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भास्कर एक्सप्लेनर:कोविड का खतरा महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को; मेन्स हेल्थ वीक में एक्सपर्ट से समझिए ऐसा क्यों और कैसे

4 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

दुनियाभर में ऐसे कई रिसर्च हुए हैं जो साबित करते हैं कि कोविड-19 महामारी ने पुरुषों को ज्यादा प्रभावित किया है। न केवल उनमें इन्फेक्शन का रेट ज्यादा है, बल्कि मृतकों में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का अनुपात ज्यादा है। यह तो हो गई इन्फेक्शन और उसके असर की बात। इस महामारी ने आर्थिक मोर्चे पर जो उथल-पुथल मचाई है, उसका असर भी पुरुषों पर अधिक हुआ है। बड़े स्तर पर लोगों को अपनी नौकरियों और रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। इससे वे डिप्रेशन, स्ट्रेस जैसे मानसिक रोगों से जूझ रहे हैं।

कोरोना महामारी के इस काल में दुनियाभर में मेन्स हेल्थ वीक (14-20 जून 2021) मनाया जा रहा है। इसमें पुरुषों और खासकर लड़कों से जुड़े स्वास्थ्य विषयों पर चर्चा हो रही है। ऐसे में हमने नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. आशीष सबरवाल से बात की। उनसे समझा कि पुरुषों को ही कोविड-19 ज्यादा प्रभावित क्यों कर रहा है? दुनियाभर में इस पर हुईं स्टडीज क्या कहती हैं? पुरुष किस तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं?

कोरोना महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक या पुरुषों के लिए?

  • पुरुषों के लिए। दुनियाभर में कई स्टडीज हुई हैं, जिनमें कोरोना के महिलाओं और पुरुषों पर हुए असर को जांचा गया है। फरवरी में चंडीगढ़ में PGIMER के रिसर्चर्स ने पाया कि कोरोना के कुल मरीजों में 65% पुरुष और 35% महिलाएं थीं।
  • इसी तरह अप्रैल में फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित स्टडी कहती है कि कोविड के गंभीर लक्षणों से जूझने वालों में महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक थे। चीनी रिसर्चर्स ने दावा किया है कि कोरोना के मरीजों में 70% पुरुष हैं। 2003 में सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) के प्रकोप के दौरान भी ऐसे ही नतीजे आए थे।
  • WHO की स्टडी में पता चला है कि यूरोप में कोविड-19 से हुई मौतों में 63% पीड़ित पुरुष थे। मार्च में रोम में अस्पताल में भर्ती मरीजों की मौत पर स्टडी हुई। पता चला कि अस्पताल में भर्ती 8% पुरुषों की मौत हुई, जबकि हॉस्पिटलाइज महिलाओं की मौत का आंकड़ा 5% था। अप्रैल में न्यूयॉर्क सिटी के हेल्थ डिपार्टमेंट ने बताया कि एक लाख पुरुषों पर 43 की मौत हो रही है, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा एक लाख की आबादी पर 23 का है।
  • भारत में इन्फेक्ट होने वाले मरीजों की संख्या पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग आंकड़े जारी नहीं होते। न ही मरने वालों में अंतर बताया जाता है। अमेरिका में भी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) महिलाओं-पुरुषों के अलग आंकड़े नहीं बताता।

क्या इसका कोई बायोलॉजिकल कारण है?

  • हां। 10 मई को मेन्स हेल्थ नेटवर्क में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक पुरुषों के खून में महिलाओं के मुकाबले अधिक एंजियोटेन्सिन कन्वर्टिंग एंजाइम 2 (ACE2) होते हैं। ACE2 की मौजदूगी में ही कोरोना वायरस स्वस्थ कोशिकाओं को इन्फेक्ट करता है। साफ है कि ACE2 रिसेप्टर अधिक होने से इन्फेक्ट होने का खतरा पुरुषों को ज्यादा है।
  • महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का इम्यून सिस्टम भी कमजोर होता है। रिसर्चर्स कहते हैं कि अतिरिक्त X क्रोमोसोम की वजह से महिलाओं का इम्यून सिस्टम पुरुषों से मजबूत होता है। इन्फेक्शन होने पर तत्काल प्रतिक्रिया देता है। अमेरिका में तो दो क्लीनिकल ट्रायल्स भी हुए थे। इनमें वैज्ञानिकों ने पुरुषों को कोविड-19 के साथ एस्ट्रोजन जैसे सेक्स हारमोन भी दिए ताकि यह देखा जा सके कि रिकवरी में कितनी मदद मिलती है।
  • हेल्थलाइन में प्रकाशित एक स्टडी यह भी कहती है कि पुरुष लापरवाह होते हैं। स्मोकिंग, ड्रिंकिंग और अन्य लत भी अधिक होती है। साफ है कि कोविड-19 इन्फेक्शन होने पर पुरुषों की पहले से किसी न किसी बीमारी से पीड़ित होने की आशंका ज्यादा रहती है।

कोविड से उबरने के बाद भी पुरुष किस तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं?

  • भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान कई नई बीमारियां देखने को मिली है। ब्लैक फंगस से लेकर हैप्पी हाइपोक्सिया और निमोनिया तक। इसने शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाया। कई बीमारियों का खतरा बढ़ाया है।
  • हालिया स्टडी में पाया गया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में स्ट्रेस लेवल बढ़ा हुआ है। कहीं न कहीं यह उनकी सेक्स लाइफ को भी प्रभावित कर रहा है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन से लेकर फर्टिलिटी तक सब कुछ प्रभावित हो रही है। यह स्टडी इटली में की गई थी। दावा किया गया कि कार्डियोवस्कुलर सिस्टम में डैमेज होने से इरेक्शन में समस्याएं आ रही हैं।
  • पुरुषों में न केवल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन हुए हैं बल्कि कार्डियोवस्कुलर समस्याएं भी बढ़ी हैं। कई मामलों में हारमोनल बदलावों की वजह से चेहरे और शरीर पर आने वाले बाल भी कम दिखे हैं। कुछ पुरुषों में तो सीने में असामान्य ग्रोथ दिखी है। इसके अलावा सेक्स की इच्छा न होना या उसमें कमी भी एक बड़ी समस्या के रूप में पुरुष मरीजों में दिख रही है।
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