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भास्कर एक्सप्लेनर:कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज कब लगेगा? और समय पर नहीं मिला तो एंटीबॉडी बनने पर क्या असर होगा, जानिए सब कुछ

3 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

एक मई के बाद कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर कई तरह के नए सवाल सामने आए हैं। अधिकांश जगहों पर वैक्सीन के डोज उपलब्ध नहीं हैं या हैं भी तो बहुत कम हैं। कई लोग दूसरा डोज लेना तो चाहते हैं, पर अपॉइंटमेंट बुक नहीं हो पा रहा। उन्हें चिंता सता रही है कि अगर समय पर वैक्सीन का दूसरा डोज नहीं ले पाए तो क्या होगा? अगर देरी हुई तो क्या होगा? इसका इम्युनिटी या एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा?

सवालों का सिलसिला यहीं आकर नहीं थमता। हर डोज के साथ किंतु-परंतु जुड़ रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें पहला डोज लगने के बाद कोरोना इन्फेक्शन हो गया। अब उन्हें चिंता है कि दूसरा डोज कब लगेगा? दरअसल, 1 मई से देश में 18+ को वैक्सीन लगने की शुरुआत हुई है, लेकिन वैक्सीन डोज की अनुपलब्धता ने दूसरे डोज का शेड्यूल बिगाड़ दिया है। हमने महामारी और वैक्सीन एक्सपर्ट डॉ. चंद्रकांत लहारिया, एमडी, सहित विशेषज्ञों से बात की, ताकि आपको सही फैसला लेने में मदद मिले।

दूसरे डोज को लेकर किस तरह की दिक्कतें आ रही हैं?
1 मई से पूरे देश में 18+ को कोरोना वैक्सीन लगनी शुरू हुई है। पर पेंच यह फंसा है कि 18-44 वर्ष के लोगों को राज्य सरकारें वैक्सीन लगवा रही हैं और 45+ को केंद्र सरकार। यानी 45+ के लिए डोज केंद्र सरकार दे रही है, वहीं 18-44 वर्ष के ग्रुप के लिए राज्य सरकारें सीधे वैक्सीन कंपनियों से डोज खरीद रही हैं।
ज्यादातर राज्यों में उतने ही वैक्सीन डोज थे, जो केंद्र ने उन्हें दिए थे। यानी 45+ के लिए थे। जब इन राज्यों में 18-44 वर्ष आयु समूह को वैक्सीन लगनी शुरू हुई तो 45+ के लिए डोज कम पड़ गए। पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा कि दूसरे डोज को प्राथमिकता दी जाए। यानी जिन्हें एक डोज दे दिया है और दूसरे डोज का शेड्यूल आ गया है, तो उन्हें पहले डोज लगाएं।

इस स्थिति से निपटने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
भारत में 85% डोज कोवीशील्ड के लगे हैं। वहीं, ब्रिटेन में इस वैक्सीन के दो डोज में 12 से 16 हफ्ते का अंतर रखा जा रहा है। इसके दो उद्देश्य है- एक तो ट्रायल्स में देरी से वैक्सीन की इफेक्टिवनेस बढ़ी होने के सबूत सामने आए हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को पहला डोज दिया जा सकेगा। इस वजह से वैक्सीनेशन से जुड़े फैसले लेने वाले नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्युनाइजेशन (NTAGI) ने सिफारिश की है कि कोवीशील्ड के डोज के बीच का अंतर 12 से 16 हफ्ते कर दिया जाए। फिलहाल 6 से 8 हफ्ते के अंतराल में कोवीशील्ड के दो डोज लगाए जा रहे हैं।
पैनल ने साफ किया कि कोवैक्सिन के मामले में किसी भी तरह के बदलाव की सिफारिश नहीं की गई है। इससे पहले केंद्र सरकार ने कोवीशील्ड वैक्सीन के दो डोज के बीच का समय पहले से दो हफ्ते ज्यादा कर दिया था। शुरुआत में कोवीशील्ड के दोनों डोज के बीच 4 से 6 हफ्ते, यानी 28 से 42 दिन का अंतर रखा जाता था। इसके बाद इसे बढ़ाते हुए 6 से 8 हफ्ते यानी 42 से 56 दिन कर दिया गया था। नया नियम सिर्फ कोवीशील्ड वैक्सीन पर लागू हुआ था।

