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भास्कर एक्सप्लेनर:बच्चों के लिए दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन कनाडा में मंजूर; अमेरिका में फाइजर की वैक्सीन पर फैसला अगले हफ्ते

5 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

फाइजर की वैक्सीन बच्चों के लिए अप्रूवल पाने वाली दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन हो गई है। कनाडा के ड्रग रेगुलेटर हेल्थ कनाडा ने 12 से 15 साल के बच्चों के लिए यह वैक्सीन लगाने की इजाजत दे दी है। इससे पहले यह वैक्सीन 16 साल से ज्यादा उम्र वालों को लगाई जा रही थी। अमेरिका में भी फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTecch) की कोरोना वैक्सीन को 12 से 15 साल के बच्चों को लगाने की इजाजत जल्द मिलने की उम्मीद है।

फाइजर की वैक्सीन के बच्चों पर ट्रायल्स जनवरी से मार्च के बीच हुए थे। वैक्सीन निर्माता ने बताया कि उसकी वैक्सीन बच्चों पर पूरी तरह से सुरक्षित है। इसकी इफेक्टिवनेस 100% साबित हुई है। अमेरिका में ही फाइजर के अलावा मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के भी बच्चों में ट्रायल्स किए जा रहे हैं। मॉडर्ना की वैक्सीन के ट्रायल्स के नतीजे जून में आने की उम्मीद है। वहीं, जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के नतीजे उसके बाद आएंगे। यानी साल के अंत तक दोनों ही कंपनियों की वैक्सीन सब बच्चों के लिए उपलब्ध हो सकती है।

आइए जानते हैं कि बच्चों की वैक्सीन पर दुनियाभर में क्या चल रहा है? फाइजर की वैक्सीन की इफेक्टिवनेस कितनी रही है?

कनाडा में फाइजर की वैक्सीन को इजाजत मिलने के बाद आगे क्या होगा?

  • कनाडा में हेल्थ रेगुलेटर ने साफ किया है कि अब यह वैक्सीन 12 से 15 साल तक के बच्चों को लगाई जाएगी। इससे पहले कंपनी ने 13 अप्रैल को अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर (US-FDA) से 12-15 साल तक के बच्चों के लिए वैक्सीन का इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी थी। अमेरिकी न्यूज चैनल CNN की रिपोर्ट के मुताबिक अगले हफ्ते अमेरिका में भी फाइजर की वैक्सीन को 12-15 साल आयु समूह के बच्चों पर इस्तेमाल की इजाजत मिल जाएगी।
  • US-FDA के अधिकारियों की अगले हफ्ते की मीटिंग में फाइजर की वैक्सीन पर फैसला होना है। मंजूरी मिल जाती है तो फिर सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की एडवायजरी कमेटी की बैठक होगी। इसमें तय किया जाएगा कि वैक्सीन को बच्चों को कैसे और कब लगाया जाए। US-FDA की एक प्रवक्ता ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा कि हम जल्द से जल्द और पूरी पारदर्शिता के साथ फाइजर के अनुरोध की समीक्षा करेंगे। फिलहाल फाइजर की वैक्सीन 16 वर्ष से ज्यादा आयु समूह वालों को लग रही है।
  • वहीं, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में भी 12-15 साल के बच्चों के लिए यह वैक्सीन मंजूरी पा सकती है। फाइजर की वैक्सीन इन देशों में 16 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लगाई जा रही है। फाइजर ने यह भी कहा है कि अब उसका फोकस 6 महीने से 11 साल तक के बच्चों पर वैक्सीन के ट्रायल्स करने पर होगा।
अमेरिका के सिनसिनाटी में फाइजर की वैक्सीन के बच्चों पर हुए ट्रायल्स के दौरान एक लड़की को वैक्सीन लगातीं हेल्थवर्कर। इस स्टडी में 2,260 बच्चों को शामिल किया गया था।
अमेरिका के सिनसिनाटी में फाइजर की वैक्सीन के बच्चों पर हुए ट्रायल्स के दौरान एक लड़की को वैक्सीन लगातीं हेल्थवर्कर। इस स्टडी में 2,260 बच्चों को शामिल किया गया था।

बच्चों पर कितनी इफेक्टिव है फाइजर की वैक्सीन?

