भास्कर एक्सप्लेनरजयललिता की मौत के राज से उठा पर्दा:हॉस्पिटल के 10 कमरों पर था शशिकला के रिश्तेदारों का कब्जा; सर्जरी ही नहीं कराई

3 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय / नीरज सिंह

‘जयललिता की सर्जरी कराने की सलाह दी गई थी, लेकिन अपना मकसद हासिल करने के लिए उन्होंने दबाव में इसे टाल दिया। इस मामले की जांच होनी चाहिए।'

ये बात कही है जस्टिस ए अरुमुघसामी कमीशन की रिपोर्ट में। ये कमीशन तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए बना था। इसकी रिपोर्ट हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में पेश हुई है। इस कमीशन ने 150 गवाहों और करीब 500 पन्नों की रिपोर्ट में जयललिता की मौत को लेकर उनकी करीबी रहीं शशिकला, उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों और पूर्व हेल्थ मिनिस्टर और हेल्थ सेक्रेटरी की भूमिकाओं पर सवाल उठाते हुए इनकी जांच की सिफारिश की है।

भास्कर एक्सप्लेनर में जानते हैं कि आखिर क्यों जयललिता की मौत को लेकर उनकी सहेली रहीं शशिकला पर उठे सवाल? जयललिता की मौत हुई कैसे थी?

आखिर क्या है जयललिता की मौत से जुड़ा विवाद?

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता को 22 सितंबर 2016 को चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 75 दिन बाद 5 दिसंबर 2016 को अपोलो हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई थी।

जयललिता की भतीजी दीपा और उनके भतीजे दीपक समेत AIADMK के कई नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री की मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए थे।

जयललिता की मौत की असली तारीख को लेकर भी विवाद है। हॉस्पिटल के मुताबिक, जयललिता की मौत 5 दिसंबर 2016 को हुई थी, लेकिन एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 4 दिसंबर को ही जयललिता की मौत हो चुकी थी।

इसी मामले की जांच को लेकर 2017 में एक कमीशन बना था, जिसकी रिपोर्ट अब सामने आई है। इस कमीशन से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें जान लीजिए:

17 अगस्त 2017 को तमिलनाडु के तब के मुख्यमंत्री रहे के पलानीस्वामी ने जयललिता की मौत की वजहों की जांच के लिए एक कमीशन का गठन किया था। इस कमीशन की अध्यक्षता मद्रास हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज ए अरुमुघसामी ने की। इस मामले की सुनवाई 22 नवंबर 2017 को शुरू हुई थी। इस कमीशन ने अपनी जांच रिपोर्ट करीब 3 साल बाद तमिलनाडु सरकार को सौंपी, जो18 सितंबर 2022 को तमिलनाडु विधानसभा में पेश की गई। अरुमुघसामी कमीशन ने करीब 150 गवाहों के बयान के आधार पर अंग्रेजी में करीब 500 पेज और तमिल में 600 पेज की रिपोर्ट तैयार की।

कमीशन के सामने पेश होने वाले गवाहों में AIADMK के शीर्ष नेता ओ पन्रीरसेल्वम, जयललिता की भतीजी दीपा और भतीजे दीपक, डॉक्टर्स, टॉप अधिकारियों और AIADMK के सी विजयभास्कर (पूर्व हेल्थ मिनिस्टर), एम थंबी दुरई, सी पोन्नियिन और मनोज पांडियन शामिल थे।

जांच कमीशन ने मुख्य रूप से 6 लोगों की भूमिकाओं पर सवाल उठाया है, इनमें सबसे प्रमुख नाम है करीब तीन दशक तक जयललिता की करीबी रहीं वीके शशिकला का...