दूसरा डोज कितना लेट हो सकता है?
डॉ. लहारिया के मुताबिक सरकार और वैक्सीन कंपनियों की सिफारिशों को देखें तो कोवैक्सिन के दो डोज के लिए 6 हफ्ते और कोवीशील्ड के दो डोज के लिए 8 हफ्ते का अधिकतम समय दिया है। जब हम एविडेंस आधारित असेसमेंट की बात करते हैं तो दो डोज में कम से कम कितना अंतर रखना है, इसकी बात ही होती है। अधिकतम समय डोज की उपलब्धता के अनुसार तय हो सकता है। इसकी कोई अपर लिमिट नहीं होती।
इसका मतलब यह है कि कुछ मामलों में तो छह महीने तक का अंतर रखा जा सकता है। पर इसका मतलब यह नहीं है कि एक साल बाद दूसरा डोज लेने चले जाएं। यह कोई काम नहीं करेगा। हो सकता है कि तब आपको दोबारा दो डोज लेने पड़ जाएं।
मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की डॉ. माला वी. कानेरिया, कंसल्टेंट, इंफेक्शियस डिजीज, का कहना है कि कोवीशील्ड के दूसरे डोज में 12 हफ्ते का अंतर हो भी गया तो कोई दिक्कत नहीं है। पर कोवैक्सिन को लेकर ऐसी कोई स्टडी नहीं हुई है। अन्य वैक्सीन के संबंध में उपलब्ध स्टडी कहती है कि अगर दूसरा डोज कुछ महीनों के बाद भी लेते हैं तो भी उसका असर कायम रहता है।
उनका यह भी कहना है कि कोरोना के केस बढ़ रहे हैं और सलाह दी जाती है कि लोग उपलब्ध होते ही दूसरा डोज लगवा लें। अगर देर हो भी जाती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें। एक डोज के बाद भी उन्हें काफी हद तक प्रोटेक्शन मिलेगा ही।

बॉटम लाइन यह है कि जब भी दूसरा डोज उपलब्ध हो, तब आप उसे ले लीजिए। कम से कम हफ्तों का अंतर पूरा करने के बाद कभी भी दूसरा डोज ले सकते हैं।

अगर किसी व्यक्ति को पहले डोज के बाद कोरोना इन्फेक्शन हो गया तो वह दूसरा डोज कब लगवाएं?
डॉ. लहारिया के मुताबिक इन्फेक्शन तो दो डोज लेने के बाद भी हो सकता है। पर तब यह लक्षणों को ज्यादा गंभीर नहीं होने देगा। माइल्ड से मॉडरेट ही लक्षण होंगे। पर अगर पहले डोज के बाद इन्फेक्शन हुआ है तो दो परिस्थितियां बन सकती हैं-
1. पहला डोज लगने के तीन हफ्ते के अंदर इन्फेक्शन हुआ है तो इसका मतलब है कि वैक्सीन अपना काम शुरू कर ही नहीं कर सकी और व्यक्ति इन्फेक्ट हो गया। भारत सरकार के नियम के अनुसार ठीक होने के 4 से 8 हफ्ते के गैप में दूसरा डोज लेना चाहिए। पर दुनियाभर में हुई स्टडी कहती है कि वैक्सीन के डोज और नेचरल इन्फेक्शन दोनों का उद्देश्य शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनाना है। अगर इन्फेक्शन से एंटीबॉडी बनी है तो भी कम से कम 6-7 महीने तक तो प्रोटेक्शन मिलेगा ही। WHO की सिफारिश है कि ऐसे लोग 2 से 6 महीने के अंतर से वैक्सीन का डोज ले सकते हैं।
2. पहला डोज लगने के तीन हफ्ते बाद इन्फेक्शन हुआ है तो इस तरह के केस में नेचुरल इन्फेक्शन भी बूस्टर डोज का ही काम करेगा। ऐसे में लक्षण गंभीर नहीं होते और व्यक्ति आसानी से ठीक हो जाता है। इन लोगों को सलाह होगी कि वे 6 महीने रुककर ही वैक्सीन का डोज लगवाएं।

इन्फेक्ट होने पर प्लाज्मा थेरेपी या मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ली है तो वैक्सीन का डोज कब लगेगा?
डॉ. कानेरिया का कहना है कि अगर व्यक्ति पहले डोज के बाद इन्फेक्ट होता है और इलाज में प्लाज्मा थेरेपी या मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (टोसिलिजुमाब आदि) की जरूरत पड़ती है तो उसे दूसरे डोज के लिए इंतजार करना होगा। वह ऐसी किसी थेरेपी के कम से कम 3 महीने बाद ही दूसरा डोज ले सकेगा।

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