भास्कर एक्सप्लेनर:जिस DRS के फैसले ने भारत से छीनी जीत, उस 'हॉक-आई' को जानिए; क्या ब्रॉडकास्टर ने की इसमें हेरफेर?

5 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

केपटाउन में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेले जा रहे तीसरे टेस्ट के दौरान अफ्रीकी कप्तान डीन एल्गर के एक LBW फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया। DRS के इस फैसले को लेकर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली, अश्विन और केएल राहुल भड़क गए।

इस फैसले ने काफी हद तक भारत की वापसी की राहें बंद कर दीं और मैच के चौथे दिन साउथ अफ्रीका ने 7 विकेट से जीत दर्ज कर टेस्ट सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। टीम इंडिया के खिलाड़ियों की नाराजगी के बाद इस विवाद के बाद एक बार फिर से DRS चर्चा में है और इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चलिए जानते हैं कि आखिर क्या होती है DRS और हॉक-आई (Hawk Eye) तकनीक? भारत-साउथ अफ्रीका टेस्ट में क्यों उठा इस पर सवाल?

भारत-साउथ अफ्रीका टेस्ट में DRS को लेकर हुए विवाद को जानिए
यह विवाद भारत और साउथ अफ्रीका के बीच केपटाउन में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन दक्षिण अफ्रीकी पारी के 21वें ओवर में हुआ। भारत से मिले 212 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफ्रीकी टीम की पारी के 21वें ओवर की चौथी गेंद पर रविचंद्रन अश्विन की एक गेंद विपक्षी टीम के कप्तान डीन एल्गर के पैड पर लगी।

भारतीय खिलाड़ियों की अपील पर फील्ड अंपायर मरैस इरास्मस ने एल्गर को LBW आउट दे दिया। इसके खिलाफ एल्गर ने DRS ले लिया। रीप्ले में दिखा कि गेंद इन लाइन पिच हुई थी और और एल्गर के पैड के बीच में लगी थी, लेकिन बहुत ही रहस्यमय तरीके से गेंद की ट्रैजेक्टरी से दिखा कि यह लेग-स्टंप के ऊपर जा रही थी। यानी स्टंप से नहीं टकरा रही थी। इसी वजह से DRS में थर्ड अंपायर ने एल्गर को नॉट आउट करार दिया।

इस फैसले पर कप्तान कोहली समेत कई भारतीय खिलाड़ी भड़क उठे, तो वहीं फील्ड अंपायर इरास्मस भी इस फैसले से हैरान नजर आए और उन्हें स्टंप माइक पर "यह असंभव है" कहते हुए सुना गया।

कोहली, अश्विन, राहुल DRS फैसले पर भड़के
DRS में डीन एल्गर को आउट दिए जाने का फैसला बदले जाने से भारतीय कप्तान समेत कई खिलाड़ी खफा नजर आए। कोहली ने गुस्से में जमीन पर पैर पटकते हुए स्टंप माइक के पास जाकर दक्षिण अफ्रीकी ब्रॉडकास्टर को अपनी टीम के खेल पर ध्यान देने की सलाह दे डाली। कोहली ने कहा, ''केवल विपक्षी टीम पर ही नहीं, बल्कि अपनी टीम पर भी ध्यान दीजिए जब वे गेंद को चमकाते हैं। हमेशा लोगों को पकड़ने की कोशिश करते हैं।''

उपकप्तान केएल राहुल ने भी मैदान पर ही इस पर नाराजगी जताते हुए कहा, ''पूरा देश 11 (भारतीय) खिलाड़ियों के खिलाफ खेल रहा है।'' अश्विन ने तो इस टेस्ट के दक्षिण अफ्रीकी ब्रॉडकास्टर सुपरस्पोर्ट पर ही निशाना साध दिया और कहा, ''आपको जीतने के लिए बेहतर तरीका खोजना होगा सुपरस्पोर्ट।''

क्या साउथ अफ्रीका के ब्रॉडकास्टर ने बदला एल्गर का LBW का फैसला?
दरअसल, हॉक-आई एक स्वतंत्र संस्था है, और DRS के LBW से जुड़े मामले में बॉल ट्रैकिंग का वही डेटा दिखाती है जो उसे मेजबान ब्रॉडकास्टर देता है। भारत-साउथ अफ्रीका टेस्ट के मामले में वह ब्रॉडकास्टर सुपरस्पोर्ट है।

