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भास्कर एक्सप्लेनर:भारत में हावी है कोरोना वायरस की डेल्टा वेव; स्टडी में दावा- वैक्सीन जान बचा सकती है, पर इन्फेक्शन से नहीं

15 दिन पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR की नई स्टडी ने कुछ नए तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट का दावा है कि वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद भी इन्फेक्शन हो रहा है। इसकी वजह कोविड-19 का डेल्टा वैरिएंट है। यानी वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद भी खतरा टला नहीं है।

यह स्टडी बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर, दूसरी लहर के कमजोर पड़ते ही राज्यों में अनलॉक होने लगा है। जनजीवन सामान्य होने लगा है, लेकिन अब हिल स्टेशनों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर दिख रहे हैं। वह भी बिना मास्क के। सोशल डिस्टेंसिंग भी भुला दी गई है। लिहाजा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को सक्रिय होना पड़ा। उन्होंने लोगों को हिदायत दी है कि कोरोना की लहर कमजोर हुई है, खत्म नहीं हुई। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो तीसरी लहर जल्द ही आ जाएगी और हालात बदतर होते चले जाएंगे।

ICMR की स्टडी से यह साबित हुआ है कि वैक्सीन सिर्फ जान बचाएगी, हॉस्पिटल में एडमिट होने से बचाएगी, पर इन्फेक्शन से नहीं। वायरस से संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है। इस विषय पर हमने मुंबई के डॉ. भरेश देढ़िया (हेड क्रिटिकल केयर, पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, खार फेसिलिटी) और डॉ. सुनील जैन (हेड, डिपार्टमेंट ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन, जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर) से जाना कि वैक्सीनेशन के बाद भी सावधानी बरतनी क्यों जरूरी है?

सबसे पहले बात करते हैं, ICMR की स्टडी की

  • इस स्टडी के लिए 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 677 क्लीनिकल सैम्पल जुटाए गए। यह सैम्पल उन लोगों के थे, जो वैक्सीन का एक या दोनों डोज लगवा चुके थे और इसके बाद भी उन्हें इन्फेक्शन हुआ। इस तरह के इन्फेक्शन को ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन कहते हैं।
  • 677 में से 86% केस में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई। 85 मरीज पहले डोज के बाद इन्फेक्ट हुए। वहीं, 592 लोग दूसरे डोज के बाद। अच्छी बात यह रही कि सिर्फ 9.8% केस में मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा और सिर्फ तीन लोगों की मौत हुई।
  • साफ है कि वैक्सीन का एक डोज लगा हो या दोनों डोज, वह आपको मौत से बचा लेगा, पर इन्फेक्शन से नहीं बचा सकेगा। इससे आपके आसपास के लोग, खासकर बच्चों को इन्फेक्ट होने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि उन्हें अब तक वैक्सीन लगनी शुरू नहीं हुई है।

क्या डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कारगर नहीं है?

  • वैक्सीन गंभीर और जानलेवा इन्फेक्शन से बचा लेगी। कोवीशील्ड की कोविड-19 वैरिएंट्स पर ओवरऑल इफेक्टिवनेस 70%-90% है। वहीं, कोवैक्सिन ने भी फेज-3 ट्रायल्स में 78% की इफेक्टिवनेस दिखाई है। स्पुतनिक वी की इफेक्टिवनेस भी 90% रही है। यानी यह साफ है कि गंभीर इन्फेक्शन से वैक्सीन बचा लेगी। पर माइल्ड या एसिम्प्टोमेटिक इन्फेक्शन होने का खतरा बना हुआ है।
  • ICMR की नई स्टडी से साफ है कि डेल्टा वैरिएंट हो या अल्फा-बीटा या कप्पा वैरिएंट, वैक्सीन का असर सीमित है। स्टडी कहती है कि 677 में से सिर्फ तीन लोगों (0.4%) की मौत हुई और 67 लोगों (9.8%) को हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा। साफ है कि वैक्सीन लगने के बाद भी जिन लोगों को इन्फेक्शन हुआ, उनमें दस में से नौ लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी।
  • स्टडी में शामिल सैम्पल्स में SARS-CoV-2 के दो नए डेल्टा वैरिएंट्स AY.1 और AY.2 की पहचान हुई है। डेल्टा AY.1 और AY.2 वैरिएंट्स में स्पाइक प्रोटीन में K417N म्यूटेशन मिला है। यह वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी को चकमा देने में वायरस की मदद करता है। इस तरह वायरस अधिक शक्तिशाली बन चुका है।
  • स्टडी के अनुसार 86.09% केस डेल्टा वैरिएंट (B.1.617.2) की वजह से आए। वहीं, उत्तर भारत में मिले ज्यादातर ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन की वजह अल्फा वैरिएंट बना। भारत के दक्षिण, पश्चिम, पूर्वी और उत्तर-पश्चिम इलाकों में ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन की वजह डेल्टा और फिर कप्पा वैरिएंट रहे हैं।

