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भास्कर एक्सप्लेनर:नए टैक्सपेयर चार्टर में फेसलेस असेसमेंट कैसे होगा? क्या इसे लागू करने वाला पहला देश है भारत? इसका उल्लंघन किया तो क्या होगा?

2 महीने पहले
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  • 25 सितंबर यानी दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन से देशभर में फेसलेस अपील की सुविधा शुरू होगी
  • भारत से पहले अमेरिका, यूरोप और कई खाड़ी देशों में भी टैक्सपेयर चार्टर लागू है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहित करने और टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए फेसलेस असेसमेंट और टैक्सपेयर चार्टर लागू किया है। 25 सितंबर यानी दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन से पूरे देशभर में फेसलेस अपील की सुविधा भी मिलने लगेगी। साथ ही विशेष टैक्सेशन प्लेटफार्म की शुरुआत भी की है।

सबसे पहले, क्या है फेसलेस असेसमेंट?

पिछले साल वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने फेसलेस असेसमेंट का प्रस्ताव रखा था। इसका मतलब यह है कि टैक्स रिटर्न की स्क्रूटनी अब आयकर अधिकारी नहीं करेंगे बल्कि यह काम तकनीक की मदद से किया जाएगा। इसका उद्देश्य टैक्सपेयर और आयकर अधिकारी के बीच संपर्क को खत्म करना है। असेसमेंट अधिकारी को पता नहीं होगा कि वह किसका रिटर्न असेस कर रहा है। इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। टैक्सपेयर की परेशानी भी कम होगी।

फेसलेस अपील कैसे होगी?

यदि असेसमेंट अधिकारी ने टैक्सपेयर के रिटर्न में किसी तरह की खामी या गलती पकड़ी है तो वह उसे नोटिस भेज सकता है। लेकिन, यदि टैक्सपेयर को उसके खिलाफ अपील करनी है तो भी उसे किसी अधिकारी से मिलने की आवश्यकता नहीं होगी। नए सिस्टम में वह भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संभव हो जाएगा।

छापों या सर्वे को लेकर क्या कहती है नई व्यवस्था?

अब तक कोई भी आयकर अधिकारी या अधिकृत इंस्पेक्टर अपने क्षेत्र में सर्वे या छापे की कार्रवाई कर सकता था। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। इसके लिए उसे आयकर महानिदेशक (जांच) और आयकर मुख्य आयुक्त (टीडीएस) की मंजूरी लेनी होगी। दरअसल, आयकर कानून के सेक्शन 133A के तहत सर्वे होता है। इसके तहत अचानक किसी के घर में घुसकर जांच शुरू होती है। ऐसे में पूरी जवाबदेही और जिम्मेदारी से ही ऐसा किया जा सकेगा।

क्या अब भी पहले जैसे नोटिस आएंगे?

नोटिस तो आएंगे, लेकिन प्रक्रिया थोड़ी बदल गई है। साथ ही उस पर तत्काल कार्रवाई भी करनी होगी। सभी असेसमेंट ऑर्डर अब फेसलेस असेसमेंट स्कीम 2019 के जरिये नेशनल ई-असेसमेंट सेंटर से पास होंगे। बेस्ट जजमेंट असेसमेंट्स को भी फेसलेस असेसमेंट्स में शामिल कर लिया है। यदि कोई टैक्सपेयर सहयोग नहीं करता तो टैक्स अधिकारी अपने बेस्ट जजमेंट के आधार पर टैक्स असेसमेंट रैफर करता है। नगिया एंड कंपनी एलएलपी पार्टनर शैलेष कुमार का कहना है कि नई प्रक्रिया में यह पहलू महत्वपूर्ण है। टैक्सपेयर को ध्यान रखना होगा। यदि उसने ध्यान नहीं दिया तो उसका बेस्ट जजमेंट असेसमेंट में उस पर प्रतिकूल कार्रवाई करवा सकता है।

अब यह टैक्सपेयर चार्टर क्या है?

