भास्कर एक्सप्लेनर:क्या है FATF जिससे डरा पाकिस्तान, जानिए कैसे ब्लैक लिस्ट होने पर एक-एक पैसे को मोहताज होगी इमरान सरकार

एक वर्ष पहलेलेखक: नीरज सिंह

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की प्लेनरी सेशन की मीटिंग 21 फरवरी, यानी आज से शुरू होनी है। इस दौरान भारत समेत दुनियाभर की नजर पाकिस्तान के ब्लैक लिस्ट होने पर रहेगी। पाकिस्तान अभी FATF की ग्रे लिस्ट में है।

पाकिस्तान पर UN से घोषित आतंकियों पर कार्रवाई नहीं करने और टेरर फंडिंग का आरोप है। FATF की ओर से ब्लैक लिस्ट होने पर पाकिस्तान एक-एक पैसे का मोहताज हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान को किसी भी फाइनेंशियल बॉडी से आर्थिक मदद नहीं मिलेगी। इससे उसकी अर्थव्यवस्था तबाही के कगार पर पहुंच सकती है।

ऐसे में आइए जानते हैं कि FATF है क्या? ग्रे लिस्ट क्या है जिसमें पाकिस्तान शामिल है? साथ ही ब्लैक लिस्ट होने पर पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा?

सवाल 1 : क्या है FATF और कितने देश जुड़े हैं?

  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स, यानी FATF एक इंटरगवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन है। इसे G7 देशों की पहल पर 1989 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में बनाया गया था।
  • इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग, सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और टेरर फंडिंग पर निगाह रखना है।
  • इसके कुल 39 सदस्य देश और क्षेत्रीय संगठन हैं। सदस्य देशों में भारत, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और चीन भी शामिल हैं।
  • 2006 में भारत आब्जर्वर के रूप में FATF में शामिल हुआ। इसके बाद से यह पूर्ण सदस्यता की दिशा में काम कर रहा था। 25 जून 2010 को भारत को FATF के 34वें सदस्य देश के रूप में शामिल किया गया।

सवाल 2 : कैसे काम करता है FATF?

  • FATF मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्‍था है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो यह आतंकियों को पालने-पोसने के लिए पैसा मुहैया कराने वालों पर नजर रखने वाली एजेंसी है।
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाए रखना इस एजेंसी का मकसद है। यह अपने सदस्य देशों को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्र‍िंग जैसी गतिविधियों में शामिल होने से रोकता है।
  • अमेरिका में 9/11 के आतंकी हमलों के बाद टेरर फंडिंग से निपटने में FATF की भूमिका प्रमुख हो गई। 2001 में इसने अपनी नीतियों में टेरर फंडिंग को भी शामिल किया। टेरर फंडिंग में आतंकियों को पैसा या फाइनेंशियल सपोर्ट पहुंचाना शामिल है।
  • FATF के निर्णय लेने वाले निकाय को FATF प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है।
  • FATF अपनी सिफारिशों को लागू करने में देशों की प्रगति की निगरानी करता है।

सवाल 3 : FATF टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर कैसे कार्रवाई करता है?

  • FATF के अनुसार, जब किसी देश को निगरानी सूची में रखा जाता है तो इसका मतलब है कि वह देश तय समय सीमा के भीतर पहचानी गई कमियों को तेजी से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही वह देश अतिरिक्त जांच के दायरे में है।
  • FATF में टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दो तरह की कार्रवाई करता है। पहले के तहत वह देशों को ग्रे लिस्ट में डालता है। साथ ही कोई कार्रवाई नहीं कर पाने पर उस देश को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है।

1. ग्रे लिस्ट :

  • ग्रे लिस्ट में शामिल देश वो होते हैं जहां टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। हालांकि, ये देश इसे रोकने के लिए FATF के साथ मिलकर काम करने को तैयार होते हैं।
  • FATF से जुड़ी एजेंसी एशिया पैसिफिक ग्रुप यानी APG इस मामले में एशिया से संबंधित देश पर नजर रखती है।
  • APG यह पता लगाती है कि ये देश आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को खत्म करने को लेकर कितने गंभीर हैं। अगर कोई देश इसे रोकने में नाकाम रहता है तो उसे ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी दी जाती है।
  • APG की तरह ही यूरोप, दक्षिण अमेरिका और दूसरे क्षेत्रों में FATF से जुड़ी एजेंसियां हैं।

ग्रे लिस्ट में रहने पर कितना नुकसान : ग्रे लिस्ट वाले देशों को किसी भी इंटरनेशनल मॉनेटरी बॉडी यानी IMF, ADB, वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेने के पहले बेहद सख्त शर्तों को पूरा करना पड़ता है। ज्यादातर संस्थाएं कर्ज देने में आनाकानी करती हैं। ट्रेड में भी दिक्कत होती है।

2. ब्लैक लिस्ट :

  • जहां ग्रे लिस्ट में शामिल देश FATF के साथ मिलकर काम करने को इच्छुक होते हैं। वहीं ब्लैक लिस्ट में उन देशों को डाला जाता है जो यह साबित करने की कोशिश नहीं करते हैं कि उन पर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप बेबुनियाद हैं।
  • ये देश टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों का समर्थन करते हैं। साथ ही ये देश इन आरोपों से बाहर निकलने की भी कोशिश नहीं करते हैं।
  • FATF ने 2019 में टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का सपोर्ट करने पर ईरान और नार्थ कोरिया को ब्लैक लिस्ट कर दिया था।
  • हालांकि, FATF समय-समय पर ब्लैक लिस्ट को रिवाइज करता है और इसमें कई नामों को हटाता और जोड़ता है।

ब्लैक लिस्ट में आने का नुकसान : IMF, ADB, वर्ल्ड बैंक या कोई भी फाइनेंशियल बॉडी आर्थिक मदद नहीं देती। मल्टी नेशनल कंपनियां कारोबार समेट लेती हैं। रेटिंग एजेंसीज निगेटिव लिस्ट में डाल देती हैं। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था तबाही के कगार पर पहुंच जाती है।

सवाल 4 : पाकिस्तान FATF की बैठक से इतना क्यों घबरा रहा है?

