भास्कर एक्सप्लेनर:पंत की जगह पंड्या कप्तान होते तो क्या भारत बनाता वर्ल्ड रिकॉर्ड, IPL से मिलते हैं इसके सबूत; जानिए कैसे

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: कुमार ऋत्विज

टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला टी-20 गंवा दिया। 212 रन का टारगेट सेट करने के बावजूद भारत हार गया। इसी के साथ लगातार 13 टी-20 मैच जीत कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का ख्वाब भी चकनाचूर हो गया। इस हार के बाद ऋषभ पंत की कप्तानी पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि जब पंड्या मौजूद हैं, तो पंत को कप्तान क्यों बनाया गया?

ऐसे में आज के एक्सप्लेनर में हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि पंत और पंड्या में बेहतर कप्तान कौन है? क्या पंत को कप्तानी देकर बीसीसीआई ने गलती की है।

इसके लिए हमने 3 फैक्टर को लेकर एनालिसिस की है...

1. कप्तानीः पंड्या और पंत में कौन बेहतर?

कप्तान के तौर पर हार्दिक पंड्या की स्ट्रैटजी रही कारगर

  • आईपीएल में पहली बार कप्तानी कर रहे पंड्या ने टीम की जर्सी लॉन्च पर बयान दिया था कि टीम अगर अच्छा करेगी, तो क्रेडिट युवाओं को जाएगा। अगर हम खराब करते हैं तो सारी जिम्मेदारी मेरी होगी। इस बयान ने खिलाड़ियों में कप्तान के प्रति भरोसा कायम किया।
  • गुजरात की बैटिंग लाइनअप कमजोर थी। हार्दिक ने अधिकतर मुकाबलों में फर्स्ट डाउन और सेकंड डाउन बैटिंग करने का फैसला किया, लेकिन इसमें रिस्क था कि लोअर डाउन द ऑर्डर अच्छा करने वाले हार्दिक टॉप ऑर्डर में फेल हो सकते थे। हार्दिक के ऊपर खेलने से टीम का बैटिंग ऑर्डर मजबूत हुआ। डेविड मिलर और राहुल तेवतिया जैसे खिलाड़ी मैच फिनिशर के रोल में फिट हो गए।
  • अंतिम लीग मैच में हार्दिक ने ओस की आशंका के बावजूद बेंगलुरु के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया। GT 8 विकेट से बुरी तरह हार गई। हार्दिक ने साफ किया कि प्लेऑफ में अगर ऐसी स्थिति आई तो हम क्या करेंगे, इसलिए पहले बैटिंग करना जरूरी लगा। अपने डिसीजन पर टिके रहने के कारण हार्दिक कप्तान के तौर पर परिपक्व नजर आए।

ऋषभ पंत कप्तानी में पूरी तरह फ्लॉप रहे

  • दिल्ली कैपिटल्स को IPL 2022 के प्लेऑफ में क्वालिफाई करने के लिए मुंबई के खिलाफ हर हाल में मुकाबला जीतना जरूरी था। 12वें ओवर में ऋषभ पंत ने डेवाल्ड ब्रेविस का आसान सा कैच छोड़ दिया। 15वें ओवर में शार्दूल ठाकुर की गेंद पर टिम डेविड जीरो रन पर आउट थे, लेकिन विकेट के पीछे कैच पकड़ने वाले ऋषभ पंत ने DRS नहीं लिया। 309 की स्ट्राइक रेट से खेलते हुए टिम डेविड ने 11 बॉल पर 34 रन और डेवाल्ड ब्रेविस ने 33 गेंदों पर 37 रन जड़ दिए। प्रेशर मैच में कप्तान पंत की गलती टीम पर भारी पड़ी। 160 रनों का टारगेट डिफेंड कर रही दिल्ली 5 विकेट से मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई। मुंबई इंडियंस सीजन की सबसे कमजोर टीम थी, जो 14 मैच खेलकर केवल 4 मुकाबले जीत सकी। उस मुंबई के सामने भी दिल्ली आखिरी लीग मैच में जीत दर्ज नहीं कर पाई।
  • पृथ्वी शॉ और श्रीकर भरत के बतौर ओपनर खराब प्रदर्शन के बावजूद पंत ओपनिंग करने नहीं आए। भरत 2 मुकाबलों में केवल 8 रन बना सके और शॉ के बल्ले से 10 मैच खेलकर 2 अर्धशतकों की मदद से 283 रन निकले। शॉ तबीयत बिगड़ने के कारण सीजन में कुछ समय के लिए अस्पताल में भर्ती थे। पंत ने तब भी ओपन नहीं किया। नतीजा ये हुआ कि दिल्ली प्लेऑफ में क्वालिफाइ करने के लिए जरूरी 8 मैच नहीं जीत सकी।
  • विश्व क्रिकेट के सबसे तेज गेंदबाजों में शुमार एनरिक नॉर्त्या को पंत की कप्तानी वाली दिल्ली की टीम की तरफ से केवल 6 मुकाबलों में खेलने का मौका दिया गया। मेगा ऑक्शन से पहले रिटेन किए गए नॉर्त्या को कुछ मुकाबलों में परफॉर्म न करने पर टीम से बाहर करने का नतीजा हुआ कि टीम की फास्ट बॉलिंग लाइनअप कमजोर नजर आई।

