भास्कर एक्सप्लेनर:पिछले हफ्ते दुनिया में आए 95 लाख कोरोना केस, भारत में मामले 120% बढ़े; जानिए कैसे ओमिक्रॉन ला रहा सुनामी?

5 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना डरावनी रफ्तार से बढ़ रहा है। इस नए वैरिएंट की वजह से दुनिया में डेली कोरोना केसेज ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ओमिक्रॉन को माइल्ड वैरिएंट समझने को लेकर WHO ने चेतावनी देते हुए कहा है कि कोरोना को कॉमन कोल्ड समझना खतरनाक साबित हो सकता है। एक नई स्टडी के मुताबिक, ओमिक्रॉन की वजह से भारत की R वैल्यू बढ़कर 4 हो गई है। इसमें फरवरी में तीसरी लहर का पीक आने का अनुमान जताया गया है।

चलिए जानते हैं कि आखिर क्यों ओमिक्रॉन को माइल्ड वैरिएंट समझना भूल है? भारत के लिए ओमिक्रॉन कितना बड़ा खतरा है और कैसे कोरोना की सुनामी ला रहा ओमिक्रॉन?

कई स्टडी में ओमिक्रॉन को माइल्ड बताया गया

अमेरिका, ब्रिटेन, और साउथ अफ्रीका की ऐसी कई स्टडीज हैं, जिनमें ओमिक्रॉन को माइल्ड यानी हल्के लक्षण वाला वैरिएंट बताया गया है। कुछ एक्सपर्ट्स तो इसे सामान्य सर्दी-जुकाम जैसा बता चुके हैं।

दिसंबर 2021 में आई कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में ओमिक्रॉन वैरिएंट में SARS-CoV-2 और कॉमन कोल्ड दोनों वायरस के जेनेटिक मटेरियल होने की संभावना जताई गई थी। इसमें कहा गया था कि ओमिक्रॉन जुकाम की तरह तेजी से तो फैलेगा, लेकिन इसके लक्षण हल्के ही होंगे।

ओमिक्रॉन को आम सर्दी-जुकाम समझना भूल

अब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने दुनिया को चेताया है कि ओमिक्रॉन को कॉमन कोल्ड समझकर हल्के में न लें। WHO की महामारी विज्ञानी डॉ. मारिया वान केरखोव ने एक ट्वीट में कहा, ''ओमिक्रोन आम सर्दी नहीं है।"

उन्होंने कहा, ''कुछ रिपोर्ट्स में डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन से कम खतरे की बात कही गई है, लेकिन अब भी कई लोग ओमिक्रॉन से संक्रमित हो रहे हैं, हॉस्पिटल में हैं और बीमार हो रहे हैं और मौतें भी हो रही हैं।''

ओमिक्रॉन को माइल्ड वैरिएंट समझना गलत

वहीं यूके के विशेषज्ञों ने भी अपनी एक स्टडी में कहा है कि ओमिक्रॉन को माइल्ड समझना ठीक नहीं है और इस वायरस के कम घातक होने का कोई संकेत नहीं है।

ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर रवींद्र गुप्ता के नेतृत्व में हुई इस स्टडी में कहा गया है कि हालांकि ओमिक्रॉन फेफड़ों में पाए जाने वाले सेल को कम प्रभावित कर रहा है, लेकिन इस वायरस के माइल्ड होने की बात सही नहीं है।

अलग-अलग वायरस से होते हैं ओमिक्रॉन और जुकाम

भले ही ओमिक्रॉन और सर्दी-जुकाम के कई लक्षण जैसे-नाक बहना, गले में खराश, खांसी और थकान एक जैसे हों, लेकिन ये दोनों एक नहीं हैं। कोविड-19 और फ्लू या सर्दी दो अलग वायरस की वजह से होते हैं।

कोविड-19 SARS-CoV-2 वायरस से होता है, जो पहली बार 2019 में सामने आया था। वहीं सामान्य सर्दी-जुकाम राइनोवायरस की वजह से होता है।

