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भास्कर एक्सप्लेनर:लद्दाख सीमा पर 10 महीने बाद भारत-चीन के बीच डिसएंगेजमेंट समझौता; ये किसकी जीत है?

4 महीने पहले
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भारत-चीन सीमा पर 10 महीने से जारी टकराव के बीच भारतीय सेना ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें दिख रहा था कि लद्दाख में दोनों देश अपने-अपने टैंक पीछे हटा रहे हैं। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में जानकारी दी कि भारत और चीन के बीच अपनी सेनाओं को पीछे हटाने को लेकर सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने अप्रैल 2020 से पैंगॉन्ग लेक के नॉर्थ और साउथ बैंक पर जो भी कंस्ट्रक्शन किए हैं, उन्हें हटाया जाएगा और पहले की स्थिति कायम की जाएगी।

आपको याद होगा, पिछले साल चीनी सैनिकों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC पर कुछ जगहों पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की थी। इसका भारतीय सेना ने विरोध किया। इसके बाद दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। कुछ जगहों पर हिंसक झड़प भी हुई। करीब 45 साल बाद दोनों देशों के बीच खूनी संघर्ष देखने को मिला, जिसमें दोनों तरफ के कई जवान हताहत भी हुए। बाद में भारत ने LAC के पास कई चोटियों पर कब्जा कर लिया।

अब दोनों देशों ने पीछे हटने का फैसला लिया है तो इस पहल की सराहना की जानी चाहिए। हाई एल्टीट्यूड पर बर्फबारी के बीच, जहां तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता हो, वहां हालात बद से बदतर हो सकते थे। दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देशों के बीच कभी भी हिंसक संघर्ष हो सकता था।

डिसएंगेजमेंट प्रोसेस क्या है?

यह एक लंबी प्रक्रिया होती है। जब दो देशों के बीच ये तय हो जाता है कि किसी पोस्ट को खाली करना है तो स्टेप बाई स्टेप प्रोसेस आगे बढ़ती है। शुरुआत में एक देश पहले अपने एक या एक से ज्यादा बंकर हटाता है। जिसे दूसरा देश वेरिफाई करता है। इसके लिए सैटेलाइट इमेज और ड्रोन से खींची गईं तस्वीरों की मदद ली जाती है। इसके साथ ही उस जगह पर पेट्रोलिंग करके भी वेरिफाई किया जाता है कि सामने वाले ने पोस्ट खाली किया है या नहीं, लेकिन इस बार ये फैसला लिया गया है कि फिलहाल पेट्रोलिंग नहीं होगी, ताकि फिर से झड़प जैसी स्थिति पैदा ना हो।

जब एक बार वेरिफाई हो जाता है, तब दूसरे साइड से भी पहले से तय जगहों से बंकर पीछे हटाए जाते हैं। इसलिए पूरी प्रक्रिया में लंबा वक्त लगता है। इस बीच अगर कहीं कुछ अप्रिय घटना होती है तो यह प्रोसेस और लंबा हो जाता है। फिर इन विवादों को दूर करने के लिए हाई लेवल मीटिंग्स की भी जरूरत होती है।

गलवान में पेट्रोलिंग के दौरान ही बिगड़े थे हालात

पिछले साल लद्दाख की गलवान घाटी में 15-16 जून की रात को भारत-चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में हमारे 20 सैनिक शहीद हुए थे। चीन के भी 40 सैनिक मारे गए थे। इस झड़प का कारण वेरिफिकेशन पेट्रोलिंग ही था।

डिसएंगेजमेंट से किसकी जीत हुई?

दोनों में से कोई भी देश किसी भी समय युद्ध नहीं चाहता है, वो भी तब जब दुनिया एक महामारी से लड़ रही है। सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक स्तरों पर दोनों के बीच बातचीत होती रही है। इसी का नतीजा है कि चीन को पीछे हटना पड़ रहा है। ये एक तरह से भारत की जीत है, क्योंकि चीन की सेना ने कुछ जगहों पर अपनी मौजूदगी स्थापित करनी चाही थी।

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