  • 2008 में पाकिस्तान को पहली बार FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था। इसके तहत उसे टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर कार्रवाई करनी थी। 2009 में वह इस लिस्ट से बाहर हो गया था।
  • 2012 में पाकिस्तान को एक बार फिर FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था। हालांकि, 2015 में फिर वह बाहर निकलने में कामयाब रहा था।
  • पाकिस्तान जून 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल हुआ था। अक्टूबर 2018, 2019, 2020 और अप्रैल 2021 में हुए रिव्यू में भी पाकिस्तान को राहत नहीं मिली थी।
  • पाकिस्तान इस दौरान FATF की सिफारिशों पर काम करने में विफल रहा है। इस दौरान पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को विदेशों से और घरेलू स्तर पर आर्थिक मदद मिलनी जारी है।

सवाल 5 : पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए कितने देशों का समर्थन जुटाना होगा?

  • FATF प्लेनरी सेशन की शुरुआत 21 फरवरी से होनी है। इसमें FATF के अफसर यह देखेंगे कि पाकिस्तान ने टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए कितनी कार्रवाई की है।
  • हालांकि, अक्टूबर 2021 में FATF की पिछली बैठक में पाया गया था कि पाकिस्तान UN द्वारा घोषित आतंकवादियों पर मुकदमा चलाने और उनकी प्रॉपर्टी को जब्त करने में विफल रहा था।
  • साथ ही इस वक्त पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए 39 सदस्यों में से कम से कम 12 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है।
  • ऐसे में माना जा रहा है कि पाकिस्तान का ग्रे लिस्ट से बाहर आना संभव नहीं है। अभी पाक समेत 23 देश FATF की ग्रे लिस्ट में हैं।

सवाल 6 : पाकिस्तान के ब्लैक लिस्ट होने की कितनी संभावना है?

  • इस बात की संभावना काफी ज्यादा है कि FATF पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर दे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि FATF की मीटिंग में बहुत सख्ती से इस बात पर गौर किया जाएगा कि इमरान खान सरकार ने टेरर फंडिंग और बड़े आतंकियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की और इसके सबूत कहां हैं?
  • FATF इस बात को बहुत बारीकी से देखेगा कि पाकिस्तान सरकार ने देश में मौजूद हाफिज सईद और दूसरे बड़े आतंकियों के खिलाफ कितने मजबूत केस तैयार किए और उन्हें सजा दिलाने के लिए कितनी ठोस कार्रवाई की है।
  • दूसरी तरफ, टेरर फाइनेंसिंग और एंटी मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर पाकिस्तान को खुद सबूत देने होंगे। अब तक पाकिस्तानी एजेंसियों ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है जिससे टेरर फंडिंग को रोके जाने का सबूत मिला हो।
  • वहीं पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट होने से बचने के लिए 39 सदस्य देशों में से 3 सदस्य देशों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

सवाल 7 : अब तक किन देशों की वजह से बचता रहा है पाकिस्तान?

  • भारत लगातार अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर UN की ओर से बैन आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का दबाव बनाता रहा है। FATF के सामने भी भारत कई बार पाक प्रायोजित आतंकवाद को लेकर सबूत सौंप चुका है।
  • पाकिस्तान अब तक चीन, तुर्की और मलेशिया की वजह से FATF में ब्लैक लिस्ट होने से बचाता आया है। ऐसे में पाकिस्तान इस बार ब्लैक लिस्ट होता है तो यह भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत होगी।

सवाल 8 : अगर पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होता है तो क्या असर होगा

  • अगर FATF पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करता है तो पहले से ही खराब चल रही अर्थव्यवस्था पर खतरा और बढ़ जाएगा। इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक मदद नहीं मिल पाएगी। यानी IMF, ADB, वर्ल्ड बैंक या कोई भी फाइनेंशियल बॉडी आर्थिक मदद नहीं करेगी।
  • आयात निर्यात पर कई तरह की पाबंदियों के साथ साथ दूसरे संगठनों से आर्थिक मदद लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा दूसरे देशों में काम करने वालों द्वारा भेजी गई रकम (रेमिटेन्स) पर प्रभाव पर सकता है।
  • क्रेडिट रेटिंग एजेंसी जैसे मूडीज और दूसरी संस्थाओं द्वारा पाकिस्तान को निगेटिव लिस्ट में डाल दिया जाएगा। इससे पाकिस्तान में निवेश आने बंद हो जाएंगे।
  • 21.4 लाख करोड़ भारतीय रुपए के बराबर का कर्ज है पाकिस्तान के ऊपर इस वक्त। जबकि ग्रे लिस्ट में रहने के चलते पाकिस्तान को हर साल 74 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।