अमेरिकी सोल्जर से कम नहीं होंगे भारतीय जवान:इंडियन आर्मी को मिला F-INSAS; कैसे हमारे जवान बन जाएंगे फाइटिंग मशीन

2 महीने पहलेलेखक: प्रज्ञा भारती/कुमार ऋत्विज

बॉर्डर पर तैनात भारतीय सैनिक अब फाइटिंग मशीन में बदलने वाले हैं। सिर पर बैलिस्टिक हेलमेट, आंखों में बैलिस्टिक गॉगल्स, बॉडी पर बुलेट जैकेट, कोहनी पर एब्लो पैड, घुटने पर नी पैड्स, कानों में हेडसेट, हाथों में AK-203 ऑटोमेटिक राइफल।

75वें स्वतंत्रता दिवस के अगले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना को F-INSAS, निपुण माइंस और असॉल्ट लैंडिंग क्राफ्ट जैसे आधुनिक हथियार और इक्विपमेंट सौंपे हैं। खास बात ये है कि इन सभी को भारत में ही बनाया गया है।

भास्कर एक्सप्लेनर में भारतीय सेना को मिले इन सभी मेड इन इंडिया इक्विपमेंट्स और हथियारों के बारे में जानेंगे…

F-INSAS: हमारे सैनिक ही बन जाएंगे फाइटिंग मशीन
F-INSAS का मतलब है Future Infantry System as a Soldier; यानी भविष्य में एक सैनिक ही हथियार की तरह काम करेगा। ये पूरा सिस्टम बॉर्डर पर तैनात सैनिकों को दिया जाएगा। इनमें आधुनिक हथियार और इक्विपमेंट रहेंगे, जिनका वजन काफी कम होगा। ये हर मौसम में सभी इलाकों यानी पहाड़, रेगिस्तान, मैदान सब जगह काम आएंगे।

F-INSAS का मकसद पैदल सेना, यानी इन्फैंट्री को आधुनिक बनाना है। यह सैनिकों की ऑपरेशनल कैपेसिटी को बढ़ाएगा, यानी सैनिक दुश्मनों पर जल्दी और तेजी से हमला कर पाएंगे।

F-INSAS को भारत और रूस के साझा मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के अमेठी में बनाया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने F-INSAS के अलावा भी इंडियन आर्मी को कई आधुनिक हथियार सौंपे हैं। एक-एक करके उनके बारे में जानते हैं…

निपुण माइंसः एंटी टैंक माइंस की तरह दुश्मन सैनिकों को उड़ाने के काम आती हैं
निपुण माइंस को एंटी पर्सनल माइंस कहते हैं। DRDO ने इन्हें सॉफ्ट टारगेट ब्लास्ट म्यूनिशन नाम दिया है। ये एंटी टैंक माइंस की तरह काम करते हैं। एंटी टैंक माइंस को भारी वाहनों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। वहीं निपुण माइंस को घुसपैठियों और दुश्मन पैदल सैनिकों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा।

निपुण माइंस साइज में छोटे हैं और इन्हें ज्यादा संख्या में इंस्टॉल किया जा सकता है।
निपुण माइंस साइज में छोटे हैं और इन्हें ज्यादा संख्या में इंस्टॉल किया जा सकता है।

लैंडिंग क्रॉफ्ट असॉल्ट: एक बार में 35 लड़ाकू सैनिकों को ले जाएगा
लैंडिंग क्रॉफ्ट असॉल्ट एक तरह की नाव है। लद्दाख की पेंगौंग सो झील में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। ये एक बार में 35 लड़ाकू सैनिकों को बहुत कम समय में अपने साथ ले जा सकती है। लैंडिंग क्रॉफ्ट को गोवा की एक्वेरियस शिप यॉर्ड लिमिटेड ने बनाया है। इसकी स्पीड और क्षमता पहले की नावों के मुकाबले बेहतर है।

लैंडिंग क्रॉफ्ट असॉल्ट भारतीय नेवी में पहले से ही मौजूद हैं।
लैंडिंग क्रॉफ्ट असॉल्ट भारतीय नेवी में पहले से ही मौजूद हैं।

SRAX MK-2: आर्मी का कम्युनिकेशन ब्लॉक नहीं हो सकेगा
यह एक ऑटोमेटिक टेलीफोन एक्सचेंज है। इससे आर्मी का लाइन कम्युनिकेशन बेहतर होगा। यह पूरी तरह डिजिटल है और इसे ब्लॉक नहीं किया जा सकता। बॉर्डर वाले इलाकों में सैनिकों से बात करने के लिए यह बेहतर सिस्टम है। भारतीय सेना के पास इससे पहले जो एक्सचेंज थे, वो नए इंटरनेट प्रोटोकॉल तकनीक के साथ काम नहीं कर सकते थे।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, कोटद्वार ने सेना की लाइन कम्युनिकेशन बेहतर करने के लिए नया एक्सचेंज बनाया है।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, कोटद्वार ने सेना की लाइन कम्युनिकेशन बेहतर करने के लिए नया एक्सचेंज बनाया है।