जिन लोगों पर सवाल उठे हैं, वे हैं::

  • जयललिता की करीबी सहयोगी शशिकला, जयललिता के निजी डॉक्टर केएस शिवकुमार (शशिकला के रिश्तेदार), उस समय के हेल्थ सेक्रेटरी जे. राधाकृष्णनन और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सी विजयभास्कर समेत चार लोगों के खिलाफ जांच की सिफारिश की गई है।
  • साथ ही जयललिता का इलाज करने वाले डॉक्टर वाईवीसी रेड्डी और डॉक्टर बाबू अब्राहम की भी जांच की सिफारिश की गई है।
  • अपोलो हॉस्पिटल के चेयरमैन प्रताप रेड्डी, पूर्व चीफ सेक्रेटरी राम मोहन राव और पूर्व CM पन्नीरसेल्वम की भूमिकाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं।

पहले 6 अहम किरदारों की भूमिका पर उठे सवालों को एक-एक करके जान लेते हैं:

शशिकला:

  • केवल शशिकला को ही दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के हॉस्पिटल रूम में जाने की इजाजत थी।
  • जयललिता का इलाज करने वाले सभी डॉक्टर केवल शशिकला को ही सब बातें बताते थे।
  • शशिकला ने ही जयललिता के रिश्तेदार/परिवार के सदस्य के तौर पर सभी कंसेंट फॉर्म पर साइन किए थे।
  • जयललिता के अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने शशिकला को ही उनकी बीमारियों के बारे में बताया और शशिकला के ही निर्देश पर ही इलाज शुरू हुआ।
  • जयललिता की जान बचाने के लिए डॉक्टरों की ओर से स्पष्ट सलाह दी गई थी, लेकिन शशिकला ने इसकी अनदेखी की।
  • शशिकला के रिश्तेदारों ने उस वक्त अस्पताल में 10 कमरों पर कब्जा जमाया हुआ था।

पूर्व हेल्थ मिनिस्टर सी विजयभास्कर, पूर्व हेल्थ सेक्रेटरी जे राधाकृष्णन, जयललिता के डॉक्टर शिवकुमार: ये सभी विदेशी डॉक्टरों की सलाह के बावजूद जयललिता का विदेश में इलाज कराए जाने के खिलाफ थे।

डॉक्टर वाईवीसी रेड्डी और डॉ. बाबू अब्राहम: 'डॉ. वाईवीसी रेड्डी और डॉ.बाबू अब्राहम ने पूरे समय दिवगंत मुख्यमंत्री का इलाज किया था। मुंबई, अमेरिका और ब्रिटेन से भी डॉक्टरों को बुलाया गया था और इन डॉक्टरों को जयललिता की एंजियो/सर्जरी कराने की सलाह मिली थी, लेकिन अपना मकसद हासिल करने के लिए उन्होंने दबाव में इसे टाल दिया। इस मामले में जांच होनी चाहिए।'

इन 3 लोगों पर भी सवाल उठाए गए हैं

अपोलो हॉस्पिटल के चेयरमैन सी प्रताप रेड्डी: नवंबर 2016 में जब जयललिता हॉस्पिटल में थी तो प्रताप रेड्डी ने कहा था कि जयललिता का इंफेक्शन अंडर कंट्रोल है और 'डिस्चार्ज होना उनकी मर्जी पर निर्भर करता है।' कमीशन के अनुसार, मेडिकल रिकॉर्ड्स और डॉक्टर्स से मिली जानकारी के अनुसार, 'रेड्डी के शब्द सच्चाई से कोसों दूर थे।'

कमीशन ने कहा, 'ये हैरान करने वाला है कि इतने विश्व प्रसिद्ध हॉस्पिटल के प्रमुख ने मीडिया को इतना गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया था। क्या उन पर इस तरह का झूठा बयान देने का कोई दबाव था?”

