कांग्रेस के महिला कार्ड पर सवाल:UP में कुछ खोने को नहीं तो 40% को टिकट, पर पंजाब में अलग फॉर्मूला; आंकड़ों से समझिए खेल

नीरज सिंह4 महीने पहले

देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले आधी आबादी का वोट पाने के लिए सभी पार्टियों उन्हें साधने में जुट गई हैं, लेकिन जब टिकट देने की बात आती है तो ये पार्टियां जिताऊ उम्मीदवार का बहाना देने लगती हैं। यूपी जैसे सूबे में जहां कांग्रेस अपना वजूद पाने के लिए संघर्ष कर रही है वहां पर वह महिलाओं की खूब बात कर रही है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने काफी एग्रेसिव तरीके से ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा देते हुए 40% महिलाओं को टिकट देने की बात की है।

वहीं दूसरी तरफ बात पंजाब की बात करें, तो यहां आधी आबादी का हक पीछे छूट जाता है। पंजाब में कांग्रेस ने पहली सूची में 86 उम्मीदवारों की घोषणा की है। इसमें महिलाएं सिर्फ 9 हैं यानी महज 10 फीसदी।

ऐसे में एक बार फिर महिलाओं की राजनीति में ज्यादा भागीदारी की बात छलावा ही साबित हो रही है। आइए जानते हैं कि पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस यूपी में ज्यादा महिलाओं को टिकट देने की बात तो कर रही है, लेकिन पंजाब जैसे राज्य में कम टिकट क्यों दे रही है...।

कांग्रेस का यूपी में ज्यादा तो पंजाब में महिलाओं पर भरोसा कम क्यों

कांग्रेस पंजाब में सत्ता में है, वहीं यूपी में वह चौथे नंबर पर है। इसके साथ ही पंजाब में कांग्रेस की एक बार फिर चुनाव जीतने की संभावना है, जबकि यूपी में वह तीसरे नंबर के लिए ही संघर्ष कर रही है। इससे साफ समझ में आता है कि यूपी में उसके सत्ता में आने की संभावना न के बराबर है। वहां तो वह महिलाओं पर ज्यादा दांव लगा रही है, लेकिन पंजाब में वह महिलाओं पर दांव लगाने के मूड में नहीं दिख रही है।

प्रियंका का ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ अभियान

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की पार्टी प्रभारी प्रियंका गांधी ने कुछ महीने पहले ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ अभियान की शुरुआत करते हुए घोषणा की थी कि विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिए जाएंगे, लेकिन अन्य चार राज्यों में इस अभियान को लेकर कांग्रेस में ही कोई हलचल नहीं है। ऐसे में यह अभियान महिला सशक्तिकरण के बजाय विशुद्ध रूप से राजनीति से प्रेरित दिखाई देता है।

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