भास्कर एक्सप्लेनर:देश में बनेंगे 50 मॉड्यूलर हॉस्पिटल, 3 हफ्ते में हो सकेंगे तैयार; जानिए कैसे होते हैं ये और कोरोना से लड़ने में क्या होगा इनका रोल

4 महीने पहलेलेखक: जयदेव सिंह/आबिद खान

कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच सरकार ने इससे निपटने की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने के साथ ही अब पूरे देश में 50 मॉड्यूलर हॉस्पिटल खोलने की तैयारी है। इन हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों के लिए ICU, ऑक्सीजन बेड और आइसोलेशन वार्ड का इंतजाम होगा। फिलहाल पूरे देश में चुनिंदा जगहों पर इन हॉस्पिटल्स को खोला जाएगा। उम्मीद है कि आने वाले 2 से 3 महीनों में ये हॉस्पिटल बनकर तैयार हो जाएंगे।

आइए, समझते हैं मॉड्यूलर हॉस्पिटल होते क्या हैं, कैसे बनाए जाते हैं, इन हॉस्पिटल के क्या फायदे हैं और भारत को कोरोना से लड़ने के लिए ऐसे हॉस्पिटल की कितनी जरूरत है...

पहले समझिए मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन क्या होता है?

मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन में लगने वाले सभी आइटम को किसी दूसरी जगह पर पहले से बना लिया जाता है। जैसे एक कमरा बनाने के लिए खिड़की, दीवार, दरवाजे, छत और बाकी दूसरी चीजों को पहले से तैयार कर लिया जाता है। अब जहां भी कमरे की जरूरत होगी, वहां इन आइटम को ले जाकर केवल असेंबल कर दिया जाता है और कमरा बनकर तैयार। यानी साइट पर आपको केवल असेंबलिंग का काम करना है। इन अलग-अलग हिस्सों को मॉड्यूल्स कहते हैं और इस पूरी प्रक्रिया को मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन कहा जाता है।

मॉड्यूलर हॉस्पिटल क्या है?

इन्हीं अलग-अलग मॉड्यूल्स के जरिए बनने वाले हॉस्पिटल, मॉड्यूलर हॉस्पिटल कहलाते हैं। मॉड्यूलर हॉस्पिटल में भी लगने वाली सभी चीजों को पहले से तैयार कर लिया जाता है। जहां भी हॉस्पिटल बनाने की जरूरत होती है, वहां इन चीजों को ले जाकर असेंबल कर दिया जाता है।

किन-किन जगहों पर ये हॉस्पिटल बनेंगे?

फिलहाल देशभर में चुनिंदा जगहों पर इन हॉस्पिटल को बनाने की तैयारी है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, महाराष्ट्र के पुणे, अमरावती और जालना, पंजाब के मोहाली में ये हॉस्पिटल बनाए जाएंगे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी ऐसा 20 बेड वाला हॉस्पिटल बनेगा। कर्नाटक के बेंगलुरु में पहले चरण में 20, 50 और 100 बेड वाले हॉस्पिटल बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार इन हॉस्पिटल्स को ऐसे सरकारी हॉस्पिटल के नजदीक बनाएगी जहां बिजली, ऑक्सीजन और पानी की व्यवस्था होगी।

क्या देश में पहले भी कहीं ऐसे हॉस्पिटल काम कर रहे हैं?

हां, टाटा ग्रुप देशभर में ऐसे मॉड्यूलर हॉस्पिटल बना चुका है जिनमें कोरोना मरीजों का इलाज हुआ है। केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और ओडिशा में रिकॉर्ड टाइम में कोरोना गाइडलाइन के तहत इन हॉस्पिटल्स को बनाया गया है। कई जगहों पर हॉस्पिटल को पूरा बनाया गया तो कुछ जगहों पर आइसोलेशन वार्ड और कोविड गाइडलाइन के हिसाब से बदलाव किए गए हैं।

ये हॉस्पिटल कब तक बनकर तैयार होंगे?

अगले 2 से 3 महीनों में देशभर में 50 हॉस्पिटल को बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए टाटा ग्रुप और IIT मद्रास के एक स्टार्टअप मॉड्यूल्स हाउसिंग ने काम भी शुरू कर दिया है। ऐसे एक हॉस्पिटल को बनाने में 3 करोड़ रुपए खर्च होंगे और 6 से 7 हफ्तों में ये पूरी तरह काम करने लगेंगे।

हॉस्पिटल में स्टाफ कहां से आएगा?