पूर्व चीफ सेक्रेटरी राम मोहन राव: कमीशन ने कहा है, 'प्रोसिजिरल पहलुओं को लेकर विभिन्न तारीखों से जुड़े 21 फॉर्म पर उनके साइन करने की भी जांच की जानी चाहिए।'

AIADMK के बागी नेता और पूर्व CM ओ पन्नीरसेल्वम

पन्नीरसेल्वम जयललिता की मौत को लेकर सवाल उठाने और जांच की मांग करने वाले पहले व्यक्ति थे, लेकिन कमीशन ने उन पर भी सवाल उठाए हैं।

कमीशन ने कहा, 'वो इनसाइडर और एक मूक दर्शक थे। वो सब जानते थे कि अपोलो हॉस्पिटल में क्या हुआ, खासतौर पर इलाज का एपिसोड। और उन्होंने धर्मयुद्ध का सहारा लिया और अपनी जगह गंवाने के बाद सीबीआई जांच की मांग की।'

दरअसल, पन्नीरसेल्वम जयललिता की मौत के बाद मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन सत्ता के खेल में दरकिनार किए जाने के बाद उन्होंने शशिकला पर हमला बोल दिया था।

मौत की घोषणा में देरी और समय में हेरफेर पर सवाल

अपोलो हॉस्पिटल के अनुसार जयललिता का निधन 5 दिसंबर 2016 को रात 11.30 बजे हुआ था, लेकिन कई गवाहों ने बताया कि जयललिता की मौत 4 दिसंबर 2016 को दोपहर 3 से 3.50 बजे के बीच हुई थी।

जस्टिस ए. अरुमुघसामी ने कहा कि अपोलो हॉस्पिटल ने यह जानते हुए भी कि जयललिता की रिकवरी की उम्मीद नहीं हैं, उनकी मौत के समय से हेरफेर किया। उन्होंने कहा कि चेस्ट कट के निशान बताते हैं कि जानबूझकर स्टर्नोटॉमी और CPR के जरिए उनकी मौत की घोषणा में देरी की गई जो साजिश की ओर इशारा करता है।

शशिकला ने 3 पेज का स्टेटमेंट जारी कर सफाई दी

शशिकला ने खुद पर लगे आरोपों से साफ इनकार किया है। शशिकला ने 3 पेज का बयान जारी कर कहा है, ‘जिनमें जयललिता से मुकाबला करने की हिम्मत नहीं थी, वे उनकी मौत पर राजनीति कर रहे हैं, लेकिन जनता ऐसी हरकतों का समर्थन नहीं करेगी।’

शशिकला ने कहा कि कमीशन के निष्कर्ष अनुमानों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, ‘अम्मा (जयललिता) के इलाज में मैंने एक बार भी दखल नहीं दिया। सब कुछ मेडिकल टीम डिसाइड कर रही थी कि कब कौन सा टेस्ट करना है और कौन सी दवा देनी है। मैं सिर्फ यह देख रही थी कि अम्मा को सबसे अच्छा ट्रीटमेंट और मेडिकल केयर मिले।’

कौन हैं शशिकला, जयललिता की सबसे करीबी, अब उनकी मौत में हाथ होने का आरोप

शशिकला का जन्म 1954 में तमिलनाडु के तंजावुर जिले के मन्नारगुड़ी में हुआ था। शशिकला का परिवार प्रभावशाली कल्लार समुदाय और जमींदार होने के बावजूद अमीर नहीं था। शशिकला की शादी 1973 में एम नटराजन से हुई थी। नटराजन तमिलनाडु सरकार में पब्लिक रिलेशन ऑफिसर थे। उनकी शादी में तब के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि शामिल हुए थे। 1976 से 1980 तक नटराजन बेरोजगार हो गए थे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा गई थी।

1980 में नटराजन तमिलनाडु के साउथ अर्कट जिले की DM वीएस चंद्रलेखा के PRO बन गए। चंद्रलेखा तमिलनाडु के तब के मुख्यमंत्री MG रामचंद्रन की करीबी मानी जाती थीं। इस पॉलिटिकल कनेक्शन की वजह से ही शशिकला की मुलाकात जयललिता से हुई, जो आगे चलकर जीवन भर की दोस्ती में बदल गई। उस समय जयललिता एक उभरती हुई स्टार और MG रामचंद्रन की करीबी थीं।

