भास्कर एक्सप्लेनर:जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन गंभीर लक्षणों से बचाने में 85% तक कारगर, अगस्त में ही मिल सकती है

3 महीने पहलेलेखक: आबिद खान

भारत को पहली सिंगल डोज वैक्सीन मिल गई है। शनिवार को अमेरिकी फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्सीन को सरकार ने इमरजेंसी यूज अप्रूवल दे दिया। ये वैक्सीन अमेरिका समेत कई देशों में इस्तेमाल हो रही है।

इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत है कि ये सिंगल डोज वैक्सीन है। इससे पहले कंपनी ने भारत में ट्रायल के लिए भी आवेदन किया था। लेकिन भारत सरकार ने प्रतिष्ठित वैक्सीन निर्माता कंपनियों को ट्रायल में छूट देने का फैसला लिया है। उसके बाद कंपनी ने सीधे इमरजेंसी यूज के लिए 5 अगस्त को अप्रूवल मांगा। दो दिन बाद ही स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस वैक्सीन के इमरजेंसी अप्रूवल देने की जानकारी दी।

आइये समझते हैं, ये वैक्सीन काम कैसे करती है? कितनी इफेक्टिव है? भारत में कब तक आ सकती है? और इस वैक्सीन की खासियत क्या है? अगर प्राइवेट तौर पर ये वैक्सीन आती है तो कितने की मिलेगी?

पहले वैक्सीन के बारे में जान लीजिए

अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने इस वैक्सीन को बनाया है। ट्रायल्स में J&J की वैक्सीन 66% इफेक्टिव साबित हुई है। भारत में प्रोडक्शन के लिए J&J ने हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल E से करार किया है। ये एक सिंगल डोज वैक्सीन है। इस वैक्सीन को WHO भी अप्रूव कर चुका है और फिलहाल 59 देशों में इसे इस्तेमाल किया जा रहा है।

कैसे काम करती है ये वैक्सीन?

जॉनसन एंड जॉनसन ने इस वैक्सीन को जैनसन (Ad26.COV2.S) नाम दिया है। ये वायरल वेक्टर वैक्सीन है। यानी कोवीशील्ड जैसी ही है। इसमें सेल तक एंटीजन को पहुंचाने के लिए एक वायरस का इस्तेमाल किया जाता है। ये वायरस खुद इतना ताकतवर नहीं होता कि आपको संक्रमित कर सके।

J&J के केस में कोरोनावायरस के जीन को एडीनोवायरस में मिलाकर बनाया गया है। ये सेल हमारे शरीर में स्पाइक प्रोटीन्स को बनाता है। यही प्रोटीन बाद में वायरस से लड़ने में इम्यून सिस्टम की मदद करते हैं। जॉनसन एंड जॉनसन ने इसी तरह इबोला की वैक्सीन भी बनाई थी।

क्या कहते हैं ट्रायल्स के नतीजे?

वैक्सीन ने अपने पहले फेज के ट्रायल अमेरिका, जापान, नीदरलैंड और बेल्जियम में किए थे। इसके बाद हर फेज में ट्रायल के दायरे को और बढ़ाया गया। तीसरे फेज में कंपनी ने 17 देशों में वैक्सीन के ट्रायल किए थे। 40 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल में वैक्सीन की ओवरऑल एफिकेसी 66% पाई गई थी। साथ ही हॉस्पिटलाइजेशन से रोकने में भी वैक्सीन 85% कारगर है। J&J वैक्सीन लेने के 4 हफ्ते बाद कोरोना से संक्रमित लोगों में किसी को भी हॉस्पिटलाइज नहीं किया गया था।

क्या कंपनी ने भारत में भी ट्रायल किए हैं?

कंपनी ने अप्रैल में भारत में क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए आवेदन किया था। लेकिन भारत सरकार ने अमेरिका, जापान,यूरोप, WHO द्वारा अप्रूव्ड और प्रतिष्ठित वैक्सीन निर्माता कंपनियों द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन को भारत में क्लिनिकल ट्रायल से छूट दी है।

इस वजह से कंपनी ने सीधे इमरजेंसी यूज के लिए आवेदन किया है। हालांकि, पहले वैक्सीन 100 लोगों को दी जाएगी और 7 दिनों तक इन लोगों की निगरानी की जाएगी। इन 7 दिनों के दौरान किसी तरह के साइड इफेक्ट न होने पर वैक्सीन सभी लोगों की दी जा सकेगी।

वैक्सीन की एफिकेसी कम है, तो क्या ये कोरोना से बचाएगी?

