भास्कर एक्सप्लेनर:माई लॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट में 50% महिला जज कहां से आएंगीं? 71 साल में तो सिर्फ 11 जज बनीं, जानिए देश की अदालतों में महिला जजों की स्थिति

2 महीने पहलेलेखक: जयदेव सिंह/आबिद खान

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एनवी रमन्ना ने हाल ही में कहा था कि ज्यूडिशियरी में महिलाओं को 50% आरक्षण मिलना चाहिए। इसके अलावा देशभर के लॉ कॉलेजों में भी महिलाओं को इतना ही आरक्षण मिलना चाहिए। ये महिलाओं का अधिकार है, कोई चैरिटी नहीं है।

आइए समझते हैं, अब तक सुप्रीम कोर्ट में कितनी महिलाएं जज बन चुकी हैं? हाईकोर्ट में कितनी महिलाएं चीफ जस्टिस बन चुकी हैं? देश को पहली महिला CJI कब मिलेगी? और 50% रिजर्वेशन हो गया तो क्या होगा

अब तक सुप्रीम कोर्ट में कितनी महिलाएं जज बन चुकी हैं?

भारत का संविधान लागू होने के बाद 26 जनवरी 1950 को जस्टिस हरिलाल कानिया देश के पहले चीफ जस्टिस बने। उनके साथ कुल पांच जजों की नियुक्ति हुई। तब से अब तक सुप्रीम कोर्ट में 256 जज नियुक्त हो चुके हैं, इनमें सिर्फ 11 जज महिला हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या 33 है, जिनमें केवल 4 महिलाएं हैं। जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस हिमा कोहली फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में जज हैं। इनमें से इंदिरा बनर्जी को छोड़ बाकी तीन महिला जजों की नियुक्ति हाल ही में की गई है।

मार्च 2021 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा के रिटायरमेंट के बाद जस्टिस इंदिरा बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में अकेली महिला जज थीं।

देश को पहली महिला CJI कब मिलेगी?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में जज जस्टिस बीवी नागरत्ना वरिष्ठता के आधार पर 2027 में भारत की चीफ जस्टिस बन सकती हैं। हालांकि उनका कार्यकाल केवल 36 दिनों का ही होगा। यानी देश को अपनी पहली महिला सीजेआई की नियुक्ति के लिए 2027 तक इंतजार करना होगा।

जस्टिस बीवी नागरत्ना को फरवरी 2008 में कर्नाटक हाईकोर्ट की एडिशनल जज और फिर फरवरी 2010 में परमानेंट जस्टिस के तौर पर नियुक्त किया गया था। जस्टिस नागरत्ना के पिता भी 1989 में सुप्रीम कोर्ट के 19वें चीफ जस्टिस रह चुके हैं।

हाईकोर्ट में कितनी महिलाएं चीफ जस्टिस हैं?

सरकार द्वारा सितंबर 2020 में लोकसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, देशभर के 25 हाईकोर्ट में केवल 78 महिला जज हैं। वहीं, पुरुष जजों की संख्या 1079 हैं। यानी हाईकोर्ट में केवल 7% महिला जज हैं। सबसे ज्यादा 11 महिला जज पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में हैं।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की पहली महिला जज कौन थीं?

सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज के तौर पर न्यायमूर्ति फातिमा बीबी ने 1989 में शपथ ली थी। साल 1950 में भारत के बार काउंसिल की परीक्षा को टॉप करने वाली फातिमा पहली महिला थीं।

अन्ना चांडी देश के किसी भी हाईकोर्ट की जज बनने वाली पहली महिला थीं। अन्ना ने अपने करियर की शुरुआत बतौर बैरिस्टर की थी। 1937 में केरल के दीवान सर सीपी रामास्वामी अय्यर ने चांडी को मुंसिफ के तौर पर नियुक्त किया। 1959 में अन्ना चांडी केरल हाईकोर्ट की पहली महिला जज बन गईं। केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश के पद पर जस्टिस अन्ना ने 1967 तक अपनी सेवाएं दीं।

अब तक बने कुल 256 जजों में महिला जज की संख्या 11 यानी 0.4% है। मौजूदा 33 जजों में से 4 यानी 1.2% महिला जज हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ये महिला जजों की एक वक्त में सबसे ज्यादा संख्या है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में कभी भी एक साथ दो से ज्यादा महिला जज नहीं रही हैं।

50% महिला जज होने में अड़चनें क्या हैं?

सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान के जानकार विराग गुप्ता के मुताबिक...

  • संविधान के अनुच्छेद 243-D के तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है, लेकिन न्यायपालिका में महिलाओं के लिए 50 फीसदी प्रतिनिधित्व का हक संविधान में संशोधन या फिर न्यायिक आदेश से ही हासिल हो सकता है।
  • संसद की सीटों में महिलाओं के आरक्षण पर कानून पिछले कई दशकों से लटका हुआ है, क्योंकि उसमें अन्य वर्गों के आरक्षण की मांग हो रही है। इसलिए न्यायपालिका में महिलाओं के 50 फीसदी आरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को न्यायिक आदेश पारित करना पड़ सकता है।
  • जज बनने के लिए वकील होना जरूरी है। फिलहाल क्लैट के तहत हो रही प्रवेश परीक्षा में कॉलेजों में महिलाओं के आरक्षण के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं, पर पूरे देश के सभी लॉ कॉलेजों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का कोई नियम नहीं है।
  • निचली या जिला अदालतों में राज्य न्यायिक सेवाओं में 5 फीसदी से 35 फीसदी तक आरक्षण का नियम है। बिहार में पांच साल पहले 35 फीसदी आरक्षण का कानून बना, उसके बावजूद वहां की निचली अदालतों में महिला जजों की संख्या लगभग 11.5 फीसदी ही है। दूसरी ओर गोवा और मेघालय जैसे छोटे और प्रगतिशील राज्यों में आरक्षण के बगैर महिला जजों की संख्या 65 और 73 फीसदी है।
  • निचली अदालतों से जजों का हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन होता है, लेकिन कॉलेजियम के तहत होने वाली जजों की सीधी नियुक्ति में महिलाओं के आरक्षण के लिए अभी तक कोई नियम या कानून नहीं बनने की वजह से देश की आधी आबादी का न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व बहुत कम है।

तो क्या सिर्फ भारतीय सुप्रीम कोर्ट में ऐसी स्थिति है?

नहीं, ऐसा नहीं कह सकते हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में स्थिति भारत से भी खराब है। अमेरिकी ज्यूडिशियरी सिस्टम 232 साल पुराना है। यहां के सुप्रीम कोर्ट में अब तक कुल 115 जज हुए हैं। इन 115 जजों में केवल 5 महिलाएं हैं। यानी अब तक बने कुल जजों का महज 4% जज महिलाएं हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज सांड्रा डे ओ’कॉर्नर थी। सांड्रा 1981 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुई थीं। मौजूदा नौ जजों में तीन महिला जज हैं।

पड़ोसी देश पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में अब तक एक भी महिला जज नहीं बन सकी है। हाल ही में पाकिस्तान में लाहौर हाईकोर्ट की जस्टिस आयशा मलिक को सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस बनाने की सिफारिश पाकिस्तान के चीफ जस्टिस ने की थी, लेकिन उनकी नियुक्ति का विरोध शुरू हो गया था। बाद में पाकिस्तान के ज्यूडिशियल कमीशन में उनके नाम को मंजूरी नहीं मिल सकी।

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