टैक्सपेयर चार्टर कोई नई बात नहीं है। अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों के साथ-साथ यूरोप और खाड़ी देशों में भी टैक्सपेयर चार्टर लागू है। इसमें टैक्स डिपार्टमेंट, टैक्सपेयर को क्या-क्या सुविधा देगा, इसका जिक्र है। साथ ही टैक्सपेयर से डिपार्टमेंट को क्या-क्या उम्मीदें हैं, यह बताया गया है।

यदि इसका उल्लंघन किया तो क्या होगा?

यह आयकर कानून के प्रावधानों के आधार पर बनाया गया है। हालांकि, चार्टर अपने आप में कोई कानून नहीं है, बल्कि एक संकल्प जैसा है। यदि आयकर विभाग के अधिकारियों ने इसका पालन नहीं किया तो उन पर कोई सजा या जुर्माना लगाने जैसा कोई प्रावधान इसमें नहीं है।

टैक्सपेयर चार्टर में आयकर विभाग ने क्या वादे किए हैं?

वैसे, जो भी वादे किए हैं, उसमें नया कुछ खास नहीं है। सिर्फ, आयकर विभाग ने बताया है कि वह टैक्सपेयर के लिए क्या-क्या करेगाः

  1. निष्पक्ष और विनम्रता का व्यवहार करेगा : टैक्सपेयर से डील करते वक्त विभाग का व्यवहार सहयोगात्मक होगा। वह एक फेसिलिटेटर के तौर पर टैक्सपेयर की मदद करेगा।
  2. टैक्सपेयर को ईमानदार मानेेगा : यह एक बड़ी बात है क्योंकि अब तक टैक्स अधिकारी यह समझकर ही काम करते थे कि टैक्सपेयर ने कोई न कोई गड़बड़ी की है। वह उसका पता लगाने की कोशिश करते थे। अब ऐसा तभी होगा जब कोई वाजिब कारण हो।
  3. अपील और रिव्यू मैकेनिज्म : आयकर विभाग ने वादा किया है कि वह टैक्सपेयर्स को रिव्यू और अपील के लिए निष्पक्ष मैकेनिज्म उपलब्ध कराएगा। साथ ही टैक्सपेयर को कानून के तहत सभी सटीक और पूरी जानकारी उपलब्ध कराएगा।
  4. निर्णय में समय का पालन होगा : विभाग आयकर की कार्यवाही से जुड़े निर्णय निश्चित समयसीमा में करेगा। कानूनन जो बनता है, उतनी ही राशि टैक्स के तौर पर वसूलेगा।
  5. टैक्सपेयर की प्राइवेसी और गोपनीयता का सम्मान : आयकर विभाग किसी भी जांच, परीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई में कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करेगा। साथ ही टैक्सपेयर की प्राइवेसी और गोपनीयता का सम्मान करेगा, जब तक कानून अन्यथा न कहें।
  6. अधिकारियों को जवाबदेह बनाएगा : विभाग अपने अधिकारियों को वाजिब ट्रेनिंग देकर उन्हें फेसिलिटेटर के तौर पर उपलब्ध कराएगा। उन्हें जवाबदेह बनाएगा।
  7. टैक्सपेयर अपना अधिकृत प्रतिनिधि चुन सकेंगे : विभाग की ओर से प्रत्येक टैक्सपेयर को अपनी पसंद का अधिकृत प्रतिनिधि चुनने का अधिकार दिया जाएगा। टैक्सेपयर किसी भी समस्या की शिकायत भी करेंगे तो उसका निराकरण निश्चित समयसीमा में होगा।
  8. निष्पक्ष सिस्टम उपलब्ध कराएगा : आयकर विभाग समयसीमा का पालन करेगा। टैक्स संबंधी सभी मुद्दों का निराकरण समय पर होगा। इसके लिए निष्पक्ष सिस्टम उपलब्ध होगा। सर्विस स्टैंडर्ड्स प्रकाशित होंगे। निश्चित पीरियड के बाद रिपोर्ट बनाई जाएगी।
  9. टैक्सपेयर का खर्च कम करेगा : आयकर विभाग इस बात पर भी ध्यान देगा कि टैक्सपेयर को कानून का पालन करने में ज्यादा खर्च न उठाना पड़े। कम्प्लायंस की लागत कम करने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

टैक्सपेयर पर भी कुछ जिम्मेदारी रहेगी क्या?

