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भास्कर एक्सप्लेनर:फिनटेक इंडस्ट्री ने बदला लोन लेने से पेमेंट करने तक का तरीका, चार साल में 11 लाख करोड़ से ज्यादा का होगा यह सेक्टर

10 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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आप बिना कागज के कर्ज ले सकते हैं। बिना कैश के पेमेंट कर सकते हैं। बिजली, पानी के बिल भी मोबाइल वॉलेट्स से जमा हो सकते हैं। इतना ही नहीं, इंश्योरेंस से लेकर शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट तक सबकुछ मोबाइल से संभव है। यह डिजिटल पेमेंट क्रांति सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। नई तकनीक ने इन सेवाओं को उन गांवों तक भी पहुंचा दिया है, जहां अब तक लोग इससे दूर थे। मसलन, महाग्राम ने दो लाख से अधिक किराना स्टोर मालिकों और रिटेलर्स के जरिए 3.5 करोड़ ग्रामीणों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई हैं। वहीं, पाईचैन लैब्स मजदूरों को पेपरलेस लोन मुहैया करा रही है।

यह सब संभव हुआ है फिनटेक यानी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में हुए इनोवेशंस की बदौलत। और, यह इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) और फिक्की की हालिया रिपोर्ट कहती है कि 2025 तक भारत में फिनटेक सेक्टर 150 बिलियन डॉलर यानी 11 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा का होगा। 'इंडिया फिनटेकः अ 100 बिलियन डॉलर अपॉर्चुनिटी' नाम की यह रिपोर्ट कहती है कि पिछले 5 वर्षों में भारतीय फिनटेक कंपनियों ने दुनियाभर के इन्वेस्टर्स से करीब 10 बिलियन डॉलर यानी 70 हजार करोड़ रुपए जुटाए हैं। इस सेक्टर का वैल्युएशन बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपए हो चुका है। हालांकि स्टडी यह भी कहती है कि भारत के फिनटेक सेक्टर को आने वाले 5 वर्षों में 20-25 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होगी।

सोर्सः BCG एनालिटिक्स, NSE
सोर्सः BCG एनालिटिक्स, NSE

दोगुनी हो जाएंगी फिनटेक कंपनियां

ज्यादातर लोग फोनपे, गूगल पे, पेटीएम, अमेजन पे जैसे ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बारे में उन्हें पता ही है, पर फिनटेक्स का सिलसिला यहां आकर खत्म नहीं होता बल्कि शुरू होता है। BCG की रिपोर्ट कहती है कि आज भारत में 2,100 फिनटेक कंपनियां हैं। इनमें भी 67% ऐसी हैं जो पिछले पांच साल में बनी हैं। और तो और, अगले पांच साल में इनकी संख्या दोगुनी हो जाएगी। रिपोर्ट कहती है कि मार्च 2020 से जनवरी 2021 तक UPI पेमेंट्स तीन गुना तक बढ़ गए। लॉकडाउन में ही तीन नए यूनीकॉर्न (पाइनलैब्स, रेजरपे और डिजिटल इंश्योरेंस) बने और इन्होंने एक साल में अपनी वैल्यू में तीन गुना तक की बढ़ोतरी की।

इसी तरह 5 नए सूनीकॉर्न (जल्द ही यूनीकॉर्न बनने वाली कंपनियों) ने जनवरी 2020 से अब तक अपनी वैल्यू कई गुना बढ़ाई है। जेरोधा, अपस्टॉक्स, 5पैसा जैसे फिनटेक डिस्काउंट ब्रोकर्स ने भी एक्टिव क्लाइंट्स में 43% से 57% तक की बढ़त दर्ज की है। BCG के मैनेजिंग डायरेक्टर और पार्टनर प्रतीक रूंगटा का कहना है कि भारत में फिनटेक्स अगले पांच साल में 100 बिलियन डॉलर की वैल्यू क्रिएट कर लेंगे।

काफी हद तक यह आकलन सही भी है। क्रेडेबल (CredAble) की ही बात करें तो उसके मैनेजिंग डायरेक्टर राम केवलरमानी के मुताबिक फिनटेक इनेबलर का काम कर रहे हैं। स्मार्टफोन पर एक टैप करना है और लोग फंड हासिल कर सकते हैं। हमने भी एक साल में दस गुना ग्रोथ हासिल की है। आज हमारे प्लेटफॉर्म पर हर महीने 1,000 करोड़ रुपए का लेन-देन हो रहा है।

दरवाजे तक बैंकों को लेकर जा रहे हैं फिनटेक

जन-धन स्कीम में करोड़ों बैंक अकाउंट खुले, फिर भी करीब 19 करोड़ लोग बैंकों से अभी दूर हैं। ग्रामीण और सेमी-रूरल मार्केट में 35 करोड़ लोगों तक बैंकिंग सेवाएं नहीं पहुंची हैं। ऐसे में पाईचैन लैब्स और महाग्राम जैसे फिनटेक उन तक बैंकों को पहुंचा रहे हैं। पाईचैन लैब्स के सह-संस्थापक और CEO शुभ्रदीप नंदी का कहना है कि जिन तक बैंक नहीं पहुंचे हैं, उन्हें बैंकिंग सुविधाएं देना ही हमारा लक्ष्य है। पाईचैन में हमारे कस्टमर दैनिक वेतनभोगी, माइग्रंट वर्कर्स, किसान, स्वरोजगारी आदि हैं। अगर उन्हें कर्ज चाहिए तो काम से छुट्टी लेकर बैंकों या माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूट्स के चक्कर लगाने होते थे। हमने लोन लेने की दिक्कतों को दूर किया है।

