नाबालिग गर्लफ्रेंड से संबंध बनाने वाला प्रेमी बरी:हाईकोर्ट ने क्यों कहा कि सहमति की उम्र पर फिर से विचार हो

3 महीने पहलेलेखक: अनुराग आनंद

सबसे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट की टिप्पणी को पढ़िए…
‘16 साल की नाबालिग लड़कियों के प्यार करने और प्रेमी के साथ यौन संबंध बनाने से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में हमारा मानना है कि ‘लॉ कमीशन’ को सेक्स के लिए सहमति की उम्र पर एक बार फिर से विचार करना चाहिए। हमें सोचना होगा कि 16 साल और उससे ज्यादा उम्र की लड़कियों के साथ उनकी सहमति से संबंध बनाना क्या अब भी कोई अपराध है?’

5 नवंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट में 2 जजों की बेंच ने एक मामले में ये बातें कहीं। इस टिप्पणी के साथ ही नाबालिग लड़की से यौन संबंध बनाने वाले उसके प्रेमी को कोर्ट ने बरी कर दिया।

भास्कर एक्सप्लेनर में जानते हैं कि नाबालिग लड़कियों को लेकर की गई हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के मायने क्या हैं?
5 साल पहले के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
साल 2017 की बात है। 17 साल की रिहाना (बदला हुआ नाम) अपने प्रेमी अजहर (बदला हुआ नाम) के साथ फरार हो गई थी। दोनों ने एक दूसरे से शादी रचाई और कुछ दिनों के बाद ही रिहाना गर्भवती हो गई। लड़की की मां और पिता ने लड़के के खिलाफ तीन धाराओं में केस दर्ज कराया जो इस तरह है…

1. IPC की धारा 376(2) (j): इस मामले में केस दर्ज तब होता है जब नाबालिग के साथ यौन प्रताड़ना से उसके शरीर को नुकसान पहुंचता है।

2. POCSO अधिनियम की धारा 5(1): स्कूल या सामूहिक जगह पर किसी नाबालिग के साथ लैंगिक हमला करने पर इस धारा के तहत केस दर्ज किया जाता है।

3. POCSO अधिनियम की धारा 6: नाबालिग का यौन शोषण करने वालों के दोषी साबित होने पर इस धारा के तहत 10 साल या आजीवन जेल की सजा हो सकती है।

इस मामले में गवाह के मुकरने की वजह से निचली अदालत ने लड़के को बरी कर दिया था। इसके बाद निचली अदालत के फैसले को लड़की के घरवालों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अब 5 साल बाद 7 नवंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट में जस्टिस सूरज गोविंदराज और जस्टिस जी. बसवराज की पीठ ने भी नाबालिग लड़की से संबंध बनाने वाले उसके प्रेमी को बरी कर दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने कानून संबंधी विषयों पर सुझाव देने वाली सबसे बड़ी संस्था ‘लॉ कमीशन’ को सेक्स के लिए सहमति की उम्र पर फिर से विचार करने के लिए कहा है।

अब बात पॉक्सो एक्ट की हुई है तो एक स्लाइड में इसके बारे में जान भी लीजिए…

18 साल से कम उम्र की लड़की की सहमति से भी संबंध बनाना है अपराध
भारत में 18 साल से कम उम्र की लड़की को कानूनी तौर पर नाबालिग माना गया है। यही वजह है कि 18 से कम उम्र की लड़कियों की शादी कानूनी रूप से अपराध है।

इतना ही नहीं नाबालिग लड़कियों की सहमति से सेक्स करना भी पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत अपराध माना गया है। साथ ही बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के मुताबिक 18 साल से कम उम्र में शादी कानूनी रूप से अपराध है। इतना ही नहीं जबरन इस तरह की शादी कराने वाले लोग भी अपराधी हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि 18 साल से पहले लड़कियां शारीरिक और मानसिक तौर पर मैच्योर नहीं हो पाती हैं। ऐसे में वह खुद को लेकर सही और गलत का फैसला नहीं कर सकती हैं।

रिहाना और उसके प्रेमी अजहर के मामले में भी लड़की की उम्र 17 साल थी, जिसकी वजह से उसके माता-पिता ने पॉक्सो एक्ट के तहत लड़के के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

नाबालिग से संबंध बनाने के बावजूद किस आधार पर मिली जमानत?
रिहाना नाबालिग थी। ऐसे में उसके साथ संबंध बनाने वाला प्रेमी पॉक्सो एक्ट के तहत अपराधी था। इसके बावजूद निचली अदालत और फिर हाईकोर्ट से उसे कैसे बरी कर दिया गया?

इस सवाल का जवाब उन तीन बातों से मिलता है, जिसको आधार मानते हुए संभव है कि कोर्ट ने आरोपी लड़के को बरी किया….