2. परफॉर्मेंसः पंड्या और पंत में कौन बेहतर?

अपने खेल से मुकाबलों का रुख नहीं बदल सके पंत
कप्तान के अलावा ऋषभ इस आईपीएल सीजन में बल्ले से भी कोई प्रभाव नहीं छोड़ सके। 2016 में IPL डेब्यू करने वाले पंत पहली बार इस लीग में एक भी फिफ्टी नहीं लगा सके। उनके खराब प्रदर्शन का असर दिल्ली कैपिटल्स की बैटिंग लाइनअप पर पड़ा। बड़े मौकों पर पंत डिलीवर करने में नाकाम रहे।

चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ दिल्ली कैपिटल्स को जीत के लिए 208 रनों का टारगेट मिला था। पंत को बेहतर शुरुआत मिली और वह 11 गेंद पर ही 21 रन तक पहुंच गए। मोईन अली की शॉर्ट ऑफ ब्रेक बॉल को कैजुअल अप्रोच के साथ ऋषभ बैकफुट से कट करने गए और गेंद बल्ले के निचले हिस्से पर लगते हुए विकेट से जा टकराई। उनका विकेट गेमचेंजर साबित हुआ और दिल्ली 91 रनों के बड़े अंतर से से मैच गंवा बैठी।

मुंबई इंडियंस के खिलाफ आखिरी लीग मैच हारने के बाद दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत बेहद निराश नजर आए। उनकी कप्तानी में टीम लगातार दूसरे साल IPL का खिताब नहीं जीत सकी।
मुंबई इंडियंस के खिलाफ आखिरी लीग मैच हारने के बाद दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत बेहद निराश नजर आए। उनकी कप्तानी में टीम लगातार दूसरे साल IPL का खिताब नहीं जीत सकी।

मुंबई इंडियंस के खिलाफ दिल्ली की टीम 'करो या मरो' का मुकाबला खेल रही थी। हारने पर टूर्नामेंट से बाहर होना तय था। उस मुकाबले में ओपनर पृथ्वी शॉ और डेविड वॉर्नर फ्लॉप रहे। ऋषभ 33 गेंद पर 118 की स्ट्राइक रेट से केवल 38 रन ही बना सके। मुकाबले में 16वें ओवर तक पंत के क्रीज पर रहने के बावजूद टीम मोमेंटम नहीं हासिल कर सकी। जब तेज बैटिंग की बारी आई, तो ऋषभ पवेलियन लौट गए।

हार्दिक ने अपने खेल से टीम को जिताए कई मुकाबले
हार्दिक ने खिलाड़ी के रूप में अपनी भूमिका को पूरी तरह बदल दिया। टी-20 वर्ल्ड कप 2021 में गेंदबाजी न करने वाले हार्दिक आईपीएल के पहले ही मुकाबले में पावरप्ले के दौरान गेंदबाजी करते दिखे। परफेक्ट ऑलराउंडर के तौर पर हार्दिक गुजरात टाइटंस के लिए तुरुप का इक्का साबित हुए।

सीजन के 21वें मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ चौथे नंबर पर हार्दिक 42 गेंद पर 50* रन ही बना सके। जिस तेजी से उनके खेलने की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी। 163 के टारगेट को SRH ने 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया। हार्दिक की धीमी बैटिंग को हार के लिए जिम्मेदार माना गया। हार्दिक अपने निर्णय पर कायम रहे। अगले मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ हार्दिक फिर से 4 नंबर पर बल्लेबाजी करने आए और 52 गेंद पर 167 की स्ट्राइक रेट से नाबाद 87 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी। उनकी सेल्फ बिलीफ गुजरात के लिए पूरे सीजन फायदेमंद रही।

