बॉडी दिखी तो लड़कियों को उठा लेती थी मॉरैलिटी पुलिस:हिजाब सही से नहीं पहना तो मार डाला, विरोध के बाद ईरान ने खत्म किया

2 महीने पहलेलेखक: नीरज सिंह/ अनुराग आनंद

13 सितंबर 2022 का दिन था। ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत की 22 साल की महसा अमीनी एक लंबा ओवरकोट पहनकर अपने परिवार के साथ तेहरान में घूम रही थीं। परिवार जैसे ही शहीद हेगानी एक्सप्रेसवे पर पहुंचता है, मॉरैलिटी पुलिस आती है। मॉरैलिटी पुलिस अमीनी के ड्रेस को अभद्र बताते हुए उन्हें हिरासत में ले लेती है। दावा करती है अमीनी ने हिजाब को सही तरीके से नहीं पहना था। इसके बाद अमीनी को वैन से डिटेंशन सेंटर ले जाया जाता है।

डिटेंशन सेंटर ले जाते वक्त मॉरैलिटी पुलिस अमीनी के कपड़े फाड़ देती है और उन्हें मारती भी है। पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद भी अमीनी के साथ मारपीट की जाती है। इससे उसे दिखाई देना बंद हो जाता है और कुछ देर में ही वह बेहोश होकर गिर जाती हैं। 2 घंटे तक होश नहीं आने पर पुलिस उन्हें हॉस्पिटल ले जाती है। 2 दिन अमीनी कोमा में रहती हैं। 16 सितंबर 2022 को ईरान की मॉरैलिटी पुलिस की बर्बरता सामने आती है। शाम को ही अमीनी की मौत हो जाती है।

अमीनी की मौत के बाद कुर्दिस्तान से लेकर तेहरान तक में मॉरैलिटी पुलिस के विरोध में प्रदर्शन भड़क गए। अमीनी के जनाजे में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जनाजे में शामिल महिलाओं ने विरोध में अपने हिजाब उतार दिए थे। हिजाब के खिलाफ प्रोटेस्ट के दौरान कई महिलाओं ने अपने बाल तक काट दिए। लगभग 3 महीने के विरोध के बाद ईरान सरकार ने मॉरैलिटी पुलिस को खत्म करने का फैसला लिया है।

भास्कर एक्सप्लेनर में हम बताएंगे कि क्या है मॉरैलिटी पुलिस, जिसे ईरान सरकार ने खत्म कर दिया है? ईरान की महिलाएं इसका विरोध क्यों कर रही थीं?

महसा अमीनी अक्टूबर से यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू करने वाली थीं और कोर्स शुरू होने से पहले तेहरान घूमने के लिए भाई के पास गई थीं।
महसा अमीनी अक्टूबर से यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू करने वाली थीं और कोर्स शुरू होने से पहले तेहरान घूमने के लिए भाई के पास गई थीं।

सवाल-1 : क्या करती है मॉरैलिटी पुलिस, जिसे ईरान सरकार ने खत्म कर दिया है?

जवाब : ईरान की मॉरैलिटी पुलिस को ‘गश्त ए इरशाद’ नाम से जाना जाता है। ये इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े पैरामिलिट्री फोर्स बासिज के साथ मिलकर काम करती है। इसका काम ईरान के इस्लामी कानूनों और पहनावे के नियमों को सख्ती से लागू कराना है। मॉरैलिटी पुलिस यह सुनिश्चित करती है कि महिलाएं सही तरीके से हिजाब पहन रही हैं या नहीं। ऐसा नहीं करने पर मॉरैलिटी पुलिस उन पर जुर्माना लगा सकती है, गिरफ्तार कर सकती है।

नेशनल ईरानियन अमेरिकन काउंसिल में रिसर्च डायरेक्टर असल राड कहती हैं कि यदि किसी महिला ने टाइट कपड़े पहने हैं, बॉडी बहुत ज्यादा दिख रही है, आस्तीन चढ़ी हुई है या आपकी जींस फटी हुई है तो ऐसा होने पर मॉरैलिटी पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है और डिटेंशन सेंटर में डाल सकती है। हिरासत में ली गई महिलाओं को कई बार एजुकेशन एंड एडवाइस सेंटर ले जाया जाता है। यहां उन्हें हिजाब और इस्लामी मूल्यों पर लेक्चर दिया जाता है। घर से कोई सही ड्रेस लेकर आता है, तभी उन्हें छोड़ा जाता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि मॉरैलिटी पुलिस का मेन फोकस महिलाओं की ड्रेस पर होता है। किस तरह के कपड़े पहने जा सकते हैं और किस तरह के नहीं, इसे लेकर कोई खास गाइडलाइन नहीं है। इस वजह से मॉरैलिटी पुलिस के अधिकारी खुद तय कर लेते हैं कि क्या सही है और क्या नहीं। ईरान के मानवाधिकार कार्यकर्ता हदी घियामी कहते हैं कि मॉरैलिटी पुलिस लोगों की निजी जिंदगी में दखलंदाजी की तरह है।