पहली बात: आरोपी लड़के के वकील ने कहा कि रिहाना और उसके प्रेमी अजहर ने शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत की है। इसके मुताबिक प्यूबर्टी ऐज यानी पीरियड्स शुरू होने के बाद 15 से 16 साल की उम्र में लड़की निकाह योग्य हो जाती है।

दूसरी बात: लाइव लॉ के मुताबिक इस मामले में सभी गवाह मुकर गए।

तीसरी बात: लड़की ने स्वेच्छा से प्रेमी के साथ भागकर मुस्लिम धर्म से जुड़े कानून के आधार पर शादी करने की बात कही।

अब बात ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ की हुई है तो आगे बढ़ने से पहले इसके बारे में जान लीजिए…

भारत में अलग-अलग धर्मों के लड़के-लड़कियों के शादी की उम्र को लेकर क्या कानून हैं, इस पर एक्सपर्ट की राय जानते हैं….

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और संविधान विशेषज्ञ विराग गुप्ता का कहना है कि भारत में अलग-अलग धर्म के लड़के-लड़कियों की शादी के लिए मुख्यत: 3 तरह के कानून हैं…

पहला: हिन्दुओं के लिए हिन्दू विवाह कानून 1955 है। इस कानून के सेक्शन 2, (1) (बी) के तहत जैन, बौद्ध और सिख धर्म की भी शादियां होती हैं। इस कानून के सेक्शन 5 (iii) के मुताबिक शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल होनी चाहिए। इसके अलावा सिखों की शादी आनंद कारज विवाह अधिनियम 2012 के तहत भी होती है। यानी लड़कियां 18 साल की उम्र में बालिग होती हैं।

दूसरा: ईसाइयों की शादी के लिए क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872 है। इस कानून के मुताबिक भी शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल होनी चाहिए। साफ है कि इस कानून में भी लड़कियों के बालिग होने की उम्र 18 साल मानी गई है।

तीसरा: स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 है। इसके तहत दो धर्मों या किसी भी धर्म के लोग अपनी शादी रजिस्टर करा सकते हैं। इस कानून के मुताबिक भी शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल होनी चाहिए।

इसके अलावा मुस्लिम लड़के-लड़कियों की शादी उनके मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होती है, जिसके बारे में संसद से कानून नहीं बना है। इसमें प्यूबर्टी 15 साल के बाद ही लड़कियों को बालिग मान लिया जाता है।

11 साल की फूलमनि की मौत के बाद भारत में बना ‘एज ऑफ कंसेंट एक्ट’
131 साल पहले 1891 में 11 साल की लड़की फूलमनि के साथ उसके पति ने जबरन संबंध बनाए, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद भारत में पहली बार इसी साल सहमति से सेक्स के लिए ‘एज ऑफ कंसेंट एक्ट- 1891’ बना था।

अंग्रेजी शासन ने लड़की के साथ सहमति से सेक्स की न्यूनतम उम्र 10 साल से बढ़ाकर 12 साल कर दी थी। जिसे लेकर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक समेत कई स्वतंत्रता सेनानी विरोध में जुट गए। उनका तर्क था कि ये नया कानून हिंदू धर्म की परंपरा के खिलाफ है, क्योंकि शादी तो रजस्वला होने से पहले ही होनी चाहिए।

अब जानिए दुनिया में कब पहली बार ‘यौन सहमति ’ यानी ‘एज ऑफ कसेंट’को लेकर कानून बना….

भारत में पहले भी सामने आया है इस तरह का मामला
नाबालिग लड़की से शादी करके संबंध बनाने का मामला पहले भी कोर्ट में पहुंचा है। आज ऐसे ही 2 मामलों के बारे में जानते हैं…

1. 2012 में नाबालिग प्रेमिका से भागकर शादी करने का एक मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था। इस मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि 18 साल से कम उम्र की लड़की या 21 साल से कम उम्र के पुरुष के साथ हुआ विवाह उनके नाबालिग रहने तक अवैध रहेगा। हालांकि, उनके नाबालिग होने तक कोई याचिका ना दायर करने पर यह वैध हो जाएगा।

2. 20 सितंबर 2021 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जस्टिस रितु बाहरी और जज जस्टिस अरुण मोंगा ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर नाबालिग लड़की से शादी की जाती है, तो यह शादी नाबालिग के 18 साल की उम्र तक अवैध रहेगी। लेकिन अगर लड़की द्वारा 18 साल तक कोई याचिका नहीं डाली गई, तो यह शादी वैध हो जाएगी।

दरअसल, हाईकोर्ट ने लुधियाना कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ यह फैसला सुनाया था, जिसमें कपल ने फरवरी 2009 में शादी की थी। लुधियाना कोर्ट ने कपल की तलाक की अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनकी शादी वैध नहीं है, क्योंकि शादी के वक्त महिला नाबालिग थी।

अब आखिर में जान लीजिए सहमति से यौन संबंध की उम्र दुनिया के किस देश में कितनी है?

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