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भास्कर डेटा स्टोरी:मई में गिरावट के बाद जून में संभली वैक्सीनेशन की रफ्तार, पर अब भी टारगेट से 12 लाख डोज रोज पीछे है सरकार

2 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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भारत में कोविड वैक्सीनेशन ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मई के तीसरे हफ्ते में सात दिन का डेली एवरेज घट गया था। महज 13 लाख डोज रोज पर आ गया था। दो महीने में सबसे कम। पर मई के चौथे हफ्ते में इसने रफ्तार पकड़ी। 20 लाख डोज रोज पर आया। फिर जून के पहले हफ्ते में दोगुना यानी करीब 26 लाख डोज रोज हो गया है।

सरकार का जून में 12 करोड़ डोज लगाने का प्लान है। यानी हर रोज 38 लाख डोज। ताकि जुलाई में एक करोड़ डोज रोज देने के टारगेट के करीब पहुंच सकें। पर जून के पहले हफ्ते के आंकड़े सरकार के टारगेट से 12 लाख डोज रोज पीछे हैं। 7 जून तक भारत में 23.28 करोड़ डोज दिए जा चुके हैं। इनमें 18.65 करोड़ पहले डोज और 4.62 करोड़ दूसरे डोज शामिल हैं।

किस तरह बढ़ रही है रफ्तार…
16 जनवरी को भारत में वैक्सीनेशन शुरू हुआ और उसके बाद हफ्ता-दर-हफ्ता आंकड़ा बढ़ता ही गया है। इक्का-दुक्का अवसरों पर ही किसी हफ्ते में उसके पिछले हफ्ते से कम डोज दिए गए (टेबल देखें)। 1 अप्रैल से सरकार ने 45+ को वैक्सीनेट करने की शुरुआत की और 3-9 अप्रैल के बीच सात दिन में 2.47 करोड़ (35 लाख रोज) डोज देने का रिकॉर्ड दर्ज किया। यह आज भी एक रिकॉर्ड है।

पर 1 मई के बाद वैक्सीनेशन में 18+ को शामिल करते ही वैक्सीन डोज की कमी की शिकायतें आने लगीं। नतीजा यह हुआ कि कई राज्यों में 1 मई से 18+ को वैक्सीनेट नहीं किया जा सका। कई राज्यों में बीच में ही 18+ को डोज देने से इंकार कर दिया गया। यानी पॉलिसी ही गड़बड़ा गई। 15-21 मई के बीच दो महीने में पहली बार साप्ताहिक औसत घटकर 13 लाख डोज रोज रह गया था। पर उसके बाद वैक्सीनेशन फिर रफ्तार पकड़ रहा है। 22-28 मई के बीच रोज करीब 20 लाख और 29 मई से 4 जून के बीच रोज करीब 26 लाख डोज दिए गए। अब सरकार ने पूरे जून महीने के लिए 38 लाख डोज रोज देने का टारगेट रखा है।

जुलाई में एक करोड़ डोज रोज देने की तैयारी
1जून को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के चीफ डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि देश में कोरोना वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। जुलाई तक देश में वैक्सीन की पर्याप्त डोज उपलब्ध होंगी, जिसके बाद रोज एक करोड़ लोगों को डोज दिया जा सकेगा। हमें पूरी उम्मीद है कि दिसंबर तक देश की पूरी जनसंख्या को कोरोना की वैक्सीन दे दी जाएगी।

दरअसल, सरकार ने 13 मई को जो प्लान जारी किया था, उसके मुताबिक अगस्त से दिसंबर के बीच सरकार को 2.1 अरब डोज मिल जाएंगे। नीति आयोग के सदस्य (हेल्थ) डॉ. वीके पॉल ने बाकायदा एक प्रजेंटेशन दिखाया और कहा कि भारत में अगस्त से दिसंबर तक 2.1 अरब डोज बनेंगे। यानी पूरी आबादी को दो डोज दे सकें, इतने डोज भारत में ही बन जाएंगे। पर सरकार ने जो प्लान बनाया, वह वास्तविकता से कोसों दूर नजर आ रहा है। भारत में टारगेट के आधे ही डोज उपलब्ध हो सकेंगे। सरकार की प्लानिंग में कुछ ऐसी वैक्सीन भी शामिल हैं, जिनके अभी ट्रायल्स चल रहे हैं और उन्हें लाइसेंस नहीं मिला है।

आंकड़ों में कहां और कैसे पिछड़ रही है सरकार

सरकार ने अगस्त से दिसंबर तक के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए हैं। पर ऐसा नहीं कि अब तक उसकी प्लानिंग पूरी तरह सफल रही है। सरकार ने अप्रैल के अंत में मई के लिए वैक्सीनेशन प्लान दिया था तो दावा किया था कि मई में वह 8 करोड़ डोज उपलब्ध कराएगी। पर लगे सिर्फ 5.98 करोड़ डोज।

अगर प्रोडक्शन की बात करें तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) में कोवीशील्ड के 6-6.5 करोड़ डोज हर महीने बन रहे हैं। इसी तरह कोवैक्सिन के 2 करोड़ डोज बन रहे हैं। पर हकीकत यह है कि मई में कोवीशील्ड के 5.1 करोड़ और कोवैक्सिन के करीब 90 लाख डोज लगाए गए। बचे हुए डोज कहां गए, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हो सकता है कि प्रोडक्शन अनुमान के मुताबिक न रहा हो, जो अक्सर होता है। ऐसे में जून और बाद के महीनों के लिए टारगेट्स पूरे करना मुश्किल हो सकता है।

अब जून का टारगेट कैसे पूरा होगा?
केंद्र सरकार ने कहा है कि वह जून में 12 करोड़ डोज उपलब्ध कराएगी। मई में लगे हैं सिर्फ 5.98 करोड़ डोज। ऐसे में एक महीने में ऐसा क्या हो गया, जो डोज की उपलब्धता दोगुनी हो जाएगी। सरकार ने खुद ही कहा है कि जून में प्रोडक्शन नहीं बढ़ने वाला।

भारत सरकार ने पहले भी कहा है कि अगस्त से सीरम इंस्टीट्यूट की प्रोडक्शन क्षमता 6.5 करोड़ डोज प्रतिमाह से बढ़कर 10 करोड़ डोज प्रतिमाह हो जाएगी। भारत बायोटेक का भी प्रोडक्शन 2 करोड़ डोज से बढ़कर 3.3 करोड़ डोज करने का दावा जुलाई के लिए है। इसके बाद अगस्त में ही अतिरिक्त डोज मिलेंगे। इस समय दोनों कंपनियों से की जा रही उम्मीद कागजों पर भी ठीक नहीं लग रही।

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