असल राड कहती हैं कि जिस तरह महसा अमीनी ने हिजाब पहना हुआ था, लेकिन ढीला होने की वजह से उसके कुछ बाल दिख रहे थे। सिर्फ इतने भर के लिए उनके साथ इस तरह की क्रूरता की गई, इससे ईरान की महिलाएं काफी गुस्से में हैं। यह किसी के भी साथ हो सकता है, क्योंकि ज्यादातर महिलाएं हिजाब को ढीला पहनती हैं। यानी उनके बाल भी दिखते हैं। इसी वजह से ईरान में महिलाएं गुस्से में हैं।

ईरान की मॉरैलिटी पुलिस ने 2007 में बड़े स्तर पर अभियान चलाकर सही ढंग से हिजाब नहीं पहनने पर महिलाओं को जेल भेजा था।
ईरान की मॉरैलिटी पुलिस ने 2007 में बड़े स्तर पर अभियान चलाकर सही ढंग से हिजाब नहीं पहनने पर महिलाओं को जेल भेजा था।

सवाल-2 : ईरान की मॉरैलिटी पुलिस को कब बनाया गया था?

जवाब : कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल पॉलिटिक्स पढ़ाने वाले रॉक्सेन फर्मेनफर्मियन बताते हैं कि 90 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के बाद तक मॉरैलिटी पुलिस कोई अलग फोर्स नहीं थी। हालांकि ईरान में इस्लामी क्रांति की शुरुआत से ही पब्लिक प्लेस पर ड्रेस की वजह से महिलाओं का हैरेसमेंट होने लगा था। वहीं 1979 की क्रांति के बाद से महिलाओं के लिए सिर ढंकना मैंडेटरी कर दिया गया। इससे पहले शाह पहलवी के शासन में महिलाओं के कपड़ों के मामले में ईरान काफी आजाद ख्याल था।

साल 2000 के मध्य में महमूद अहमदीनेजाद के राष्ट्रपति बनने के बाद इन नियमों को और सख्ती से लागू किया जाने लगा। साल 2006 में अहमदीनेजाद के वक्त ही मॉरैलिटी पुलिस यानी गश्त-ए-इरशाद नाम की यूनिट बनाई गई। 2013 में उदारवादी हसन रूहानी के राष्ट्रपति बनने के बाद ड्रेस कोड के नियम काफी बदल गए। इस दौरान ढीले, रंगीन हेडस्कार्व्स के साथ टाइट जींस में महिलाओं का दिखना आम हो गया।

अगस्त 2021 में कट्‌टरपंथी इब्राहिम रईसी ईरान के राष्ट्रपति बनते हैं और अहमदीनेजाद के रास्ते पर चलने लगते हैं। रईसी मॉरैलिटी पुलिस की संख्या को और बढ़ाने का फैसला करते हैं। इस साल जुलाई में रईसी ने सभी इंस्टीट्यूशन में हेडस्कार्फ कानून लागू करने का आदेश दे दिया, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं ने बेपरवाह ढंग से हेडस्कार्फ और टाइट जींस पहनना जारी रखा।

इसके बाद रईसी ने मॉरैलिटी पुलिस को ऐसी महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। इसी के चलते सितंबर में महसा अमीनी के सिर का सिर्फ थोड़ा सा बाल दिखने की वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फिर हिरासत में उनकी मौत हो गई।

ईरान की मोरैलिटी पुलिस गश्त-ए-इरशाद को अमेरिका ने 23 सितंबर को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने उस वक्त कहा था कि मोरैलिटी पुलिस महसा अमीनी की मौत के लिए जिम्मेदार है।

सवाल-3 : ईरानी महिलाओं ने मॉरैलिटी पुलिस का विरोध कैसे किया?

जवाब : ईरान की महिलाएं हमेशा कानून तोड़कर ही मॉरैलिटी पुलिस का विरोध नहीं करती हैं, बल्कि कई महिलाएं अपने हर रोज की जिंदगी में भी नए तरीकों के जरिए विरोध जताती हैं। ये महिलाएं कभी हिजाब ढीला पहनती हैं तो कभी शरीर में फिट होने वाले ड्रेस पहनती हैं। कई बार गहरा लाल लिपस्टिक लगाकर भी वो अपना गुस्सा जाहिर करती हैं। हालांकि विरोध का ये तरीका जोखिम भरा भी होता है।

