भास्कर एक्सप्लेनर:क्या आरक्षण के लिए 70 हजार महीना कमाने वाला गरीब है? NEET काउंसलिंग में फंसा पेंच, जानिए पूरा मामला

एक वर्ष पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

NEET-PG काउंसलिंग के स्थगित रहने को लेकर पिछले कई दिनों से हजारों डॉक्टर हड़ताल पर हैं। नीट-पीजी की काउंसलिंग आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर स्थगित है। इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत ने आखिरी बार 25 नवंबर को सुनवाई की थी और अब इस पर अगली सुनवाई 6 जनवरी को होनी है। हड़ताली डॉक्टर अपने कोर्स में हो रही देरी का हवाला देते हुए NEET-PG की काउंसलिंग जल्द से जल्द शुरू किए जाने की मांग कर रहे हैं।

चलिए समझते हैं कि क्या है NEET-PG काउंसलिंग को लेकर जारी विवाद? क्या है इसमें EWS कैटेगरी के लिए आरक्षण को लेकर विवाद? क्यों हड़ताल कर रहे हैं डॉक्टर?

NEET-PG काउंसलिंग क्यों है स्थगित?

देश भर के पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन के लिए नेशनल एलिजिबिटी कम एंट्रेस टेस्ट (NEET-PG) की काउंसलिंग का मामला सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई में फंसने की वजह से स्थगित है।

  • NEET-PG 2021 (ऑल इंडिया कोट) में OBC को 27% और आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) वर्ग को 10% आरक्षण दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई की वजह से महीनों से स्थगित है।
  • केंद्र सरकार ने 29 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन के लिए NEET (ऑल इंडिया कोटा) के तहत मेडिकल सीट्स पर ओबीसी के लिए 27% और EWS कैटेगरी के लिए 10% आरक्षण की घोषणा की थी। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुई थीं।
  • इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आखिरी बार 25 नवंबर को सुनवाई हुई थी। तब केंद्र ने कोर्ट से EWS कैटेगरी को आरक्षण देने के लिए सालाना 8 लाख रुपये इनकम (करीब 70 हजार रुपये महीना) के क्राइटेरिया पर पुनर्विचार करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि ओबीसी के क्रीमी लेयर के लिए तय 8 लाख रुपये सालाना आय की लिमिट और EWS कैटेगरी के आरक्षण के लिए भी सालाना आय (8 लाख) की लिमिट एक जैसी नहीं होनी चाहिए।
  • मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की वजह से अंडरग्रैजुएट और पोस्टग्रैजुएट दोनों कोर्सेज के लिए NEET की काउंसलिंग अटकी हुई है।
  • मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए हर राज्य की 85% सीटों पर फैसला वहां की सरकार करती है, जबकि बाकी 15% सीटों पर ही फैसला केंद्र के पास रहता है। इन्हीं 15% सीटों पर केंद्र द्वारा घोषित EWS आरक्षण लागू होना है, जिस पर फैसला न हो पाने की वजह से ही काउंसलिंग रुकी हुई है।
  • हालांकि कई राज्यों-गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम और आंध्र प्रदेश ने अपने हिस्से की 85% अंडरग्रैजुएट सीटों पर काउंसलिंग शुरू कर दी है। लेकिन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों में अभी काउंसलिंग रुकी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में क्या कहा था?

इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र से पूछा था कि वह समझाए कि उसने किस आधार पर NEET के तहत मेडिल सीटों पर आर्थिक रूप से पिछड़ों (EWS) को आरक्षण के लिए सालाना 8 लाख रुपये इनकम का क्राइटेरिया तय किया है।

कोर्ट ने कहा था, ''आप 8 लाख को बस ऐसे ही कहीं से भी नहीं ले सकते हैं। इसके लिए अवश्य ही कुछ डेटा होना चाहिए। सामाजिक, जनसंख्या पर आधारित।''

कोर्ट ने सरकार से कहा कि ओबीसी कोटा (क्रीमी लेयर) के लिए भी 8 लाख रुपये की ही लिमिट है। ऐसे में आप EWS कैटेगरी के लिए भी 8 लाख रुपये (करीब 70 हजार/महीना) की ही लिमिट कैसे रख सकते हैं। अगर सरकार ऐसा करती है तो वह ''असमान को समान बना रही है।''

कोर्ट ने कहा कि ओबीसी कोटा के तहत आने वाले लोग सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हैं, लेकिन संवैधानिक योजना के तहत EWS कैटेगरी के लोग सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े नहीं हैं, ऐसे में दोनों के लिए एक समाना सालाना आय की लिमिट कैसे रखी जा सकती है।

