भास्कर एक्सप्लेनर:काढ़ा न तो कोरोना की दवा है और न ही वैक्सीन, केवल इम्यूनिटी बढ़ाता है; डॉक्टर की सलाह पर ही लें

6 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

कोरोना वायरस महामारी शुरू होने के बाद से इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए देश में काढ़ा पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। आयुष मंत्रालय से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तक महामारी के दौर में इम्यून सिस्टम को मजूबत करने के लिए काढ़े के प्रयोग की सलाह देते रहे हैं, लेकिन कई बार लोगों द्वारा काढ़े के ज्यादा प्रयोग से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी सामने आई हैं। यानी काढ़े का सही तरीके और मात्रा में इस्तेमाल करना जरूरी है। और सबसे जरूरी बात कि काढ़ा डॉक्टर की सलाह से ही लें।

चलिए जानते हैं कि क्या कोरोना से बचाने में सक्षम है काढ़ा? काढ़ा के प्रयोग से क्या सच में बढ़ती है इम्यूनिटी? कितना काढ़ा पीना चाहिए? क्या होते हैं काढ़े के उपयोग के साइड इफेक्ट?

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए होता है काढ़ा का प्रयोग

वैसे तो भारत में सदियों से ही काढ़े का प्रयोग होता आ रहा है, लेकिन कोरोना महामारी फैलने के बाद से खासतौर पर पिछले दो सालों के दौरान लोगों में काढ़े को इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में उपयोग करने का चलन तेजी से बढ़ा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने वाले उपायों के तहत काढ़े के प्रयोग की सलाह दे चुका है।

सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, ''तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, शुंठी या सोंठ (सूखी अदरक) और मुनक्का से बनी हर्बल चाय/काढ़ा दिन में एक या दो बार पिएं। अगर जरूरत लगे तो स्वाद के लिए इसमें गुड़ और ताजा नींबू का रस मिलाएं।''

आयुष मंत्रालय ने भी कोरोना से बचाव के लिए घरेलू उपायों के तहत दिन में एक या दो बार काढ़ा पीने की सलाह दी है।

कैसे बनाया जाता है काढ़ा?

'काढ़ा' (concoction) या हर्बल मिश्रण, जड़ी बूटियों और मसालों का मिश्रण होता है। काढ़ा बनाने के लिए गर्म पानी में आमतौर पर अदरक, नींबू, हल्दी, काली मिर्च, अजवाइन, गिलोय, लौंग, इलायची, शहद और चुटकी भर नमक को उबाला जाता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले काढ़े में तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, शुंठी या सोंठ (सूखी अदरक), मुनक्का, गुड़ और ताजा नींबू के रस के इस्तेमाल की सलाह दी है।

कितनी मात्रा में और कितना काढ़ा पीना है सही?

भले ही काढ़े के प्रयोग से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, लेकिन इसके अधिक प्रयोग से कई परेशानियां भी हो सकती हैं। यानी काढ़े का प्रयोग तभी लाभदायक होता है, जब इसे सही मात्रा में और सही खुराक के साथ लिया जाए।

  • स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को एक दिन में एक या दो बार ही काढ़ा पीना चाहिए।
  • काढ़े की मात्रा कितनी होनी चाहिए? इसके जवाब में एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक बार में करीब 50 mL काढ़ा पीना चाहिए।
  • इसके लिए 100 mL पानी में काढ़े में मिलाए जाने वाले पदार्थों को तब तक उबालना चाहिए जब तक ये 50 mL ही न रह जाए।
  • एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति के लिए एक दिन में एक कप या दो कप (करीब 50 से 100 mL) काढ़ा लेना ही सही होता है।
  • हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर सुबह खाली पेट काढ़े का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
  • कफ से पीड़ित लोगों के लिए काढ़े का प्रयोग ज्यादा लाभदायक होता है, क्योंकि ऐसे व्यक्तियों में वायरल इन्फेक्शन का खतरा भी ज्यादा रहता है।
  • वहीं वात और पित्त बॉडी टाइप वाले लोगों को अपने काढ़े में काली मिर्च, दालचीनी और सोंठ मिलाने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए शाम को काढ़ा पीना ज्यादा अच्छा माना जाता है।

क्या काढ़े से वाकई मजबूत होता है इम्यून सिस्टम?

कोरोना से बचाव के उपायों के तहत इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय भी काढ़े के उपयोग की सलाह दे चुके हैं।

हर्बल टी या काढ़ा को इम्यूनिटी मजबूत करने के नेचुरल उपायों में से एक माना जाता है। काढ़े के उपयोग से सामान्य सर्दी, जुकाम और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में मदद मिलती हैं।

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) की 2015 में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक,काढ़ा जैसे हर्बल उपाय शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं, जो शरीर को संक्रामक वायरस से लड़ने में मदद कर सकते हैं।

क्या काढ़ा पीने से होते हैं साइड इफेक्ट?

वैसे तो काढ़ा आमतौर पर इम्यून सिस्टम मजबूत करता है, लेकिन अगर इसे ज्यादा मात्रा में लिया जाए या अधिक बार प्रयोग किया जाए तो इसके कई साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।

देश में अप्रलै-मई 2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लोगों में काढ़ा पीने का क्रेज काफी बढ़ गया था। इसका नतीजा ये हुआ कि कई लोगों में ज्यादा काढ़ा पीने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आईं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी लहर के दौरान सैकड़ों ऐसे मामले सामने आए, जब ज्यादा काढ़ा पीने की वजह से लोगों को अपच, डायरिया और एनल फिशर जैसी समस्याएं हुईं। ये समस्याएं कोविड से संक्रमित हो चुके और इससे संक्रमित नहीं, दोनों तरह के लोगों में दिखीं।

  • हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि काढ़े के ज्यादा प्रयोग से व्यक्ति में हाइपरएसिडिटी, पेट और आंत में जलन और दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • साथ ही काढ़ा का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने पर कब्ज और दस्त की समस्या भी हो सकती है।
  • ज्यादा काढ़ा पीने से पेट में अल्सर या मुंह में छाले होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
  • दरअसल, काढ़े को बनाने में प्रयोग की जाने वाली सामग्री से शरीर में काफी गर्मी पैदा होती है।
  • काढ़े के ज्यादा प्रयोग से ये पेट और आंतों पर असर पड़ता है, जिससे अपच, डायरिया और गैस की समस्याएं होती हैं, जो धीरे-धीरे एनल फिशर बन जाती है।
  • एनल फिशर एक गुदा संबंधी समस्या, जो गुदा की पतली, नाजुक परत में एक घाव या उसका फटना है।

कैसे जानें कि काढ़ा पीना कर रहा नुकसान?

काढ़े के फायदे के लिए इसका सही मात्रा में उपयोग जरूरी है, लेकिन अगर काढ़े के ज्यादा प्रयोग से आपके शरीर को नुकसान पहुंच रहा है तो इसके कई साइड इफेक्ट नजर आने लगते हैं।

चलिए जानते हैं कि कैसे जानें कि काढ़ा आपको फायदे की जगह नुकसान कर रहा है?

-नाक से खून बहना

- मुंह में छाले निकलना।

- बहुत ज्यादा एसिडिटी होना।

- अपच या बदहजमी होना।

- पेशाब में समस्या होना।

अगर आपको काढ़ा पीने की वजह से इनमें से कोई भी समस्या दिखाई दे, तो तुरंत ही काढ़ा पीना बंद करें और डॉक्टर की सलाह लें।

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