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भास्कर एक्सप्लेनर:2014 में 'मिनिमम' के साथ चले मोदी 2017 में 'मैक्जिमम' तक पहुंचे, क्या इस बार टूट सकता है रिकॉर्ड? जानें कैबिनेट विस्तार के बारे में सबकुछ

17 दिन पहलेलेखक: जयदेव सिंह

दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट का पहला विस्तार करने जा रहे हैं। ये कैबिनेट विस्तार आज शाम हो सकता है। 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार सत्ता में आए तो उनकी कैबिनेट में महज 45 मंत्री शामिल थे। तब प्रधानमंत्री ने मिनिमम गवर्नमेंट मैक्जिमम गवर्नेंस का नारा दिया। हालांकि, तीन साल बाद ही हालात बदले और उनकी कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 76 हो गई।

2019 में दोबारा सत्ता में आने के बाद मोदी कैबिनेट में 58 मंत्रियों ने शपथ ली। इस वक्त ये संख्या घटकर 53 हो गई है। कैबिनेट विस्तार के बाद अगर 23 से ज्यादा नए चेहरों को मोदी शामिल करते हैं तो पिछला रिकॉर्ड टूट सकता है। कहा जा रहा है कि विस्तार में 20 से 22 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। यानी, एक बार फिर कैबिनेट में 75 के आसपास मंत्री होंगे। जिन नेताओं को मंत्री पद मिल सकता है वो सभी दिल्ली पहुंचने लगे हैं। मंत्री बनने की रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया, सर्बानंद सोनोवाल, नारायण राणे, सुशील कुमार मोदी जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं।

सवाल ये है कि केंद्रीय कैबिनेट में आखिर कितने मंत्री बनाए जा सकते हैं? अभी कैबिनेट की क्या स्थिति है? किन नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है? किन मंत्रियों के विभाग कम हो सकते हैं? आइए समझते हैं...

मोदी कैबिनेट में अधिकतम कितने मंत्री बन सकते हैं?
कॉन्स्टीट्यूशन एक्ट 2003 कहता है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों के 15% से ज्यादा नहीं होगी। मंत्रिमंडल के सदस्यों में प्रधानमंत्री भी शामिल होगा। अभी लोकसभा में अधिकतम 543 सदस्य हो सकते हैं। यानी, मोदी कैबिनेट में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं।

2019 में जब नई सरकार का गठन हुआ तो उस वक्त प्रधानमंत्री समेत कुल 58 मंत्रियों ने शपथ ली थी। अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल, शिवसेना के अरविंद सावंत मंत्री पद छोड़ चुके हैं। दोनों ही पार्टियां अब NDA का हिस्सा नहीं हैं। वहीं, लोजपा के रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी जगह भी कोई मंत्री नहीं बनाया गया।

सुरेश अंगड़ी का कोरोना से निधन हो गया था। मंगलवार को कैबिनेट मंत्री थावरचंद गहलोत को राज्यपाल बनाया गया। गहलोत के मंत्री पद छोड़ने के बाद कैबिनेट में कुल 53 मंत्री रह गए हैं। यानी, कैबिनेट विस्तार के वक्त अधिकतम 28 मंत्री बनाए जा सकते हैं।

किन नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है?
भाजपा से ज्योतिरादित्य सिंधिया, जबलपुर से सांसद राकेश सिंह, पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे, उत्तराखंड के पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत, असम के पूर्व सीएम सर्बानंद सोनोवाल, सुशील मोदी, अपना दल से अनुप्रिया पटेल, जदयू से आरसीपी सिंह, लोजपा के पशुपति पारस और एआईएडीएमके के खाते में भी एक पद जा सकता है।

किन मंत्रियों के विभाग कम हो सकते हैं?
इस वक्त नरेंद्र सिंह तोमर, रविशंकर प्रसाद, डॉक्टर हर्षवर्धन, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल और प्रह्लाद जोशी के पास अतिरिक्त मंत्रालय हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद इन मंत्रियों के विभाग कम हो सकते हैं। जैसे पीयूष गोयल इस वक्त रेल मंत्रालय के साथ ही वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के साथ उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय भी संभाल रहे हैं। चर्चा है कि रेल मंत्रालय गोयल से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिया जा सकता है।

