लंपी वायरस ने देश में ली 17,000 गायों की जान:रोजाना 1 लाख लीटर दूध का प्रोडक्शन घटा, तेज बुखार और शरीर पर गांठों से मर जाते हैं जानवर

एक महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय

भारत में पिछले एक महीने के दौरान लंपी स्किन डिजीज की वजह से करीब 17 हजार से ज्यादा पालतू पशुओं की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर गायें हैं। ये जानलेवा वायरस से गुजरात, राजस्थान और पंजाब समेत देश के 8 राज्यों में मवेशियों की जान ले रहा है। लंपी वायरस की वजह से अकेले गुजरात में रोज करीब एक लाख लीटर दूध का प्रोडक्शन घट गया है।

भास्कर एक्सप्लेनर में लंपी स्किन डिजीज यानी LSD से जुड़े 10 सवालों के जवाब जानिए…

आगे बढ़ने से पहले चलिए एक पोल में हिस्सा लेते हैं-

सवाल 1: लंपी स्किन डिजीज या LSD क्या है?

जवाब: लंपी स्किन डिजीज गायों-भैंसों जैसे मवेशियों में कैप्रिपॉक्स नाम के वायरस से फैलने वाली बीमारी है। ये बहुत तेजी से एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। यह वायरस बकरियों में होने वाले गोट पॉक्स और भेड़ों में होने वाले शीप पॉक्स जैसी वायरल इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार वायरस जैसा ही है। कैप्रिपॉक्स उसी पॉक्सविरिडे वायरस फैमिली से आता है, जिससे स्मॉलपॉक्स यानी चेचक और मंकीपॉक्स जैसी बीमारियां होती हैं।

सवाल 2: लंपी वायरस कितना खतरनाक है?

जवाब: हेल्थ एक्सपर्ट्स लंपी को दुनिया भर के मवेशियों के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं। इससे गायें ज्यादा बीमार होती हैं। हालांकि इससे भैंसें, घोड़े, ऊंट, जिराफ और हिरण भी बीमार पड़ सकते हैं। इस वायरस से भैंसों के मुकाबले गायों की मौत ज्यादा होती है क्योंकि भैसों की नैचुरल इम्युनिटी गायों से ज्यादा होती है।

लंपी वायरस से संक्रमित गायों के पूरे शरीर पर गांठें पड़ जाती हैं, जो कई बार घावों में बदल जाती हैं। इन घावों का इलाज न करने पर दूसरा इंफेक्शन होने का खतरा रहता है, जो कई बार जानलेवा साबित होता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
लंपी वायरस से संक्रमित गायों के पूरे शरीर पर गांठें पड़ जाती हैं, जो कई बार घावों में बदल जाती हैं। इन घावों का इलाज न करने पर दूसरा इंफेक्शन होने का खतरा रहता है, जो कई बार जानलेवा साबित होता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सवाल 3: आखिर कैसे फैलता है LSD?

जवाब: लंपी एक संक्रामक बीमारी है। UN फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गेनाइजेशन यानी FAO के अनुसार, लंपी बीमारी मच्छर, मक्खियों, जूं और पिस्सू जैसे जीवों के जरिए फैलने वाली एक चेचक जैसी बीमारी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये बीमारी जानवरों के एक जगह से दूसरी जगह मूवमेंट से भी फैलती है। ये बारिश में तेजी से फैलता है।

सवाल 4: लंपी बीमारी के लक्षण और इसका असर क्या है?

जवाब: तेज बुखार और शरीर पर गांठें होना इस बीमारी के सबसे बड़े लक्षण हैं। बीमार पशुओं में बांझपन हो सकता है और इससे उनकी दूध उत्पादन क्षमता भी घट जाती है।

संक्रमित मवेशी में ये लक्षण कैसे सामने आते हैं, चलिए समझते हैं…

  • इंफेक्शन होने के बाद लक्षण दिखने में 4-7 दिन का समय लगता है। इसे इन्क्यूबेशन पीरियड कहते हैं।
  • शुरुआत में गायों या भैसों की नाक बहने लगती है, आंखों से पानी बहता है और मुंह से लार गिरने लगती है।
  • इसके बाद तेज बुखार हो जाता है, जो करीब एक हफ्ते तक बना रह सकता है।
  • फिर जानवर के शरीर पर 10-50 मिमी गोलाई वाली गांठें निकल आती हैं। साथ ही उसके शरीर में सूजन भी आ जाती है।
  • जानवर खाना बंद कर देता है, क्योंकि उसे चबाने और निगलने में परेशानी होने लगती है। इससे दूध का प्रोडक्शन घट जाता है।
  • ज्यादा दूध देने वाली वाली गायों पर लंपी का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि उनकी शारीरिक और मानसिक ताकत दूध उत्पादन में लग जाती है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं।
  • कई बार लंपी पीड़ित गायों की एक या दोनों आंखों में गहरे घाव हो जाते हैं, जिससे उनके अंधे होने का खतरा रहता है।
  • कई बार चेचक के घाव पूरे पाचन, श्वसन और शरीर के लगभग सभी आंतरिक अंगों में हो जाते हैं।
  • जानवरों में बांझपन और गर्भपात की समस्या नजर आती है। जानवर बहुत कमजोर हो जाता है।
  • ये लक्षण 5 हफ्ते तक बने रहते हैं। इलाज न होने पर मौत भी हो सकती है।
  • लंपी संक्रमित मवेशियों को ठीक होने में दो हफ्ते से एक महीने तक का समय लगता है।
  • वहीं इस बीमारी से गंभीर रूप से संक्रमित मवेशी के वायरस से पूरी तरह उबरने में करीब 6 महीने तक लग जाते हैं।

सवाल 5: लंपी वायरस से मौत होने की संभावना कितनी है?