EWS आरक्षण को लेकर सरकार के तर्क

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि नीट के ऑल इंडिया कोटा में आर्थिक रूप से पिछड़ों (EWS) की कैटेगरी के लिए उसका सालाना 8 लाख इनकम तय करने का फैसला मनमानी नहीं है बल्कि कई राज्यों में विविध आर्थिक कारकों पर विचार करने के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया है।

सॉलिसिटिर जनरल तुषार मेहता ने नवंबर में हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि हमें EWS कैटेगरी के लिए तय 8 लाख इनकम की लिमिट पर फिर से विचार करने का निर्देश मिला है। हम इस पर विचार करके चार हफ्तों में जबाब देंगे। सरकार ने कहा था कि EWS कैटेगरी की इनकम लिमिट तय होने तक NEET-PG की काउंसलिंग नहीं होगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार EWS कैटेगरी के लिए सालाना इनकम लिमिट को 8 से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर सकती है।

क्या है EWS कैटेगरी और उसकी इनकम लिमिट?

जनवरी 2019 में मोदी सरकार ने देश में आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) वर्ग के लोगों के लिए भी सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के लिए कानून बनाया था।

  • EWS आरक्षण में ऐसे लोग आते हैं, जिनके परिवार की सालाना इनकम 8 लाख रुपये से कम है। इन लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 10% फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।
  • केंद्र ने संविधान के 103वें संशोधन के तहत आर्टिकल 15(6) और 16(6) में संशोधन के जरिए EWS कैटेगरी के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था की थी।
  • EWS कैटेगरी में वे लोग आते हैं, जो पहले से ही लागू SC/ST/OBC कैटेगरी में से किसी में शामिल नहीं हैं। EWS आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति है।
  • EWS आरक्षण में किसी भी धर्म के सामान्य वर्ग का व्यक्ति शामिल हो सकता है, बशर्ते उसके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम हो।
  • EWS कैटेगरी के लिए आरक्षण SC/ST/OBC श्रेणियों के लिए मौजूदा 50% आरक्षण के अतिरिक्त होगा।
  • कई बार EWS आरक्षण को सवर्णों या सामान्य जातियों के लिए आरक्षण भी कहा जाता है।

क्या होता है क्रीमी लेयर?

पिछड़े वर्ग (OBC) के ऐसे लोग जो इकोनॉमिक, सोशल और एजूकेशन के मामलें में काफी एडवांस है, उन्हें 'क्रीमी लेयर' कहा जाता है। क्रीमी लेयर में आने वाले लोगों को आरक्षण की सुविधा नहीं मिलती है। 1993 से क्रीमी लेयर को तय करने के लिए सालाना इनकम को आधार बना दिया गया है। 1993 में 1 लाख रुपए सालाना, 2004 में 2.5 लाख रुपए, 2008 में 4.5 लाख रुपए, 2013 में 6 लाख रुपए और 2017 में 8 लाख रुपए सालाना इनकम वालों को 'क्रीमी लेयर' के अंतर्गत माना गया है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ओबीसी कल्याण के लिए लड़ने वाले एक्टिविस्ट जल्द से जल्द ओबीसी क्रीमी लेयर की सालाना इनकम की लिमिट को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

क्यों हड़ताल पर हैं हजारों डॉक्टर?

NEET-PG 2021 का रिजल्ट सितंबर में ही घोषित किए जाने के बावजूद अब तक काउंसलिंग शुरू नहीं किए जाने को लेकर हजारों डॉक्टर हड़ताल पर है। NEET-PG की काउंसलिंग 24-29 अक्टूबर के दौरान होनी थी, लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने की वजह से काउंसलिंग फिलहाल स्थगित है।

काउंसलिंग नहीं शुरू होने से ही देश भर के मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टरों में नाराजगी हैं और उन्होंने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी है। दिल्ली में तो पिछले 12 दिनों से इसी मुद्दे को लेकर हजारों डॉक्टर हड़ताल पर हैं और कई बड़े सरकारी अस्पतालों की ओपीडी ठप पड़ गई है। वहीं कुछ छात्र NEET की ऑल इंडिया कोटा की सीटों पर EWS कैटेगरी को आरक्षण दिए जाने को लेकर भी विरोध जता रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि NEET-PG की परीक्षा में पहले नौ महीने की देरी और अब रिजल्ट आने के बावजूद काउंसलिंग नहीं होने से मेडिकल स्टूडेंट की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इससे अस्पतालों को नए डॉक्टर नहीं मिल पा रहे और जूनियर डॉक्टरों की कमी से मौजूदा डॉक्टरों पर काम का बोझ काफी बढ़ गया है।

देश भर के 50 हजार से ज्यादा NEET पास करने वाले छात्र अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनकी काउंसलिंग शुरू हो सके। सुप्रीम कोर्ट NEET-PG काउंसलिंग में जारी आरक्षण के विवाद के मुद्दे पर 06 जनवरी 2022 को सुनवाई करेगा।