भास्कर एक्सप्लेनर:5 राज्यों में 1 से ज्यादा हुई R वैल्यू; जानें ये हमारे लिए क्यों चिंताजनक, क्या इन राज्यों में बढ़ेंगे केसेज?

8 महीने पहले

ओमिक्रॉन की एंट्री के बीच अब एक और खतरा मंडराने लगा है। देश की कोरोना की R वैल्यू चिंताजनक 1 के आसपास है। 2 दिसंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि देश की R वैल्‍यू 0.95 है। चिंता वाली बात ये है कि तेलंगाना, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और मिजोरम में R वैल्यू 1 से ज्यादा हो गई है। कोरोना के एक्टिव केसेज में गिरावट शुरू होने के लिए R वैल्‍यू का 1 से कम होना जरूरी है।

समझते हैं, देश के किन राज्यों में R वैल्‍यू बढ़ रही है? R वैल्यू से जुड़े ताजा आंकड़े क्या कहते हैं? इसका बढ़ना हमारे लिए कितना चिंताजनक है? दूसरी लहर के दौरान देश की R वैल्यू क्या थी? आखिर R वैल्यू होती क्या है? और इसका 1 से कम होना इसके लिए कितना जरूरी है...

सबसे पहले समझते हैं, R वैल्यू से जुड़े ताजा आंकड़े क्या हैं?

R वैल्यू को लेकर इंडियन इंस्टीयूट ऑफ मैथमेटिकल साइंसेज के 2 दिसंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि देश की R वैल्‍यू 0.95 है। तेलंगाना, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और मिजोरम में R वैल्‍यू अभी भी 1 से ऊपर है।

देश में मिजोरम में R वैल्यू सबसे ज्यादा है। लगातार 3 हफ्तों से मिजोरम की R वैल्यू 1 से ज्यादा बनी हुई है। हालांकि, 16 नवंबर को मिजोरम की R वैल्यू 1.14 थी जो कम होकर 1.11 पर आ गई है। कर्नाटक में एक हफ्ते के दौरान R वैल्यू 0.94 से बढ़कर 1.09 हो गई है। तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु की R वैल्यू भी बढ़ी है। हालांकि, ज्यादा केस आने के बावजूद केरल की R वैल्यू 0.88 है।

बड़े शहरों का हाल भी जान लेते हैं

11 नवंबर के बाद से ही मुंबई और पुणे की R वैल्यू 1 से ज्यादा है। आंकड़े जारी होने के 2 हफ्ते पहले तक पुणे की R वैल्यू 1.13 है। एक हफ्ते में मुंबई की R वैल्यू भी 1.02 से बढ़कर 1.09 हो गई है। चेन्नई और कोलकाता की R वैल्यू में गिरावट हुई है।

भयावह दूसरी लहर के दौरान देश की R वैल्यू क्या थी?

दूसरी लहर की शुरुआत के दौरान 9 मार्च और 21 अप्रैल के बीच R वैल्यू 1.37 थी। इसी वजह से इस दौरान केस तेजी से बढ़ रहे थे और दूसरी लहर अपने पीक की ओर बढ़ रही थी। 24 अप्रैल से 1 मई के बीच R वैल्यू 1.18 थी और फिर 29 अप्रैल से 7 मई के बीच 1.10 रह गई। उसके बाद से R वैल्यू लगातार कम होती गई। जिस वजह से केसेज भी कम होते गए।

आखिर R वैल्यू क्या होती है?

R वैल्यू यानी रीप्रोडक्शन वैल्यू। यह बताती है कि कोरोना से इन्फेक्टेड एक व्यक्ति से कितने लोग इन्फेक्ट हो रहे हैं या हो सकते हैं। अगर R वैल्यू 1 से ज्यादा है तो इसका मतलब है कि केस बढ़ रहे हैं और अगर 1 से कम हो रही है तो ये केसेज घट रहे हैं।

इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर 100 व्यक्ति इन्फेक्टेड हैं और वे 100 लोगों को इन्फेक्ट करते हैं तो R वैल्यू 1 होगी। पर अगर वे 80 लोगों को इन्फेक्ट कर पा रहे हैं तो यह R वैल्यू 0.80 होगी।

R वैल्यू का बढ़ना हमारे लिए कितना चिंताजनक?

R वैल्यू का सीधा-सीधा संबंध केसेज बढ़ने या कम होने की रफ्तार से है। केसेज कम होने के लिए जरूरी है कि R वैल्यू 1 से कम हो। देश की R वैल्यू भले ही अभी 1 से कम हो, लेकिन कई राज्यों में ये 1 से ज्यादा है जो हमारे लिए चिंता की बात है।

R वैल्यू क्यों 1 से कम होना चाहिए?

नए केसेज की रफ्तार रोकने के लिए जरूरी है कि R वैल्यू 1 से कम हो। R वैल्यू का 1 से ज्यादा होना बताता है कि एक संक्रमित व्यक्ति एक से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर रहा है। इससे धीरे-धीरे नए केसेज की रफ्तार बढ़ने लगती है।

क्या किसी महामारी के खतरे को केवल R वैल्यू से ही मापा जाता है?

कोई महामारी कितनी गंभीर है, इसे मापने के लिए 3 पैमानों का इस्तेमाल किया जाता है - R वैल्यू, केसेज की संख्या और सिविरिटी यानी गंभीरता। इसके साथ ही कितने मरीज मिल रहे हैं और कुल मरीजों में से कितने मरीजों में गंभीर लक्षण देखे जा रहे हैं, इस आधार पर किसी महामारी के खतरे को मापा जाता है।