तो क्या वैक्सीन लगने के बाद भी घर में बैठना है?

  • बिल्कुल नहीं। पर भीड़ वाले इलाकों में तभी जाएं, जब बहुत जरूरी हो। कोशिश करें कि जब भी घर से बाहर निकले तो मास्क जरूर पहनें। भीड़ वाले इलाकों में डबल मास्क ही आपको इन्फेक्शन से बचाने में कारगर है।
  • अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक वैक्सीन के दोनों डोज लगवा चुके लोग रोजमर्रा की गतिविधियों में बिना मास्क शामिल हो सकते हैं, पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते मामलों के बाद मास्क पहनने की सलाह जारी की है। इसके बाद ही 19 जुलाई से अनलॉक हो रहे ब्रिटेन में भी वैक्सीनेटेड लोगों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • भारत में वायरस के नए वैरिएंट्स पर नजर रख रहे इंसाकॉग (INSACOG) की हालिया रिपोर्ट कहती है कि 9 जुलाई तक देश में एक्टिव केस में कम से कम 88% केस डेल्टा वैरिएंट्स के हैं। यानी भारत में इस समय सामने आ रहे हर दस में से करीब नौ केस के लिए डेल्टा वैरिएंट जिम्मेदार है। ICMR की नई स्टडी के बाद यह साफ है कि डेल्टा वैरिएंट से इन्फेक्शन बचाने में वैक्सीन भी बहुत असरदार नहीं है।

आप किस तरह की गतिविधियों में भाग ले सकते हैं?

  • कोई पाबंदी नहीं है। आप पूरी तरह से वैक्सीनेट हो गए हैं तो आपको रिस्क बहुत कम रह जाएगा। पहला डोज कुछ हद तक प्रोटेक्शन देता है, पर दूसरा डोज आपकी इम्यूनिटी को कई गुना बढ़ा देता है। यह आपको कोरोना वायरस के गंभीर इन्फेक्शन से काफी हद तक प्रोटेक्शन देता है।

तीसरी लहर से बचने के लिए क्या करना जरूरी है?

  • तीसरी लहर तो आनी ही है, पर उसका स्वरूप क्या होगा, इसे हम तय कर सकते हैं। जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई है, उन्हें जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराना चाहिए। मास्क पहनने की आदत को कायम रखना होगा। हाइजिन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। इससे ही हम तीसरी लहर को कम प्रभावी रख सकेंगे।
  • यदि हम ऐसा करने में कामयाब रहते हैं तो 1918 के स्पेनिश फ्लू की ही तरह दूसरी लहर के मुकाबले तीसरी लहर कमजोर रहेगी। इस तरह महामारी गायब हो जाएगी। कोविड-19 इसके बाद फ्लू जैसा इन्फेक्शन बनकर रह जाएगा। सालाना कोविड वैक्सीन बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है।
  • इसके अलावा जिन मरीजों को कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियां हैं, उन्हें जरा-भी लापरवाही नहीं दिखाना है। इस तरह के लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। इस वजह से उन्हें गंभीर इन्फेक्शन या मौत का खतरा वैक्सीन लेने के बाद भी कायम है। वैक्सीन लगवाने के बाद भी उन्हें पूरी तरह सुरक्षा नहीं मिली है।
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