हार्दिक पंड्या ने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ पावरप्ले के दूसरे ओवर की पहली गेंद पर टी-20 स्पेशलिस्ट टिम सीफर्ट को आउट कर दिया। इस बड़े झटके ने रनचेज का रुख बदल दिया। मुकाबले में 4 ओवर में हार्दिक ने 5.5 की इकोनॉमी से केवल 22 रन दिए। उनकी बॉलिंग स्पीड 145 kmph के आसपास रही।

3. बिहैवियरः पंत और पंड्या में कौन ज्यादा पॉजिटिव?
सीजन के 21वें मुकाबले में SRH और GT की भिड़ंत हुई। इस मैच में हार्दिक की गेंदबाजी के दौरान एक शॉट पर मोहम्मद शमी ने कैच के लिए आगे बढ़ने की बजाय बाउंड्री रोकना बेहतर समझा। हार्दिक को इस पर चीखते हुए 'क्या कर रहे हो यार' कहते देखा गया। टीम इंडिया के सीनियर गेंदबाज के साथ उनके व्यवहार की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई।

इसके बाद हार्दिक ने खुद में बड़ा बदलाव किया। 13 मई को खुद मोहम्मद शमी का बयान आया कि हार्दिक ने मेरी सलाह मानी है। दरअलस शमी ने हार्दिक से कहा था कि फील्ड में भावनाओं पर काबू रखें क्योंकि पूरी दुनिया की नजर आप पर होती है। हार्दिक ने कप्तान के रूप में दूसरे खिलाड़ियों की सलाह पर अमल करते हुए अपने व्यवहार में लगातार सुधार किया।

वहीं दिल्ली और राजस्थान रॉयल्स के मैच के दौरान पंत के व्यवहार की क्रिकेट जगत में काफी निंदा हुई। इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ जीत के लिए 6 गेंद पर 36 रन चाहिए थे। रॉवमैन पॉवेल ने पहली 3 गेंद पर 3 छक्के जड़ दिए। चौथी गेंद कमर के ऊपर हाइट की नो बॉल दिखाई पड़ रही थी। हालांकि, अंपायर ने नो बॉल नहीं दिया।

किसी मुकाबले के बीच से अपने बल्लेबाजों को वापस बुलाने पर ऋषभ पंत की तीखी आलोचना हुई थी। इसके लिए उनपर मैच फीस का 100 फीसदी जुर्माना लगा था।
किसी मुकाबले के बीच से अपने बल्लेबाजों को वापस बुलाने पर ऋषभ पंत की तीखी आलोचना हुई थी। इसके लिए उनपर मैच फीस का 100 फीसदी जुर्माना लगा था।

इस निर्णय पर पंत भड़क गए और अपने दोनों बल्लेबाजों को बीच मैच में वापस आने का इशारा कर दिया। इस बर्ताव ने बताया कि पंत कप्तानी की जिम्मेदारी के लिए अभी तैयार नही हैं।

पंड्या कप्तान होते तो क्या पहले टी-20 की अलग होती कहानी
पहली बार इंटरनेशनल मैच में कप्तानी कर रहे ऋषभ पंत से साउथ अफ्रीका के खिलाफ कप्तानी में काफी गलतियां हुईं, जिसकी वजह से 212 रन का बड़ा टारगेट देने के बावजूद टीम इंडिया 7 विकेट से मैच हार गई।

उन्होंने लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल से सिर्फ 2.1 ओवर ही करवाए। चहल ने इस आईपीएल में 27 विकेट लेकर पर्पल कैप अपने नाम किया था। अगर उनके कोटे के 4 ओवर का पूरा इस्तेमाल होता तो परिस्थिति अलग हो सकती थी। इसके साथ ही पंत मैच के शुरुआती ओवर में लगातार गेंदबाजी में बदलाव करते रहे, जिसका टीम को कोई फायदा नहीं मिला।

आईपीएल में गुजरात की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले डेविड मिलर का गलत DRS लेकर भी ऋषभ पंत ने टीम का नुकसान किया। डिफेंड करने के लिए बोर्ड पर 211 रन होने के बावजूद पंत का गेंदबाजों को सही तरीके से इस्तेमाल न कर पाना टीम इंडिया की हार की बड़ी वजह रहा।

जाते जाते इस पोल में हिस्सा जरूर लें.....

खबरें और भी हैं...