भास्कर एक्सप्लेनर:ओमिक्रॉन क्यों है ‘सुपर माइल्ड’ वैरिएंट? युवाओं को कर रहा सबसे अधिक टारगेट, क्या है सबसे बड़ा खतरा?

6 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है। ओमिक्रॉन भारत समेत दुनिया के 38 देशों में दस्तक दे चुका है। दुनिया में कहर ढा चुके डेल्टा वैरिएंट से भी कई गुना अधिक संक्रामक ओमिक्रॉन को 'सुपर माइल्ड' कहा जा रहा है। साथ ही इसके स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक म्यूटेशन की वजह से इस पर वैक्सीन का असर कम होने की आशंका है।

चलिए जानते हैं कि ओमिक्रॉन को क्यों कहा जा रहा है 'सुपर माइल्ड' वैरिएंट? क्या है ओमिक्रॉन को लेकर सबसे बड़ा खतरा?

ओमिक्रॉन है 'सुपर माइल्ड' वैरिएंट?

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन में 50 से अधिक म्यूटेशन हो चुके हैं। इतना ही नहीं अब तक कोरोना के सबसे खतरनाक वैरिएंट माने जा रहे डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में भी 30 से अधिक म्यूटेशन हो चुके हैं। इतने अधिक म्यूटेशन ही ओमिक्रॉन को डेल्टा की तुलना में अधिक तेजी से फैलने वाला वैरिएंट बनाते हैं।

अब सवाल ये है कि क्या तेजी से फैलने में सक्षम होने से ही ओमिक्रॉन ज्यादा खतरनाक भी हो जाता है? इसके जवाब में महामारी विशेषज्ञों से लेकर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन तक के विशषज्ञों ने ओमिक्रॉन को हल्के लक्षण वाला, यानी कि 'सुपर माइल्ड' वैरिएंट कहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ओमिक्रॉन एक ऐसा वैरिएंट है जो बहुत तेजी से फैलने में तो सक्षम है लेकिन इससे गंभीर संक्रमण के बजाय हल्के लक्षण ही होते हैं।

ओमिक्रॉन को लेकर क्या है सबसे बड़ा खतरा?

शुरुआती डेटा दिखाते हैं कि चाहे साउथ अफ्रीका हो या यूरोप ओमिक्रॉन के ज्यादातर संक्रमित युवा हैं। साथ ही इस वैरिएंट ने उन लोगों को भी संक्रमित किया है जो वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके हैं। ये दो बातें इस वैरिएंट को लेकर चिंता बढ़ाती है। इन दो बातों का मतलब ये है कि ओमिक्रॉन उम्रदराज लोगों की तुलना में मजबूत इम्यूनिटी के माने जाने वाले युवाओं और पूरी तरह वैक्सीनेटेड लोगों को भी संक्रमित करने में सक्षम है।

ओमिक्रॉन की वजह से भारत में तीसरी लहर आने की आशंका जताई जा रही है। IIT कानपुर की स्टडी में शामिल प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल के एनालिसिस के मुताबिक, ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से भारत में 2022 की शुरुआत में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी लहर के दौरान भारत में डेढ़ लाख डेली कोविड केसेज के साथ फरवरी में पीक आ सकता है। दूसरी लहर के दौरान भारत में डेली कोविड केसेज की संख्या 4 लाख को पार कर गई थी।

वहीं, यूरोप में भी ओमिक्रॉन के मामलों में अगले कुछ महीनों में तेज उछाल आने की आशंका है। यूरोपियन यूनियन पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने गुरुवार को कहा कि अगले कुछ ही महीनों में ओमिक्रॉन यूरोप के कुल कोरोना मामलों में से आधे से अधिक के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

ओमिक्रॉन के सुपर माइल्ड वैरिएंट होने का क्या है मतलब?

ओमिक्रॉन का सबसे पहला केस साउथ अफ्रीका में पाया जाने के महज 10 दिन के अंदर ही ये भारत, अमेरिका समेत दुनिया के 38 देशों में फैल चुका है। ओमिक्रॉन भले ही बहुत तेजी से फैल रहा है, लेकिन अब तक ओमिक्रॉन से संक्रमित ज्यादातर मरीजों में हल्के लक्षण ही हैं और इनमें से किसी को भी गंभीर संक्रमण या ICU में भर्ती नहीं करवाना पड़ा है और न ही इससे किसी की मौत हुई है।

