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भास्कर एक्सप्लेनर:बढ़ते केसेज के लिए कोरोनावायरस में डबल म्यूटेशन वाला वैरिएंट जिम्मेदार; 10 से ज्यादा राज्यों में सक्रिय

2 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

देश में कोरोनावायरस ने खतरनाक रूप ले लिया है। एक दिन में कोरोना के नए केसेस ने 2.33 लाख का आंकड़ा पार कर लिया है। पहली लहर में तो 97 हजार केस पर ही पीक आ गया था, पर इस बार दूसरी लहर करीब सवा दो गुना अधिक पर पहुंच चुकी है। दूसरा पीक तो अब भी आया नहीं है। वैज्ञानिकों और महामारी विशेषज्ञों में इस बात की चर्चा चल पड़ी है कि ऐसा क्यों हो रहा है? कहीं बाहर से आए वैरिएंट्स और भारत में मिला डबल म्यूटेंट वैरिएंट तो इसके लिए दोषी नहीं है?

रिपोर्ट्स के अनुसार डबल म्यूटेंट वैरिएंट्स तेजी से फैल रहा है। महाराष्ट्र के 61% सैम्पल्स की जीनोम सीक्वेंसिंग में डबल म्यूटेंट वायरस होने की पुष्टि हुई है। केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि यह डबल म्यूटेंट वायरस महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड होता हुआ करीब 10 राज्यों में पहुंच चुका है, जहां पिछले कुछ समय से पॉजिटिव केस तेजी से बढ़े हैं।

महाराष्ट्र की बात करें तो इस साल जनवरी से मार्च के बीच पॉजिटिव आए पेशेंट्स के 361 सैम्पल लिए गए। इसकी जीनोम-सीक्वेंसिंग की गई। 220 में यानी 61% सैम्पल्स में डबल म्यूटेंट वैरिएंट की मौजूदगी मिली है।

इस वैरिएंट्स को डबल म्यूटेंट क्यों कहा जा रहा है?

  • देश की ख्यात वैक्सीन साइंटिस्ट और वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कंग कहती हैं कि इसे समझना इतना भी मुश्किल नहीं है। वायरस एक शरीर से दूसरे शरीर में जाता है तो उसमें बदलाव होते हैं। यह स्पेलिंग मिस्टेक्स की तरह है। VIRUS को VIURS लिखने जैसा। इन्हें ही वैज्ञानिक उस वायरस का वैरिएंट्स कहते हैं।
  • कोरोनावायरस यानी SARS-CoV-2 के नए वैरिएंट को उसमें हुए दो म्यूटेशंस ( E484Q और L452R) की वजह से डबल म्यूटेंट वैरिएंट कहा जा रहा है। वैज्ञानिकों ने इसे B.1.617 नाम दिया है। इस डबल म्यूटेंट वैरिएंट में वायरस में दो जगह बदलाव हुए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि यह दोनों ही बदलाव नए नहीं हैं। बल्कि अलग-अलग वैरिएंट्स में हम अलग-अलग देशों में इनका अलग-अलग असर देख रहे हैं। दोनों ही बदलाव वायरस के स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं।

क्यों खतरनाक है डबल म्यूटेंट वायरस?

  • वैज्ञानिकों की मानें तो डबल म्यूटेंट वैरिएंट में हुआ E484Q म्यूटेशन E484K म्यूटेशन जैसा है। यह यूके (लाइनेज B.1.1.7) और दक्षिण अफ्रीकी (B.1.351) में मिले वैरिएंट्स में भी देखा गया था। इसी तरह L452R म्यूटेशन कैलिफोर्निया में तेजी से फैले वैरिएंट्स (B.1.427 और B.1.429) में दिखा था।
  • यह दोनों ही बदलाव वायरस की इंसानी कोशिकाओं को इन्फेक्ट करने की ताकत बढ़ाते हैं। इससे इसकी ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ती है। साथ ही वायरस की संख्या तेजी से बढ़ाने में भी मददगार है। सीधे शब्दों में यह दोनों ही बदलाव वायरस के ऐसे हिस्से में हुए हैं, जो ट्रांसमिशन और एंटीबॉडी से बचने की इसकी ताकत बढ़ाते हैं।

यह डबल म्यूटेंट वैरिएंट्स मिले कहां हैं?

  • शुरुआत महाराष्ट्र से हुई। मार्च में केंद्र सरकार ने कहा कि महाराष्ट्र से लिए सैम्पल्स में 20% केसेस में डबल म्यूटेंट वैरिएंट मिला है। पर नए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जीनोम स्टडी के लिए की गई सीक्वेंसिंग से पता चला कि 61% केसेस में डबल म्यूटेंट वैरिएंट मिला है। केंद्र सरकार के सूत्र बता रहे हैं कि दिल्ली, पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों में भी यह वैरिएंट सक्रिय है।
  • अब तक महाराष्ट्र के अमरावती, नागपुर, अकोला, वर्धा, पुणे, ठाणे, औरंगाबाद और चंद्रपुर जिलों में यह घातक वैरिएंट मिला है। अन्य जिलों से ज्यादा सैम्पल नहीं लिए गए हैं और उनकी सीक्वेंसिंग हुई नहीं है। यह देखते हुए और भी जिलों में यह फैला हो सकता है। दुनिया की बात करें तो अमेरिका, यूके, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में भी यह डबल म्यूटेंट वैरिएंट मिला है।

क्या यह वैरिएंट ज्यादा घातक है?

