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भास्कर एक्सप्लेनर:बांग्लादेश के मंदिर से बंगाल जीतने का मंत्रः 70 सीटों पर असरदार मतुआ समुदाय को साधने ओरकांडी के मंदिर मोदी ने माथा टेका

20 दिन पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के बांग्लादेश दौरे पर हैं। आज अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री ने मंदिरों का भी दौरा किया। मंदिर भी बहुत खास हैं। एक का तो सीधा कनेक्शन पश्चिम बंगाल के चुनाव से जोड़ा जा रहा है। कारण, ये मंदिर जिस मतुआ समुदाय की आस्था का केंद्र है, उस समुदाय का पश्चिम बंगाल की 70 विधानसभा सीटों पर असर है। खास बात ये कि आज इनमें से कई सीटों पर वोटिंग भी है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के लिए मतुआ समुदाय क्यों अहम है? ये समुदाय किसे वोट करता रहा है? जिस मंदिर में मोदी जा रहे हैं, उसका क्या इतिहास है? पहले कब-कब मोदी इस तरह कूटनीति के साथ चुनावी राजनीति को साधते रहे हैं? आइये समझते हैं...

प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को गोपालगंज के ओरकांडी में बने मतुआ समुदाय के मंदिर में माथा टेका। यहां मोदी ने हरिचंद मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मतुआ समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित भी किया। ये मंदिर हरिचंद ठाकुर का है। जिन्हें मतुआ समुदाय के लोग भगवान का अवतार मानते हैं।

शूद्र जाति से आने वाले हरिचंद ठाकुर मतुआ महासंघ के संस्थापक थे। उन्होंने ओरकांडी में 1860 में धार्मिक सुधार आंदोलन की शुरुआत की। इसी आंदोलन के बाद बांग्लादेश में मतुआ संप्रदाय बना। 1947 में भारत विभाजन के बाद इस समुदाय के बहुत से लोग पश्चिम बंगाल आ गए और यहीं बस गए। 2011 की जनगणना के मुताबिक पश्चिम बंगाल में इस समुदाय की आबादी 2 करोड़ के आसपास है। हालांकि कुछ लोग इनकी आबादी 3 करोड़ तक होने का भी दावा करते हैं। ज्यादातर मतुआ आबादी नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, नादिया और जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी, कूच बिहार और बर्धमान जिलों में फैली है।

दर्शन के साथ नजर 2019 में भाजपा की ओर आए वोटरों पर पकड़ बनाने पर

पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति की कुल आबादी 23% से ज्यादा है। कुल अनुसूचित जाति आबादी का 20% मतुआ समुदाय के लोग हैं। 70 विधानसभा सीटों पर इनका असर है। 2009 से पहले मतुआ समुदाय लेफ्ट समर्थक माना जाता था, लेकिन 2009 के बाद से इन्हें तृणमूल का समर्थक माना जाने लगा। बाद में 2019 के लोकसभा चुनाव में इनके वोट भाजपा की तरफ भी शिफ्ट हुए।

दो गुटों में बंटा हरिचंद ठाकुर का परिवार, एक भाजपा तो दूसरा ममता के साथ

हरिचंद ठाकुर के परिवार से आने वालीं बीनापाणि देवी, जिन्हें इस बंगाल में बोरो मां यानी बड़ी मां कहते हैं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी मानी जाती थीं। 2019 में प्रधानमंत्री मोदी भी बंगाल में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान बोरो मां से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। बोरो मां का मतुआ समुदाय पर काफी प्रभाव रहा है। मार्च 2019 में बोरो मां के निधन के बाद उनका परिवार दो हिस्सों में बट गया है। एक तृणमूल के साथ है तो दूसरा भाजपा के साथ।

ममता पहली नेता थीं जिन्होंने बोरो मां के परिवार के लोगों को राजनीतिक पहचान दिलाई और मतुआ समुदाय को वोट बैंक के रूप में विकसित किया। 2014 में बीनापाणि देवी के बेटे कपिल कृष्ण ठाकुर बनगांव लोकसभा सीट से तृणमूल के सांसद बने। 2015 में उनके निधन के बाद उनकी पत्नी ममता बाला ठाकुर उप-चुनाव जीतीं, लेकिन 2019 में बोरो मां के छोटे बेटे और ममता सरकार में मंत्री रहे मंजुल कृष्ण भाजपा में शामिल हो गए। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ममता बाला ठाकुर के खिलाफ मंजुल के बेटे शांतनु ठाकुर को उतार दिया। शांतनु ने अपनी ताई को हराकर यहां भाजपा को जीत दिलाई और सांसद बने। मोदी के साथ बांग्लादेश गए प्रतिनिधिमंडल में भी शांतनु शामिल हैं।

पहले लेफ्ट, फिर ममता के साथ रहा मतुआ वोटर, अब भाजपा की ओर झुका

1977 के पहले इस समुदाय को कांग्रेस का परंपरागत वोटर माना जाता था, लेकिन 1977 के बाद ये समुदाय लेफ्ट फ्रंट के साथ चला गया। 2009 के चुनाव से पहले लेफ्ट और ममता दोनों बोरो मां से समर्थन लेने पहुंचे। बोरो मां ने ममता का समर्थन किया। यहां तक कि 2010 में बोरो मां ने ममता को मतुआ महासभा का मुख्य संरक्षक भी बना दिया। 2011 में जब ममता सत्ता में आईं तो ठाकुरनगर में इस समुदाय को पवित्र कामोनासागर को बनाने के लिए ग्रांट भी दी। 2018 में सरकार ने मतुआ समुदाय के लिए वेलफेयर बोर्ड बनाने का ऐलान किया, लेकिन 2019 में भाजपा ने ममता के इस वोट बैंक में सेंध मार दी।

पहले कब-कब मोदी ने इस तरह कूटनीति और आस्था के साथ चुनावी राजनीति को साधा?

11-12 मई 2018 को प्रधानमंत्री मोदी नेपाल के दौरे पर गए थे। 12 मई की सुबह-सुबह वो काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। जब मोदी के मंदिर दर्शन की लाइव तस्वीरें देशभर के टीवी चैनल दिखा रहे थे, उस वक्त कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे थे। 2019 में 19 मई को मोदी केदारनाथ की गुफा में ध्यान लगा रहे थे। जब देशभर के टीवी चैनल मोदी के संत अवतार का बखान कर रहे थे, उस वक्त देश के कई राज्यों में लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के वोट डाले जा रहे थे। इसमें खुद मोदी की लोकसभा सीट वाराणसी भी शामिल थी।

इसी तरह जब आज मोदी बांग्लादेश में मतुआ समुदाय के मंदिर और 51 शक्तिपीठ में शामिल सुगंधा शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना कर रहे होंगे, उस वक्त बंगाल और असम के मतदाता वोट डाल रहे होंगे।

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