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भास्कर डेटा स्टोरी:कंपनियों ने CSR के जरिए 8 हजार करोड़ ही खर्च किए, पिछले साल से आधा; अंबानी की रिलायंस सबसे आगे

20 दिन पहले

देश की बड़ी कंपनियों ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR के जरिए खर्च की जाने वाली रकम घटाकर आधी कर दी है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स ने 2019-20 का डेटा जारी कर दिया है। ये डेटा बताता है कि 2019-20 में देश की बड़ी कंपनियों ने CSR के जरिए 8 हजार करोड़ से भी कम खर्च किए। इस साल महज 7,823 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए। जबकि 2018-19 में 18,655 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

ये आंकड़ा इसलिए भी कम है क्योंकि 2019-20 में महज 1,075 कंपनियों ने ही CSR के जरिए रकम खर्च की। इससे पहले 2018-19 में 24,932 कंपनियों ने खर्च किए थे। CSR के अंडर में वही कंपनियां आती हैं, जिनका सालाना टर्नओवर कम से कम एक हजार करोड़ रुपए और नेट प्रॉफिट 5 करोड़ रुपए होता है।

लेकिन, इस बार महज एक हजार कंपनियों ने ही CSR के जरिए रकम क्यों खर्च की? जबकि पिछली बार तो इनकी संख्या 25 हजार के करीब थी। इस पर सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन कहते हैं कि हो सकता है कि अभी कंपनियों ने रिटर्न फाइल नहीं किया हो, इस वजह से इनकी संख्या कम दिख रही हो।

सरकारी कंपनियों की परफॉर्मेंस अच्छी

सरकार के मुताबिक 2019-20 में जिन 1,075 कंपनियों ने CSR के जरिए रकम खर्च की है, उनमें 14 सरकारी और 1,061 निजी कंपनियां हैं। सरकारी कंपनियों ने 438 करोड़ रुपए और निजी कंपनियों ने 7,384 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इसका अगर औसत निकाला जाए, तो एक सरकारी कंपनी ने 31 करोड़ से ज्यादा खर्च किए हैं। जबकि, निजी कंपनियों ने करीब 7 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। हालांकि, कुल खर्च में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी महज 6% ही है, जो पिछली बार 21% थी।

मुकेश अंबानी की रिलायंस सबसे आगे

देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज CSR पर खर्च करने में सबसे आगे है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2019-20 में सबसे ज्यादा 909 करोड़ रुपए खर्च किए। उनकी कंपनी हर साल ही सबसे ज्यादा खर्च करने में सबसे आगे रहती है। दूसरे नंबर पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (TCS) है, जिसने 602 करोड़ रुपए खर्च किए। तीसरे नंबर पर 360 करोड़ रुपए के साथ इन्फोसिस है।

हालांकि, 248 कंपनियां ऐसी भी हैं, जिन्होंने जितना तय किया था, उतना खर्च नहीं किया। सिर्फ 621 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने तय लिमिट से ज्यादा खर्च किया। जबकि 98 कंपनियों ने एक रुपया भी खर्च नहीं किया।

ये पैसा कहां खर्च किया गया?

CSR के जरिए ये पैसा सबसे ज्यादा एजुकेशन पर खर्च किया गया। 2019-20 में एजुकेशन पर CSR के तहत कंपनियों ने 2,627 करोड़ रुपए खर्च किए। उसके बाद हेल्थकेयर है, जिस पर 1,049 करोड़ रुपए की रकम खर्च की गई। सबसे कम 40 लाख रुपए क्लीन गंगा फंड को दिए गए।

वहीं राज्यों की बात करें तो सबसे ज्यादा पैसा महाराष्ट्र में खर्च किया गया है। इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि ज्यादा कॉर्पोरेट के हेडक्वार्टर महाराष्ट्र में ही हैं। 2019-20 में महाराष्ट्र में 1,314 करोड़ रुपए खर्च हुए। उसके बाद कर्नाटक में 587 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

लेकिन CSR में कमी क्यों आई?

इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन बताते हैं कि CSR को लेकर कई नए रूल्स और रेगुलेशन आ गए हैं, जिस वजह से भी इसमें कमी आई है। CSR का आमतौर पर मकसद यही रहता है कि कुछ ऐसे नए मॉडल्स खड़े किए जाएं, जिससे लोगों की मदद की जा सके। इसके अलावा जो सरकार कर रही है, उससे इतर कंपनियां कुछ नया करने का सोचती हैं।

जैन कहते हैं कि लेकिन अब सरकार चाहती है कि CSR का ज्यादा से ज्यादा पैसा उसके पास आए। जैसा पिछले साल पीएम केयर्स फंड को मिला। सरकार ने बाद में नियम भी बदल दिया कि पीएम केयर्स फंड में दिया गया पैसा CSR के तहत ही माना जाएगा।

कोरोना की वजह से देर से आया डेटा

आमतौर पर कंपनियां फाइनेंशियल ईयर खत्म होने के 6 महीने बाद रिटर्न फाइल करती हैं, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से इसे तीन महीने और बढ़ाकर दिसंबर तक कर दिया गया था। इसके एक महीने बाद कंपनियां CSR का डेटा फाइल करती हैं। इस लिहाज से जनवरी में कंपनियों ने CSR डिटेल फाइल की।

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