जासूसी के लिए ISRO साइंटिस्ट को फंसा रही लड़कियां:विदेश मंत्रालय का ड्राइवर भी फंसा; क्या है हनीट्रैप?

19 दिन पहले

सबसे पहले इन दो हेडलाइन को पढ़िए…

1. हनी ट्रैप का शिकार: विदेश मंत्रालय का ड्राइवर पाकिस्तान भेजता था गुप्त सूचनाएं, 2 लड़कियों ने बुना था जाल

2. ISRO के वैज्ञानिक को हनीट्रैप में फंसाकर जासूसी की साजिश;पत्र लिखकर बयां की पूरी कहानी

ये दो हेडलाइन तो सिर्फ बानगी हैं। खबरों में आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

इजरायल की मोसाद हो या रूस की KGB, अमेरिकी CIA हो या भारतीय रॉ, ये सभी खुफिया एजेंसी अपने दुश्मन देश की जानकारी हासिल करने के लिए हनीट्रैप को हथियार की तरह इस्तेमाल करती हैं। आज भास्कर एक्सप्लेनर के जरिए जासूसी में हनीट्रैप की पूरी कहानी को समझेंगे…

खबरों में आगे बढ़ने से पहले ये ग्राफिक्स देख लीजिए…

अब हनीट्रैप से जुड़े इस सप्ताह की दो बड़े मामलों के बारे में जानिए…

केस- 1: आखिर कैसे हनीट्रैप में फंसा विदेश मंत्रालय का टैक्सी ड्राइवर?
18 नवंबर 2022 को दिल्ली पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने विदेश मंत्रालय में काम करने वाले 46 साल के श्रीकृष्ण को गिरफ्तार किया। श्रीकृष्ण विदेश मंत्रालय में एक टैक्सी ड्राइवर के तौर पर काम करता था।

जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि ये ड्राइवर खुफिया एजेंसी ISI के हनीट्रैप में फंसकर गुप्त जानकारी पाकिस्तान को भेज रहा था। हालांकि, विदेश मंत्रालय का बयान जारी होना अभी बाकी है।

3 महीने पहले सोशल मीडिया के जरिए करीब आए: दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि श्रीकृष्ण की 3 महीने पहले फेसबुक पर दो महिलाओं से दोस्ती हुई थी। इनमें एक महिला का प्रोफाइल नाम- पूनम शर्मा और दूसरी का नाम- पूजा था।

बातचीत के दौरान जल्द ही वह दोनों महिलाओं से अश्लील बातें करने लगा। कुछ समय बाद दोनों महिलाएं उससे भारत की गुप्त सूचनाएं मांगने लगीं और इसके बदले में उसे पैसे देती थी। आरोपी के मोबाइल से कई युवतियों की फोटो व वीडियो भी बरामद हुए हैं।

आरोपी श्रीकृष्ण ने पूछताछ में पाकिस्तान को गोपनीय दस्तावेज लीक करने की बात स्वीकार की है। अब उसके मोबाइल को जल्द ही फोरेंसिक जांच के लिए भेजकर पुलिस डिटेल जानकारी जमा कर रही है।

केस- 2: साइंटिस्ट पर ISRO की खुफिया जानकारी लीक करने का दबाव
9 नवंबर 2022 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में काम करने वाले रॉकेट साइंटिस्ट प्रवीण मौर्य ने लिंक्डइन पर लिखा- उसे हनीट्रैप में फंसाकर खुफिया जानकारी लीक करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जब उसने ऐसा करने से इनकार किया तो जासूसों ने उसे जान से मारने और फंसाने की धमकी दी।

साइंटिस्ट ने ISRO और केरल पुलिस के कुछ सीनियर अधिकारियों पर साजिश और इस हनीट्रैप गैंग में शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इसरो इस मामले में जांच कर रही है और जांच पूरा होने तक फिलहाल प्रवीण को निलंबित कर दिया गया है।

कैसे हनीट्रैप में फंसा प्रवीण: प्रवीण का कहना है कि अजिकुमार सुरेंद्रन नाम के एक व्यक्ति ने उसे दुबई में रहने वाले कुछ लोगों के लिए जासूस के रूप में काम करने के लिए कहा था। साथ ही अजिकुमार ने प्रवीण से ISRO से कुछ गोपनीय जानकारी देने के बदले में भारी धन देने का वादा किया था। जब प्रवीण ने ऐसा करने से मना किया तो अजिकुमार ने अपनी बेटी की मदद से उसे हनीट्रैप में फंसाया। इसके बाद अजिकुमार ने प्रवीण के खिलाफ केरल में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कराया है। हालांकि, इन आरोपों में कितनी सच्चाई है ये फाइनल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा।

अब एक स्लाइड में जानिए हनीट्रैप के आरोपी के खिलाफ भारत में पुलिस किन धाराओं में केस दर्ज करती है…

1980 में हनीट्रैप के मामले ने भारत सरकार को बेचैन कर दिया था

1980 में भारत में एक हनीट्रैप का मामला सामने आया तो इसने केंद्र सरकार को बेचैन कर दिया था। दरअसल, देश की खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम करने वाले के वी उन्नीकृष्णन को कथित तौर पर 1980 के दशक में एक महिला ने हनीट्रैप में फंसा लिया था।

बाद में पता चला कि ये महिला अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA यानी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की सदस्य है। वह एक एयरलाइंस के साथ एक एयर होस्टेस के रूप में काम कर रही थी, जब उन्नीकृष्णन रॉ के चेन्नई डिवीजन के प्रमुख थे।

उन्नीकृष्णन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी LTTE के साथ काम कर रहे थे। जैसे ही सुरक्षा एजेंसी को पता चला कि वह खुफिया जानकारी महिला के हाथों दूसरी सरकार तक पहुंचा रहा है, उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी गिरफ्तारी भारत और श्रीलंका के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने से ठीक पहले हुई थी।

