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भास्कर एक्सप्लेनर:पुरुषों की सेक्स लाइफ को प्रभावित कर रहा है कोविड; नपुंसकता भी साइड इफेक्ट के तौर पर सामने आई

3 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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कोरोना की दूसरी लहर में उसके साथ आए लक्षणों को लेकर नई-नई बातें सामने आ रही हैं। अब नई रिसर्च में पता चला है कि पुरुषों की सेक्स लाइफ भी कोविड-19 से प्रभावित हो रही है। स्टडी के अनुसार कोरोना की वजह से पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी नपुंसकता देखी जा रही है। इसकी वजह पोस्ट-कोविड स्ट्रेस, डिप्रेशन के साथ-साथ कुछ हद तक शरीर के अंदर होने वाले बदलाव भी शामिल हैं। हमने इन स्टडी पर कुछ विशेषज्ञों से बात की, ताकि समझा जा सके कि यह क्यों हो रहा है और किस हद तक पुरुषों की सेक्स ड्राइव प्रभावित हो रही है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन क्या है?

  • मेन्स हेल्थ में छपी स्टडी में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के यूरोलॉजिस्ट डॉ. हॉवर्ड ऑबर्ट कहते हैं कि यह समझने से पहले इरेक्शन की प्रक्रिया को समझना होगा। दरअसल, पेनिस (लिंग) तीन सिलेंडर से बना होता है। ऊपर के दो सिलेंडर स्पंज जैसे फैलने वाले टिश्यू से भरे होते हैं। वहीं, निचला सिलेंडर ब्लैडर से यूरिन को पास करता है।
  • जब व्यक्ति उत्तेजित होता है तो वह नर्वस रेस्पॉन्स और उसकी वजह से शुरू होने वाली एक्टिविटी से होता है। इस दौरान ब्लड स्पंजी टिश्यू में आता है और वह फैल जाते हैं। सिस्टम कुछ ऐसा है कि ब्लड वहां आकर रुक जाता है। तब व्यक्ति को इरेक्शन महसूस होता है। इसके लिए जरूरी है कि नर्व से पर्याप्त मात्रा में नाइट्रिक ऑक्साइड निकलें। नसें इतनी खुलनी चाहिए कि उससे स्पीड से खून निकल सके। जब किसी कारण से पेनिस तक ब्लड नहीं पहुंच पाता तो उसमें इरेक्शन नहीं होता और इसे ही इरेक्टाइल डिसफंक्शन कहते हैं।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के क्या कारण हो सकते हैं?

  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कई कारणों में स्ट्रेस, डिप्रेशन और परफॉर्मेंस संबंधी तनाव भी है। पर अगर ब्लड फ्लो में कोई समस्या आ रही है तो इसका असर इरेक्शन पर हो सकता है। नर्वस सिस्टम में कोई गड़बड़ी या हॉर्मोन सेंसिटिविटी भी इसकी वजह हो सकती है।
  • आम तौर पर इरेक्टाइल फंक्शन का संबंध सीधे-सीधे ब्लड सर्कुलेशन से होता है और इस वजह से इरेक्टाइल फंक्शन में कोई भी गड़बड़ी दिल की बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। कोविड-19 की वजह से पूरे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होती है और ब्लड सर्कुलेशन पर सीधे-सीधे असर पड़ता है। पेनिस को ब्लड सप्लाई करने वाली धमनियां (आर्टरी) ब्लॉक या संकरी हो सकती है। अगर ऐसा हुआ और पेनिस तक ब्लड नहीं पहुंचेगा और तब इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है।
  • नई दिल्ली में डायोज मेन्स हेल्थ सेंटर के क्लीनिकल डायरेक्टर डॉ. विनीत मल्होत्रा कहते हैं, “कोविड-19 का फिजिकल और इमोशनल हेल्थ सहित व्यक्ति की ओवरऑल हेल्थ पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। सेक्शुअल फंक्शन और फर्टिलिटी भी वायरस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से जुड़ रही है। शारीरिक कसरत की कमी, अधिक भोजन और अत्यधिक शराब भी हेल्थ खराब कर रही है।”

क्या कहती है पुरुषों की पोस्ट-कोविड सेक्शुअल लाइफ पर हुई स्टडी?

