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भास्कर डेटा स्टोरी:120 सालों में 2020 आठवां सबसे गर्म साल था; जानें बढ़ती गर्मी नौकरियों के लिए भी खतरा क्यों?

3 दिन पहले
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हम जब अपने यार-दोस्तों के साथ बैठते हैं तो उसमें कोई न कोई ऐसा जरूर होता है, जो बोलता है कि गर्मी बहुत लग रही है। आप लोगों को अक्सर ये कहते भी सुनते होंगे कि अब ठंड पड़ती ही नहीं है, पड़ती भी है तो हफ्ते-दो हफ्ते तक, उसके बाद फिर गर्मी आ जाती है।

ये बातें इसलिए, क्योंकि गर्मी वाकई बढ़ रही है। अब सर्दियों के दिन बहुत कम होते जा रहे हैं और गर्मी के दिन बढ़ते जा रहे हैं। यही वजह है कि 1901 के बाद 2020 आठवां सबसे गर्म साल था। मौसम विभाग के मुताबिक, 2020 में देश का तापमान 0.29 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। इससे पहले 2019 में तापमान 0.36 डिग्री सेल्सियस बढ़ा था।

ताज्जुब की बात ये है कि जो 8 सबसे गर्म साल रहे हैं, वो सभी 2009 से लेकर 2020 के बीच 12 सालों में दर्ज किए गए हैं। अब तक सबसे गर्म साल 2016 रहा है। उस वक्त तापमान 0.71 डिग्री सेल्सियस बढ़ा था। उसके बाद 2009 में 0.56 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ा था।

लू की वजह से सैकड़ों जानें जाती हैं

केंद्र सरकार की एक मिनिस्ट्री है, जो सभी तरह के आंकड़े रखती है। ये है मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स। इसके मुताबिक, 2019 में देश के अलग-अलग हिस्सों में 157 दिन लू चली है। जबकि, 2018 में 86 दिन लू चली थी। 2020 के आंकड़े आने अभी बाकी हैं।

गर्मी किस कदर बढ़ रही है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई हिस्सों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जा रहा है। 2020 में तो कोरोना की वजह से लॉकडाउन रहा, लेकिन 2019 में तो इतनी गर्मी पड़ी थी कि उत्तर भारत के कई इलाकों में स्कूल-कॉलेज तक बंद करने पड़ गए थे।

लू की वजह से हर साल सैकड़ों जानें भी जाती हैं। 2019 में ही देशभर में 373 लोगों की जान लू की वजह से गई। जबकि, कोल्ड वेव्स की वजह से 61 लोगों की जान गई थी। 2010 से लेकर 2019 तक इन 10 सालों में लू की वजह से 6 हजार 355 लोगों की मौत हुई है।

इतनी गर्मी की वजह क्या है?

जब भी गर्मी बढ़ने की वजह किसी से पूछी जाती है, तो उसका आमतौर पर एक ही जवाब होता है- ग्लोबल वार्मिंग, लेकिन ये पूरा सच नहीं है। हो ये रहा है कि देश के बड़े शहरों में धड़ल्ले से पेड़ काटे जा रहे हैं। इमारतों की संख्या बढ़ती जा रही है और हरियाली कम होती जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हमारे देश में कुल फॉरेस्ट कवर का एरिया 21.67% है। मतलब, सिर्फ 22% हिस्सा ही जंगल है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में फॉरेस्ट कवर बढ़ा है। 2015 में फॉरेस्ट कवर एरिया 21.34% था।

फरवरी 2020 में लोकसभा में पिछले तीन साल में काटे गए पेड़ों का आंकड़ा मांगा गया था। इसके जवाब पर्यावरण मंत्री बाबुल सुप्रियो ने दिया था। उनके मुताबिक, 2016-17 से लेकर 2018-19 तक 76 लाख से ज्यादा पेड़ काटे गए थे। सबसे ज्यादा 12.12 लाख पेड़ तेलंगाना में काटे गए थे। उसके बाद 10 लाख से ज्यादा पेड़ महाराष्ट्र में कटे थे।

पेड़ कटने की वजह से शहरों में गर्मी बढ़ रही है। ऐसे शहरों को अब अर्बन हीट आईलैंड या हीट आईलैंड कहा जाने लगा है। यही वजह है कि जब हम शहर में रहते हैं तो गर्मी महसूस होती है, लेकिन जैसे ही शहरों से बाहर निकलते हैं तो ठंडक महसूस होने लगती है।

बढ़ती गर्मी से नौकरियों को भी खतरा

2019 में इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की एक रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि गर्मी बढ़ने की वजह से 2030 तक साउथ एशिया में 4.3 करोड़ से ज्यादा नौकरियां खत्म हो जाएंगी। इसका सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा, क्योंकि 2030 तक बढ़ती गर्मी से 3.4 करोड़ लोगों की नौकरियां चली जाएंगी।

सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर होगा। ILO की रिपोर्ट के मुताबिक, मजदूरों को सुबह 10 से शाम 5 बजे तक काम करना पड़ता है। लेकिन, गर्मी की वजह से दिन में काम करना मुश्किल होगा। इससे काम के घंटों में कमी आएगी और मजदूरों की कमाई पर असर पड़ेगा।

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