28 से ज्यादा मंत्री क्यों नहीं बनाए जा सकते हैं?
2003 में संविधान के आर्टिकल 75 में संशोधन (91वां संशोधन) किया गया। 1 जनवरी 2004 को लागू हुए इस संशोधन ने केंद्र और राज्यों की कैबिनेट में अधिकतम मंत्रियों की संख्या तय कर दी। इसमें कहा गया कि केंद्रीय कैबिनेट में मंत्रियों की अधिकतम संख्या लोकसभा में कुल सासंदों की संख्या का 15% से ज्यादा नहीं होगी। इसी तरह राज्य मंत्रिमंडल में भी उस राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% सदस्य ही हो सकते हैं।

देश की लोकसभा में 543 सदस्य हो सकते हैं। 543 का 15% 81.45 होता है। यानी, केंद्रीय कैबिनेट में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। इसमें प्रधानमंत्री भी शामिल होता है। मौजूदा मोदी कैबिनेट में प्रधानमंत्री सहित 53 सदस्य हैं। इस लिहाज से मंत्रिमंडल विस्तार में अधिकतम 28 नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं।

2003 से पहले क्या कभी केंद्र या राज्य में 15% से ज्यादा मंत्री भी रहे हैं?
हां, 1990 के दशक के आखिरी के सालों में और 2000 के शुरुआती सालों में केंद्र और कई राज्यों में इस तरह के जम्बो कैबिनेट का चलन था। इसकी बड़ी वजह गठबंधन सरकारें थीं। 2003 में 15% वाला संविधान संशोधन किया गया उस वक्त कई राज्यों में जम्बो कैबिनेट वाली सरकारें चल रही थीं।

उत्तर प्रदेश की विधानसभा में सदस्यों की संख्या 403 थी। उस वक्त समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। यादव की सरकार में 98 मंत्री थे। यानी कुल सदस्य संख्या का करीब 25%। यूपी में जम्बो कैबिनेट बनने की शुरुआत 1997 में भाजपा की कल्याण सिंह सरकार से शुरू हुई थी। उस वक्त कल्याण सिंह की कैबिनेट में 93 मंत्री थे। उनके बाद राम प्रकाश गुप्ता सरकार में भी 91 मंत्री थे। उनकी जगह सीएम बने राजनाथ सिंह की सरकार में भी 86 मंत्री थे। वहीं, मुलायम से पहले मुख्यमंत्री रहीं मायावती की सरकार में 87 मंत्री थे।

संविधान संशोधन से ऐन पहले उत्तर प्रदेश के साथ ही बाकी राज्यों में भी इसी तरह का चलन था। जैसे बिहार में उस वक्त राबड़ी देवी की सरकार चल रही थी। उनकी सरकार में 82 मंत्री थे। बिहार में विधानसभा में कुल सदस्यों की संख्या 243 है। यानी, उस दौर में विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के करीब 34% मंत्री थे। इसी तरह महाराष्ट्र विधानसभा 288 सदस्यों वाली थी। वहां, उस वक्त की सुशील कुमार शिंदे सरकार में 69 मंत्री थे। यानी, सदस्य संख्या के करीब 24% मंत्री। इसी तरह केंद्र में उस वक्त की अटल सरकार में 80 मंत्री थे।

नया नियम आने के बाद अब तक का सबसे बड़ा केंद्रीय कैबिनेट कब बना?
1 जनवरी 2004 को नया संविधान संशोधन लागू हुआ। उसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद मनमोहन सिंह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। उनकी सरकार में 79 मंत्री थे। 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो उनकी कैबिनेट में महज 45 मंत्री शामिल थे। तब प्रधानमंत्री ने मिनिमम गवर्नमेंट मैक्जिमम गवर्नेंस का नारा दिया। हालांकि, तीन साल बाद ही हालात बदले और उनकी कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 76 हो गई।

कैबिनेट में किसे शामिल करना है किसे नहीं ये तय कौन करता है?
संविधान कहता है कि केंद्रीय कैबिनेट में मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति करेंगे। नियुक्ति भले राष्ट्रपति करते हैं, लेकिन फैसले प्रधानमंत्री के होते हैं। अगर व्यवहारिक रूप से बात करें तो प्रधानमंत्री अपनी पार्टी और सहयोगियों की सलाह के बाद मंत्रियों के नाम तय करते हैं। जिन्हें राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। उसके बाद राष्ट्रपति लिस्ट में शामिल लोगों को मंत्री पद की शपथ दिलाते हैं। मंत्रियों की नियुक्ति जैसी ही प्रक्रिया विभागों के बंटवारे के दौरान भी चलती है।

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