भारत अब पानी के अंदर से परमाणु हमले में सक्षम:रेंज में चीन-पाक के कई शहर

2 महीने पहलेलेखक: अनुराग आनंद

14 अक्टूबर यानी शुक्रवार को बंगाल की खाड़ी में INS अरिहंत पनडुब्बी तैनात थी। भारतीय नौसेना के अधिकारियों के ट्रिगर दबाते ही इस पनडुब्बी से K-15 SLBM मिसाइल लॉन्च हुई, जिसने 750 किलोमीटर दूर टारगेट को तबाह कर दिया। रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारत अब पानी के अंदर से भी परमाणु हमला करने में सक्षम है। इस तरह भारत दुनिया का छठा ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ देश बन गया है।

भास्कर एक्सप्लेनर में जानते हैं कि SLBM मिसाइल क्या है? इससे कैसे भारत की परमाणु क्षमता बढ़ी है? साथ ही भारत के ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ बनने के मायने को भी जानेंगे।

पानी के अंदर से छोड़े जाने वाले मिसाइल को SLBM कहते हैं
जब किसी मिसाइल को पनडुब्बी से छोड़ा जाता है तो उसे SLBM यानी सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल कहते हैं। मॉडर्न सबमरीन बैलिस्टिक मिसाइल पानी के ऊपर और पानी के अंदर दोनों जगहों से छोड़ी जा सकती है। ये मिसाइल एक साथ कई टारगेट पर हमला करने में सक्षम होती है। इसके जरिए परमाणु हमला भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं इनकी रेंज 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है।

शुक्रवार को भारत ने जिस SLBM का टेस्ट किया है, वह 750 किलोमीटर की दूरी तक अपने टारगेट को तबाह करने में सक्षम है। रक्षा मंत्रालय ने कहा किसी मिसाइल के सफल परीक्षण के 2 प्रमुख मापदंड होते हैं-

पहला: ऑपरेशनल

दूसरा: टेक्निकल

इन दोनों ही पैरामीटर्स पर ये मिसाइल सफल रही है। इसके अलावा भारत 3,500 किलोमीटर की दूरी तक टारगेट को तबाह करने वाले बैलिस्टिक मिसाइल का भी ट्रायल पूरा कर चुका है। जल्द ही इसे भी ऑपरेशनल करने की तैयारी है।

अब एक ग्राफिक्स के जरिए पानी के अंदर से छोड़े जाने वाले ‘K’ फैमिली की मिसाइल के बारे में जानिए…

5 साल में भारत ने तैयार की परमाणु मिसाइलों से लैस 3 पनडुब्बियां
भारतीय नौसेना के बेड़े में इस वक्त 3 पनडुब्बियां हैं, जिसके जरिए दुश्मन देशों पर परमाणु मिसाइल दागी जा सकती हैं। 2009 में पहली बार सांकेतिक तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी ने कारगिल विजय दिवस के मौके पर INS अरिहंत को लॉन्च किया था। इसके बाद 2016 में इसे नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। अगले 5 साल में दो और पनडुब्बियों को भारतीय नौसेना ने लॉन्च किया है।

2009 में लॉन्च करने से पहले भारत ने पनडुब्बियों को दुनिया से छिपा रखा था। 1990 में भारत सरकार ने ATV यानी एडवांस टेक्नोलॉजी वेसल प्रोग्राम शुरू किया था। इसके तहत ही इन पनडुब्बियों का निर्माण शुरू हुआ था।

अगले ग्राफिक्स में भारत के उन तीनों पनडुब्बियों के बारे में जानिए, जिससे परमाणु मिसाइल लॉन्च की जा सकती है….

इग्नीशन टेक्नोलॉजी कठिन होने की वजह से सिर्फ 6 देशों के पास है SLBM मिसाइल
पनडुब्बियों से छोड़े जाने वाली मिसाइल यानी SLBM को बनाने की टेक्नोलॉजी न सिर्फ महंगी बल्कि कठिन भी है। इस मिसाइल को बनाने में 2 सबसे बड़ी चुनौती हैं…

पहली चुनौती: कम ऊंचाई लेकिन दूर तक जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल बनाना।

दूसरी चुनौती: पनडुब्बी मिसाइल की इग्नीशन टेक्नोलॉजी का कठिन होना।

इस तस्वीर को देखकर समझ सकते हैं कि पनडुब्बी से SLBM मिसाइल को हवा के प्रेशर के जरिए लॉन्च किया जाता है। पानी की सतह पर मिसाइल के आते ही इग्नीशन प्रोसेस पूरा होता है। (सांकेतिक फोटो)
इस तस्वीर को देखकर समझ सकते हैं कि पनडुब्बी से SLBM मिसाइल को हवा के प्रेशर के जरिए लॉन्च किया जाता है। पानी की सतह पर मिसाइल के आते ही इग्नीशन प्रोसेस पूरा होता है। (सांकेतिक फोटो)