रोमांटिक रिलेशनशिप से खुफिया जानकारी हासिल करना हनीट्रैप है
ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के मुताबिक रोमांटिक और सेक्सुअल रिलेशनशिप के जरिए किसी खुफिया जानकारी को हासिल करना ही हनीट्रैप कहलाता है। ये जानकारी राजनीतिक फायदे या फिर किसी देश की जासूसी के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है।

कई बार किसी व्यक्ति को ब्लैकमेल करने के लिए भी हनीट्रैप में फंसाया जाता है। 1974 में ‘जॉन ले कैर्रे’ नाम के शख्स ने अपनी नॉवेल 'टिंकर टेलर सोल्जर स्पाय' में पहली बार हनीट्रैप शब्द का इस्तेमाल किया था।

इस नॉवेल में एक कैरेक्टर ये बात स्वीकार करता है कि, ‘बहुत पहले जब मैं एक छोटा लड़का था तो मैंने एक गलती की थी और हनीट्रैप में फंस गया था।’ कुछ समय बाद हनीट्रैप शब्द का इस्तेमाल जासूसी को लेकर भी किया जाने लगा।

अब फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के दौरान हनीट्रैप के लिए मशहूर खूबसूरत महिला जासूस ‘माता हारी’ की कहानी …

माता हारी के बारे में पढ़ने से पहले उसकी खूबसूरत तस्वीर को देख लीजिए। माता हारी पैसे के लिए एक साथ दो दुश्मन देशों की जासूसी करती थी।
माता हारी के बारे में पढ़ने से पहले उसकी खूबसूरत तस्वीर को देख लीजिए। माता हारी पैसे के लिए एक साथ दो दुश्मन देशों की जासूसी करती थी।

15 अक्टूबर 1917 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक 41 साल की महिला को सुरक्षा एजेंसियों ने गोलियों से भून दिया था। इस महिला का नाम था- मार्गरेट गीर्तोईदा जेले उर्फ माता हारी।

इस खूबसूरत महिला पर फ्रांस ने हिटलर की जासूस होने और हनीट्रैप के जरिए खुफिया जानकारी लीक करने का आरोप लगाया था । माता हारी 7 अगस्त 1876 को नीदरलैंड में पैदा हुईं और पेरिस में पली-बढ़ीं थी।

माता हारी की शादी नीदरलैंड की शाही सेना के एक अधिकारी से हुई थी, जो इंडोनेशिया में तैनात था। दोनों तत्कालीन डच ईस्ट इंडीज के द्वीप जावा में रह रहे थे।

पति के साथ इंडोनेशिया में रहते हुए वो एक डांस कंपनी में शामिल हो गईं और अपना नाम बदलकर माता हारी कर लिया। नीदरलैंड्स लौटने के बाद 1907 में माता हारी ने अपने पति को तलाक दे दिया और पेशेवर डांसर के रूप में पेरिस चली गईं।

पेरिस में बड़े नेताओं के यहां रखैल बनकर रही माता हारी
पेरिस में माता हारी एक साल तक एक फ्रेंच नेता की रखैल बनकर रही। इसी दौरान फ्रांस की सरकार ने माता हारी को जासूसी करने के लिए राजी कर लिया। इसके बदले में उसे अच्छी खासी रकम दी गई। फ्रांस ने प्रथम विश्वयुद्ध के समय माता हारी को हथियार बना कर जर्मन मिलिट्री ऑफिसर्स की कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की थीं, लेकिन माता हारी की पैसों की भूख बहुत बढ़ चुकी थी। उसने फ्रांस सरकार की भी जानकारी जर्मनी सरकार को देनी शुरू कर दी। यह बात फ्रांस के खूफिया डिपार्टमेंट को पता चल गई थी।

1917 को उसको होटल रूम से अरेस्ट किया गया
दरअसल, फ्रांसीसी सेना ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड से जर्मनी की राजधानी बर्लिन भेजे जा रहे उन संदेशों को पकड़ा, जिसमें कहा गया था कि उन्हें एच-21 से सटीक जानकारियां मिल रही हैं।

इसके बाद फ्रांसीसी सेना ने एच-21 की पहचान माता हारी के रूप में की और उन्हें पेरिस में 13 फरवरी, 1917 को उनके होटल रूम से अरेस्ट कर लिया गया। इसके बाद उन्हें 50 हजार लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहराया गया और 15 सितंबर, 1917 में गोलियों से भूनकर मौत की सजा दी गई।

माता हारी के मरने के बाद भी ये साफ नहीं हो सका कि वो किस देश के लिए जासूसी कर रही थी। माता हारी डांस, सेक्स और सीक्रेट डीलिंग का खेल खेलते हुए 41 की उम्र में अपनी जान से हाथ धो बैठी थी।

शीत युद्ध के दौरान हनीट्रैप के लिए लड़कियों को जासूस बनाने का ट्रेंड बढ़ा
ब्रिटिश पत्रकार और इतिहासकार डोनाल्ड मैककॉर्मिक ने अपनी किताब ‘स्पाईक्लोपीडिया: द कॉम्प्रिहेंसिव हैंडबुक ऑफ एस्पियनेज’ में लिखा है कि शीत युद्ध के दौरान महिला एजेंटों को जासूस बनाने का ट्रेंड शुरू हुआ, जो तेजी से बढ़ा। इस दौरान सोवियत संघ की सुरक्षा एजेंसी केजीबी ने 'हनी ट्रैपिंग' का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। इस समय हनीट्रैप करने वाली लड़कियों के लिए एक शब्द ‘मोज्नो गर्ल्स’ इस्तेमाल किया जाता था।

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