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भास्कर एक्सप्लेनर:मोदी के बांग्लादेश दौरे के विरोध में हिंसा, मंदिर पर भी हमले; आतंकी फंडिंग से लेकर शेख हसीना सरकार को गिराने की साजिश तक, जानें सब कुछ

16 दिन पहलेलेखक: जयदेव सिंह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26-27 मार्च को बांग्लादेश दौरे पर गए थे। वहां के कुछ संगठन मोदी के दौरे का विरोध कर रहे थे। मोदी के दौरे के बाद बांग्लादेश के कुछ शहरों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। विरोध का सबसे ज्यादा असर ब्राह्मणबरिया, चटगांव और ढाका में रहा।

इन प्रदर्शनों में कम से कम एक दर्जन लोग मारे गए। वहीं, कई पत्रकार और पुलिसवाले घायल हुए। सोमवार को खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि यह हिंसा विरोध का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसके लिए साजिश रची गई थी। इसके पीछे प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी का हाथ था। विरोध करने वाले शेख हसीना सरकार को अस्थिर करना चाहते थे।

ये प्रदर्शन कब से शुरू हुए? प्रदर्शन करने वाले कौन थे और उनका क्या कहना था? प्रदर्शन हिंसक कैसे हो गया? इसमें आतंकी एंगल सामने आने के बाद क्या हुआ? आइये समझते हैं...

सबसे पहले बात करते हैं प्रदर्शन की शुरुआत कब से हुई। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार के दिन ढाका पहुंचने वाले थे। इसके पहले ही उनके विरोध की खबरें आने लगीं। 26 मार्च को जुमे की नमाज के बाद करीब 500 लोगों ने ढाका की बैतुल मोकार्रम मस्जिद के बाहर सड़क पर मार्च किया। ये लोग भारत विरोधी और मोदी विरोधी नारे लगा रहे थे। बताया गया कि ये लोग हिफाजत-ए-इस्लाम नाम के संगठन से जुड़े थे।

कुछ इसी तरह के प्रदर्शन चटगांव और ब्राह्मणबरिया में भी हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प भी हुई।

इसके अलावा बांग्लादेश के वामपंथी स्टूडेंट यूनियन के वर्कर्स ने ढाका यूनिवर्सिटी के बाहर मोदी के विरोध में मार्च निकाला था। इन स्टूडेंट्स ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के खिलाफ भी नारेबाजी की थी। हालांकि हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के ज्यादातर आरोप मुस्लिम संगठनों पर ही हैं।

नारायणगंज में बीते रविवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिफाजत-ए-इस्लाम के प्रदर्शनकारी।
नारायणगंज में बीते रविवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिफाजत-ए-इस्लाम के प्रदर्शनकारी।

हिंसक घटनाओं में एक दर्जन मौतें, कई पत्रकार भी घायल

मोदी के दो दिन के दौरे के दौरान जो प्रदर्शन हुए, उनमें कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद मोदी के दौरे के विरोध में हिफाजत-ए-इस्लाम ने रविवार को बंद बुलाया। इस दौरान भी बांग्लादेश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में भी कई लोगों की जान गई। कुल एक दर्जन लोगों की मौत हुई।

बांग्लादेश की कमेटी टु प्रोटेक्ट जर्नलिज्म के मुताबिक रविवार को हुए प्रदर्शनों को कवर करने के दौरान कम से कम 17 पत्रकार भी घायल हुए। प्रदर्शन के दौरान कट्टर इस्लामिक गुटों ने हिंदू मंदिरों पर भी हमला किया। रविवार को पूर्वी बांग्लादेश में एक ट्रेन को भी आग के हवाले कर दिया गया।

बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने कम से कम चार पुलिस थानों और एक दर्जन से अधिक बसों में तोड़फोड़ करके उनमें आग लगा दी। एक मंदिर में तोड़फोड़ की गई। वहीं, एक ट्रेन पर भी प्रदर्शनकारियों ने हमला बोला। प्रदर्शनकारियों ने इंजन रूम और लगभग हर कोच को बर्बाद कर दिया। देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 500 लोग घायल हो गए।

सबसे ज्यादा हिंसा ब्राह्मणबरिया में हुई। प्रदर्शनकारियों ने यहां के रेलवे स्टेशन को भी जला दिया।
सबसे ज्यादा हिंसा ब्राह्मणबरिया में हुई। प्रदर्शनकारियों ने यहां के रेलवे स्टेशन को भी जला दिया।

ब्राह्मणबरिया में सबसे ज्यादा हिंसा

सबसे ज्यादा हिंसा ब्राह्मणबरिया में हुई है। अब तक जिन 12 लोगों की मौत हुई है, उनमें से 6 इसी जिले के हैं। ब्राह्मणबरिया में ही आगजनी की वारदात सबसे ज्यादा हुई। हिंसक भीड़ ने कई घरों में आग लगा दी। इलाके के काली मंदिर में घुसकर लूटपाट और तोड़फोड़ की। यहां के रेलवे स्टेशन को जला दिया। जला दिए गए स्टेशन से गुजर रही ट्रेन में भी तोड़फोड़ की।

हिंसा फैलने के बाद हिफाजत-ए-इस्लाम पर आरोप लग रहे हैं। हालांकि संगठन ने हिंसा की घटनाओं से किनारा कर लिया है। उसका आरोप है कि ब्राह्मणबरिया में हुई हिंसा में स्थानीय सांसद का हाथ है। यहां के सांसद ओबैदुल मुक्तदिर चौधरी हैं, जो विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी से हैं।

अपने ऊपर लगे आरोपों से चौधरी भी इंकार कर रहे हैं। हालांकि शनिवार को यहां निकाले गए विरोध मार्च की अगुआई करने की बात उन्होंने मानी है। वहीं, हिफाजत के 500 सदस्यों पर हिंसा का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कर लिया गया है।

मोदी को अल्पसंख्यक विरोधी बता रहे प्रदर्शनकारी, सामने आई आतंकी फंडिंग की बात

विरोध करने वाले कट्टरपंथी मुस्लिम प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मोदी अल्पसंख्यक मुस्लिमों से भेदभाव करते रहे हैं। विरोध करने वाले NRC, CAA और गुजरात दंगों का हवाला दे रहे हैं। इनका कहना है कि मुजीब-उर-रहमान ने एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की परिकल्पना की थी। ऐसे में उनके जन्मशती समारोह में मोदी को नहीं बुलाना चाहिए था।

सोमवार को खुफिया एजेंसियों ने दावा किया कि यह हिंसा विरोध का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसके लिए बाकायदा साजिश रची गई थी। इसके पीछे प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी का हाथ था। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस, मीडिया और सरकारी ऑफिसों पर बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी की गई थी। जमात-ए-इस्लामी ने इसके लिए भारी मात्रा में पैसे बांटे थे, ताकि मोदी की यात्रा के दौरान लॉ एंड ऑर्डर का मुद्दा बनाकर शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए जा सकें।

प्रधानमंत्री शेख हसीना सरकार को गिराने की साजिश

एक अन्य खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ये हिंसा जमात, हिफाजत और विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की शेख हसीना सरकार को गिराने की साजिश का हिस्सा थी। इसमें कहा गया है कि ये संगठन जिस तरह से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वह अनुचित है। इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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