1987 में रामचंद्रन की मौत के बाद उनकी पार्टी AIADMK पर कब्जे के लिए जयललिता और रामचंद्रन की पत्नी जानकी आमने-सामने आ गए और पार्टी दो धड़े में बंट गई। रामचंद्रन के परिवार ने जयललिता को किनारे लगाने की कोशिश की। इस दौरान शशिकला जयललिता के साथ हर मोर्चे पर मजबूती से डटी रहीं।

आखिरकार 1989 में जानकी ने AIADMK पर दावा छोड़ दिया और पार्टी की कमान जयललिता के हाथों में आ गई। इसके साथ ही शशिकला और नटराजन की जयललिता के पोएज गार्डन स्थित घर ‘वेद निलयम’ में एंट्री हो गई। हालांकि, 1990 में नटराजन को जयललिता को डॉमिनेट करने की कोशिश में घर से बाहर कर दिया गया।

1991 में हुए विधानसभा चुनावों में AIADMK जीत के साथ सत्ता में आई और जयललिता पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गईं। जयललिता के मुख्यमंत्री बनने के बाद AIADMK और तमिलनाडु की राजनीति दोनों में शशिकला का कद और ताकत दोनों तेजी से बढ़े। कहा जाता है कि शशिकला उस समय इतनी पावरपुल हो गई थीं कि CM तो जयललिता थीं, लेकिन उनके सरकार के मंत्री शशिकला के ऑर्डर पर काम करते थे।

इन दोनों की रिश्तों में दरार 1995 में शशिकला के भतीजे वीएन सुधाकरन की वजह से आई। सुधाकरन को 1995 में जयललिता ने गोद लिया था। 1995 में सुधाकरन की शादी में करोड़ों रुपए खर्च हुए। इस शादी में खर्च हुए पैसों के बाद ही जयललिता और शशिकला पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। इसका असर ये हुआ कि 1996 में हुए विधानसभा चुनावों में जयललिता की AIADMK को करारी शिकस्त मिली। 1996 में जयललिता ने सुधाकरन को बेदखल कर दिया।

1996 में जयललिता ने पहली बार शशिकला से दूरी बनाने का ऐलान किया। तभी शशिकला भ्रष्टाचार के आरोपों में अरेस्ट हो गईं। 10 महीने जेल में रहने के बाद जब वह वापस लौटीं तो जयललिता और उनकी दोस्ती फिर से ट्रैक पर आ गई।

दिसंबर 2011 में जयललिता ने उनके खिलाफ साजिश रचने की खबर मिलने पर शशिकला और उनके पति नटराजन और भतीजे सुधाकरन और रिश्तेदारों समेत 13 लोगों को अपने घर और पार्टी से निकाल दिया। फिर मार्च 2012 में ही शशिकला की लिखित माफी के बाद जयललिता के घर और पार्टी में वापसी हो गई।

5 दिसंबर 2016 को जयललिता की मौत के बाद 29 दिसंबर 2016 को शशिकला को AIADMK का महासचिव चुन लिया गया। CM पद पर ताजपोशी की तैयारी में फरवरी 2017 में शशिकला को AIADMK की नेता चुन लिया गया, लेकिन 14 फरवरी 2014 को आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शशिकला को 4 साल जेल की सजा सुना दी।

जेल जाने से पहले शशिकला ने पलानीसामी को CM नियुक्त कर दिया था। पलानीसामी और अन्य मंत्रियों ने शशिकला के खिलाफ विद्रोह करते हुए सितंबर 2017 में उन्हें पार्टी से निकाल दिया। शशिकला इसके खिलाफ कोर्ट भी गईं, लेकिन सफल नहीं हुई। जनवरी 2021 में शशिकला जेल से रिहा हुईं, लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा रह गया। 2021 के विधानसभा चुनावों में AIADMK की हार हुई और DMK की सत्ता में वापसी के साथ फिलहाल मुख्यमंत्री एमके स्टालिन हैं।

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