भास्कर एक्सप्लेनर:नए कोरोना वैरिएंट IHU से बढ़ी चिंता, ओमिक्रॉन के 37 के मुकाबले इसमें 46 म्यूटेशन, जानिए कितना खतरनाक?

6 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के तेजी से फैलने के बीच एक नए स्ट्रेन की खोज ने दुनिया की चिंता और बढ़ा दी है। फ्रांस में मिले इस नए स्ट्रेन को IHU नाम दिया गया है। IHU वैरिएंट में 46 म्यूटेशन मिले हैं। इस वजह से इसे लेकर टेंशन बढ़ गई है। एक ओर जहां ओमिक्रॉन की वजह से दुनिया में कोरोना बेहद तेज रफ्तार से बढ़ रहा है और वैज्ञानिक इससे निपटने के उपाय खोजने में जुटे हैं, ऐसे में इस नए स्ट्रेन ने कोरोना महामारी की एक नई लहर फैलने की आशंका को जन्म दे दिया है।

चलिए जानते हैं कि आखिर क्या है कोरोना का नया स्ट्रेन IHU? कहां पाया गया इसका पहला केस? कितना खतरनाक हो सकता है कोरोना का नया स्ट्रेन IHU?

क्यों IHU को कहा जा रहा है कोरोना का नया वैरिएंट?

IHU का पहला केस फ्रांस में पाया गया था। यह कोरोना वैरिएंट B.1.640 का सब-लीनेज है। फ्रांस में नवंबर 2021 में इस वैरिएंट के मामले पाए जाने के बाद फ्रांसीसी रिसर्चर्स ने IHU वैरिएंट को सब-लीनेज B.1.640.2 के रूप में क्लासिफाई किया है।

इस नए स्ट्रेन IHU की जानकारी 29 दिसंबर 2021 को medRxiv पर पोस्ट की गई एक स्टडी से मिली है। इस नए स्ट्रेन की खोज की घोषणा वैज्ञानिक डिडिएर राउल के नेतृत्व में फ्रांस के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट्स (IHU) के मेडिटेरेनी इंफेक्शन इन मार्सिले के रिसर्चर्स ने की है। फ्रेंच रिसर्चर्स ने इस वैरिएंट को IHU निकनेम दिया है।

कहां मिला IHU का पहला केस?

फोर्ब्स के मुताबिक, IHU स्ट्रेन का पहला केस नवंबर (2021) मध्य में ही फ्रांस में मिला था और अब तक वहां इसके 12 केस मिल चुके हैं। यानी, कोरोना के नए वैरिएंट ऑफ कंसर्न ओमिक्रॉन का पहला केस (24 नवंबर) मिलने से भी पहले IHU का केस मिल चुका था।

IHU का पहला केस फ्रांस के एक ऐसे व्यक्ति में पाया गया था, जो वैक्सीनेटेड था और अफ्रीकी देश कैमरून से लौटा था। उसे सांस लेने में दिक्कत के लक्षण के बाद हुए टेस्ट में कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया था। उसमें IHU या B.1.640.2 वैरिएंट पाए जाने की पुष्टि हुई थी। IHU का पहला केस मिलने के बाद दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के इसी भौगोलिक क्षेत्र से 11 और मामले सामने आए।

कितना खतरनाक है नया वैरिएंट?

IHU में काफी ज्यादा म्यूटेशन हुए हैं और इसके कुछ म्यूटेशन के अल्फा जैसे अन्य वैरिएंट्स जैसे होने की वजह से ही इसे लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, IHU के जेनेटिक कोड में 46 म्यूटेशन और 37 डिलीशंस हो चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं।

माना जा रहा है कि IHU में हुए म्यूटेशन दुनिया भर में कहर ढा रहे ओमिक्रॉन वैरिएंट से भी ज्यादा हैं। ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में 36 से ज्यादा म्यूटेशन सामने आए थे। स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस इंसान की कोशिकाओं से चिपकता है।

हालांकि, रिसर्चर्स ने कहा है कि इंफेक्शन और वैक्सीन से सुरक्षा के संबंध में IHU को लेकर अभी कोई भी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

दुनिया में कहां-कहां मिले हैं नए स्ट्रेन के केस?

IHU या कोरोना के B.1.640.2 वैरिएंट के केस अब तक केवल फ्रांस में ही पाए गए हैं। इसका पहला केस नवंबर 2021 में दक्षिण पश्चिमी फ्रांस में सामने आने के बाद अब तक इसके 12 केस दर्ज किए गए हैं।

हालांकि, दुनिया के किसी और देश ने IHU के मामले पाए जाने की पुष्टि नहीं की है। outbreak.info के मुताबिक, इस वैरिएंट का आखिरी केस 25 दिसंबर 2021 को दर्ज किया गया था। इसके बाद से ग्लोबल डेटाबेस में इस वैरिएंट के और केस नहीं दर्ज किए हैं।

कितनी तेजी से फैलता है IHU वैरिएंट?

