भास्कर एक्सप्लेनर:मोदी ने किया गंगा एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास, BJP वोटों पर साधेगी निशाना तो वायुसेना चीन पर, जानिए कैसे

एक वर्ष पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 दिसंबर को शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना की आधारशिला रखी। उत्तर प्रदेश के मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला गंगा एक्सप्रेस-वे UP का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा। गंगा एक्सप्रेस-वे के जरिए भले ही BJP की नजरें उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में वोटरों को साधने पर हों, लेकिन इस एक्सप्रेस-वे के जरिए वायुसेना की नजरें चीन के खिलाफ रणनीतिक बढ़त हासिल करने पर हैं। 594 किलोमीटर लंबे छह लेन एक्सप्रेस-वे से पूर्वी और पश्चिमी UP की दिल्ली-NCR से बेहतर कनेक्टिविटी का रास्ता खुलेगा। उत्तर प्रदेश में नवंबर में ही देश के सबसे लंबे (ऑपरेशनल) एक्सप्रेस-वे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन हुआ है।

चलिए जानें क्या है गंगा एक्सप्रेस-वे? क्या है इसका उत्तर प्रदेश और देश के लिए महत्व? क्यों गंगा एक्सप्रेस-वे पर बनने वाली एयर स्ट्रिप से वायुसेना की नजरें चीन को साधने पर होंगी? और एक्सप्रेस-वे पर एयर स्ट्रिप क्यों है सेना के लिए जरूरी?

सबसे पहले गंगा एक्सप्रेस को जानिए

गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे होगा। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ेगा। गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को पीछे छोड़कर उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे बन जाएगा। नवंबर 2021 में ही पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे (341 किलोमीटर) का उद्घाटन हुआ है, जो वर्तमान में देश और UP का सबसे लंबा ऑपरेशनल एक्सप्रेस-वे है।

गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र को पश्चिमी क्षेत्र से जोड़ेगा। गंगा एक्सप्रेस-वे को दिसंबर 2024 तक बनकर तैयार होने का अनुमान है। उस समय तक यह सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे के मामले में देश के सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे में छठे नंबर पर होगा, क्योंकि देश में इस समय गंगा एक्सप्रेस-वे से लंबे पांच एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो रहे हैं।

कैसे परवान चढ़ी गंगा एक्सप्रेस-वे की योजना?

  • गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना को सबसे पहले 2007 में UP की तत्कालीन CM मायावती ने लॉन्च किया था।
  • इस परियोजना पर काम 2017 में योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद ही शुरू हुआ।
  • यह परियोजना 29 जनवरी 2019 को UP CM योगी आदित्यनाथ ने लॉन्च की।
  • फरवरी 2020 में मेरठ से प्रयागराज को तक 594 किलोमीटर लंबे पहले चरण के निर्माण को 2024 तक पूर करने का लक्ष्य रखा गया।
  • नवंबर 2021 में पर्यावरण मंत्रालय से क्लियरेंस मिला, उसी महीने उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए 36200 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी।
  • 18 दिसंबर 2021 को PM मोदी शाहजहांपुर में करेंगे शिलान्यास।

क्या हैं गंगा एक्सप्रेस-वे की खासियत?

  • यह उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा, जिसके दिसबंर 2024 तक पूरा होने का अनुमान है।
  • 594 किलोमीटर लंबा छह लेन का गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश में मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाएगा।
  • उत्तर प्रदेश के 12 जिलों- मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज, से होकर गुजरेगा। इन 12 जिलों के 500 से अधिक गांवों को भी जोड़ेगा।
  • गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ जिले के बिजौली गांव के पास (NH-334) से शुरू होगा और प्रयागराज जिले के जुदापर डांडू गांव (NH-19) के पास खत्म होगा।
  • गंगा एक्सप्रेस-वे की अनुमानित लागत 36,230 करोड़ रुपये है, जिसमें से जमीन अधिग्रहण पर करीब 9500 करोड़ रुपये का खर्च भी शामिल है।
  • एक्सप्रेस-वे में सात ओवरब्रिज, 17 इंटरचेंज रोड, 14 बड़े पुल, 126 छोटे पुल, 28 फ्लाईओवर, 50 वाहन अंडरपास और 946 पुलिया होंगी।
  • गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए आवश्यक 7386 हेक्टेयर भूमि में से 83 हजार किसानों से करीब 94 फीसदी जमीन खरीदी जा चुकी है।
  • गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण अडानी इंटरप्राइजेज और IRB इंफ्रास्ट्रक्टर डेवलपर्स करेंगे। हाल ही में एक बिडिंग प्रक्रिया के जरिए इन दोनों कंपनियों का चयन हुआ है।
  • इसके बनने के बाद दिल्ली से प्रयागराज के बीच यात्रा में लगने वाला 10-11 घंटे का समय कम होकर 6-7 घंटे रह जाएगा।
  • गंगा एक्सप्रेस-वे को भविष्य में 8 लेन का किए जाने और ग्रेटर नोएडा से बलिया तक 1047 किमी लंबा किए जाने की योजना है।

गंगा एक्सप्रेस-वे पर लैंड कर सकेंगे फाइटर प्लेन, क्या है चीन-पाकिस्तान कनेक्शन?

  • पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की तरह ही गंगा एक्सप्रेस-वे में भी आपातकालीन स्थिति में एयरफोर्स के विमानों की लैंडिंग के लिए शाहजहांपुर के पास एक 3.5 किलोमीटर लंबी एयर स्ट्रिप का निर्माण भी किया जाएगा।
  • गंगा एक्सप्रेस-वे पर एयरफोर्स के फाइटर प्लेन की आपातकालीन लैंडिंग के लिए एयर स्ट्रिप के साथ ही उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा, जिसके चार एक्सप्रेस-वे पर ऐसी सुविधा उपलब्ध होगी।
  • उत्तर प्रदेश में पहले ही यमुना एक्सप्रेस-वे पर मथुरा के पास ऐसी ही एयर स्ट्रिप मौजूद है। इसके अलावा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर बागरमऊ के पास भी एयर स्ट्रिप का निर्माण किया गया है। हाल ही में शुरू हुए 341 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे में भी एयरफोर्स के विमानों की आपात लैंडिंग के लिए सुल्तानपुर के पास 3 किलोमीटर से अधिक लंबी एयर स्ट्रिप भी बनाई गई है।
  • नवंबर 2021 में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की एयर-स्ट्रिप पर भी इंडियन एयरफोर्स के फाइटर प्लेन सुखोई-30 ने लैंडिंग और टेक-ऑफ का सफल परीक्षण किया था। उससे पहले 2015 में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मौजूद एयर स्ट्रिप पर फाइटेर प्लेन मिराज-2000 सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेक-ऑफ कर चुका है। वहीं लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर भी एयरफोर्स के सुखोई-30 और मिराज-2000 फाइटर प्लेन लैंडिंग और टेक-ऑफ कर चुके हैं।
  • उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे पर एयरफोर्स के विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए बनाई जाने वाली एयर स्ट्रिप का देश के लिए रणनीतिक महत्व है। इससे आगरा और हिंडन एयर बेसों को बहुत फायदा होगा। साथ ही चीन और पाकिस्तान से युद्ध छिड़ने की स्थिति में आपातकालीन स्थिति में एयरफोर्स के फाइटर प्लेन की लैंडिंग के लिए ये एयर स्ट्रिप महत्वपूर्ण लॉन्चिंग पैड की तरह काम करेंगे।
  • उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे पर एयरफोर्स के विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए बनाई जाने वाली एयर स्ट्रिप का देश के लिए रणनीतिक महत्व है। इससे आगरा और हिंडन एयर बेसों को बहुत फायदा होगा। साथ ही चीन और पाकिस्तान से युद्ध छिड़ने की स्थिति में आपातकालीन स्थिति में एयरफोर्स के फाइटर प्लेन की लैंडिंग के लिए ये एयर स्ट्रिप महत्वपूर्ण लॉन्चिंग पैड की तरह काम करेगा।

एक्सप्रेस-वे पर एयर स्ट्रिप बनाना चीन को काउंटर करने की योजना?

गंगा एक्सप्रेस-वे पर एयर स्ट्रिप बनाना भारतीय वायुसेना का युद्ध की स्थिति में चीन को काउन्टर करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। UP में तीन एक्सप्रेस-वे पर पहले ही एयर स्ट्रिप मौजूद हैं। UP में एक्सप्रेस-वे पर पहले से मौजूद दो एयर स्ट्रिप वायुसेना के दो एयरबेसों आगरा और हिंडन के करीब स्थित हैं। ऐसे में युद्ध के समय आपात स्थिति में इन एयर स्ट्रिप का इस्तेमाल लैंडिंग, लड़ाकू विमानों या ट्रांसपोर्ट प्लेन को ईंधन और हथियारों की सप्लाई के लिए किया जा सकता है।

दरअसल, चीन पहले ही भारत के साथ लगती उसकी 3488 किमी लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से लगे इलाकों में नए एयरपोर्ट बना रहा है या मौजूदा एयर स्ट्रिप को अपग्रेड कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए भी जरूरी है कि चीन की इस चाल का जवाब देने के लिए आपात स्थिति में एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचने पर एक्सप्रेस-वे पर मौजूद एयर स्ट्रिप का इस्तेमाल फाइटर प्लेन और ट्रांसपोर्ट प्लेनों को लैंडिंग की सुविधा प्रधान करने के लिए तैयार करे।

एक्सप्रेस-वे पर एयर स्ट्रिप बनाने से सेना को होगा क्या फायदा?

रक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि UP के एक्सप्रेस-वे पर बनने वाली हवाई पट्टियां भारतीय वायु सेना की योजना का हिस्सा हैं। इसका उद्देश्य विशेष रूप से डिजाइन की गई ऐसी सड़कें तैयार करना है, जहां जरूरत पड़ने पर मिराज -2000 जैसे फाइटर प्लेन और C-130 जे हरक्यूलिस जैसे ट्रांसपोर्ट प्लेन उतारे जा सकें।

दरअसल, 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान, पाकिस्तानी वायु सेना के विमानों ने हवाई ठिकानों पर बमबारी के कारण भारतीय वायुसेना को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उन अनुभवों से सीखते हुए, भारतीय वायु सेना ने इन एक्सप्रेस-वे की इन हवाई पट्टियों का उपयोग चौबीसों घंटे लैंड करने, मोबाइल एयर ट्रैफिक कम्युनिकेशन, ईंधन भरने और हथियारों से लदे होने के बाद टेक-ऑफ करने के लिए करने का फैसला किया है।

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