तेजी से डॉमिनेंट वैरिएंट बन रहा ओमिक्रॉन

दो महीने से भी कम समय में ओमिक्रॉन दुनिया के सर्वाधिक कोरोना संक्रमित देशों में डेल्टा की जगह लेता दिख रहा है और धीरे-धीरे डॉमिनेंट वैरिएंट बनता जा रहा है।

  • ओमिक्रॉन का पहला केस 24 नवंबर 2021 को साउथ अफ्रीका में पाया गया था।
  • डेढ़ महीन के अंदर ही ये अमेरिका, यूरोप और भारत समेत दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में फैल चुका है।
  • साउथ अफ्रीका में 90% से ज्यादा नए कोरोना केसेज ओमिक्रॉन के हैं।
  • अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस में 80% नए केसेज के लिए ओमिक्रॉन जिम्मेदार है।
  • भारत में 30 दिसंबर 2021 तक करीब 35% केसेज के लिए ओमिक्रॉन जिम्मेदार था।
  • देश में दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे मेट्रो शहरों में तो नए केसेज में से 75% मामले ओमिक्रॉन के हैं।

दुनिया में ओमिक्रॉन की वजह से आई कोरोना की सुनामी

ओमिक्रॉन की वजह से कोरोना के केसेज नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। 27 दिसंबर से 02 जनवरी के बीच दुनिया में करीब 95 लाख नए कोरोना केसेज सामने आए, जो कि इस महामारी का एक हफ्ते में सर्वाधिक केस का रिकॉर्ड है।

  • WHO के मुताबिक, 21 दिसंबर से 2 जनवरी के दौरान पिछले हफ्ते के मुकाबले दुनिया में कोरोना केसेज में 71% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस बढ़ते कोरोना केसेज के पीछे ओमिक्रॉन को ही जिम्मेदार माना जा रहा है।
  • WHO के कोविड-19 वीकली एपिडेमियोलॉजिकल अपडेट के मुताबिक, 27 दिसंबर-02 जनवरी के दौरान दुनिया में करीब 95 लाख नए कोरोना केस सामने आए, जो कि एक रिकॉर्ड हैं। हालांकि नई मौतों में 10% की कमी आई और इस दौरान 41 हजार से ज्यादा मौतें दर्ज हुईं।
  • इस दौरान दुनिया के सभी क्षेत्रों में कोरोना केसेज में बढ़ोतरी देखने को मिली, इनमें अमेरिका में सर्वाधिक 100%, साउथ ईस्ट एशिया में 78%, यूरोप में 65% और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में 40%, पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में 38% और अफ्रीकी (7%) क्षेत्रों में भी नए कोरोना केसेज में वृद्धि देखी गई।
  • इस दौरान सर्वाधिक नए केसेज यूरोप (प्रति एक लाख में 577.7 केस) और अमेरिका (प्रति एक लाख में 319.0 केस) में सामने आए। इन्हीं दोनों क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मौतें भी दर्ज हुईं।
  • इस दौरान सबसे ज्यादा केस अमेरिका (25 लाख+), ब्रिटेन (11 लाख+), फ्रांस (10 लाख+), स्पेन ( 6 लाख 49 हजार) और इटली (6 लाख 44 हजार) में दर्ज हुए।
  • जुलाई 2021 के बाद पहली बार साउथ ईस्ट एशिया क्षेत्र में नए केसेज में (78%, एक लाख 35 हजार) बढ़ोतरी दर्ज की गई।
  • इस दौरान साउथ ईस्ट एशिया में सबसे ज्यादा केसेज भारत में दर्ज हुए। 27 दिसंबर-02 जनवरी के दौरान देश में कोरोना के एक लाख 2 हजार 230 नए केस सामने आए और पिछले हफ्ते के मुकाबले में इसमें 120% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • इस क्षेत्र में सर्वाधिक मौत भी भारत में ही दर्ज हुई। इस एक हफ्ते के दौरान देश में 2088 मौतें दर्ज हुईं, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले 8% कम है।
  • इस दौरान दुनिया के सभी क्षेत्रों में मौतों की संख्या में कमी देखी गई, केवल अफ्रीका में पिछले हफ्ते नई मौत के मामले में 22% बढ़ोतरी हुई।