अब तक केवल फ्रांस में ही IHU (B.1.640.2) के 12 केस मिले हैं। किसी और देश ने IHU के मामलों की पुष्टि नहीं की है। अभी ये स्पष्ट नहीं है कि IHU कितना ताकतवर है या कोरोना वायरस के अन्य ज्ञात स्ट्रेंस से कितनी ज्यादा तेजी से फैलता है।

हालांकि, माना जा रहा है कि IHU या इसका पूर्ववर्ती कोरोना वैरिएंट B.1.640 ओमिक्रॉन जितना संक्रामक नहीं है और उतनी तेजी से नहीं फैल रहा है।

MedRxiv में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, अभी IHU वैरिएंट के वायरोलॉजिकल, एपिडिमिलॉजिकल और क्लिनिकल फीचर्स के बारे में कोई अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

WHO ने नए वैरिएंट पर क्या कहा?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने अब तक IHU को ‘वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट’ या ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ नहीं घोषित किया है। हालांकि, नवंबर 2021 में WHO ने वैरिएंट B.1.640 को 'वैरिएंट अंडर मॉनिटरिंग' या VUM के तहत रखे जाने की घोषणा की थी। IHU को अभी WHO ने किसी श्रेणी में नहीं रखा है।

WHO ने कहा है कि वह IHU पर नजर बनाए हुए है। WHO के कोविड इंसिडेंट मैनेजर आब्दी महमूद ने मंगलवार को जिनेवा में IHU को लेकर कहा है कि वह इसके रडार पर है। आब्दी ने कहा, ''उस वायरस में फैलने की काफी संभावनाएं थीं।''

IHU को लेकर और स्टडी होना बाकी

IHU वैरिएंट को लेकर महामरी विशेषज्ञ एरिक फीगल-डिंग ने एक लंबा ट्विटर थ्रेड पोस्ट शेयर किया है। डिंग ने लिखा है कि कोरोना के नए वेरिएंट सामने आते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे अधिक खतरनाक होंगे।

मंगलवार को किए अपने ट्वीट में डिंग ने कहा, "जो चीज किसी वैरिएंट को ज्यादा खतरनाक बनाती है, वह इसमें होने वाले म्यूटेशन की संख्या के कारण इसकी वृद्धि करने की इसकी क्षमता है।"

उन्होंने कहा, "ऐसा होने पर यह 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' बन जाता है-ओमिक्रॉन की तरह, जो ज्यादा संक्रामक और इम्यूनिटी को चकमा देने में सक्षम है। यह देखा जाना बाकी है कि यह नया वैरिएंट (IHU) किस श्रेणी में आएगा।''

IHU है जिस वैरिएंट B.1.640 का सब-लीनेज उसे जानिए

फ्रेंच रिसर्चर्स ने जिस IHU वैरिएंट का उल्लेख किया है, वह कोरोना के वैरिएंट B.1.640 का सब-लीनेज है, जिसे नवंबर 2021 में ही WHO ने ‘वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग’ में रखा था।

नवंबर 2021 में फ्रांस के 12 लोगों में पाए गए वैरिएंट को फ्रेंच रिसर्चर्स ने अब सब-लीनेज B.1.640.2 के रूप में क्लासिफाई किया है।

B.1.640 करोना का नया वैरिएंट नहीं है। जीनोम सीक्वेंसिंग डेटाबेस के जरिए विभिन्न वैरिएंट्स के फैलने को ट्रैक करने वाली वेबसाइट outbreak.info के मुताबिक, कोरोना के लीनेज B.1.640 की पहचान सबसे पहले 1 जनवरी 2021 को हुई थी। इसके मुताबिक, अब तक दुनिया भर में इस लीनेज से जुड़े इंफेक्शन के 400 से ज्यादा मामलों की पहचान हो चुकी है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना के स्ट्रेन B.1.640 के मामले दुनिया के 19 देशों में सामने आ चुके हैं, जिनमें से एक केस भारत में भी मिल चुका है। ग्लोबल डेटाबेस में रिपोर्ट किए गए भारत के 89763 जीनोम सीक्वेंसेस में से इसका केवल एक केस मिला था।

कोरोना के B.1.640 स्ट्रेन के सर्वाधिक मामले फ्रांस (287), कांगो (39), जर्मनी (17) और यूनाइटेड किंगडम (16) में मिले हैं। इसका सर्वाधिक प्रसार कांगो में दिखा, जहां 454 जीनोम सीक्वेंसेस में से 39 केस मिले हैं।

IHU वैरिएंट का मिलना क्यों है चिंता की बात?

कोरोना के नए वैरिएंट IHU का मिलना पहले ही ओमिक्रॉन वैरिएंट का संकट झेल रही दुनिया के लिए एक और चिंता बढ़ाने वाली खबर है। ओमिक्रॉन का पहला केस 24 नंवबर 2021 को साउथ अफ्रीका में मिला था और डेढ़ महीने से कम समय में ही ये दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में फैल चुका है।

ओमिक्रॉन की वजह से अमेरिका, यूरोप और भारत में भी कोरोना केसेज बहुत तेज रफ्तार से बढ़ रहे हैं। भारत में ओमिक्रॉन की वजह से जनवरी-फरवरी में तीसरी लहर आने की आशंका है।

देश में तीसरी लहर के दौरान डेली केसेज की संख्या के 16 लाख तक जाने की आशंका है, जो दूसरी लहर के दौरान आए 4 लाख डेली केसेज की अधिकतम संख्या से 4 गुना ज्यादा है।

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