भास्कर डाटा स्टोरी:हरियाणा के पुरुषों की औसत हाइट 2 सेमी से ज्यादा घटी, हिन्दू महिलाओं की हाइट में भी 0.10 सेमी की कमी; जानिए क्या कहती है रिसर्च

2 महीने पहलेलेखक: आबिद खान

हाइट को लेकर की गई एक स्टडी में सामने आया है कि भारतीयों की एवरेज हाइट कम हो रही है। 2005-06 से लेकर 2015-16 के दौरान भारतीयों की एवरेज हाइट में कमी आई है। भारत के उलट दूसरे देशों में लोगों की हाइट बढ़ रही है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के सेंटर ऑफ सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ ने ये स्टडी की है। इसके मुताबिक देश में वयस्क महिलाओं और पुरुषों की एवरेज हाइट घटी है। आदिवासी महिलाओं के साथ ही गरीब तबके की महिलाओं की हाइट में भी ज्यादा गिरावट आई है।

इस स्टडी में राज्य, जाति, आय और एज ग्रुप के आधार पर महिला-पुरुष की हाइट को लेकर आंकड़े जारी किए गए हैं।

आइए समझते हैं, इस स्टडी के नतीजे क्या कहते हैं? अलग-अलग राज्यों में महिला-पुरुषों के कद में क्या बदलाव आया है? धर्म के आधार पर हाइट के आंकड़े क्या कहते हैं? किस जाति की महिलाओं की हाइट में सबसे ज्यादा कमी आई है? और आखिरकार ये आंकड़े हमारे लिए चौंकाने वाले क्यों हैं...

स्टडी के नतीजे क्या कहते हैं?

  • 15-50 साल के भारतीय पुरुषों की एवरेज हाइट में गिरावट आई है। 2005-06 और 2015-16 के दौरान 15 से 25 साल के भारतीयों की एवरेज हाइट 1.10 सेंटीमीटर कम हो गई है। वहीं, 26 से 50 साल के पुरुषों की एवरेज हाइट भी 0.86 सेंटीमीटर कम हो गई है।
  • 15-25 साल की भारतीय महिलाओं की एवरेज हाइट भी कम हुई है। 2005-06 और 2015-16 के दौरान इस एज ग्रुप की महिलाओं की एवरेज हाइट में 0.12 सेंटीमीटर की गिरावट आई है।
  • 26-50 साल की महिलाओं की एवरेज हाइट में बढ़ोतरी हुई है। इस एज ग्रुप की महिलाओं की एवरेज हाइट 0.13 सेंटीमीटर बढ़ी है।

राज्यों के आंकड़े क्या कहते हैं?

सर्वे में अलग-अलग राज्यों के आधार पर भी महिला-पुरुष की हाइट की स्टडी की गई है। आंकड़े बताते हैं कि 2005-06 और 2015-16 के दौरान हरियाणा के पुरुषों की हाइट में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है, वहीं मेघालय के पुरुषों की हाइट सबसे ज्यादा बढ़ी है। इसी तरह सिक्किम की महिलाओं की हाइट सबसे ज्यादा बढ़ी है, वहीं हरियाणा की महिलाओं की हाइट में सबसे ज्यादा गिरावट आई है।

26-50 एज ग्रुप में कर्नाटक के पुरुषों की हाइट में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। कर्नाटक के पुरुषों की हाइट में 2.04 सेंटीमीटर की गिरावट आई है। हरियाणा के बाद झारखंड दूसरे नंबर पर है। झारखंड के पुरुषों की हाइट में 2 सेंटीमीटर की कमी आई है।

पारसी धर्म के पुरुषों की हाइट में सबसे ज्यादा कमी

धर्म के आधार पर हाइट के आंकड़े बताते हैं कि 2005-06 और 2015-16 के दौरान पारसी धर्म के पुरुषों की हाइट में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। दूसरे नंबर पर जैन धर्म के पुरुष हैं।

इसी तरह बौद्ध और जैन धर्म की महिलाओं को छोड़कर बाकी सभी धर्मों की महिलाओं की हाइट भी कम हुई है।

हर जाति के पुरुषों की हाइट कम हुई, SC महिलाओं की हाइट बढ़ी

स्टडी में जाति के आधार पर हाइट के आंकड़े बताते हैं कि सभी जाति के पुरुषों की हाइट में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, SC कैटेगरी की महिलाओं की हाइट बढ़ी है। 26-50 साल की महिलाओं में केवल ST कैटेगरी की महिलाओं की हाइट में गिरावट दर्ज की गई है बाकी सभी कैटेगरी की महिलाओं की हाइट बढ़ी है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 26-50 साल की SC कैटेगरी की महिलाओं में दर्ज की गई है।

हर आर्थिक वर्ग के पुरुषों की हाइट कम हुई, लेकिन महिलाओं की हाइट में बढ़ोतरी

हर आर्थिक वर्ग के पुरुषों की हाइट में गिरावट आई है। वहीं, बेहद गरीब महिलाओं को छोड़कर बाकी सभी आर्थिक वर्ग की महिलाओं की हाइट में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

ये आंकड़े सतर्क करने वाले क्यों हैं?

  • JNU में सेंटर ऑफ सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ में PhD स्कॉलर और इस स्टडी का हिस्सा रहे कृष्णा चौधरी के मुताबिक किसी भी इंसान की हाइट उसके ओवरऑल क्वालिटी ऑफ लाइफ को रिप्रजेंट करती है। यानी अगर किसी व्यक्ति की हाइट सामान्य है इसका मतलब उसे मां के गर्भ से लेकर 20-22 साल की उम्र तक अच्छा पोषण मिला है, बीमार होने पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिली हैं और बेहतर हाइजीन और सेनिटेशन के वातावरण में उसका पालन-पोषण हुआ है। यानी अगर किसी की हाइट कम है तो उसकी वजह स्टैंडर्ड ऑफ लाइफ से भी जुड़ी हो सकती है।
  • हाइट का संबंध पोषण, आय, जाति, क्षेत्र, स्वास्थ्य और कई दूसरे फैक्टर से भी होता है। गरीबी की वजह से लोगों को कम पोषण मिल पाता है जिसका सीधा-सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। यानी एक इंसान की हाइट उसके शारीरिक स्वास्थ्य और लिविंग स्टैंडर्ड को दर्शाती है। अगर भारतीयों की हाइट कम हो रही है इसका मतलब है कि पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
  • हाइट का सीधा-सीधा संबंध प्रोडक्टिविटी से भी होता है। वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि बचपन में किसी भी वजह से बच्चे की हाइट में 1% की गिरावट आगे चलकर इकोनॉमिक प्रोडक्टिविटी में 1.4% का नुकसान कर सकती है।

किस तरह की गई है ये स्टडी?

इस स्टडी को JNU में सेंटर ऑफ सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ से जुड़े प्रोफेसर्स और स्कॉलर्स ने किया है। स्टडी में 1998 से 2015 तक के दौरान किए गए तीन नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे (NFHS) के डेटा को एनालाइज किया है। इस स्टडी में 15-25 और 26-50 साल के महिला और पुरुष दोनों के डेटा को अलग-अलग पैमाने पर स्टडी किया गया है। इसके अलावा नेशनल न्यूट्रिशनल मॉनिटरिंग ब्यूरो (NNBM) के डेटा को भी स्टडी किया गया है।

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