जरूर। टैक्सपेयर चार्टर में टैक्सपेयर के लिए भी कुछ जवाबदेही तय की गई है-

  1. टैक्सपेयर ईमानदारी से कम्प्लायंस करें : टैक्सपेयर को अपनी आय से संबंधित सभी जानकारी पूरी ईमानदारी से देनी होगी। उसे अपने कम्प्लायंस से जुड़े दायित्वों को पूरा करना होगा।
  2. कानून के प्रति दायित्वों की जानकारी रखें : आयकर विभाग चाहता है कि टैक्सपेयर को पता रहे कि आयकर कानून के तहत उसके क्या दायित्व हैं। यदि जरूरत पड़े तो वह इसके लिए विभाग से मदद भी मांग सकता है।
  3. रिकॉर्ड सटीक रखें : टैक्सपेयर को अपना रिकॉर्ड सटीकता के साथ रखना होगा। उसे कानून के तहत निर्धारित फॉर्मेट में अपने रिकॉर्ड रखने होंगे।
  4. प्रतिनिधि की गतिविधियां पता होना चाहिए : यदि किसी टैक्सपेयर ने अपना कोई अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त किया है तो उसे पता होना चाहिए कि उसका प्रतिनिधि क्या कर रहा है। उसकी गतिविधियां उसे पता होना चाहिए।
  5. समय सीमा का पालन करना होगा : टैक्सपेयर से उम्मीद है कि वह आयकर कानून के तहत निर्धारित सभी जानकारियों को जमा करने में समय सीमा का पालन करेगा। साथ ही समय पर टैक्स का भुगतान करेगा।

इतनी बड़ी कवायद का फायदा क्या है?

भारत में कई वर्षों से आयकर विभाग का डर बहुत ज्यादा रहा है। हर किसी को जटिलता समझ नहीं आती और नोटिस आने पर लोग घबरा जाते हैं। यह सारी कवायद टैक्स सिस्टम को सरल बनाने को लेकर है। ताकि बिना घबराए लोग स्वेच्छा से आगे आकर टैक्स जमा करें।

इसके अलावा, बजट में भी सरकार इसी बात पर जोर देती रही कि ज्यादा दस्तावेजों की जरूरत नहीं है और उसने काफी हद तक टैक्स संबंधी दस्तावेजों की आवश्यकता भी कम कर दी है। हालांकि, यह बात अलग है कि यदि आप पुरानी व्यवस्था में टैक्स जमा करते हैं तो आपको बचत होगी।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

विशेषज्ञों ने एक स्वर में इसका स्वागत किया है। लेकिन कुछ ने इसके अमल पर जरूर शंका उठाई है। क्लियर टैक्स के सीईओ अर्चित गुप्ता का कहना है कि पॉलिसी लेवल पर अच्छा कदम है। लेकिन यह टैक्स प्रशासन और टैक्स अधिकारियों के आचरण में भी झलकना चाहिए। इसके लिए टैक्स अधिकारियों को ट्रेनिंग देनी होगी। टैक्सपेयर का मददगार बनाना होगा।

इसी तरह, इंडस लॉ के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रितेश कुमार ने कहा कि अब तक फेसलेस असेसमेंट के नतीजे संतोषजनक रहे हैं। क्रिटिकल मामलों में अधिकारियों से व्यक्तिगत मुलाकात कर अपनी बात रखने का स्कोप तो है ही। टैक्स स्क्रूटनी एक्सपर्टाइज के आधार पर देना चाहिए, रैंडमाइज नहीं। इससे गैरजरूरी मुकदमेबाजी कम होगी।

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