भारत में फिलहाल कोविशील्ड, कोवैक्सिन और स्पूतनिक अवेलबल हैं। इन तीनों वैक्सीन की एफिकेसी जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन से ज्यादा है। कंपनी का कहना है कि वैक्सीन की कम एफिकेसी के पीछे ज्यादा लोगों पर किए गए ट्रायल्स वजह हैं। कंपनी ने फेज 1 में 4, फेज 2 में 4 और फेज 3 में 3 ट्रायल किए हैं। ये ट्रायल 17 देशों में 40 हजार से भी ज्यादा लोगों पर किए गए हैं।

साथ ही कंपनी ने कहा है कि कई देशों में ऐसे समय पर ट्रायल किए गए जब वहां कोरोना केसेस पीक पर थे। इस वजह से भी वैक्सीन की एफिकेसी कम है।

हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में क्लिनिकल ट्रायल में सामने आया है कि J&J वैक्सीन डेल्टा और बीटा वैरिएंट के खिलाफ भी इफेक्टिव है। 5 लाख से भी ज्यादा हेल्थकेयर वर्कर्स पर किए गए सर्वे में पता चला है कि डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ मौत से रोकने में वैक्सीन 95% और हॉस्पिटलाइजेशन से रोकने में 71% इफेक्टिव है।

भारत में अब तक कितनी वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है?

देश में इमरजेंसी अप्रूवल पाने वाली ये 5वीं वैक्सीन है। इससे पहले कोवीशील्ड, कोवैक्सिन, स्पूतनिक-वी और मडॉर्ना की वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। कहा जा रहा है कि इस महीने के अंत तक ये वैक्सीन देश में उपलब्ध होगी।

भारत में वैक्सीन आने के बाद क्या बदलेगा?

भारत में फिलहाल वैक्सीन के 50 करोड़ डोज दिए जा चुके हैं। 28% आबादी को वैक्सीन का एक डोज और 8% आबादी पूरी तरह वैक्सनेट हो चुकी है। अगर भारत में J&J वैक्सीन आती है तो भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम को रफ्तार मिलेगी। इसके सिंगल डोज वैक्सीन होने की वजह से एक डोज के बाद ही लोग पूरी तरह वैक्सीनेट हो जाएंगे। तीसरी लहर की आशंका के बीच ये बड़ी राहत होगी।

साथ ही इस वैक्सीन को स्टोर करने के लिए एडिशनल कोल्ड सप्लाय चेन की जरूरत नहीं होगी। वैक्सीन के पैक वायल को 9 से 25 डिग्री तापमान पर 12 घंटे तक रखा जा सकता है। सामान्य तापमान पर वैक्सीन 4 घंटे तक खराब नहीं होगी।

हमें कितने डोज मिल सकते हैं?

भारत में वैक्सीन प्रोडक्शन के लिए J&J ने हैदराबाद की बायोलॉजिकल E से करार किया है। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक बायोलॉजिकल E करीब 7 करोड़ डोज हर महीने बना सकती है। यानी हमारे पास मौजूदा वैक्सीन के अलावा हर महीने 7 करोड़ डोज अतिरिक्त उपलब्ध होंगे।

वैक्सीन से जुड़े विवादों को भी जान लीजिए

अप्रैल में अमेरिका ने J&J वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। वैक्सीनेशन के बाद वहां 6 लोगों में खून के थक्के जमने की शिकायत मिली थी। इनमें से एक की मौत भी हो गई थी। उसके बाद अमेरिका ने वैक्सीन के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी। हालांकि, जांच के बाद वैक्सीन पर लगी रोक हटा ली गई थी।

हाल ही में कई लोगों में J&J के वैक्सीन देने के बाद गुलियन बेरी सिंड्रोम की शिकायतें भी मिली थीं। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम स्वस्थ तंत्रिकाओं पर हमला करता है, जिससे शरीर में कमजोरी, हाथ-पैर में झुनझुनी होने लगती है। हालांकि, वैक्सीन और इस सिंड्रोम के बीच में अभी तक कोई कनेक्शन नहीं पता चल सका है।

खबरें और भी हैं...