2017 की बात है। ईरानी महिला मासिह अलाइनजाद ने 'व्हाइट वेडनेस-डे' नाम से एक आंदोलन की शुरुआत की थी। इसके जरिए महिलाओं ने अपने हेडस्कार्व्स को हटाकर सफेद दुपट्टा दिखाकर विरोध जताया। इसके बाद ईरान सरकार ने इस महिला को देश से बाहर निकाल दिया था।

इसी साल जुलाई में एक बार फिर से महिलाओं ने ‘हिजाब-बी-हिजाब’ के नाम से एक आंदोलन की शुरुआत की। ‘गेर्शद’ नाम के एक मोबाइल ऐप के जरिए इस आंदोलन को आगे बढ़ाया गया। इस ऐप से आंदोलन में हिस्सा ले रही महिलाएं पुलिस की हर गतिविधि से अपडेट रहती थीं।

ईरान के मानवाधिकार कार्यकर्ता हदी घियामी के मुताबिक हिजाब के खिलाफ ये आंदोलन सिर्फ सांकेतिक है। ईरान के युवा अब सभी संस्थाओं और कानूनों से आजादी चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि वह इस व्यवस्था में अपना भविष्य नहीं देख पा रहे हैं। ऐसे में बदलाव सिर्फ मॉरैलिटी पुलिस को खत्म करने भर से नहीं आने वाला है।

सवाल-4 : मॉरैलिटी पुलिस पर महसा अमीनी के परिजनों ने क्या आरोप लगाए हैं?

जवाब : ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत की 22 वर्षीया महसा अमीनी की 16 सितंबर को पुलिस हिरासत में मौत हो जाती है। अमीनी को तेहरान में हिजाब से जुड़े नियमों का कथित तौर पर पालन नहीं करने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

तेहरान की मॉरैलिटी पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर बाल ढकने और ढीले कपड़े पहनने के नियम को सख्ती से लागू करने के सिलसिले में महसा को हिरासत में लिया गया था। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अमीनी को कस्टडी में लिए जाने के बाद अचानक हार्ट फेल होने की वजह से उसकी मौत हो गई।

अमीनी के पिता अमजद ने ईरानी अधिकारियों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। अमजद बताते हैं कि अमीनी का 17 साल का भाई अराश मौके पर था, जब अमीनी को पुलिस ने हिरासत में लिया। अराश ने बताया कि पुलिस ने महसा को पीटा था और उसके कपड़े फाड़ दिए थे। अराश ने अमीनी को नहीं ले जाने की गुजारिश की, लेकिन पुलिस ने उसे भी पीटा।

अमजद ने कहा कि मैंने सिक्योरिटी अफसर से बॉडी कैम का फुटेज दिखाने की मांग की, लेकिन उन्होंने कहा कि उसकी बैटरी खत्म हो गई थी। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी के समय अमीनी ने अभद्र कपड़े पहने हुए थे। वहीं अमजद ने कहा कि गिरफ्तारी के वक्त अमीनी ने ओवरकोट पहना था।

अमजद के मुताबिक, अमीनी की अटॉप्सी से जुड़ी कोई भी जानकारी परिवार को नहीं दी गई है। अमजद ने अपनी बेटी का शव तभी देखा, जब उसे दफनाने के लिए पूरी तरह से ढंक दिया गया था और केवल तलवे दिख रहे थे। महसा के तलवों पर चोट के निशान थे।

सवाल-5 : दुनिया के और किन देशों में मॉरैलिटी पुलिस जैसी व्यवस्था है?

जवाब : ईरान मॉरैलिटी पुलिस वाला इकलौता देश नहीं है। सऊदी अरब में भी ‘मुतवा’ नाम की मॉरैलिटी पुलिस है। यहां भी सेम सेक्स में संबंध बनाने और शराब पीने पर ‘मुतवा’ लोगों को पकड़कर सजा देने का काम करती है। हालांकि 2016 के बाद सऊदी अरब सरकार ने ‘मुतवा पुलिस’ के अधिकार कम कर दिए और साथ ही महिलाओं पर लगाई जाने वाली पाबंदियों में भी छूट दी।

सूडान के तानाशाह उमर अल बशीर ने भी एक मॉरैलिटी पुलिस बनाई थी। उन्होंने इस पुलिस दस्ते को दो काम सौंपे थे। पहला- महिलाओं की सभी तरह की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने और दूसरा- पुरुषों के साथ महिलाओं के ज्यादा घुलने-मिलने पर उसे पकड़कर कानून के मुताबिक सजा देने के लिए कहा गया था।

इतना ही नहीं, मलेशिया में भी धार्मिक अधिकारी रमजान उपवास के दौरान कानून और मर्यादा तोड़ने वालों के खिलाफ शरिया कोर्ट में केस चलाते हैं। कोर्ट के आदेश के आधार पर शरिया नियमों को नहीं मानने वालों को सजा दी जाती है।

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