प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय में इंडस्ट्री-एकेडेमिया कोलैबरेशन की सदस्य अदिति लेले के मुताबिक, इन हॉस्पिटल को पहले से मौजूद किसी सरकारी हॉस्पिटल के पास ही खोला जाएगा। ऐसे में उस सरकारी हॉस्पिटल का जो स्टाफ होगा, उसी की ड्यूटी इन हॉस्पिटल में भी लगाई जाएगी। यानी इन हॉस्पिटल के लिए अलग से स्टाफ की भर्ती नहीं की जाएगी।

इन हॉस्पिटल को बनाने का पैसा कहां से आएगा?

पैसे के लिए अलग-अलग इंडस्ट्रीज से पार्टनरशिप की गई है। सरकार की तरफ से प्रोजेक्ट में किसी तरह का कोई फंड नहीं दिया गया है।

जब सरकार पैसा नहीं दे रही है तो उसका रोल क्या है?

इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन और उनकी टीम संभाल रही है। इस टीम का काम केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्टार्टअप और दूसरे इंडस्ट्रीज पार्टनर्स के बीच समन्वय बनाने का है। हॉस्पिटल के लिए फंड, जगह, डॉक्टर और बाकी तमाम सुविधाएं जुटाने का काम ये टीम संभाल रही है।

केरल के कासरगोड में बनाया गया मॉड्यूलर हॉस्पिटल।
केरल के कासरगोड में बनाया गया मॉड्यूलर हॉस्पिटल।

क्या कोरोना के अलावा दूसरे मरीजों का इलाज भी इन हॉस्पिटल में होगा?

बिल्कुल। जरूरत के हिसाब से इन हॉस्पिटल में कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों के मरीजों का इलाज भी किया जा सकेगा। कोरोना मरीजों के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर में इसी तरह का एक हॉस्पिटल बनाया गया था जिसे कोरोना मरीज कम होने के बाद कैंसर मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारत को इन हॉस्पिटल्स की कितनी जरूरत?

  • कोरोना मरीजों के इलाज के लिए ये हॉस्पिटल बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। इन हॉस्पिटल्स में ICU बेड और ऑक्सीजन की सुविधा भी होगी। दूसरी लहर में ऑक्सीजन और बेड की मारामारी का हाल सब जानते ही हैं।
  • इन्हें कम समय में बनाया या शिफ्ट किया जा सकता है। इसका फायदा ये होगा कि कोरोना के केसेज के हिसाब से इन हॉस्पिटल को बनाया जा सकेगा। जहां केस कम होंगे, वहां से हटाकर ज्यादा केस वाले इलाकों में इन्हें शिफ्ट किया जा सकेगा।
  • कोरोना की दूसरी लहर में ग्रामीण इलाकों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी सामने आई है। इन हॉस्पिटल्स को ग्रामीण इलाकों में भी खोला जा सकेगा।
  • दरअसल दूसरी लहर के दौरान हॉस्पिटल में बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी को देखते हुए इन हॉस्पिटल को बनाया जा रहा है। इन हॉस्पिटल में आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन और ICU की सुविधा होगी, जो कोरोना मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की जा सकेंगी। साथ ही इन्हें बनाने और शिफ्ट करने में लगने वाले कम खर्च और समय की वजह से ये हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक बेहतर विकल्प है।

एक्सपर्ट्स इस पहल को कैसा बता रहे हैं?

महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रकांत लहारिया कहते हैं कि मॉड्यूलर हॉस्पिटल का कॉन्सेप्ट एक टेम्परेरी समाधान की तरह है। हम जिन अस्पतालों के पास इन्हें बनाने और उनके डॉक्टरों के जरिए इन हॉस्पिटल्स को चलाने की बात कर रहे हैं, वो पहले से ही डॉक्टर और हेल्थ वर्कर्स की कमी से जूझ रहे हैं।

ऐसे में सरकार को लॉन्ग टर्म सस्टेनेबल रोडमैप बनाना चाहिए। इसमें भी सबसे पहले मौजूदा हेल्थ सिस्टम में खाली पड़े पद, दवाओं आदि की कमियां हैं, उन्हें पूरा करना चाहिए। इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर काम करना चाहिए। ये मॉड्यूलर हॉस्पिटल जैसे टेम्परेरी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि परमानेंट उपाय होना चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के बाद हमें इसके लिए जरूरी ह्यूमन रिसोर्स को बढ़ाने पर काम करना चाहिए।

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