शायद यही वजह थी कि अश्विन ने साउथ अफ्रीकी ब्रॉडकास्टर सुपरस्पोर्ट के खिलाफ नाराजगी जताई। सोशल मीडिया में भी कुछ भारतीय फैंस ने भी DRS के जरिए जानबूझकर गलत फैसला देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ब्रॉडकास्टर का उद्देश्य पैसा कमाना है।

क्या है हॉक-आई तकनीक, जिसे लेकर मचा है बवाल?
हॉक-आई एक कंप्यूटर विजन सिस्टम है, जिसका प्रयोग क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल, बैडमिंटन समेत कई खेलों में बॉल की ट्रैजेक्टरी या उसका रास्ता ट्रैक करने के लिए किया जाता है।

  • क्रिकेट में DRS फैसलों में हॉक-आई का इस्तेमाल LBW फैसलों में बॉल के गेंदबाज से विकेटकीपर तक पहुंचने के दौरान की पूरी यात्रा को ट्रैक करने में होता है।
  • क्रिकेट में हॉक-आई का इस्तेमाल 2001 से किया जा रहा है। हॉक-आई सिस्टम को UK के पॉल विल्सन ने डेवलप किया है।
  • हॉक-आई में गेंद के सफर को देखने के लिए मैदान में छह अलग जगहों पर कैमरे लगाए जाते हैं। यह गेंदबाज द्वारा गेंद फेंके जाने से लेकर गेंद के डेड एंड तक पहुंचने तक के पूरे सफर को ट्रैक करता है।
  • हॉक-आई जो भी विजुअल जानकारी इकट्ठा करता है, उसे 3डी प्रोजेक्शन में परिवर्तित करके ये दिखाता है कि एक काल्पनिक पिच पर गेंद कैसे ट्रैवल करती।
  • वैसे हॉक-आई तकनीक का वास्तव में ब्रेन सर्जरी और मिसाइल ट्रैकिंग में इस्तेमाल होता है।

क्या हॉक-आई के जरिए LBW फैसले को बदला जा सकता है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हॉक-आई स्पिन, स्विंग और सीम हर तरह की पिच पर गेंद को ट्रैक करने में सक्षम है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, हॉक-आई तकनीक 99% मामलों में सटीक होती है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स का मानना है कि हॉक-आई तकनीक अभी विकसित हो रही है और यह एकदम सटीक फैसला नहीं देती है।

पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने हॉक-हाई के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि गेंद डीन एल्गर के घुटने से लगने के बाद अगर विकेट के बीच में नहीं तो गिल्लियों से जाकर जरूर लगती। स्पोर्ट स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक इंटरनेशनल अंपायर का कहना है कि DRS इंसान द्वारा संचालित किया जाता है, और इसमें सटीकता बहुत कुछ इस पर निर्भर करती है कि वह सॉफ्टवेयर को कैसे संभालता है। यानी, इसमें गलती होने की संभावना होती है।

आखिर क्या होता है DRS?
डिसीजन रिव्यू सिस्टम यानी DRS क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली एक तकनीक है, जिसका प्रयोग मैच के दौरान अंपायरों और खिलाड़ियों को फैसला लेने में मदद करने के लिए किया जाता है। मैच के दौरान DRS का प्रयोग केवल खिलाड़ी ही कर सकते हैं, जब वह ऑन फील्ड अंपायर के फैसले के रिव्यू के लिए थर्ड अंपायर से निवेदन करते हैं, तो इसे 'प्लेयर रिव्यू' कहा जाता है। वहीं जब ऑन फील्ड अंपायर कैच या रन आउट जैसे फैसले पर तीसरे अंपायर से सलाह लेता है तो, उसे 'अंपायर रिव्यू' कहा जाता है।

क्रिकेट में कब शुरू हुआ DRS का प्रयोग?
डिसीजन रिव्यू सिस्टम या DRS का पहली बार प्रयोग 23 जुलाई 2008 से शुरू हुए भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो टेस्ट के दौरान हुआ था। वनडे में DRS का पहली बार इस्तेमाल जनवरी 2011 में ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड सीरीज से और टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच अक्टूबर 2017 में हुई सीरीज के दौरान किया गया था। बाद में DRS में, स्निको-मीटर, अल्ट्राऐज और हॉक आई (Hawk Eye) जैसे टूल भी शामिल हो गए।

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