सोलर फोटो-वोल्टिक एनर्जी प्रोजेक्ट: सूरज से एनर्जी लेकर बिजली बनाएगा
सियाचिन में बिजली के लिए अभी तक केवल कैप्टिव जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता था। इसमें ईंधन की खपत बहुत ज्यादा होती है। इससे बचने के लिए फोटो-वोल्टिक प्लांट लगाया गया है। यह सन लाइट से एनर्जी लेकर बिजली बनाएगा।

इन्फैंट्री प्रोटेक्टेड मोबिलिटी व्हीकल: पहाड़ी रास्तों के लिए मुफीद गाड़ी
यह 8x8 पहियों की गाड़ी है। इसमें 12 सैनिक एक साथ बैठ सकते हैं। पहाड़ी इलाकों में आने-जाने के लिए यह इस्तेमाल की जाएगी। इसमें ड्राइवर को 3 पेरिस्कोप्स, डिस्प्ले कैचिंग विजन, सामने और पीछे कैमरे मिलते हैं। इनके जरिए चारों तरफ से होने वाले हमलों पर बेहतर नजर रखी जा सकती है। साथ ही एक के बाद एक सीट होने से दोनों तरफ के सैनिकों को फायरिंग करने के लिए 3-3 पोर्ट मिल जाते हैं। यह भारत की उत्तरी सीमा के सैनिकों को तेजी और ज्यादा सुरक्षा देगा। इन्फैंट्री प्रोटेक्टेड मोबिलिटी व्हीकल को मेसर्स टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड ने बनाया है।

इन्फैंट्री प्रोटेक्टेड मोबिलिटी व्हीकल में सामने और पीछे कैमरे लगाए गए हैं।
इन्फैंट्री प्रोटेक्टेड मोबिलिटी व्हीकल में सामने और पीछे कैमरे लगाए गए हैं।

क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल (मीडियम): तेज और सटीक हमले में मददगार
ये 4x4 पहियों की गाड़ी है। जिससे तेज और बेहतर हमला करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह ज्यादा सुरक्षित भी है। यह माइन प्रूफ है, यानी किसी माइन के फटने पर अंदर बैठे लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा। यह 14 और 21 किलो के विस्फोटकों से भी सैनिकों की सुरक्षा करने में सक्षम है। इसमें 14 सैनिक एक साथ बैठ सकते हैं।

साथ ही यह 2 टन तक का भार अपने साथ ले जा सकती है। पहाड़ों के लिए यह एक बेहतर गाड़ी है। इसमें 10 फायरिंग पोर्ट्स हैं। क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल (मीडियम) को टाटा एरोस्पेस एंड डिफेंस ने बनाया है।

क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल (मीडियम) की छत पर 360 डिग्री यानी सभी तरफ फायरिंग करने के लिए बंदूक लगाई जा सकती है।
क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल (मीडियम) की छत पर 360 डिग्री यानी सभी तरफ फायरिंग करने के लिए बंदूक लगाई जा सकती है।

RPAS:सैन्य परीक्षण की कमियों को दूर करेगा
RPAS भारतीय वायु सेना के विमानों और मानवरहित हवाई-जहाजों में आने वाली ऑपरेशनल परेशानियों को दूर करेगा। यह पैदल सेना बटालियन (इन्फैंट्री) और मशीन यूनिट्स की निगरानी, खोज और सैन्य परीक्षण की कमियों को दूर करते हुए भारतीय सेना को सशक्त बनाएगा।

RPAS का उपयोग सैन्य मशीन यूनिट्स की निगरानी के लिए किया जाएगा।
RPAS का उपयोग सैन्य मशीन यूनिट्स की निगरानी के लिए किया जाएगा।

ऊपर बताए गए हथियारों और डिफेंस सिस्टम के अलावा टी-90 टैंक्स के लिए थर्मल इमेजिंग साइट, हाथ में पकड़ने वाले थर्मल इमेजर, फ्रीक्वेंसी हॉपिंग रेडियो और रिकॉर्डिंग की सुविधा के साथ डाउनलिंक इक्विपमेंट भी सेना को दिए गए हैं।

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