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भास्कर एक्सप्लेनर:महामारी एक्सपर्ट से समझिए कोरोना की दूसरी लहर; यह तो होना ही था, हम ही तैयारियों में पीछे रह गए

10 दिन पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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कोरोना की भयावह होती दूसरी लहर ने सारे रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं। भारत में पहली बार 24 घंटे में साढ़े तीन लाख से ज्यादा नए केस सामने आए हैं। यह दुनिया में किसी भी लहर में किसी भी देश में आए केसेज के लिहाज से सबसे ज्यादा हैं। अमेरिका और ब्राजील को पीछे छोड़कर हम नए केसेज के मामले में दुनिया में सबसे आगे हो गए हैं। एक्टिव केस भी बढ़ते जा रहे हैं। दूसरी लहर क्यों आई? यह कैसे थमेगी? इससे जुड़े प्रश्नों को लेकर हमने देश के जाने-माने पब्लिक हेल्थ पॉलिसी एक्सपर्ट और महामारी विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया से बातचीत की। आइए, उनके ही शब्दों में समझते हैं कि दूसरी लहर क्या है और यह क्यों इतनी घातक होती जा रही है…

Q. कोरोना की सेकेंड वेव इतनी तेज होने के कारण क्या हैं?

दूसरी लहर को समझने के लिए हमें महामारी विज्ञान को समझना होगा। महामारी में एक से ज्यादा लहर आना सामान्य बात है। हमने यह 1918 में स्पैनिश फ्लू के समय भी देखा। उस समय भी हमारे यहां दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक साबित हुई थी। कोविड-19 को लेकर अलग-अलग देशों में भी हमने यह ही देखा है।

लहर को लेकर हम महामारी विज्ञान में तीन बातों को देखते हैं- एजेंट (वायरस), होस्ट (इंसान) और एनवायरनमेंट (पर्यावरण या परिवेश)। इसी पर यह लहर तय होती है। इसे हम बारी-बारी से समझते हैं...

1. पहले बात करते हैं एजेंट यानी वायरस की। विदेशों में हमने कोरोना वायरस के डबल म्यूटेंट और अब तो ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट भी देखे हैं। भारत में बड़े पैमाने पर वायरस की जीनोम स्टडी नहीं हुई है, पर फिर भी हम इसे दूसरी लहर का आधार मान सकते हैं। अब वायरस ज्यादा संक्रामक हो चुका है। शरीर में पहले से बनी इम्युनिटी को भी चकमा देने में कामयाब हो रहा है।

2. दूसरी बात होस्ट यानी इंसानों की। पहली लहर के समय लोग ज्यादा सावधान थे। घरों में ही कैद थे। उनके व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। नतीजे भी बदले हैं। मुंबई में पहली लहर में संक्रमण झुग्गी-बस्तियों के मुकाबले ऊंचे तबके में बराबरी से था। इस बार ज्यादातर केस हाईराइज से आए हैं। साफ है कि लोगों ने मान लिया था कि वायरस खत्म हो गया है और उनकी यह लापरवाही ही उन पर भारी पड़ी है। जनवरी में नेशनल सर्वे किया गया तो नतीजे मिले कि 10% लोगों में ही एंटीबॉडी हैं। यानी 90% लोग ऐसे थे, जिन्हें कोरोना का खतरा था। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने से लोग प्रभावित हुए।

3. तीसरी बात आती है एनवायरमेंट यानी पर्यावरण या परिवेश की। सरकार कहती रही कि कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करें। पर जो ऐसा बोल रहे थे, उन्होंने ही इसका पालन नहीं किया। कथनी और करनी में अंतर दिखा तो लोगों का भी भरोसा टूटा। कुंभ मेला या चुनावी रैलियों में हमने यह देखा भी।

इस तरह दूसरी लहर के लिए तीनों ही फेक्टर की भागीदारी साफ दिख रही है। हमेशा महामारियों में इन तीनों फैक्टर्स का आपसी संबंध लहर तय करता है। जब हमने देखा कि कई देशों में पिछले साल ही दो-तीन लहर आ चुकी थी, तब हम सोचने लगे थे कि यह महामारी जा चुकी है। यह हमारी चूक थी। उस समय प्रयास किए जाते तो दूसरी लहर के प्रभाव को कम किया जा सकता था। यह दूसरी लहर आना तो निश्चित ही था।

Q. सेकेंड वेव का यह दौर कब तक रहेगा और यह उतरेगा कैसे?

आज जो हालात हम देख रहे हैं, वह 14 दिन पुराने केसेज का नतीजा है। इस दौरान वायरस शरीर में जाकर इनक्युबेशन में रहा। होली या चुनावी रैलियों में बड़े इवेंट्स हुए और इसके बाद ही संक्रमण फैला। यह कहना बेहद मुश्किल है कि पीक कब आएगा। ये इस बात से तय होगा कि लोगों का व्यवहार क्या और आगे कैसा रहता है। बढ़े हुए इन्फेक्शन को देखते हुए 4 से 6 हफ्ते में गिरावट दिख सकती है। यह भी देखना होगा कि क्या संक्रमण नए क्षेत्र में फैल रहा है। पीक आने के बाद नंबर गिरने लगेंगे। पर इसका मतलब यह नहीं है कि फरवरी की तरह एकाएक 10 हजार केस तक पहुंच जाएंगे। 6 हफ्ते में लोगों का व्यवहार तय करेगा कि वायरस आगे क्या असर दिखाता है।

Q. इससे बचने के तरीके क्या हैं?

अच्छी बात यह है कि वायरस अब एक साल पुराना हो गया है। एक साल पहले के मुकाबले हम इसके बारे में बहुत कुछ जानकारी रखते हैं। इससे बचने के लिए 5 बुनियादी बातों पर फोकस करना होगा...

  • पिछली लहर के मुकाबले इस बार वायरस ज्यादा ताकतवर हो गया है। एक सदस्य को इंफेक्शन होता है तो अन्य परिजनों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है। कोविड-19 से बचने के लिए बताए गए व्यवहार का पालन करें। हाथों को धोएं, मास्क पहनें और बाहर निकलने पर सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखें।
  • भले ही आपके इलाके में लॉकडाउन लगा हो या न लगा हो, बाहरी गतिविधियों को सीमित रखें। जरूरी न हो तो घर से बिल्कुल न निकलें। कोशिश करें कि भीड़ से अलग-थलग रहें।
  • कोई भी लक्षण आने पर जांच कराएं। जितनी जल्दी जांच कराएंगे, उतनी ही जल्दी इस वायरस को खत्म कर सकेंगे। इस दौरान खुद को आइसोलेट कर लें। इससे आपके परिजनों तक वायरस के पहुंचने की आशंका काफी कम हो जाएगी।
  • अगर आप वैक्सीन लगाने के पात्र हैं, तो वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह आपको वैक्सीन के गंभीर लक्षणों से सुरक्षित रखेगी।
  • हम देख चुके हैं कि कोरोना ने अच्छे-अच्छे देशों के हेल्थ सिस्टम को घुटने पर ला दिया है। ऐसे में न केवल खुद को न्यू नॉर्मल में ढालना है, बल्कि आसपास के लोगों को भी सावधानी बरतने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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