भास्कर एक्सप्लेनर:6 महीने में घटने लगता है वैक्सीन का असर, तो तीसरी डोज 9 महीने बाद क्यों? जानिए कितना गैप सही?

4 महीने पहलेलेखक: नीरज सिंह

देश में कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगने के नौ महीने बाद प्रिकॉशन (बूस्टर) डोज दी जा रही है। अभी यह 60 साल से ऊपर के बीमार बुजुर्गों, हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को लगाई जा रही है। कई राज्य सरकारों ने केंद्र को पत्र लिखकर यह गैप तीन माह तक कम करने को कहा है।

कुछ दिन पहले ही एक भारतीय रिसर्च में सामने आया है कि वैक्सीन लगवाने के तीन महीने बाद 30% आबादी की कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। इनमें 40 साल से ऊपर के वे लोग हैं जो हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

ऐसे में सरकार की ओर से ऐसे लोगों को बूस्टर डोज 9 महीने बाद देने को फैसला कितना सही है? साथ ही अलग-अलग वैक्सीन की इम्यूनिटी कितने समय तक रहती है, इसे हम अलग-अलग रिसर्च के हवाले से बताएंगे?

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने केंद्र को पत्र लिखा

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर बूस्टर डोज लेने की समय सीमा 9 से 6 महीने करने की मांग की है। राज्य सरकारों ने तर्क दिया है कि इससे कोरोना के गंभीर मामले कम आएंगे। साथ ही हॉस्पिटलाइजेशन का भी बोझ नहीं बढ़ेगा।

इन तीन रिसर्च से समझिए क्यों गैप कम होना चाहिए

1. भारत में 30% लोगों में वैक्सीन का असर 6 महीने बाद खत्म हो जाता है

हैदराबाद स्थित AIG हॉस्पिटल और एशियन हेल्थकेयर ने वैक्सीन इम्यूनिटी को लेकर रिसर्च की है। इसमें कहा गया है कि देश में 30 फीसदी लोग ऐसे हैं जिनमें वैक्सीन की दोनों डोज लगने के 6 महीने बाद कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि कि 10 में से 3 लोगों में वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी का असर 6 महीने बाद ही खत्म हो जाता है।

AIG अस्पताल के चेयरमैन डॉ. नागेश्वर रेड्डी ने बताया कि इस रिसर्च का मकसद वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी के असर को जानना था। साथ ही यह भी पता लगाना था कि किस आबादी को बूस्टर डोज की जरूरत है। डॉ. रेड्डी ने बताया कि कोमॉर्बिडिटी वाले 40 साल से ऊपर के लोगों को 6 महीने बाद बूस्टर डोज लगाई जा सकती है।

2. तीन महीने बाद ही घटने लगता है कोवीशील्ड का असर

दिसंबर 2021 में अपनी एक रिसर्च में लैंसेट ने कहा था कि एस्ट्राजेनेका (कोवीशील्ड) वैक्सीन का असर तीन महीने बाद कम होने लगता है। रिसर्चर ने कहा कि कोविशील्ड वैक्सीन लेने वाले सभी व्यक्ति और जिन देशों में बड़े पैमाने पर इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया है उन्हें बूस्टर डोज के तौर पर तीसरी खुराक लेने के बारे में जरूर सोचना चाहिए।

3. छह महीने तक ही वायरस से बचाव कर सकती है

फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) वैक्सीन के थर्ड फेज के स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया गया है कि यह छह महीने तक लोगों को वायरस से बचा सकती है। कैसर परमानेंट सदर्न कैलिफोर्निया और फाइजर के अध्ययन में भी कहा गया है छह महीने बाद फाइजर वैक्सीन लगाने के पांच से छह महीने बाद एंटीबॉडी लेवल में काफी कमी होने लगती है।

मेट्रो में संक्रमण के 90% केसों के लिए ओमिक्रॉन जिम्मेदार

देश की मेट्रोपॉलिटन सिटी में कोरोना के 90% केस के लिए ओमिक्रॉन वैरिंएट ही जिम्मेदार है। शीर्ष वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह धीरे-धीरे मेट्रो सिटी में डेल्टा का स्थान ले रहा है। ICMR के प्रमुख महामारी विज्ञानी समीरन पांडा ने कहते हैं कि जीनोम सीक्वेंसिंग डाटा के मुताबिक, ओमिक्रॉन शहरों में प्रमुख वैरिएंट बन चुका है। दिसंबर 2021 के चौथे हफ्ते में सीक्वेंस किए गए सैंपल में जहां 50% केस ओमिक्रॉन के केस मिल रहे थे। वहीं इस साल जनवरी के दूसरे और तीसरे हफ्ते में सीक्वेंस सैंपल में 90 से 95% केस ओमिक्रॉन के मिलने लगे हैं।

बूस्टर डोज ओमिक्रॉन के खिलाफ 90% तक प्रभावी

बूस्टर डोज ओमिक्रॉन और डेल्टा के खिलाफ 90% तक प्रभावी है। ब्रिटेन की एक स्टडी में यह बात सामने आई है। इसके साथ ही अमेरिकी सीडीसी के हालिया तीन अध्ययन में भी इसकी पुष्टि हुई है।