हल्के लक्षणों और मौत के कम खतरे की वजह से ही ओमिक्रॉन को 'सुपर माइल्ड' कहा जा रहा है। साउथ अफ्रीकन मेडिकल एसोसिएशन की प्रमुख डॉक्टर एंजेलिक कोएत्जी ने कहा कि ओमिक्रॉन के हल्के लक्षणों को देखते हुए, वर्तमान में घबराने का कोई कारण नहीं है। कोएत्जी ने कहा कि उन्होंने जिन कोविड मरीजों (अन्य वैरिएंट से संक्रमित) का पहले इलाज किया है उनके मुकाबले ओमिक्रॉन के लक्षण काफी हल्के हैं।

साउथ अफ्रीकी डॉक्टरों का दावा है कि अब तक देखे गए ओमिक्रॉन के अधिकांश मरीजों के लक्षण गंभीर नहीं बल्कि हल्के हैं। साउथ अफ्रीकी स्वास्थ्य मंत्री जो फाहला ने कहा कि उनके देश के डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी नहीं देखी है।

डॉक्टरों का कहना है कि ओमिक्रॉन से किसी गंभीर बीमारी या मौत होने की जानकारी नहीं है, जो दिखाता है यह भले ही तेजी से फैल रहा हो लेकिन उतना अधिक जानलेवा नहीं है। यही वजह है कि WHO की यूरोप की रीजनल ऑफिसर डॉ. कैथरीन स्मॉलवुड ने दुनिया भर के देशों द्वारा ओमिक्रॉन को लेकर अफ्रीकी देशों पर लगाए गए ट्रैवल बैन को गैरजरूरी बताते हुए कहा कि ऐसा करना हमारी सिफारिशों में शामिल नहीं था।

क्या है ओमिक्रॉन से सर्वाधिक संक्रमित देशों का हाल ?

ओमिक्रॉन के सर्वाधिक मामले अब तक अफ्रीका और यूरोपीय देशों में सामने आए हैं। साउथ अफ्रीका में 24 नवंबर को ओमिक्रॉन वैरिएंट पाए जाने के एक हफ्ते के अंदर ही वहां डेली कोरोना केसेज 1 दिसंबर को दोगुने होकर 8500 से अधिक हो गए, लेकिन फिर से संक्रमित मरीजों और वैक्सीनेशन के बावजूद ओमिक्रॉन से संक्रमित होने वाले लोगों में गंभीर के बजाय हल्के लक्षण ही दिखे।

न केवल अफ्रीका, बल्कि ओमिक्रॉन को लेकर यूरोप के आंकड़े भी हल्के लक्षण वाली बात ही सही साबित करते हैं। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप में ओमिक्रॉन के जिन 70 मामलों की गंभीरता की जानकारी है, उसके अनुसार इस नए वैरिएंट के संक्रमितों के आधे में कोई लक्षण नहीं थे, जबकि आधे में हल्के लक्षण थे। यूरोप में ओमिक्रॉन के संक्रमितों में गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने या मौत का कोई मामला नहीं था।

हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया है कि ये बहुत ही शुरुआती आंकलन है और इस नए वैरिएंट पर पूरी जानकारी मिलने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं।

सर्दी-जुकाम की तरह फैलेगा वैरिएंट?

ओमिक्रॉन के तेजी से फैलने में सक्षम होने की वजह से माना जा रहा है कि ये वर्तमान में दुनिया के कुल कोरोना मामलों में से 99 फीसदी के लिए जिम्मेदार डेल्टा वैरिएंट को भी पीछे छोड़ सकता है। हालांकि, अगर ओमिक्रॉन डेल्टा से अधिक प्रभावी बन जाता है लेकिन इसके लक्षण माइल्ड होते हैं, तो यह इस वायरस के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

इसे लेकर सैन डियागो स्थित रिसर्च डिपार्टमेंट ऑफ इम्यूनोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के संक्रामक बीमारियों के रिसर्चर सुमित चंदा का कहना है कि अगर ओमिक्रॉन बहुत तेजी से फैलने के बावजूद माइल्ड सिम्पटम्स ही पैदा करता है तो यह सीजनल बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम जैसा बन जाएगा।

ओमिक्रॉन के माइल्ड वैरिएंट होने का एक मतलब इसके सर्दी-जुकाम की तरह तेजी से फैलने की क्षमता भी है। हालांकि, इससे जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट्स में इससे गंभीर बीमारी या मौत का खतरा कम बताया जा रहा है, लेकिन अभी इसे लेकर और शोध होना बाकी है। इसके तेज म्यूटेशन इसे मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों और वैक्सीनेटेड लोगों को भी संक्रमित करने की क्षमता वाला वैरिएंट बनाते हैं, जो निश्चित तौर पर चिंता बढ़ाने वाली बात है।

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