  • इस बात के ज्यादा सबूत नहीं हैं। ज्यादातर मरीज घरों में ही रहकर इलाज करा रहे हैं। पब्लिक हेल्थ पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ. चंद्रकांत लहारिया का कहना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग बढ़ाने पर ही पता चलेगा कि नए वैरिएंट्स चिंता का कारण हैं या नहीं। वैसे, जब वायरस ज्यादा फैलता है तो उसके तुलनात्मक रूप से कमजोर वैरिएंट्स बनते हैं। यह फैलता तो तेजी से है पर उसका जानलेवा असर कम होने लगता है। यह नेचुरल प्रोसेस है। कुछ दिनों में अगर कोरोना वायरस भी आम सर्दी-खांसी के वायरस जैसा हो जाए, तो इस पर आश्चर्य नहीं होगा।
  • डॉक्टरों का कहना है कि नए वैरिएंट्स अक्सर शरीर के इम्यून सिस्टम को चकमा देने में कामयाब हो जाते हैं। शरीर में जाते हैं और अपनी संख्या बढ़ाते हैं। अब तक यह नहीं पता कि कोरोना वायरस इंफेक्शन के इलाज में इस्तेमाल हो रही दवाओं और दोनों वैक्सीन इन वैरिएंट्स पर असरदार हैं या नहीं। भारत में अब तक 10 हजार सैम्पल्स की ही स्टडी हो सकी है। यह कुल केस का 1% भी नहीं है।

क्या महाराष्ट्र में तेजी से केसेस बढ़ने की वजह यह है?

  • हां। डॉक्टरों का तो ऐसा ही कहना है। मुंबई में पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, खार फेसिलिटी के क्रिटिकल केयर हेड डॉ. भरेश डेढ़िया का कहना है कि डबल म्यूटेंट वैरिएंट ज्यादा संक्रामक है। इसमें इम्यूनिटी से बच निकलने की क्षमता है। हो सकता है कि इसी वजह से यह ज्यादा गंभीर रोगियों, वैक्सीनेटेड लोगों में इन्फेक्शन और अन्य में रीइन्फेक्शन का कारण बन रहा है। यह युवाओं को भी बीमार कर रहा है, जिनकी वजह से यह तेजी से फैल रहा है।
  • महाराष्ट्र में डॉक्टर कह रहे हैं कि पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में परिवार के परिवार इन्फेक्ट हो रहे हैं। यह संकेत देता है कि फिजिकल डिस्टेंसिंग और आइसोलेशन घरों में कम पड़ रहे हैं या वायरस ज्यादा ट्रांसमिसिबल हो गया है।
  • वहीं, नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) के डायरेक्टर डॉ. सुजीत सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा कि महाराष्ट्र से अब तक काफी कम सैम्पल्स लिए गए हैं। यह नहीं कह सकते कि डबल म्यूटेंट ही महाराष्ट्र में बढ़ते केस का कारण है। डॉ. कंग का कहना है कि 61% सैम्पल्स में अगर यह वैरिएंट है तो निश्चित तौर पर यह बढ़े हुए नंबरों का लिंक हो सकता है। पर सटीक जवाब चाहिए तो 1% सैम्पल्स की सीक्वेंसिंग हर हफ्ते करनी होगी। जनवरी का डेटा अप्रैल में कोई काम का नहीं है। लाइव ट्रैकिंग जरूरी है।

क्या यह नया वैरिएंट्स वैक्सीन से बच सकता है?

  • पता नहीं। इस संबंध में डेटा है ही नहीं। कुछ लोग पहला डोज लेने के बाद इन्फेक्ट हो गए। कुछ दो डोज लेने के एक महीने बाद। यह नहीं पता कि उनके सैम्पल्स की जीनोम सीक्वेंसिंग की गई या नहीं। वैज्ञानिक यह साबित कर चुके हैं कि दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट इम्यून रिस्पॉन्स से बच निकलता है। वहीं, यह भी पता है कि यूके का वैरिएंट तेजी से फैलता है। पर वैज्ञानिकों को यह नहीं पता कि B.1.617 किस तरह का व्यवहार दिखाता है। इस संबंध में और डेटा जुटाया जाएगा, तभी कोई कुछ कहने की स्थिति में होगा।

क्या यह हमारी इम्युनिटी के लिए खतरा है?

  • हां। कुछ हद तो है। इस तथ्य को साबित करने के लिए आंकड़े उपलब्ध नहीं है। और रिसर्च करने की जरूरत है। पर जिस तरह से वैक्सीन डोज के बाद भी इन्फेक्शन हो रहे हैं, रीइन्फेक्शन के केस सामने आ रहे हैं, यह साफ है कि यह वैरिएंट्स कहीं न कहीं शरीर में मौजूद एंटीबॉडी को चकमा दे रहा है। हेल्थ मिनिस्ट्री ने भी कहा है कि नया वैरिएंट इन्फेक्शन रेट्स को बढ़ा सकता है और इम्यून डिफेंस को चकमा दे सकता है। इस तरह के म्युटेशन अक्सर शरीर के इम्यून रिस्पॉन्स को चकमा देने में कामयाब हो जाते हैं और एंटीबॉडी को बेअसर कर देते हैं।
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