महाराष्ट्र में शिंदे गुट की रणनीति का खुलासा:उद्धव सरकार के बदले NCP के डिप्टी स्पीकर के पीछे क्यों पड़े हैं शिवसेना के बागी

5 महीने पहलेलेखक: नीरज सिंह

महाराष्ट्र के सियासी संग्राम में सोमवार को एक बड़ा मोड़ आया। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई तक बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने पर रोक लगा दी। शिंदे गुट के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जब डिप्टी स्पीकर के खिलाफ खुद अविश्वास का प्रस्ताव है, तो वो कैसे किसी अन्य को अयोग्य ठहरा सकते हैं। उधर, शिंदे गुट बार-बार अपने साथ संख्या बल होने का दावा कर रहा है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शिंदे गुट और ‌BJP को मिलाकर बहुमत है, तो ये लोग राज्यपाल से फ्लोर टेस्ट की मांग क्यों नहीं कर रहे? उद्धव सरकार की बजाय NCP के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल के पीछे क्यों पड़े हैं?

आइए, भास्कर एक्सप्लेनर में 5 सवालों के जवाब में जानते हैं…

इन सवालों के जवाब जानने से पहले इस पोल पर हम आपकी राय जानना चाहते हैं...

सवाल-1 : आखिर उद्धव सरकार की बजाय डिप्टी स्पीकर के पीछे क्यों पड़ा है शिंदे गुट?

देखिए, महाराष्ट्र विधानसभा का स्पीकर पद पिछले करीब 9 महीने से खाली है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल स्पीकर का काम देख रहे हैं। नरहरि NCP के विधायक हैं। शिंदे गुट 24 जून को ही संविधान के अनुच्छेद 179 के तहत डिप्टी स्पीकर को पद से हटाने का नोटिस दे चुका है। इससे ठीक एक दिन पहले शिवसेना ने डिप्टी स्पीकर को 12 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की याचिका दी थी।

इस बैकग्राउंड से शिंदे गुट की रणनीति काफी हद तक साफ नजर आ रही है। शिंदे का पहला मकसद नरहरि जिरवाल को डिप्टी स्पीकर की कुर्सी से हटाकर उनसे स्पीकर की ताकत छीनना है। इसके लिए शिंदे गुट को 14 दिन पहले नोटिस देना होगा, जिसकी शुरुआत वो 4 दिन पहले कर चुके हैं। इसके फौरन बाद ही ये गुट डिप्टी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पारित कराना चाहता है।

इसके लिए शिंदे को महाराष्ट्र विधानसभा के कुल मौजूदा 287 विधायकों में से 144 विधायक चाहिए। अभी जो नंबर हैं उसके हिसाब से शिंदे गुट और BJP की साझा ताकत 168 है। यानी 144 के जरूरी आंकड़े से 24 ज्यादा। अगर शिंदे गुट अपनी इस रणनीति में कामयाब रहा और उद्धव ठाकरे डिप्टी स्पीकर को बचा नहीं पाए तो लोकतांत्रिक रवायत के मुताबिक उन्हें इसी मौके पर इस्तीफा देना पड़ सकता है।

इधर, डिप्टी स्पीकर के हटते ही शिंदे अपने गुट या BJP के किसी सीनियर विधायक को विधानसभा स्पीकर बनवा लेंगे। अगर उद्धव इस्तीफा नहीं देते हैं तो इसके तुरंत बाद शिंदे उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे। अपना स्पीकर होने पर शिंदे गुट दलबदल की कार्रवाई से बचने के साथ इस अविश्वास प्रस्ताव को आसानी से पारित करवा लेगा।

उद्धव के हटते ही शिंदे गुट के बूते देवेंद्र फडणवीस सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं। नंबर्स के आधार पर राज्यपाल को भी फडणवीस को सरकार बनाने की दावत देने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

सवाल-2 : शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में डिप्टी स्पीकर के खिलाफ क्या दलीलें दीं?
सुप्रीम कोर्ट में शिंदे का पक्ष रखते हुए वकील नीरज किशन कौल ने कहा है कि स्पीकर के पास विधायकों को अयोग्य करने जैसी याचिकाओं पर फैसला करने का संवैधानिक अधिकार होता है, ऐसे में उस स्पीकर के पास बहुमत बेहद जरूरी है।

जब स्पीकर को हटाए जाने का प्रस्ताव पेंडिंग हो, तब मौजूदा विधायकों को अयोग्य घोषित कर विधानसभा में बदलाव करना आर्टिकल 179 (C) का उल्लंघन है। इस मामले में बेवजह की जल्दी दिखाई गई, सबसे बड़ा सवाल कि स्पीकर इस मामले को कैसे देख सकता है। पहले उनके रिमूवल के नोटिस पर बात होनी चाहिए।

सवाल-3 : क्या BJP या शिंदे गुट ने राज्यपाल से फ्लोर टेस्ट की अपील की है?

एकनाथ शिंदे शिवसेना के दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों को अपने पाले में कर चुके हैं। बावजूद इसके शिंदे ने अभी तक CM उद्धव ठाकरे के फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से संपर्क नहीं किया है।

23 जून को एकनाथ शिंदे की तरफ से राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को एक पत्र लिखा गया था। पत्र में बागी विधायकों ने लिखा कि हम महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य हैं और शिवसेना का हिस्सा हैं। इसमें एकनाथ शिंदे को ही महाराष्ट्र शिवसेना विधायक दल का नेता और भरत गोगावले को शिवसेना विधानमंडल का मुख्य प्रतिनिधि बताया गया। हालांकि इसमें बहुमत सिद्ध करने की बात का कहीं जिक्र नहीं था।

वहीं, BJP ने भी अभी तक राज्यपाल से फ्लोर टेस्ट कराने की मांग नहीं की है।

सवाल-4 : अगर फ्लोर टेस्ट हुआ तो किसकी बनेगी सरकार?

हां, मौजूदा हालात साफ इशारा कर रहे हैं कि BJP और शिंदे गुट के पास बहुमत है। BJP के पास 106 विधायक हैं और 13 निर्दलीयों का समर्थन है। यानी, BJP को 119 विधायकों का समर्थन हैं। वहीं, एकनाथ शिंदे अपने साथ 49 विधायक होने का दावा कर रहे हैं, जिसमें शिवसेना 39 से ज्यादा विधायक शामिल हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल सीटें 288 हैं। हालांकि अभी 287 विधायक हैं। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 144 है। यदि ‌BJP और शिंदे समर्थकों को मिला दें तो यह आंकड़ा 168 होता है जो बहुमत से 24 ज्यादा है।

सवाल-5 : इस स्ट्रैटजी से BJP को क्या फायदा है?

इस पूरे सियासी संकट से साफ दिख रहा है कि BJP का मकसद महाराष्ट्र में सिर्फ सरकार बनाना नहीं है, बल्कि वह उद्धव ठाकरे को राज्य में कमजोर करना चाहती है।

यही कारण है कि BJP चाहती है कि शिंदे गुट को शिवसेना का सिंबल मिल जाए। इससे BJP को आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में शिवसेना के खिलाफ गुस्से का भी सामना नहीं करना पड़ेगा।