भास्कर एक्सप्लेनर:नवंबर में ही क्यों खराब होती है दिल्ली की हवा, कब तक मिलेगी इससे राहत, जानें सब कुछ

13 दिन पहले

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-NCR की हवा में जहर घुला हुआ है। प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार को फटकार भी लगाई है। इसके उलट अक्टूबर में लोगों ने बहुत अच्छे वातावरण में सांस ली थी। उस वक्त हवा चार साल में सबसे साफ थी।

नवंबर में ऐसा क्या हुआ जो एयर क्वॉलिटी इतनी खराब हो गई? हर साल नवंबर में ही इस तरह के हालात क्यों पैदा होते हैं? क्या दिवाली के पटाखों की वजह से ही ऐसा होता है? क्या पराली भी इसके पीछे की बड़ी वजह है? दिल्ली में प्रदूषण की इतनी खराब स्थिति क्यों है? आइये जानते हैं…

अक्टूबर में क्या हुआ था जो हवा साफ हुई?

पिछले कुछ साल से अक्टूबर के आसपास दिल्ली-NCR की एयर क्वॉलिटी गिरने लगती है। ये वो वक्त होता है जब किसान धान की कटाई के बाद पराली जलाते हैं। खासतौर से दिल्ली से लगते पंजाब-हरियाणा के किसान गेहूं लगाने के लिए खेत पराली जलाकर खेत साफ करते हैं।

इस साल अक्टूबर में हो रही बारिश की वजह से ऐसा नहीं हो सका। इसका असर ये रहा कि दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स औसतन 72 के करीब पहुंच गया। जो पिछले साल इसी समय 125 के आसपास था। हालांकि, अक्टूबर का एयर क्वॉलिटी इंडेक्शन भी सेफ जोन में नहीं था। जो 50 या उससे कम होना चाहिए।

क्यों बढ़ा प्रदूषण?

इसके दो कारण हैं। पहला पंजाब-हरियाणा से आ रही हवाएं जिसमें पराली का धुआं मिला है, जो अक्टूबर की आखिरी में मौसम साफ होने के बाद तेजी से जलाई जाने लगीं। इससे किसान अक्टूबर में बारिश से खराब हुए समय की जल्द से जल्द भरपाई कर सकें। आमतौर पर किसान को पराली जलाने से लेकर गेहूं की बुआई के लिए 20 से 25 दिन मिलता है। अगर देर से बुआई होती है तो उससे फसल का उत्पादन काफी कम हो सकता है। इस बार किसानों को इसके लिए केवल नवंबर के पहले दो हफ्ते मिले। ऐसे में धीरे-धीरे पराली जालाने की जगह एक साथ काफी बड़े इलाकों में पराली जलाई जा रही है। इस वजह से प्रदूषण भी तेजी से बढ़ा।

एयर क्वॉलिटी खराब होने की दूसरी वजह है हवा की गति धीमी होने के चलते स्थानीय प्रदूषक तत्वों का तितर-बितर न हो पाना। दरअसल, नवबंर वो समय होता है जब तापमान तेजी से कम होता है। ऐसे में फसल जलने से एयर क्वॉलिटी बहुत ज्यादा खराब हो जाती है, क्योंकि शुष्क मौसम की वजह से घने कोहरे और धुंध में हवा में फंस जाते हैं। यही समय दिवाली का भी होता है। कुल मिलाकर बदलता मौसम इसमें बड़ा रोल प्ले करता है।

दिल्ली में ही हर साल इस तरह के हालात क्यों पैदा होते हैं?

देश का उत्तरी हिस्से के मैदानी इलाके बाकी राज्यों की तुलना में ज्यादा सूखे और धूलभरे होते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि नई दिल्ली का लुटियन इलाका बहुत हरा भरा है, इसके बाद भी यहां पंजाब-हरियाणा के साथ ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान में होने वाली प्रदूषित हवाएं भी आती हैं, जो प्रदूषण को बढ़ाती हैं। थार के रेगिस्तान से आने वाले धूल के कण दिल्ली में प्रदूषण को और बढ़ाते हैं।

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि शहर के बाहर किसानों को भी टेक्नोलॉजी को एडॉप्ट करना होगा। इससे भी पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

धान की पराली को नष्ट करने वाली मशीनों की खरीद पर 2018 से 80% सब्सिडी दी जा रही है। किसान अगर इन मशीनों का इस्तेमाल करते हैं तो पराली को बिना जलाए नष्ट किया जा सकता है। जागरुकता की कमी और सरकार की ओर से खराब इम्पलीमेंटेशन की वजह से ज्यादातर किसान अभी भी पराली जला रहे हैं।

आने वाले दिनों में क्या एयर क्वॉलिटी और खराब होगी?

पिछले कुछ दिनों के मुकाबले गुरुवार और शुक्रवार को एयर क्वॉलिटी में सुधार होगा। हालांकि, इसके बाद ये बहुत खराब स्तर पर बनी रहेगी। मौसम विभाग के मुताबिक 21 नवंबर तक दिल्ली की एयर क्वॉलिटी बहुत खराब कटैगिरी में बनी रहेगी। 21 नवंबर के बाद इसमें सुधार शुरू होगा। जब तेज हवाएं चलने के आसार हैं। इस वक्त सबसे अहम प्रदूषक pm2.5 है। इसके साथ ही 11 नवंबर के बाद से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने के मामले भी लगातार घट रहे हैं।

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