ऐसा ही काम महाग्राम भी कर रही है। महाग्राम के संस्थापक राम पाथड़े का कहना है कि ग्रामीण भारत में आज भी 5 में से 4 पेमेंट कैश होते हैं। हमने भारतATM प्लेटफॉर्म पर 45 हजार गांवों में 2 लाख लोकल किराना दुकानों और रिटेलर्स को जोड़ा। इनके जरिए लोगों को बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाई हैं। बैंकिंग, लोन और इंश्योरेंस सेवाएं उन्हें अपने गांव में मिल जाती है। जहां कोई बैंक या एटीएम नहीं हैं, वहां ये किराना स्टोर बैंकों और एटीएम का काम करते हैं। यहां सेविंग अकाउंट, रेकरिंग डिपॉजिट्स, विड्रॉल या डिपॉजिट करने, फंड ट्रांसफर या इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकते हैं।

वहीं, पेमेंट्स को आसान बनाने के लिए नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। बिजी इंफोटेक प्रा.लि. के सह-संस्थापक और डायरेक्टर राजेश गुप्ता कहते हैं कि टोकनाइजेशन ऐसा ही एक नया तरीका है। जब भी कोई कस्टमर ट्रांजैक्शन करता है, उसके पेमेंट कार्ड के डिटेल्स एनक्रिप्टेड फॉर्मेट में दर्ज हो जाते हैं। इसे कोई हैक नहीं कर सकता। इससे कस्टमर्स को बार-बार अपने डिटेल्स नहीं डालने पड़ते।

इससे सवाल यह उठता है कि क्या यह फिनटेक कंपनियां बैंकों की जगह ले रही है, तो जवाब है- नहीं। केवलरमानी कहते हैं कि फिनटेक इंडस्ट्री बैंकों की प्रतिस्पर्धी नहीं है। यह उनके साथ मिलकर काम कर रही हैं। हमने भी घरेलू और बहुराष्ट्रीय फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के साथ भागीदारी की है। हम सिर्फ टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, जिससे बैंक अपनी सप्लाई चेन फाइनेंस प्रोग्राम को डिजिटाइज कर रहे हैं।

2020 में UPI पेमेंट्स ने तोड़ा रिकॉर्ड

पिछले साल यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पर लेन-देन ने नया रिकॉर्ड बनाया है। 2020 में इसने 4.16 करोड़ के आंकड़े को छू लिया है। 2019 में 2.02 लाख ट्रांजेक्शन ही UPI से हुए थे। महामारी की वजह से लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग अपनाई और कैशलेस पेमेंट्स किए, यह इन आंकड़ों से पता चलता है। UPI 2016 में नोटबंदी के बाद लागू हुआ था। यह बैंकों में होने वाले लेन-देन और फंड्स को मोबाइल प्लेटफॉर्म पर तुरंत ट्रांसफर करने की सुविधा देता है।

यह ग्रोथ सिर्फ UPI पेमेंट्स में नहीं है, बल्कि हर स्टेज पर हुई है। ब्रांच इंटरनेशनल की एमडी इंडिया सुचेता महापात्रा कहती हैं कि वॉलेट से UPI और पे-लेटर सॉल्युशंस तक भारत में पेमेंट सॉल्युशंस ने कई नए मापदंड स्थापित किए हैं। इसने कमजोर तबकों तक बैंकिंग सेवाओं को पहुंचाया है। महंगा सामान खरीदना भी आसान हुआ है। हम ब्रांच इंटरनेशनल में प्रोडक्ट खरीदने के लिए लोन देने के लिए आसान सुविधा देने पर भरोसा करते हैं। यह ही पेमेंट रिवॉल्युशन का हिस्सा बन रहा है।

फिनटेक इकोसिस्टम के लिए RBI के नए नियम

रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले महीने 21 पेज का मास्टर सर्कुलर जारी किया है। इसमें डिजिटल पेमेंट्स व्यवस्था को मजबूती देने की कोशिश की गई है। साथ ही बैंकों, पेमेंट गेट-वे, वॉलेट्स और अन्य गैर-बैंकिंग संस्थानों के लिए नियम तय किए गए हैं ताकि भारत के लेस-कैश इकोनॉमी के सपने को हकीकत बनाया जा सके।

नए नियम ऐसे समय लागू हुए हैं, जब भारत में पेमेंट इकोसिस्टम में धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। नए नियम सभी रेगुलेटेड संस्थाओं में सिक्योरिटी ऑपरेशन को स्टैंडर्डाइज बनाएंगे। इसे लेकर फिनटेक इंडस्ट्री भी खुश हैं।

स्टार्टअप्स की जवाबदेही भी तय की गई है। बिजी इंफोटेक के राजेश गुप्ता कहते हैं कि कनेक्टेड इकोनॉमी में कस्टमर सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कभी भी, कहीं से भी पेमेंट करने और पाने की सुविधा तेजी से विकसित हो रही है। अब बैंकों की नहीं बल्कि गैर-बैंकिंग संस्थाओं की जवाबदेही भी बढ़ गई है।

फिनटेक कंपनियों के सामने और भी चुनौतियां हैं। पेवर्ल्ड के सीईओ प्रवीण धाभाई का कहना है कि छोटे शहरों में डिजिटल पेमेंट लेने के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने की जरूरत है। PoS डिवाइस, QR कोड्स और इनका इस्तेमाल करने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है। सबसे बड़ी बात है, इस सिस्टम पर भरोसा बनाना। इसमें वक्त लग सकता है।

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