होने की आशंका की जांच करने से इनकार करना लैब से संक्रमण फैलने की थ्योरी को बल देते हैं। हालांकि वुहान की लैब में काम करने वाले वैज्ञानिक कहते हैं कि SARS-CoV-2 को लेकर न तो उनके पास कोई सुराग है, न ही इससे जुड़ी कोई रिसर्च उनकी लैब में हो रही थी। 24 वैज्ञानिकों ने एक लेटर लिखकर WHO से भी इसे लेकर स्वतंत्र जांच करने की मांग की है। जबकि इसी साल जनवरी में वुहान गई WHO की टीम का मिशन पूरी तरह फेल रहा था।

अमेरिका इसे लेकर क्या कर रहा है?
पिछले साल जब डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने कई बार कहा कि ये वायरस चीन से आया। वायरस चीन की लैब से ही निकला है। हालांकि इसे लेकर उन्होंने कोई सबूत नहीं पेश किया था। मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसे लेकर अमेरिकी जांच एजेंसियों को 90 दिन में पता लगाने को कहा है। बाइडन ने कहा है कि मार्च में उन्होंने कोरोना की उत्पत्ति को लेकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। उन्हें ये रिपोर्ट इसी महीने मिली है। इसे देखने के बाद ही उन्होंने इस जांच को कराने का फैसला किया है।

वहीं, अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी गोपनीय रिपोर्ट के हवाले से ये दावा किया है कि वुहान की लैब के कई रिसर्चर नवंबर 2019 या उससे पहले बीमार पड़े थे। इन लोगों में कोरोना या सामान्य सर्दी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षण थे। जबकि चीन में दुनिया का पहला घोषित कोरोना केस दिसंबर 2019 में आया था।

इससे पहले अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्री जेवियर बेसेरा ने वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में WHO से कहा था कि कोरोना कहां से फैला, इसकी जांच का अगला चरण 'पारदर्शी' होना चाहिए। बेसेरा चीन का नाम लिए बिना जनवरी में की गई WHO की जांच पर सवाल उठा रहे थे। हालांकि, चीन ने इन सभी खबरों को झूठ बताया है। इसके साथ ही उसने एक नया आरोप लगाते हुए कहा है कि हो सकता है कि ये वायरस अमेरिका की किसी लैब से निकला हो। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजियान का दावा है कि वुहान की लैब में 30 दिसंबर 2019 से पहले कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया था।

WHO की जो टीम चीन गई थी, उसे क्या मिला था?
इसी साल जनवरी में WHO की टीम चीन के वुहान शहर गई थी। अप्रैल में इस टीम ने अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन इस रिपोर्ट में कुछ भी नया नहीं था। न ही कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष था। जो बातें पिछले दो साल से होती रही हैं, उन्हीं बातों को रिपोर्ट में कहा गया। रिपोर्ट में कहा गया कि ये पता नहीं कि चीन में लोग इस वायरस से कैसे संक्रमित हुए। ऐसा लगता है कि ये वायरस जानवरों से इंसानों में आया। इसके साथ ही इस बात की संभावना नहीं के बराबर है कि इसे लैब में बनाया गया। WHO पर चीन के दबाव में रिपोर्ट बनाने के भी आरोप लगे थे।

जानवर से इंसानों में कोरोना फैलने वाली थ्योरी का सपोर्ट करने वालों का क्या कहना है?
कई वैज्ञानिक मानते हैं कि किसी लैब की जगह वायरस के नेचुरल उत्पत्ति की आशंका ज्यादा है। कोरोना वायरस पर काम कर रहे स्क्रिप्स रिसर्च के वैज्ञानिक क्रिस्टन जी एंडरसेन कहते हैं कि इबोला और दूसरे रोग जनक वायरस जानवरों से ही इंसानों में फैले, इन्हीं वायरस के जिनोम सीक्वेंस से ही कोरोना के फैलने के आसार सबसे ज्यादा हैं।

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