  • फाइजर का दावा है कि उसने 12-15 साल उम्र के 2,260 बच्चों पर वैक्सीन के ट्रायल्स किए। 31 मार्च 2021 को घोषित नतीजों के मुताबिक यह वैक्सीन इस आयु समूह पर 100% इफेक्टिव साबित हुई है। इसका मतलब है कि जिन्हें यह वैक्सीन लगी, उनमें से कोई भी वायरस से इन्फेक्ट नहीं हुआ।
  • ट्रायल्स में 18 बच्चे कोरोना से इन्फेक्ट हुए थे, पर वे सभी प्लेसिबो ग्रुप के थे। इसके बाद भी ट्रायल्स में शामिल बच्चों की दो साल तक निगरानी की जाएगी, ताकि उनके शरीर पर वैक्सीन के दूरगामी असर को समझा जा सके। कंपनी का कहना है कि बच्चों को जल्द से जल्द फिर से स्कूल भेजना जरूरी है। ताकि वे अपने दोस्तों से मिल सकें। दोस्तों और परिवार के साथ निश्चिंतता के साथ आउटडोर में खेल सकें।
इस समय दुनियाभर में कई वैक्सीन के बच्चों पर ट्रायल्स हो रहे हैं। अमेरिका जैसे देशों में यह कहने वाले भी कम नहीं हैं कि जब बच्चों को इस वायरस से खतरा नहीं है तो उन्हें वैक्सीन लगाने की जरूरत क्या है।
इस समय दुनियाभर में कई वैक्सीन के बच्चों पर ट्रायल्स हो रहे हैं। अमेरिका जैसे देशों में यह कहने वाले भी कम नहीं हैं कि जब बच्चों को इस वायरस से खतरा नहीं है तो उन्हें वैक्सीन लगाने की जरूरत क्या है।

दुनियाभर में बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन की क्या स्थिति है?

  • फाइजर की वैक्सीन तकरीबन तैयार है। कनाडा के बाद अन्य देशों में भी 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को लगाने की अनुमति जल्द ही मिल सकती है। दवा कंपनी ने मार्च में 6 महीने से 11 साल तक के छोटे बच्चों पर क्लीनिकल ट्रायल्स शुरू किए। उम्मीद की जा रही है कि इन ट्रायल्स के शुरुआती नतीजे सितंबर तक मिल जाएंगे।
  • ट्रायल के पहले फेज में कंपनी तीन आयु समूहों में वॉलंटियर्स को बांटेगी- 6 महीने से 2 साल, 2 से 5 साल और 5 से 11 साल तक के बच्चे। पहले 5 से 11 वर्ष के बच्चों के लिए डोज तय होगा, उसके बाद उससे कम उम्र के बच्चों के लिए डोज तय किया जाएगा।
  • वहीं, अमेरिका में मंजूर दूसरी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी मॉडर्ना का कहना है कि उसकी वैक्सीन के किशोरों और छोटे बच्चों पर ट्रायल्स चल रहे हैं। शुरुआती नतीजे जून-जुलाई में आ जाएंगे। अमेरिका में मंजूर तीसरी वैक्सीन जॉनसन एंड जॉनसन भी पीडियाट्रिक ट्रायल्स की योजना बना रही है।
  • एक और अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स ने भी 12-17 आयु वर्ग के 3,000 किशोरों पर अपनी वैक्सीन के ट्रायल्स शुरू कर दिए हैं। नोवावैक्स की वैक्सीन को अब तक किसी भी देश में मंजूरी नहीं मिली है। इसमें शामिल हो रहे बच्चों की दो साल तक निगरानी की जाएगी।

भारत में बच्चों की वैक्सीन कब उपलब्ध होगी?

  • फिलहाल कुछ भी कहना मुश्किल है। भारत बायोटेक ने फरवरी में बच्चों को कोवैक्सिन ट्रायल्स में शामिल करने का आवेदन दिया था। पर ड्रग रेगुलेटर ने यह कहकर आवेदन खारिज कर दिया था कि पहले वयस्कों पर वैक्सीन की इफेक्टिवनेस साबित करो।
  • इसके बाद मार्च में कहा गया कि भारत बायोटेक जल्द ही बच्चों पर अपनी वैक्सीन के ट्रायल्स शुरू कर सकती है। हालांकि पिछले महीने ही भारत बायोटेक ने फेज-3 ट्रायल्स के दूसरे अंतरिम नतीजे जारी किए और कहा कि उसकी वैक्सीन 78% तक इफेक्टिव है। इन नतीजों के आधार पर उम्मीद की जा सकती है कि कोवैक्सिन को बच्चों पर ट्रायल्स की इजाजत मिल जाएगी। इसके बाद ही भारत में बच्चों के बीच इसके ट्रायल्स हो सकेंगे।
  • पिछले महीने भारत सरकार ने विदेशी वैक्सीनों को मंजूरी देने का फैसला किया है। इसके तहत फाइजर, मॉडर्ना के साथ-साथ जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन भी भारत में उपलब्ध होने के आसार हैं। अभी यह देखना होगा कि अगर अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने बच्चों के लिए वैक्सीन को मंजूरी दी तो प्राइवेट मार्केट में आने वाली विदेशी वैक्सीन को भारत में बच्चों को लगाने की इजाजत दी जाती है या नहीं।