जवाब: एक पशु से दूसरे पशु में लंपी वायरस फैलने की दर 45% है, लेकिन मौत की दर 5 से 10% है। वर्ल्ड आर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ यानी WOAH के अनुसार इस बीमारी में मृत्यु दर 5% तक है। FAO के अनुसार, लंपी से मौत की दर 10% से कम होती है।

सवाल 6: क्या इंसानों में फैल सकता है लंपी?

जवाब: नहीं। लंपी वायरस जानवरों से इंसानों में फैलने वाला वायरस यानी जूनोटिक नहीं है।

सवाल 7: क्या लंपी संक्रमित जानवर का दूध पीना सुरक्षित है?

जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे दूध को 100 डिग्री सेंटीग्रेड तक गरम करने यानी अच्छी तरह उबालने से उसमें मौजूद वायरस खत्म हो जाते हैं। अभी तक लंपी से संक्रमित पशु का दूध पीने से इंसानों के बीमार होने का कोई मामला सामने नहीं आया है।

ये तस्वीर लंपी बीमारी से संक्रमित राजस्थान की एक गाय की है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, संभव है कि भारत में लंपी पड़ोसी देशों से मवेशियों के देश में आने से फैला हो। पाकिस्तान में पिछले कई महीनों से लंपी फैला है। सिंध प्रांत में 52 हजार से ज्यादा गायें लंपी से संक्रमित हैं और 570 से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है।
ये तस्वीर लंपी बीमारी से संक्रमित राजस्थान की एक गाय की है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, संभव है कि भारत में लंपी पड़ोसी देशों से मवेशियों के देश में आने से फैला हो। पाकिस्तान में पिछले कई महीनों से लंपी फैला है। सिंध प्रांत में 52 हजार से ज्यादा गायें लंपी से संक्रमित हैं और 570 से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है।

सवाल 8: लंपी का इलाज क्या है?

जवाब: इसके लिए कोई खास एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। इसे फैलने से रोकने का एकमात्र उपाय संक्रमित गाय-भैंस को कम से कम 28 दिन के लिए आइसोलेट करना है। इस दौरान उनके लक्षणों का इलाज होते रहना चाहिए।

सबसे ज्यादा ध्यान शरीर पर होने वाली गांठों का रखना चाहिए, क्योंकि इससे दूसरे इंफेक्शन और निमोनिया हो सकता है। संक्रमित जानवरों की भूख बनाए रखने के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी पेनकिलर्स जैसे पैरासिटामॉल का इस्तेमाल किया जाता है।

सवाल 9: भारत में लंपी को कैसे कंट्रोल किया जा रहा है?

जवाब: भारत में फिलहाल लंपी से सुरक्षा के लिए गोट पॉक्स-वायरस वैक्सीन लगाई जा रही है। नेशनल डेयरी डेवलेपमेंट बोर्ड ने लंपी से बचाव के लिए गुजरात, राजस्थान और पंजाब को गोट पॉक्स वैक्सीन की 28 लाख डोज भेजी हैं।

केंद्र सरकार ने लंपी के लिए लंपी-प्रोबैकएंड नाम से एक नई स्वदेशी वैक्सीन लॉन्च की है। इसे इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च यानी ICAR की हिसार और बरेली यूनिट ने विकसित किया है।

आमतौर पर ज्यादा दूध देने वाले और पतली चमड़ी वाले यूरोपीय मवेशियों की नस्लें लंपी से ज्यादा प्रभावित होती हैं। इसकी तुलना में मोटी स्किन वाले स्वदेशी अफ्रीकी और एशियाई मवेशी इससे कम संक्रमित होते हैं। इन मवेशियों को वायरस के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी माना जाता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
आमतौर पर ज्यादा दूध देने वाले और पतली चमड़ी वाले यूरोपीय मवेशियों की नस्लें लंपी से ज्यादा प्रभावित होती हैं। इसकी तुलना में मोटी स्किन वाले स्वदेशी अफ्रीकी और एशियाई मवेशी इससे कम संक्रमित होते हैं। इन मवेशियों को वायरस के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी माना जाता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सवाल 10: देश में इस बीमारी का क्या असर पड़ रहा है?

जवाब: भारत में लंपी बीमारी फैलने से बड़ी संख्या में गायों की मौत हो रही है। इससे कई राज्यों में दूध का उत्पादन घट गया है। अकेले गुजरात में रोज 1 लाख लीटर दूध का उत्पादन घट गया है। बाकी प्रभावित राज्यों का दूध उत्पादन भी 10-15% तक घट गया है।

लंपी आने के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र की संस्था FOA ने एक आकलन किया था। इसके मुताबिक लंपी बीमारी के चलते भारत और साउथ ईस्ट एशिया में करीब 11 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।

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