  • मार्च 2021 में जर्नल एंड्रोलॉजी में ‘मास्क अप टू कीप इट अप’ हेडिंग से प्रकाशित रिसर्च पेपर में कोविड-19 और इरेक्टाइल डिसफंक्शन के संबंधों को बताया गया है। इटली के पुरुषों पर की गई यह स्टडी बताती है कि कोविड-19 की वजह से कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को नुकसान पहुंचता है, जो पुरुषों में इरेक्शन पर असर डाल रहा है।
  • वर्ल्ड जर्नल ऑफ मेन्स हेल्थ में प्रकाशित एक स्टडी का दावा है कि इन्फेक्शन के कई महीनों बाद भी पेनिस में इन्फेक्शन मिला है। दावा किया गया है कि कोविड-19 की वजह से शरीर के कई सेल्स के काम करने के तरीकों पर असर पड़ा है जो इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण हो सकता है।
  • इन स्टडी के नतीजों की पुष्टि करते हुए दिल्ली के सेंटर फॉर रिकंस्ट्रक्टिव यूरोलॉजी एंड एंड्रोलॉजी के डॉ. गौतम बंगा कहते हैं, “कोविड-19 ने दो तरह से पुरुषों की हेल्थ को प्रभावित किया है- पहला सेक्शुअल हेल्थ और दूसरा मेंटल हेल्थ। महामारी ने लोगों को सामाजिक के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी परेशान किया है। इससे स्ट्रेस, डिप्रेशन और एंग्जाइटी हो रही है। इसका असर पुरुषों की ओवरऑल हेल्थ, इरेक्टाइल डिसफंक्शन और फर्टिलिटी पर दिख रहा है।”

क्या यह नुकसान स्थायी है या ठीक हो सकता है?

  • कोविड-19 महामारी के आने के डेढ़ साल बाद भी रिसर्चर्स अब भी समझने में लगे हैं कि यह वायरस लंबी अवधि में किस तरह की जटिलताएं पेश कर सकता है। ब्लड क्लॉट्स की समस्या के साथ-साथ न्यूरोलॉजिकल इश्यू, दिल, फेफड़ों, किडनी को नुकसान पहुंचने की बात साबित हो चुकी है। कई महीनों बाद भी ये लक्षण दिख रहे हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 की वजह से कुछ नुकसान स्थायी हो रहे हैं, जबकि कुछ अस्थायी। इरेक्टाइल डिसफंक्शन स्थायी है या नहीं, इस बारे में और रिसर्च की जरूरत है। यह भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि कोविड-19 इन्फेक्शन से फर्टिलिटी प्रभावित होगी। उम्र भी एक फैक्टर हो सकता है। बढ़ती उम्र की वजह से इरेक्टाइल डिसफंक्शन और कोविड-19 की गंभीरता दोनों का खतरा होता है।
  • गुड़गांव के ज्योति हॉस्पिटल में यूरोलॉजिस्ट और एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. रमन तंवर कहते हैं कि अभी भी कई कंपनियों में वर्क फ्रॉम होम चल रहा है, जिससे इम्प्लॉई ज्यादा समय तक काम कर रहे हैं। यह तनाव, एंग्जाइटी, डिप्रेशन का कारण बन रहा है और इससे कार्डियक अटैक और रिप्रोडक्शन सिस्टम से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। समय के साथ इसमें सुधार दिख सकता है।”

क्या भारत में भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन के केस सामने आए हैं?

  • हां। डॉक्टरों के पास अब ऐसे केस आने लगे हैं। डॉ. रमन तंवर के मुताबिक उनके पास इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या के साथ आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। दुनिया के कई हिस्सों में हुई स्टडी में यह साबित हुआ है कि कोविड-19 और इरेक्टाइल डिसफंक्शन का एक-दूसरे से गहरा संबंध है।

क्या वैक्सीन लगने के बाद भी इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं?

  • नहीं। ऐसा तो कोई केस सामने नहीं आया है। डॉ. मल्होत्रा का कहना है, "कोविड-19 वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अफवाहों की वजह से पुरुष वैक्सीन से बच रहे हैं। उन्हें यह सोचना चाहिए कि वैक्सीन कोविड-19 के गंभीर लक्षणों की आशंका को कम करती है। इससे उन्हें फायदा ही होगा, नुकसान नहीं।”
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