आमतौर पर लंबी दूरी की मिसाइलों की ऊंचाई काफी ज्यादा होती है, लेकिन पनडुब्बी के अंदर लगाने के लिए इसकी ऊंचाई कम होना जरूरी है। साथ ही इस पानी के अंदर मिसाइल में इग्नीशन कराना मुश्किल होता है। ऐसे में हवा के प्रेशर के जरिए मिसाइल को लॉन्च किया जाता है। पानी की सतह पर मिसाइल के आते ही इग्नीशन प्रोसेस पूरा होता है। इसी प्रोसेस की वजह से मिसाइल के पिछले हिस्से में हमें आग और धुआं नजर आता है।
दुनियाभर में भारत बना छठा न्यूक्लियर ट्रायड देश
परमाणु मिसाइलों से लैस पनडुब्बियों के नौसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद अब भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी चुनौती मिसाइल को पानी के अंदर से सफलता पूर्वक लॉन्च करना था। 14 अक्टूबर 2022 को भारत ने इस चुनौती को भी पार कर लिया है। INS अरिहंत से K-15 SLBM के सफल परीक्षण के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के अलावा दुनिया का छठा न्यूक्लियर ट्रायड देश बन गया है।
अब आसान भाषा में समझिए न्यूक्लियर ट्रायड क्या होता है?
इसे हम भारत और पाकिस्तान के उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए भारत और पाकिस्तान कश्मीर में आतंक के मुद्दे पर युद्ध की तैयारी करने लगते हैं।

परमाणु हथियारों को छोड़ दें तो सैनिक शक्ति के मामले में भारत पाकिस्तान पर काफी भारी है। यानी युद्ध हुआ तो भारत की जीत तकरीबन तय है।

ऐसे हालात में पाकिस्तान भारत पर परमाणु हमला करने का प्लान बनाने में जुट जाता है। अब सवाल ये है कि पाकिस्तान सबसे पहले क्या सोचेगा?

इसका जवाब है कि ऐसे में पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता होगी कि अगर वह परमाणु हमला करता है तो भारत भी जवाब में उस पर परमाणु हथियार इस्तेमाल करेगा। इस तरह पाकिस्तान खुद भी तबाह हो जाएगा।

ऐसे में पाकिस्तान भारत पर इतने ज्यादा परमाणु बम गिराने का प्लान बनाएगा कि भारत की जमीन पूरी तरह तबाह हो जाए और वह पाकिस्तान पर जवाबी हमला करने की स्थिति में न रहे।

इधर, भारत पहले से ऐसे किसी परमाणु हमले के जवाब में दुश्मन पर परमाणु हमला करने की क्षमता को बचाए रखने की तैयारी किए बैठा होगा। इसके दो तरीके हैं..

पहला तरीका- परमाणु बमों से लैस मिसाइल और लड़ाकू विमानों को ऐसी जगहों पर तैनात रखना जो परमाणु हमले के बावजूद पाकिस्तान को जवाब दे सकें। ऐसी जगहों में ऊंचे पर्वतीय इलाके, दूर अंडमान निकोबार जैसे द्वीप और मिसाइल छुपाकर दागने के लिए अंडरग्राउंड साइलोस यानी भूमिगत ठिकाने शामिल हैं।

दूसरा तरीका है- जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलों और विमानों से परमाणु बम गिराने की क्षमता के साथ समुद्र में युद्धपोत और पनडुब्बियों से परमाणु मिसाइल दागने की ताकत डेवलप करना है। इनमें खास ध्यान परमाणु ईंधन से चलने वाली पनडुब्बियों पर दिया जाता है, क्योंकि युद्धपोतों को तलाश कर डुबोया जा सकता है, लेकिन गहरे समुद्र में गोता लगा रही पनडुब्बी को तलाशना आसान नहीं।

इस तरह साफ है कि परमाणु हथियारों को जमीन से मिसाइलों के जरिए, हवा से लड़ाकू विमानों के जरिए और समुद्र से पनडुब्बियों के जरिए दागने की क्षमता को ही न्यूक्लियर ट्रायड कहते हैं।

K-15 SLBM लॉन्च होने के बाद अब भारत से डरेंगे दुश्मन देश
भारत यह क्षमता विकसित कर चुका है। ऐसे में पाकिस्तान के सामने हमेशा यह चिंता रहेगी कि वह भारत पर चाहे कितना बड़ा परमाणु हमला कर ले, लेकिन भारत गुपचुप तरीके से विशाल समुद्र में घूम रही अपनी पनडुब्बियों के जरिए हमेशा जवाबी परमाणु हमला करके उसे तबाह करने की स्थिति में बना रहेगा।

इस खौफ से वह कभी भारत पर परमाणु हमला नहीं करेगा। न्यूक्लियर ट्रायड के जरिए परमाणु हथियारों के इस संतुलन को ही न्यूक्लियर डेटरेंट, यानी न्यूक्लियर बचाव डेवलप करना कहते हैं। यही डेटरेंट है जिसकी वजह से अक्सर कहा जाता है कि परमाणु हथियार इस्तेमाल करने के लिए नहीं होते हैं। या परमाणु हथियार शांति बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।

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