मौतों का आंकड़ा थोड़ा घटा, पर खतरा पूरा टला नहीं

WHO के आंकड़ों के मुताबिक 27 दिसंबर-02 जनवरी के दौरान एक हफ्ते में दुनिया में कोरोना से नई मौतों के आंकड़े में 10% की कमी आई है।

  • इसकी वजह बताते हुए WHO ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन भले ही ओमिक्रॉन के खिलाफ संक्रमण रोकने में कारगर नहीं हैं, लेकिन वैक्सीन की वजह से हॉस्पिटलाइजेशन और मौतों की संख्या में कमी आई है।
  • मौत के कम खतरे के बावजूद पिछले सभी वैरिएंट से ज्यादा तेजी से फैलने की क्षमता की वजह से ओमिक्रॉन दुनिया भर के हेल्थ सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
  • अमेरिका, यूरोप में डेली केसेज का रिकॉर्ड टूटने के बाद अब ओमिक्रॉन की वजह से भारत में भी तेजी से केसेज बढ़ रहे हैं।
  • ओमिक्रॉन के खतरे के प्रति सावधान करते हुए WHO की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने भी कहा है कि ओमिक्रॉन हेल्थ सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।
  • स्वामीनाथन ने कहा कि सरकारों को बड़ी संख्या में मरीजों की टेस्टिंग और मॉनिटरिंग के लिए सिस्टम बनाना चाहिए क्योंकि कोरोना केसेज में बढ़ोतरी अचानक और बहुत ज्यादा हो सकती है।
  • दुनिया में अब तक कोरोना के 30 करोड़ 38 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जबकि 54 लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं।

देश में संक्रमण का खतरा बढ़ा, R वैल्यू बढ़कर 4 हुई

ओमिक्रॉन की वजह से देश में कोरोना संक्रमण का खतरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह से देश में कोरोना के नए मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

  • आईआईटी मद्रास की एक नई स्टडी के मुताबिक, जनवरी के पहले हफ्ते में देश की R वैल्यू बढ़कर 4 हो गई। इससे पिछले हफ्ते (25-31 दिसंबर) के दौरान देश की R वैल्यू 2.69 थी, जोकि दूसरी लहर की R वैल्यू 1.69 से भी ज्यादा है।
  • R वैल्यू का मतलब होता है कि एक संक्रमित व्यक्ति से कितने और व्यक्तियों में संक्रमण फैल सकता है। R वैल्यू के बढ़कर 4 होने का मतलब है कि अब एक संक्रमित व्यक्ति 4 लोगों को संक्रमित कर सकता है, जबकि पहली लहर के दौरान एक संक्रमित व्यक्ति से 1.69 लोग ही संक्रमित हो रहे थे।
  • इस स्टडी के मुताबिक, 1-15 फरवरी के बीच देश में तीसरी लहर का पीक आ सकता है। इससे पहले नीति आयोग ने ओमिक्रॉन की वजह से देश में 14-15 लाख डेली कोरोना केस आने की आशंका जताई थी।
  • देश में 07 जनवरी को कोरोना के 1 लाख 41 हजार 986 नए केस दर्ज हुए। 01 जनवरी 2022 को 27 हजार 553 केस आए थे और तब से लगातार तेजी से कोरोना केसेज बढ़ रहे हैं
  • देश में अब तक ओमिक्रॉन 27 राज्यों/यूटी में फैल चुका है और इसके 3 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।
खबरें और भी हैं...